10th Godhuli Gadhykhand Ex-4 BSEB Free Notes pdf

10th Godhuli Gadhykhand Ex-4 BSEB Free Notes pdf । नाखून क्यों बढ़ते हैं ।

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इस पोस्ट में आप बिहार बोर्ड कक्षा 10 गोधूली गद्यखंड के अध्याय 4 — “नाखून क्यों बढ़ते हैं” के महत्वपूर्ण Notes देखने वाले हैं। यह नोट्स विशेष रूप से बिहार बोर्ड कक्षा 10 के छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आसान, सरल और समझने योग्य भाषा में तैयार किए गए हैं। साथ ही इन्हें नवीनतम सिलेबस के आधार पर बनाया गया है, ताकि आपकी परीक्षा तैयारी अधिक प्रभावी और सफल हो सके।

यह अध्याय विद्यार्थियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उन्हें केवल एक पाठ नहीं पढ़ाता, बल्कि मानव स्वभाव, इतिहास, संस्कृति और नैतिकता के बारे में सोचने की प्रेरणा देता है। यह पाठ उन्हें अपनी सहज प्रवृत्तियों पर नियंत्रण रखने और प्रेम, त्याग, मैत्री जैसे उच्च मानवीय मूल्यों को अपनाने की शिक्षा देता है, जो एक सभ्य समाज के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। यह निबंध भारतीय संस्कृति की उन मूलभूत अवधारणाओं को भी उजागर करता है जहाँ ‘आत्म-बंधन’ और ‘अहिंसा’ को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
मैं निकेत कुमार, आपके लिए Bihar Board (BSEB) Class 10 के हिंदी गोधूली (Hindi Godhuli) सहित अन्य सभी विषयों के Notes सरल, स्पष्ट एवं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित आसान भाषा में अपनी वेबसाइट BSEBsolution पर निःशुल्क उपलब्ध कराता हूँ। यदि आप बिहार बोर्ड के छात्र हैं या बिहार बोर्ड के छात्रों को पढ़ाने वाले शिक्षक/शिक्षिका हैं, तो हमारी वेबसाइट को नियमित रूप से विज़िट करते रहें। नीचे आपको बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी गोधूली अध्याय 4 “नाखून क्यों बढ़ते हैं” के Free Notes PDF दिए गया है।
[ NOTE ] : कोई भी छात्र/छात्रा या शिक्षक/शिक्षिका जो हमारे Free Ultimate Notes को देख रहे है। यदि इसके लिए आपके पास कोई सुझवा है, तो बेझिझक Comment में या What’sApp : 8579987011 पर अपना सुझाव दें। आपके सुझावों का हम हमेशा स्वागत करते हैं। Thank You!

Bihar Board Class 10 Hindi Godhuli Notes PDF Free | नाखून क्यों बढ़ते हैं

नमस्ते प्यारे विद्यार्थियों! मैं आपका वरिष्ठ हिंदी शिक्षक, बिहार बोर्ड कक्षा 10वीं की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘गोधूलि’ के गद्य खंड के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक पाठ “नाखून क्यों बढ़ते हैं” के अध्ययन नोट्स लेकर उपस्थित हूँ। यह ललित निबंध आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी द्वारा रचित है, जो हमें मानव सभ्यता के विकास, हमारी आदिम प्रवृत्तियों और मानवीय मूल्यों के बीच के द्वंद्व पर गहराई से सोचने को विवश करता है।

1. संक्षिप्त सारांश

यह पाठ आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित एक ललित निबंध है, जिसमें लेखक ने नाखून बढ़ने को मनुष्य की आदिम पाशविक प्रवृत्ति का प्रतीक माना है और नाखून काटने को मनुष्यता का।

  • परिचय:

    लेखक की छोटी बेटी के एक सरल प्रश्न “नाखून क्यों बढ़ते हैं?” से यह निबंध शुरू होता है। यह प्रश्न लेखक को मानव सभ्यता के विकास, मनुष्य की पाशविक प्रवृत्तियों और उसके सांस्कृतिक विकास पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है। लेखक मानव के इतिहास को खंगालते हुए बताता है कि नाखून कभी मनुष्य के लिए आत्मरक्षा और शिकार के हथियार थे।

  • घटनाओं का क्रम (विचारों का प्रवाह):

    लेखक बताते हैं कि लाखों वर्ष पहले मनुष्य जंगली था और अपने नाखूनों तथा दाँतों का प्रयोग हथियार के रूप में करता था। धीरे-धीरे मनुष्य ने पत्थर, हड्डी और फिर धातु के हथियार बनाना सीख लिया। नाखूनों की उपयोगिता कम होती गई, लेकिन उनके बढ़ने की प्रवृत्ति बनी रही। लेखक इस बात पर जोर देते हैं कि नाखून काटना मनुष्य की सभ्यता और सौंदर्य बोध का प्रतीक है। यह उसकी पशुता को त्याग कर मनुष्यता की ओर बढ़ने का संकेत है। लेखक भारतीय संस्कृति की महानता को भी रेखांकित करते हैं, जहाँ आत्म-नियंत्रण, त्याग और तप को महत्व दिया गया है, न कि अस्त्र-शस्त्रों के बल पर दूसरों पर विजय प्राप्त करने को। गांधी जी के अहिंसा के सिद्धांत का भी अप्रत्यक्ष रूप से उल्लेख है, जो मनुष्य को प्रेम, मैत्री और त्याग का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है।

  • मुख्य भाव:

    इस निबंध का मुख्य भाव यह है कि नाखून बढ़ना मनुष्य की पशुता का प्रतीक है, जबकि उन्हें काटना मनुष्यता का प्रतीक। मनुष्य अपनी सहज पाशविक वृत्तियों को त्याग कर ही सच्चा मनुष्य बन सकता है। सच्ची मनुष्यता प्रेम, त्याग, आत्म-नियंत्रण और दूसरों के प्रति सहानुभूति में निहित है।

  • लेखक का उद्देश्य:

    लेखक का उद्देश्य यह बताना है कि मनुष्य निरंतर अपनी पाशविक प्रवृत्तियों से संघर्ष करता रहा है और उन्हें त्याग कर ही उसने सभ्यता का विकास किया है। वे यह संदेश देना चाहते हैं कि मनुष्य की महानता उसके भीतर की पशुता को नियंत्रित करने और मानवीय मूल्यों को अपनाने में है। भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों – अहिंसा, त्याग और आत्म-नियंत्रण – को स्थापित करना।

  • शिक्षा:

    हमें अपनी भीतर की पाशविक प्रवृत्तियों (क्रोध, लोभ, हिंसा) को पहचानना चाहिए और उन्हें नियंत्रित कर मानवीय मूल्यों (प्रेम, करुणा, त्याग) को अपनाना चाहिए। बाहरी चमक-दमक या हथियारों की शक्ति से नहीं, बल्कि आंतरिक सद्गुणों से ही मनुष्य महान बनता है। सच्ची स्वतंत्रता बाहरी बंधनों से मुक्ति नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं और वृत्तियों पर नियंत्रण पाना है।

2. महत्वपूर्ण तत्व और विश्लेषण

  • उल्लेखनीय संवाद/उदाहरण:
    • “नाखून क्यों बढ़ते हैं?” – यह प्रश्न ही पूरे निबंध का केंद्र बिंदु है, जो एक बच्चे की सहज जिज्ञासा से शुरू होकर गहन दार्शनिक चिंतन में बदल जाता है।
    • “मनुष्य की पशुता को जितनी बार भी काट दो, वह मरना नहीं जानती।” – यह वाक्य मनुष्य की आदिम प्रवृत्तियों की जिजीविषा और उनके निरंतर उभरने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
    • “मनुष्य को सुख कैसे मिलेगा? बड़े-बड़े नख बढ़ाने से? बड़े-बड़े अस्त्र-शस्त्र बढ़ाने से?” – लेखक इन प्रश्नों के माध्यम से आधुनिक मानव की दिशाहीनता पर कटाक्ष करते हैं और सच्ची सुख की परिभाषा खोजने का आह्वान करते हैं।
    • “मनुष्य की चरितार्थता प्रेम में है, मैत्री में है, त्याग में है, अपने को सबके मंगल के लिए निःशेष भाव से दे देने में है।” – यह वाक्य मनुष्यता के सर्वोच्च आदर्शों को स्पष्ट करता है।
  • निबंध-विशिष्ट बातें:
    • शैली: यह एक ललित निबंध है, जिसमें व्यक्तिगत चिंतन, साहित्यिक लालित्य और दार्शनिक गहराई का अद्भुत संगम है। लेखक की भाषा में सहजता के साथ-साथ गंभीरता भी है।
    • भाषा: संस्कृतनिष्ठ हिंदी का प्रयोग किया गया है, जो विषय की गंभीरता को बढ़ाती है। मुहावरे और लोकोक्तियों का प्रयोग भी मिलता है।
    • भाव: चिंतनशील, दार्शनिक और उपदेशात्मक। लेखक पाठक को सोचने पर विवश करते हैं।
    • प्रतीक:
      • नाखून: मनुष्य की पाशविक प्रवृत्ति, आदिम शक्ति, हिंसा, अस्त्र-शस्त्र।
      • नाखून काटना: मनुष्यता, सभ्यता, आत्म-नियंत्रण, सांस्कृतिक विकास, त्याग।
    • लेखक पृष्ठभूमि: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी (1907-1979) हिंदी साहित्य के एक महान निबंधकार, आलोचक और उपन्यासकार थे। वे भारतीय संस्कृति, इतिहास और दर्शन के प्रकांड विद्वान थे। उनके निबंधों में गहन चिंतन और भारतीय मनीषा की झलक मिलती है। “नाखून क्यों बढ़ते हैं” उनके इसी चिंतनशील व्यक्तित्व का परिचायक है।

3. परीक्षा उपयोगी प्रश्न

अ. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions – VVI)

  1. प्रश्न: “नाखून क्यों बढ़ते हैं” के निबंधकार कौन हैं?

    • (क) रामचंद्र शुक्ल
    • (ख) हजारी प्रसाद द्विवेदी
    • (ग) गुणाकर मुले
    • (घ) महात्मा गांधी

    उत्तर: (ख) हजारी प्रसाद द्विवेदी

  2. प्रश्न: “नाखून क्यों बढ़ते हैं” किस प्रकार का निबंध है?

    • (क) भावात्मक
    • (ख) ललित
    • (ग) विचारात्मक
    • (घ) वर्णनात्मक

    उत्तर: (ख) ललित

  3. प्रश्न: मनुष्य का आदर्श नहीं बन सकती।

    • (क) शेरनी
    • (ख) बंदरिया
    • (ग) भालू
    • (घ) हथिनी

    उत्तर: (ख) बंदरिया

  4. प्रश्न: द्विवेदी जी से किसने पूछा था “नाखून क्यों बढ़ते हैं?”

    • (क) उनकी बेटी ने
    • (ख) उनकी पत्नी ने
    • (ग) उनके मित्र ने
    • (घ) उनके छात्र ने

    उत्तर: (क) उनकी बेटी ने

  5. प्रश्न: प्राचीन मानव का प्रमुख अस्त्र-शस्त्र क्या था?

    • (क) तलवार
    • (ख) बंदूक
    • (ग) नाखून और दाँत
    • (घ) पत्थर के औजार

    उत्तर: (ग) नाखून और दाँत

ब. विषयनिष्ठ प्रश्न (Subjective Questions – Short/Long)

  1. प्रश्न: लेखक द्वारा नाखूनों को अस्त्र के रूप में देखना कहाँ तक संगत है?

    उत्तर : लेखक द्वारा नाखूनों को अस्त्र के रूप में देखना पूर्णतः संगत है। लाखों वर्ष पूर्व जब मनुष्य जंगली था और उसके पास कोई अन्य हथियार नहीं थे, तब वह अपने नाखूनों और दाँतों का ही प्रयोग आत्मरक्षा तथा शिकार के लिए करता था। ये उसके आदिम अस्त्र-शस्त्र थे, जो उसकी पाशविक प्रवृत्ति के प्रतीक थे। सभ्यता के विकास के साथ मनुष्य ने नए हथियार बनाए, लेकिन नाखूनों का बढ़ना उसकी आदिम पाशविक प्रवृत्ति की याद दिलाता है।

  2. प्रश्न: ‘मनुष्य की पशुता को जितनी बार भी काट दो, वह मरना नहीं जानती।’ इस कथन का आशय स्पष्ट करें।

    उत्तर : इस कथन का आशय यह है कि मनुष्य ने सभ्यता के विकास के साथ अपनी अनेक पाशविक प्रवृत्तियों को नियंत्रित किया है, लेकिन उसकी मूल पशुता (जैसे हिंसा, स्वार्थ, लोभ, क्रोध) पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। जिस प्रकार नाखून बार-बार काटने पर भी बढ़ते रहते हैं, उसी प्रकार मनुष्य के भीतर की पाशविक वृत्तियाँ भी बार-बार सिर उठाती रहती हैं। लेखक यह बताना चाहते हैं कि मनुष्य को अपनी इन वृत्तियों पर निरंतर नियंत्रण रखना पड़ता है और उन्हें त्यागने का प्रयास करते रहना चाहिए, क्योंकि ये वृत्तियाँ कभी पूरी तरह मरती नहीं, बल्कि अवसर पाकर पुनः प्रकट हो जाती हैं।

  3. प्रश्न: लेखक ने किस प्रसंग में कहा है कि “मनुष्य की चरितार्थता प्रेम में है, मैत्री में है, त्याग में है, अपने को सबके मंगल के लिए निःशेष भाव से दे देने में है”?

    उत्तर : लेखक ने यह बात मनुष्य की सच्ची मनुष्यता और उसके आदर्शों को परिभाषित करते हुए कही है। वे बताते हैं कि अस्त्र-शस्त्रों के बल पर दूसरों पर विजय प्राप्त करना या अपनी शारीरिक शक्ति का प्रदर्शन करना पशुता का लक्षण है। सच्ची मनुष्यता इसमें नहीं है कि हम दूसरों को दबाएँ या उनसे घृणा करें। बल्कि, मनुष्य की सार्थकता और उसकी महानता प्रेम, मित्रता, त्याग और परोपकार में है। जब मनुष्य अपने स्वार्थ को छोड़कर दूसरों के कल्याण के लिए स्वयं को समर्पित कर देता है, तभी वह सच्चा मनुष्य कहलाता है। यह कथन भारतीय संस्कृति के ‘अहिंसा परमो धर्मः’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ जैसे उदात्त मूल्यों को भी दर्शाता है।

  4. प्रश्न: नाखून बढ़ना मनुष्य की किस प्रवृत्ति का परिणाम है? वे उसे कैसे रोक सकता है?

    मॉडल उत्तर: नाखून बढ़ना मनुष्य की आदिम पाशविक प्रवृत्ति का परिणाम है। यह उसकी सहज वृत्ति है, जो लाखों वर्षों से उसके शरीर में विद्यमान है। मनुष्य इसे शारीरिक रूप से तो काटकर रोक सकता है, लेकिन मानसिक रूप से इस प्रवृत्ति को नियंत्रित करने के लिए उसे आत्म-नियंत्रण, त्याग, तप और प्रेम जैसे मानवीय मूल्यों को अपनाना होगा। उसे अपनी भीतर की हिंसा, क्रोध और स्वार्थ जैसी पशुता को पहचानकर उसे त्यागने का निरंतर प्रयास करना होगा। सच्ची मनुष्यता अपनी वृत्तियों पर नियंत्रण पाने में ही है।

मुझे उम्मीद है कि ये विस्तृत नोट्स आपको इस पाठ को गहराई से समझने और परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेंगे। खूब मन लगाकर पढ़ें और अपने ज्ञान को बढ़ाएँ! शुभकामनाएँ!

बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी गोधूली के अन्य अध्यायों के समाधान

गोधूली (गद्यखंड)

क्रमांक अध्याय
1 श्रम विभाजन एवं जातिप्रथा
2 विष के दाँत
3 भारत से हम क्या सीखें
5 नगरी लिपि
6 बहादुर
7 परंपरा का मूल्यांकन
8 जित-जित मैं निरखत हूँ
9 आविन्यों
10 मछली
11 नैबतख़ाने में इबादत
12 शिक्षा और संस्कृति

गोधूली (काव्यखंड)

क्रमांक अध्याय
1 राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा
2 प्रेम-अयनि श्री राधिका
3 अति सुधो सनेह को मारग है
4 स्वदेशी
5 भारतमाता
6 जनतंत्र का जन्म
7 हिरोशिमा
8 एक वृक्ष की हत्या
9 हमारी नींद
10 अक्षर – ज्ञान
11 लौटकर आऊँगा फिर
12 मेरे बिना तुम प्रभु

वर्णिका भाग - 2

Notes क्या होते हैं और क्यों आवश्यक होते हैं?

कई छात्रों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर किसी विषय का Notes क्या होता है? चलिए इसे सरल शब्दों में समझते हैं। Notes किसी भी विषय का संक्षिप्त और आसान सारांश होते हैं — यानी ऐसे पन्ने या कॉपी जिनमें किसी अध्याय की मुख्य बातें, महत्वपूर्ण परिभाषाएँ, सूत्र, उदाहरण और अवधारणाएँ छोटे-छोटे बिंदुओं में लिखी जाती हैं। Notes की आवश्यकता यह होती है कि छात्र कम समय में पूरे विषय को दोहरा सकें और कठिन टॉपिक को आसानी से समझ सकें।

अनेक शिक्षकों के अनुसार, Notes एक ऐसा संक्षिप्त लेखन होता है जो पढ़ाई और परीक्षा दोनों के लिए सहायक होता है। अच्छे Notes की मदद से छात्रों को बार-बार पूरी किताब पढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ती क्योंकि इनमें वही बातें शामिल होती हैं जो परीक्षा की दृष्टि से सबसे ज़्यादा जरूरी होती हैं।
जब छात्र स्वयं Notes तैयार करते हैं, तो वे केवल याद नहीं कर रहे होते बल्कि विषय को गहराई से समझ रहे होते हैं। इस प्रक्रिया से ज्ञान लंबे समय तक याद रहता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

Bihar Board Class 10 का हमारे Notes कैसे तैयार किए गए हैं?

FAQ's About BSEB Class10 Ultimate Notes

उत्तर : जी हाँ, ये नोट्स पूरी तरह से बिहार बोर्ड के नवीनतम पाठ्यक्रम और परीक्षा पैटर्न को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। आप निश्चिंत रहें।
उत्तर : ये नोट्स आपकी तैयारी के लिए एक बेहतरीन सहायक सामग्री हैं। सर्वोत्तम परिणामों के लिए, आपको अपनी पाठ्यपुस्तक को पढ़ना चाहिए और इन नोट्स से रिवीजन करना चाहिए।
उत्तर : जी हाँ, हमारी वेबसाइट www.bsebsolution.in पर उपलब्ध सभी Bihar Board Class 10 Notes पूरी तरह मुफ़्त (Free PDF) हैं।
उत्तर : जी हाँ, आप इस पेज पर दिए गए डाउनलोड लिंक (जल्द ही उपलब्ध होगा) पर क्लिक करके आसानी से PDF को अपने फोन या कंप्यूटर में सेव कर सकते हैं।
उत्तर : जी हाँ, इन नोट्स में Objective Questions, Very Short, Short और Long Answer Questions सभी प्रकार के प्रश्न शामिल हैं। इससे छात्रों को परीक्षा के हर सेक्शन के लिए पूर्ण तैयारी करने में मदद मिलती है।

सारांश :

हम आशा करते हैं कि हमारे द्वारा तैयार किए गए Bihar Board 10th Hindi Godhuli Gadhykhand Ultimate Notes की यह श्रृंखला आपके अध्ययन में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।

इन Notes को अत्यंत सरल भाषा, सटीक व्याख्या, महत्वपूर्ण बिंदुओं, चित्रों, उदाहरणों और संभावित परीक्षा प्रश्नों के साथ व्यवस्थित किया गया है, ताकि हर विद्यार्थी अध्याय में दिए गए सभी टॉपिक को आसानी से समझ सके और पूर्ण आत्मविश्वास के साथ अपनी परीक्षा की तैयारी कर सके।

यदि पढ़ाई के दौरान आपके मन में किसी भी प्रकार का doubt या confusion उत्पन्न होता है, तो BSEBsolution.in पर उपलब्ध अध्यायवार समाधान, प्रश्न-उत्तर और व्याख्या आपके सभी संदेहों को दूर करने में मदद करेंगे।

इन Hindi Godhuli Notes का मुख्य उद्देश्य यही है कि Bihar Board Class 10 के हर छात्र को एक ही स्थान पर complete, free और high-quality study material उपलब्ध हो, ताकि उन्हें अलग-अलग किताबों या वेबसाइटों पर समय बर्बाद न करना पड़े। यह Notes आपकी परीक्षा की तैयारी को सरल, तेज़ और प्रभावी बनाते हैं।

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