10th Godhuli Gadhykhand Ex-2 BSEB Free Notes pdf । विष के दाँत सम्पूर्ण नोट्स
इस श्रृंखला में हम आपको बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किए गए Bihar Board Class 10 Hindi Godhuli Gadhykhand Ultimate Free Notes PDF उपलब्ध करवा रहे हैं। इन Notes को आसान, सरल और समझने योग्य भाषा में प्रस्तुत किया गया है। इसकी मदद से आप न केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल कर सकेंगे, बल्कि प्रत्येक अध्याय के सभी कॉन्सेप्ट को गहराई से समझ भी पाएंगे।
इस पोस्ट में आप बिहार बोर्ड कक्षा 10 गोधूली गद्यखंड के अध्याय 2 — “विष के दाँत” के महत्वपूर्ण Notes देखने वाले हैं। यह नोट्स विशेष रूप से बिहार बोर्ड कक्षा 10 के छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आसान, सरल और समझने योग्य भाषा में तैयार किए गए हैं। साथ ही इन्हें नवीनतम सिलेबस के आधार पर बनाया गया है, ताकि आपकी परीक्षा तैयारी अधिक प्रभावी और सफल हो सके।
इन नोट्स में अध्याय के सभी महत्वपूर्ण टॉपिक—जैसे “विष के दाँत” कहानी का मुख्य संदेश, अंधविश्वास का प्रभाव, भोले-भाले लोगों को धोखा देने वाले तंत्र-मंत्र के ढोंग, अज्ञानता और भय के कारण होने वाले सामाजिक शोषण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण का महत्व, तथा अंधविश्वास से छुटकारा पाने की आवश्यकता—को बेहद आसान और स्पष्ट भाषा में समझाया गया है, ताकि छात्र इन्हें जल्दी समझ सकें और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें।
इन नोट्स की मदद से विद्यार्थी न केवल अध्याय को कम समय में दोहरा पाएंगे, बल्कि अंधविश्वास के वास्तविक स्वरूप, समाज पर उसके नकारात्मक प्रभाव, जागरूकता और वैज्ञानिक सोच अपनाने के उपाय, तथा तर्कसंगत दृष्टिकोण की गहरी समझ भी विकसित कर सकेंगे। यह ज्ञान परीक्षा के साथ-साथ वास्तविक जीवन में भी उन्हें जागरूक, वैज्ञानिक सोच वाले और विवेकशील नागरिक बनने में मदद करता है।
Bihar Board Class 10 Hindi Godhuli Notes PDF Free | श्रम विभाजन और जाति प्रथा
आज हम नलिन विलोचन शर्मा द्वारा रचित ‘विष के दाँत’ कहानी का गहन अध्ययन करेंगे। यह कहानी सामाजिक विषमताओं, वर्ग-संघर्ष और बाल मनोविज्ञान को बड़ी कुशलता से दर्शाती है। यह आपके बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा (BSEB) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है।
1. संक्षिप्त सारांश
यह कहानी मध्यवर्गीय समाज की विडंबनाओं, लिंग-भेदभाव और पूंजीपतियों की क्रूर मानसिकता को उजागर करती है।
- पात्रों का परिचय:
- सेन साहब: कहानी के मुख्य पूंजीपति पात्र, अहंकारी, रूढ़िवादी और अपनी कार तथा बेटे खोखा पर अत्यधिक गर्व करने वाले।
- सेन साहब की पत्नी: पति की हर बात में हाँ मिलाने वाली, एक आदर्शवादी पत्नी।
- खोखा (काशू): सेन साहब का इकलौता बिगड़ैल बेटा, जिसे वे इंजीनियर बनाना चाहते हैं। घर के नियमों का उल्लंघन करने वाला।
- मदन: गिरधरलाल का बेटा, गरीब लेकिन स्वाभिमानी और साहसी।
- गिरधरलाल: सेन साहब का किरानी (क्लर्क), गरीब, लाचार और अपने मालिक के प्रति वफादार, लेकिन अंत में अपने बेटे के स्वाभिमान का समर्थन करने वाला।
- सेन साहब की पाँच बेटियाँ: सीमा, रजनी, आलो, शेफाली, आरती। सुशील, संस्कारी और अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करने वाली।
- घटनाओं का क्रम (कथानक):
कहानी सेन साहब के परिवार से शुरू होती है, जहाँ उनकी पाँच सुशील बेटियाँ और एक बिगड़ैल बेटा खोखा है। सेन साहब अपनी कार और खोखा पर बहुत गर्व करते हैं। वे खोखा को इंजीनियर बनाना चाहते हैं, भले ही वह घर में तोड़-फोड़ करता रहता है। एक दिन, खोखा कार के शीशे को तोड़ने की कोशिश करता है, और ड्राइवर उसे रोकता है। उसी समय, गिरधरलाल का बेटा मदन, जो गली में खेल रहा होता है, कार को छूने की कोशिश करता है, जिस पर ड्राइवर उसे धक्का दे देता है। इस घटना के कारण गिरधरलाल को नौकरी से निकाल देने की धमकी मिलती है।
एक और घटना में, मदन और खोखा लट्टू खेलने के दौरान झगड़ते हैं। खोखा मदन के साथ खेलना चाहता है, लेकिन मदन उसे मना कर देता है क्योंकि खोखा हमेशा झगड़ा करता है। खोखा मदन पर हाथ उठाता है, और मदन पलटकर खोखा के दो दाँत तोड़ देता है। यह घटना सेन साहब के लिए एक बड़ा झटका होती है। गिरधरलाल, जो पहले अपने बेटे को मारता-पीटता था, इस बार मदन को गले लगा लेता है और उसे शाबाशी देता है।
- मुख्य भाव (सार):
यह कहानी समाज में व्याप्त वर्ग-भेदभाव (अमीर-गरीब), लिंग-भेदभाव (बेटियों और बेटे के प्रति अलग व्यवहार) और पूंजीवादी समाज की क्रूरता को दर्शाती है। यह दिखाती है कि कैसे गलत परवरिश बच्चों को बिगाड़ सकती है और कैसे स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
- लेखक का उद्देश्य:
लेखक नलिन विलोचन शर्मा का उद्देश्य समाज में व्याप्त पूंजीवादी शोषण, वर्ग-संघर्ष, लिंग-भेदभाव और खोखले आदर्शों को उजागर करना है। वे यह भी दिखाना चाहते हैं कि कैसे गरीब वर्ग भी अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए अंततः खड़ा हो सकता है।
- शिक्षा (संदेश):
- सामाजिक विषमता और वर्ग-भेदभाव गलत है।
- बच्चों की सही परवरिश अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- स्वाभिमान की रक्षा करना हर व्यक्ति का अधिकार है।
- अत्याचार के विरुद्ध आवाज़ उठाना आवश्यक है।
2. महत्वपूर्ण तत्व और विश्लेषण
- उल्लेखनीय संवाद/उदाहरण:
- “सेन साहब को अपनी कार पर बहुत नाज़ था।”
यह वाक्य सेन साहब के भौतिकवादी और अहंकारी स्वभाव को दर्शाता है। उनकी कार उनके सामाजिक रुतबे का प्रतीक है।
- “खोखा इंजीनियर बनेगा।”
सेन साहब की यह महत्वाकांक्षा उनके बेटे के प्रति उनकी अंधी उम्मीदों और रूढ़िवादी सोच को दर्शाती है। वे खोखा के बिगड़ैल स्वभाव को अनदेखा कर उसे एक निश्चित साँचे में ढालना चाहते हैं।
- “बेटियाँ तो कठपुतलियाँ हैं, और उन्हें इस बात पर गर्व है।”
यह संवाद समाज में व्याप्त लिंग-भेदभाव और पितृसत्तात्मक सोच को उजागर करता है, जहाँ बेटियों को केवल आज्ञाकारी और सुशील बने रहने की सीख दी जाती है।
- “मदन ने खोखा के दो दाँत तोड़ डाले।”
यह कहानी का चरमोत्कर्ष है। यह घटना केवल एक शारीरिक चोट नहीं, बल्कि पूंजीवादी व्यवस्था के अहंकार और अन्याय पर गरीब के स्वाभिमान की जीत का प्रतीक है। ‘विष के दाँत’ इसी घटना को संदर्भित करता है, जहाँ खोखा के दाँत तोड़ना उसके विषैले, बिगड़ैल स्वभाव और सेन साहब के अहंकारी दृष्टिकोण को तोड़ने जैसा है।
- “सेन साहब को अपनी कार पर बहुत नाज़ था।”
- कविता विशिष्टताएँ:
यह पाठ एक कहानी (गद्य खंड) है, अतः इसमें कविता विशिष्टताएँ जैसे भाव, शैली, छंद, प्रतीक आदि लागू नहीं होते। यह एक यथार्थवादी शैली में लिखी गई सामाजिक कहानी है।
3. परीक्षा उपयोगी प्रश्न
प्रिय छात्रों, इन प्रश्नों का अभ्यास आपको परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में सहायता करेगा।
- अति महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (VVI Objective Questions):
- ‘विष के दाँत’ कहानी के लेखक कौन हैं?
- (क) अमरकांत
- (ख) नलिन विलोचन शर्मा
- (ग) रामविलास शर्मा
- (घ) गुणाकर मुले
उत्तर: (ख) नलिन विलोचन शर्मा
- सेन साहब की कितनी बेटियाँ थीं?
- (क) दो
- (ख) चार
- (ग) पाँच
- (घ) तीन
उत्तर: (ग) पाँच
- खोखा का दूसरा नाम क्या था?
- (क) काशू
- (ख) मदन
- (ग) अक्कू
- (घ) बक्कू
उत्तर: (क) काशू
- मदन ने खोखा के कितने दाँत तोड़ डाले?
- (क) एक
- (ख) दो
- (ग) तीन
- (घ) चार
उत्तर: (ख) दो
- गिरधरलाल कौन था?
- (क) सेन साहब का ड्राइवर
- (ख) सेन साहब का किरानी
- (ग) सेन साहब का मित्र
- (घ) सेन साहब का पड़ोसी
उत्तर: (ख) सेन साहब का किरानी
- ‘विष के दाँत’ कहानी के लेखक कौन हैं?
- लघु/दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Subjective Questions):
- सेन साहब और खोखा के बीच के संबंध को स्पष्ट करें। क्या सेन साहब अपने बेटे को सही शिक्षा दे रहे थे?
उत्तर : सेन साहब और खोखा के बीच का संबंध अत्यंत लाड़-प्यार और अंध-मोह पर आधारित था। सेन साहब खोखा को अपने बुढ़ापे का सहारा मानते थे और उसे इंजीनियर बनाना चाहते थे। वे उसकी हर गलती को अनदेखा कर देते थे, जिससे खोखा अत्यंत बिगड़ैल और उद्दंड हो गया था। वे उसे सही शिक्षा नहीं दे रहे थे, बल्कि उसकी मनमानी को बढ़ावा देकर उसे गलत रास्ते पर धकेल रहे थे। उनकी परवरिश में अनुशासन और नैतिकता का अभाव था, जिसके कारण खोखा ‘विष के दाँत’ के समान बन गया था।
- ‘विष के दाँत’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करें।
उत्तर : ‘विष के दाँत’ शीर्षक कहानी के केंद्रीय भाव को बड़ी कुशलता से व्यक्त करता है। यहाँ ‘विष के दाँत’ प्रतीक है पूंजीवादी समाज की क्रूरता, वर्ग-भेदभाव, सेन साहब के अहंकारी स्वभाव और उनके बिगड़ैल बेटे खोखा की उद्दंडता का। खोखा के दाँत तोड़ना केवल एक शारीरिक चोट नहीं, बल्कि पूंजीवादी व्यवस्था के अन्याय और अहंकार पर गरीब के स्वाभिमान की जीत का प्रतीक है। यह शीर्षक यह भी दर्शाता है कि कैसे गलत परवरिश और सामाजिक विषमताएँ बच्चों में विष भर देती हैं, जिसे अंततः तोड़ना ही पड़ता है। अतः, यह शीर्षक पूर्णतः सार्थक है।
- मदन और ड्राइवर के बीच के विवाद के माध्यम से लेखक क्या दर्शाना चाहते हैं?
उत्तर : मदन और ड्राइवर के बीच के विवाद के माध्यम से लेखक समाज में व्याप्त वर्ग-भेदभाव और पूंजीपतियों की क्रूर मानसिकता को दर्शाना चाहते हैं। ड्राइवर, जो स्वयं एक गरीब वर्ग से आता है, सेन साहब के आदेश पर मदन को कार छूने से रोकता है और उसे धक्का देता है। यह घटना दिखाती है कि कैसे पूंजीपति वर्ग अपने अधीनस्थ कर्मचारियों का उपयोग कर गरीब वर्ग पर अपना प्रभुत्व स्थापित करता है और उन्हें अपने ही वर्ग के लोगों के खिलाफ खड़ा कर देता है। यह घटना मदन के स्वाभिमान को भी चोट पहुँचाती है और आगे चलकर उसके विद्रोह का आधार बनती है।
- सेन साहब अपनी बेटियों के प्रति कैसा व्यवहार रखते थे और क्यों?
उत्तर : सेन साहब अपनी बेटियों के प्रति अत्यंत रूढ़िवादी और लिंग-भेदभावपूर्ण व्यवहार रखते थे। वे अपनी पाँचों बेटियों को ‘कठपुतलियाँ’ मानते थे, जिन्हें केवल घर के नियमों का पालन करना, सुशील रहना और आज्ञाकारी बने रहना सिखाया जाता था। उन्हें खेलने-कूदने या अपनी इच्छा से कुछ करने की आज़ादी नहीं थी। सेन साहब का मानना था कि बेटियाँ केवल घर की शोभा होती हैं और उन्हें समाज के कठोर नियमों के अनुसार ढालना चाहिए। यह व्यवहार उनकी पितृसत्तात्मक सोच और समाज में व्याप्त लिंग-भेदभाव को दर्शाता है, जहाँ बेटों को अधिक महत्व दिया जाता है और बेटियों को दबाकर रखा जाता है।
- सेन साहब और खोखा के बीच के संबंध को स्पष्ट करें। क्या सेन साहब अपने बेटे को सही शिक्षा दे रहे थे?
मुझे उम्मीद है कि ये नोट्स आपको ‘विष के दाँत’ अध्याय को समझने और परीक्षा की तैयारी करने में मदद करेंगे। शुभकामनाएँ!
बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी गोधूली के अन्य अध्यायों के समाधान
गोधूली (गद्यखंड)
| क्रमांक | अध्याय |
|---|---|
| 1 | श्रम विभाजन एवं जातिप्रथा |
| 3 | भारत से हम क्या सीखें |
| 4 | नाखून क्यो बढ़ते हैं |
| 5 | नगरी लिपि |
| 6 | बहादुर |
| 7 | परंपरा का मूल्यांकन |
| 8 | जित-जित मैं निरखत हूँ |
| 9 | आविन्यों |
| 10 | मछली |
| 11 | नैबतख़ाने में इबादत |
| 12 | शिक्षा और संस्कृति |
गोधूली (काव्यखंड)
| क्रमांक | अध्याय |
|---|---|
| 1 | राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा |
| 2 | प्रेम-अयनि श्री राधिका |
| 3 | अति सुधो सनेह को मारग है |
| 4 | स्वदेशी |
| 5 | भारतमाता |
| 6 | जनतंत्र का जन्म |
| 7 | हिरोशिमा |
| 8 | एक वृक्ष की हत्या |
| 9 | हमारी नींद |
| 10 | अक्षर – ज्ञान |
| 11 | लौटकर आऊँगा फिर |
| 12 | मेरे बिना तुम प्रभु |
वर्णिका भाग - 2
| क्रमांक | अध्याय |
|---|---|
| 1 | दही वाले मगम्मा |
| 2 | ढहते विश्वास |
| 3 | माँ |
| 4 | नगर |
| 5 | धरती कब तक घूमेगी |
Notes क्या होते हैं और क्यों आवश्यक होते हैं?
कई छात्रों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर किसी विषय का Notes क्या होता है? चलिए इसे सरल शब्दों में समझते हैं।
Notes किसी भी विषय का संक्षिप्त और आसान सारांश होते हैं — यानी ऐसे पन्ने या कॉपी जिनमें किसी अध्याय की मुख्य बातें, महत्वपूर्ण परिभाषाएँ, सूत्र, उदाहरण और अवधारणाएँ छोटे-छोटे बिंदुओं में लिखी जाती हैं। Notes की आवश्यकता यह होती है कि छात्र कम समय में पूरे विषय को दोहरा सकें और कठिन टॉपिक को आसानी से समझ सकें।
अनेक शिक्षकों के अनुसार, Notes एक ऐसा संक्षिप्त लेखन होता है जो पढ़ाई और परीक्षा दोनों के लिए सहायक होता है। अच्छे Notes की मदद से छात्रों को बार-बार पूरी किताब पढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ती क्योंकि इनमें वही बातें शामिल होती हैं जो परीक्षा की दृष्टि से सबसे ज़्यादा जरूरी होती हैं।
जब छात्र स्वयं Notes तैयार करते हैं, तो वे केवल याद नहीं कर रहे होते बल्कि विषय को गहराई से समझ रहे होते हैं। इस प्रक्रिया से ज्ञान लंबे समय तक याद रहता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
Bihar Board Class 10 का हमारे Notes कैसे तैयार किए गए हैं?
- हमारे द्वारा तैयार किए गए सभी विषयों के नोट्स Bihar Board मैट्रिक के नवीनतम सिलेबस पर आधारित है।
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- सभी Concepts को Example के साथ समझाया गया है जिससे सभी छात्र आसानी से समझ पाए।
- प्रत्येक अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर (VVI Questions) और वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी शामिल किए गए हैं।
- विषयवस्तु को स्पष्ट चित्रों और उदाहरण के साथ भी समझाया गया गया है।
FAQ's About BSEB Class10 Ultimate Notes
1: क्या ये नोट्स BSEB के नए सिलेबस 2025-26 पर आधारित हैं?
2: क्या केवल इन नोट्स को पढ़कर अच्छे अंक लाए जा सकते हैं?
3: क्या ये सभी नोट्स फ्री (Free) में उपलब्ध हैं?
4: मैं इन नोट्स का PDF कैसे डाउनलोड कर सकता हूँ?
5: क्या इन नोट्स में Objective और Subjective दोनों प्रकार के प्रश्न शामिल हैं?
सारांश :
हम आशा करते हैं कि हमारे द्वारा तैयार किए गए Bihar Board 10th Hindi Godhuli Gadhykhand Ultimate Notes की यह श्रृंखला आपके अध्ययन में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।
इन Notes को अत्यंत सरल भाषा, सटीक व्याख्या, महत्वपूर्ण बिंदुओं, चित्रों, उदाहरणों और संभावित परीक्षा प्रश्नों के साथ व्यवस्थित किया गया है, ताकि हर विद्यार्थी अध्याय में दिए गए सभी टॉपिक को आसानी से समझ सके और पूर्ण आत्मविश्वास के साथ अपनी परीक्षा की तैयारी कर सके।
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इन Hindi Godhuli Notes का मुख्य उद्देश्य यही है कि Bihar Board Class 10 के हर छात्र को एक ही स्थान पर complete, free और high-quality study material उपलब्ध हो, ताकि उन्हें अलग-अलग किताबों या वेबसाइटों पर समय बर्बाद न करना पड़े। यह Notes आपकी परीक्षा की तैयारी को सरल, तेज़ और प्रभावी बनाते हैं।

