10th BSEB History Ex-3 Ultimate Free Notes PDF

10th BSEB History Ex-3 Ultimate Free Notes PDF । हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आन्दोलन

नमस्ते दोस्तों! क्या आप बिहार बोर्ड कक्षा 10 की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। अगर आप कक्षा 10 इतिहास के Notes की खोज में है, तो यह पोस्ट आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। हम सब जानते हैं कि इतिहास (History) एक ऐसा विषय है जो हमें न केवल अतीत की घटनाओं से जोड़ता है, बल्कि वर्तमान समाज की संरचना और राष्ट्रों के निर्माण की प्रक्रिया को समझने का अवसर भी देता है।

Bihar Board Class 10 History Ultimate Free Notes PDF in Hindi की इस श्रृंखला में, हम आपको नवीनतम BSEB सिलेबस के अनुसार तैयार किए गए आसान और विस्तृत नोट्स प्रदान कर रहे हैं, ताकि आप परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें और कॉन्सेप्ट्स को गहराई से समझ सकें।

इस पोस्ट में आप इस पोस्ट में आप बिहार बोर्ड 10 इतिहास का अध्याय 3 — “हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आन्दोलन” के नोट्स को देखने वाले हैं। इस नोट्स को विशेष रूप से बिहार बोर्ड कक्षा 10 के छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर सरल, आसान भाषा में और नवीनतम सिलेबस के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें अध्याय के सभी महत्वपूर्ण टॉपिक्स — जैसे फ्रांसीसी उपनिवेशवाद का प्रभाव, वियतनाम में राष्ट्रवादी आंदोलन का विकास, हो ची मिन्ह का योगदान, महिलाओं की भूमिका, विद्यार्थियों और बुद्धिजीवियों की भागीदारी, तथा वियतनाम युद्ध और उसकी परिणति — को बेहद सरल और स्पष्ट भाषा में समझाया गया है, ताकि प्रत्येक छात्र इन्हें आसानी से समझ और याद कर सके।

इस नोट्स की मदद से विद्यार्थी न केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे, बल्कि हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आंदोलनों की पृष्ठभूमि, उनके स्वरूप, और स्वतंत्रता के लिए चले संघर्षों की गहरी समझ भी विकसित कर पाएंगे।
मैं निकेत कुमार, आपके लिए Bihar Board (BSEB) Class 10 के इतिहास (History) के साथ – साथ अन्य सभी विषयों के Notes को सरल, स्पष्ट एवं बिहार बोर्ड के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित आसान भाषा में अपने वेबसाइट BSEBsolution पर निःशुल्क में Upload करता हूँ। यदि आप बिहार बोर्ड के Student है या बिहार बोर्ड के Students को अध्ययन कराने वाले शिक्षक/शिक्षिका है तो नियमित रूप से हमारे वेबसाइट को विजिट करते रहे। नीचे आपको बिहार बोर्ड कक्षा 10 इतिहास के तीसरे अध्याय “हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आन्दोलन” के Free Notes PDF दिए गया है।
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BSEB कक्षा 10 इतिहास अध्याय 3 नोट्स PDF | हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आन्दोलन - फ्री डाउनलोड करें

परिचय

यह अध्याय हमें 20वीं सदी में दक्षिण-पूर्व एशिया के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र हिन्द-चीन में हुए राष्ट्रवादी आंदोलनों और स्वतंत्रता संग्राम के बारे में बताता है. फ्रांसीसी उपनिवेशवाद के खिलाफ वियतनाम, लाओस और कंबोडिया के लोगों ने कैसे एकजुट होकर संघर्ष किया और अंततः स्वतंत्रता प्राप्त की, यह समझना इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य है. इन आंदोलनों ने पूरे एशिया में उपनिवेशवाद विरोधी संघर्षों को प्रेरित किया.

1. हिन्द-चीन का अर्थ एवं भौगोलिक स्थिति

अर्थ: हिन्द-चीन दक्षिण-पूर्व एशिया का एक प्रायद्वीपीय क्षेत्र है, जिसका नाम ‘हिन्द’ (भारत) और ‘चीन’ की संस्कृतियों के प्रभाव के कारण पड़ा. इस क्षेत्र के कुछ देशों पर चीनी संस्कृति का गहरा प्रभाव था, तो कुछ पर भारतीय संस्कृति का.

शामिल देश: इसमें मुख्य रूप से वियतनाम, लाओस और कंबोडिया शामिल हैं.

भौगोलिक विस्तार: यह लगभग 2.80 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है. इसकी उत्तरी सीमा म्यांमार और चीन को छूती है, जबकि दक्षिण में चीन सागर और पश्चिम में म्यांमार के क्षेत्र पड़ते हैं.

अंकोरवाट का मंदिर: कंबोडिया में 12वीं शताब्दी में राजा सूर्यवर्मा द्वितीय द्वारा बनवाया गया प्रसिद्ध अंकोरवाट का मंदिर भारतीय संस्कृति के प्रभाव का एक उदाहरण है.

2. फ्रांसीसी उपनिवेशवाद

हिन्द-चीन में यूरोपीय शक्तियों का आगमन 16वीं शताब्दी में पुर्तगालियों के साथ शुरू हुआ, जिन्होंने 1510 ईस्वी में मलक्का को अपना व्यापारिक केंद्र बनाया. उनके बाद स्पेनिश, डच और अंग्रेज भी आए, लेकिन इनमें से केवल फ्रांस ही इस क्षेत्र पर राजनीतिक प्रभुत्व स्थापित करने में सफल रहा.

फ्रांसीसी प्रसार:

  • 17वीं शताब्दी में फ्रांसीसी व्यापारी और पादरी हिन्द-चीन पहुंचे.
  • 1858 ईस्वी में फ्रांसीसी सेना ने वियतनाम में प्रवेश किया.
  • 1862 ईस्वी तक अन्नाम को संधि के लिए बाध्य किया गया.
  • 1863 ईस्वी में कंबोडिया फ्रांस का संरक्षित राज्य बन गया.
  • 1884 ईस्वी में अन्नाम को भी संरक्षित राज्य बनाया गया.
  • 1893 ईस्वी में लाओस को फ्रांसीसी संरक्षित क्षेत्र में शामिल कर लिया गया.
  • 20वीं शताब्दी की शुरुआत तक संपूर्ण हिन्द-चीन फ्रांस की अधीनता में आ गया.

उपनिवेश स्थापना के उद्देश्य:

  • आर्थिक शोषण: हिन्द-चीन की प्राकृतिक संपदा (चावल, रबड़, कॉफी, कोयला, टिन आदि) का शोषण कर फ्रांसीसी अपने उद्योगों के लिए कच्चा माल प्राप्त करना चाहते थे.
  • व्यापारिक प्रतिस्पर्धा: डच और ब्रिटिश कंपनियों की व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना और उनके मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत करना.
  • सभ्य बनाने का दायित्व: फ्रांसीसियों का मानना था कि वे पिछड़े समाजों को यूरोपीय सभ्यता से अवगत कराकर उन्हें ‘सभ्य’ बना रहे हैं.
  • बाजार की तलाश: अपने देश में उत्पादित वस्तुओं के लिए एक बड़े बाजार की आवश्यकता थी.

शोषणकारी नीतियां:

  • एकतरफा अनुबंध व्यवस्था: रबड़ बागानों, फर्मों और खानों में मजदूरों से बंधुआ मजदूरी कराई जाती थी, जहाँ मजदूरों को कोई अधिकार नहीं था और मालिक के पास असीमित अधिकार थे.
  • कोलोन (Colons): हिन्द-चीन में बसने वाले फ्रांसीसी नागरिकों को ‘कोलोन’ कहा जाता था.
  • शैक्षणिक व्यवस्था: फ्रांसीसियों ने शिक्षा प्रणाली में फ्रांसीसी पाठ्यक्रम लागू किया और चीनी सभ्यता के प्रभाव को कम करने का प्रयास किया.

3. हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आन्दोलन का उदय

फ्रांसीसी शोषण और सांस्कृतिक दमन ने हिन्द-चीन के लोगों में राष्ट्रवाद की भावना को जन्म दिया.

राष्ट्रवाद के विकास के कारण:

  • फ्रांसीसी शोषण: आर्थिक शोषण और दमनकारी नीतियों के कारण लोगों में असंतोष बढ़ा.
  • पश्चिमी शिक्षा एवं विचार: पश्चिमी शिक्षा और यूरोपीय दार्शनिकों (जैसे रूसो, मॉन्टेस्क्यू) के विचारों ने लोगों को स्वतंत्रता के लिए प्रेरित किया.
  • जापान की जीत: 1905 में जापान द्वारा रूस को हराना हिन्द-चीनियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बना, जिससे उन्हें लगा कि पश्चिमी शक्तियों को हराया जा सकता है.
  • सांस्कृतिक पुनारुत्थान: पारंपरिक धर्म और संस्कृति ने लोगों को औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ एकजुट किया.
  • प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव: युद्ध में मारे गए हिन्द-चीन के सैनिकों की संख्या अधिक होने से फ्रांसीसियों के प्रति असंतोष बढ़ा.
  • विश्वव्यापी आर्थिक मंदी (1929-30): बेरोजगारी बढ़ने से किसान और मजदूर साम्यवाद की ओर आकर्षित हुए, जिससे राष्ट्रवादी आंदोलन को बल मिला.

प्रारंभिक राष्ट्रवादी संगठन और नेता:

  • फान-बोई-चाऊ (Phan Boi Chau): 1903 ईस्वी में ‘दुई तान होई’ नामक एक क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की, जिसके नेता कुआंग दें थे. उन्होंने “द हिस्ट्री ऑफ द लॉस ऑफ वियतनाम” नामक पुस्तक लिखकर राष्ट्रवादी चेतना जगाई.
  • होआ-हाओ आंदोलन (Hoa-Hao Movement): 1939 में वियतनाम में यह एक धार्मिक और सामाजिक आंदोलन था, जिसका उद्देश्य फ्रांसीसी औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध लोगों को संगठित करना और सामाजिक सुधार लाना था.
  • फान-चू-त्रिन्ह (Phan Chu Trinh): इन्होंने राष्ट्रवादी आंदोलन के स्वरूप को गणतंत्रवादी बनाने का प्रयास किया.

4. हो-ची-मिन्ह और साम्यवादी आन्दोलन

हो-ची-मिन्ह वियतनाम के सबसे प्रमुख क्रांतिकारी नेता और वियतनाम डेमोक्रेटिक रिपब्लिक के संस्थापक थे.

प्रारंभिक जीवन: इनका मूल नाम न्गूयेन सिन्ह कुंग (अन्य नाम न्गूयेन आई क्वोक) था. इन्होंने मास्को और पेरिस में शिक्षा प्राप्त की.

साम्यवाद की ओर:

  • 1917 ईस्वी में पेरिस में साम्यवादियों का एक गुट बनाया.
  • 1925 में साम्यवाद से प्रेरित होकर ‘वियतनामी क्रांतिकारी दल’ का गठन किया.

वियतनाम कम्युनिस्ट पार्टी: 1930 ईस्वी में वियतनाम के बिखरे राष्ट्रवादी गुटों को एकजुट कर ‘वियतनाम कांग सान देंग’ (वियतनाम कम्युनिस्ट पार्टी) की स्थापना की, जो उग्र विचारों पर चलने वाली पार्टी थी.

वियतमिन्ह (Viet Minh): हो-ची-मिन्ह के नेतृत्व में ‘वियतमिन्ह’ (वियतनाम स्वतंत्रता लीग) की स्थापना की गई, जिसमें पीड़ित किसान, व्यापारी और बुद्धिजीवी सभी शामिल थे. इन्होंने छापामार युद्ध नीति अपनाई.

स्वतंत्रता की घोषणा: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, 2 सितंबर 1945 को हो-ची-मिन्ह ने वियतनाम की स्वतंत्रता की घोषणा करते हुए लोकतंत्र गणराज्य सरकार की स्थापना की और वे इसके पहले राष्ट्रपति बने.

5. प्रमुख घटनाएँ और संघर्ष

हनोई समझौता (मार्च 1946): फ्रांस और वियतनाम के बीच यह समझौता हुआ, जिसमें फ्रांस ने वियतनाम को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता दी, लेकिन फ्रांसीसी संघ के भीतर रहने की शर्त रखी.

डिएन बिएन फू का युद्ध (Battle of Dien Bien Phu): 1954 में वियतनामियों ने फ्रांसीसी सेना को डिएन बिएन फू में बुरी तरह हराया. इस निर्णायक हार के बाद फ्रांस हिन्द-चीन से अपनी सेना हटाने पर मजबूर हो गया.

जेनेवा समझौता (1954): डिएन बिएन फू की हार के बाद, 1954 में जेनेवा में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया. इस समझौते के तहत, लाओस और कंबोडिया को स्वतंत्र कर दिया गया. वियतनाम को अस्थायी रूप से दो भागों में विभाजित कर दिया गया: उत्तरी वियतनाम (साम्यवादी, राजधानी हनोई, हो-ची-मिन्ह के नियंत्रण में) और दक्षिणी वियतनाम (अमेरिकी समर्थित, राजधानी साइगॉन). विभाजन रेखा 17वीं समानांतर रेखा थी. यह निर्णय लिया गया कि भविष्य में पूरे वियतनाम में चुनाव कराकर उसका एकीकरण किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.

वियतनाम युद्ध (Vietnam War – 1955-1975):

कारण: जेनेवा समझौते के बाद वियतनाम का एकीकरण न हो पाना, उत्तरी वियतनाम में साम्यवादी शासन और दक्षिणी वियतनाम में अमेरिकी हस्तक्षेप, साम्यवाद के विस्तार को रोकने की अमेरिकी नीति (डोमिनो थ्योरी).

अमेरिकी हस्तक्षेप: अमेरिका ने दक्षिणी वियतनाम का समर्थन किया और साम्यवाद के फैलाव को रोकने के लिए सैन्य बल भेजा.

युद्ध की विभीषिका: यह एक लंबा और क्रूर युद्ध था. अमेरिकी सेना ने जंगलों और फसलों को नष्ट करने के लिए नापाम (ज्वलनशील मिश्रण) और एजेंट ऑरेंज (रासायनिक कीटनाशक) जैसे खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल किया.

हो-ची-मिन्ह मार्ग: उत्तरी वियतनाम ने दक्षिणी वियतनाम के क्रांतिकारियों को हथियार और रसद पहुंचाने के लिए लाओस और कंबोडिया से गुजरने वाले एक जटिल मार्ग का इस्तेमाल किया, जिसे हो-ची-मिन्ह मार्ग कहा जाता था. यह सैकड़ों कच्ची-पक्की सड़कों से जुड़ा था.

अंतर्राष्ट्रीय आलोचना: प्रसिद्ध दार्शनिक बर्ट्रेंड रसेल ने एक अदालत लगाकर अमेरिका को वियतनाम युद्ध के लिए दोषी ठहराया.

पेरिस शांति वार्ता (1968): युद्ध को समाप्त करने के लिए शांति वार्ता शुरू हुई.

निक्सन की शांति योजना: हिन्द-चीनी क्षेत्र में अंतिम युद्ध समाप्ति के समय अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन थे, जिन्होंने वियतनाम में शांति के लिए पाँच सूत्री योजना की घोषणा की.

वियतनाम का एकीकरण: 1975 में वियतनाम युद्ध समाप्त हुआ और उत्तरी वियतनाम ने दक्षिणी वियतनाम पर विजय प्राप्त कर पूरे वियतनाम को एकीकृत कर दिया. साइगॉन का नाम बदलकर हो-ची-मिन्ह शहर कर दिया गया.

6. लाओस और कम्बोडिया में राष्ट्रवादी आन्दोलन

लाओस: फ्रांसीसी उपनिवेशवाद के खिलाफ यहां भी राष्ट्रवादी भावनाएं उभरीं. जेनेवा समझौते (1954) के तहत लाओस को स्वतंत्र राज्य की मान्यता मिली. बाद में ‘पाथेट लाओ’ नामक एक सैन्य संगठन की स्थापना हुई, जिसका उद्देश्य लाओस में साम्यवादी शासन स्थापित करना था.

कम्बोडिया: जेनेवा समझौते (1954) के तहत कंबोडिया को भी स्वतंत्र राज्य की मान्यता मिली. नरोत्तम सिंहानुक यहां के शासक थे. अमेरिका ने कंबोडिया में साम्यवाद के प्रभाव को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया, जिससे वहां राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी. कंबोडिया का नया नाम कम्पूचिया है.

बिहार बोर्ड कक्षा 10 इतिहास के अन्य अध्यायों के भी FREE PDF Download करें।

क्रमांक अध्याय
1 यूरोप में राष्ट्रवाद
2 समाजवाद एवं साम्यवाद
4 भारत में राष्ट्रवाद
5 अर्थव्यवस्था और आजीविका
6 शहरीकरण एवं शहरी जीवन
7 व्यापार और भूमंडलीकरण
8 प्रेस-संस्कृति एवं राष्ट्रवाद

Notes क्या होते हैं और क्यों आवश्यक होते हैं?

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