10th Godhuli Gadhykhand Ex-7 BSEB Free Notes pdf

10th Godhuli Gadhykhand Ex-7 BSEB Free Notes pdf । 'परंपरा का मूल्यांकन' के सम्पूर्ण नोट्स

नमस्ते दोस्तों! क्या आप बिहार बोर्ड कक्षा 10 की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और हिंदी (Hindi) विषय आपको कठिन लग रहा है? कई छात्रों को हिंदी में कवि-परिचय, कहानी या कविता के भाव, सारांश, तथा व्याख्या को समझने और याद करने में परेशानी होती है। लेकिन चिंता करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है! यह विषय कई छात्रों को चुनौतीपूर्ण लगता है, परंतु सही मार्गदर्शन, उपयोगी टिप्स और अच्छे स्टडी मटेरियल की मदद से आप हिंदी में आसानी से अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं और विषय की मजबूत समझ भी विकसित कर सकते हैं।
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इस श्रृंखला में हम आपको बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किए गए Bihar Board Class 10 Hindi Godhuli Gadhykhand Ultimate Free Notes PDF उपलब्ध करवा रहे हैं। इन Notes को आसान, सरल और समझने योग्य भाषा में प्रस्तुत किया गया है। इसकी मदद से आप न केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल कर सकेंगे, बल्कि प्रत्येक अध्याय के सभी कॉन्सेप्ट को गहराई से समझ भी पाएंगे।

इस पोस्ट में आप बिहार बोर्ड कक्षा 10 गोधूली गद्यखंड के अध्याय 7 — “परंपरा का मूल्यांकन” के महत्वपूर्ण Notes देखने वाले हैं। यह नोट्स विशेष रूप से बिहार बोर्ड कक्षा 10 के छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आसान, सरल और समझने योग्य भाषा में तैयार किए गए हैं। साथ ही इन्हें नवीनतम सिलेबस के आधार पर बनाया गया है, ताकि आपकी परीक्षा तैयारी अधिक प्रभावी और सफल हो सके।

इन नोट्स में “परंपरा का मूल्यांकन” अध्याय से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विचार बहुत सरल भाषा में समझाए गए हैं—जैसे परंपरा का अर्थ, परंपराएँ कैसे बनती हैं, समय के साथ उनका रूप बदलना, कुछ परंपराओं का उपयोगी होना और कुछ का हानिकारक बन जाना। इसमें यह भी बताया गया है कि जब परंपराएँ मनुष्य की स्वतंत्रता, समानता या विकास में बाधा डालती हैं, तब उनकी समीक्षा करना आवश्यक हो जाता है। इन बातों को सरल और स्पष्ट ढंग से लिखा गया है, ताकि छात्र अध्याय की पूरी अवधारणा जल्दी समझ सकें और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें।
इन नोट्स की सहायता से विद्यार्थी न केवल अध्याय को कम समय में दोहरा पाएंगे, बल्कि यह भी समझ सकेंगे कि किसी भी समाज की परंपराएँ तभी मूल्यवान होती हैं, जब वे मानव कल्याण, समानता और न्याय को बढ़ावा दें। हानिकारक परंपराओं को छोड़ने और उपयोगी परंपराओं को अपनाने की समझ भी इनमें दी गई है। यह ज्ञान छात्रों को सोचने की क्षमता देता है कि समाज में सुधार कैसे लाया जाए और बदलते समय के साथ कौन-सी परंपराएँ जारी रहनी चाहिए। इस समझ से वे न केवल परीक्षा में सफल होंगे बल्कि वास्तविक जीवन में भी जागरूक, विवेकशील और सामाजिक रूप से जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।
मैं निकेत कुमार, आपके लिए Bihar Board (BSEB) Class 10 के हिंदी गोधूली (Hindi Godhuli) सहित अन्य सभी विषयों के Notes सरल, स्पष्ट एवं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित आसान भाषा में अपनी वेबसाइट BSEBsolution पर निःशुल्क उपलब्ध कराता हूँ। यदि आप बिहार बोर्ड के छात्र हैं या बिहार बोर्ड के छात्रों को पढ़ाने वाले शिक्षक/शिक्षिका हैं, तो हमारी वेबसाइट को नियमित रूप से विज़िट करते रहें। नीचे आपको बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी गोधूली अध्याय 7 “परंपरा का मूल्यांकन” के Free Notes PDF दिए गया है।
[ NOTE ] : कोई भी छात्र/छात्रा या शिक्षक/शिक्षिका जो हमारे Free Ultimate Notes को देख रहे है। यदि इसके लिए आपके पास कोई सुझवा है, तो बेझिझक Comment में या What’sApp : 8579987011 पर अपना सुझाव दें। आपके सुझावों का हम हमेशा स्वागत करते हैं। Thank You!

Bihar Board Class 10 Hindi Godhuli Notes PDF Free | परंपरा का मूल्यांकन

मैं आज हम बिहार बोर्ड कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तक “गोधूलि (गद्य खंड)” के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक अध्याय “परंपरा का मूल्यांकन” पर विस्तृत अध्ययन नोट्स तैयार करेंगे। यह निबंध डॉ. रामविलास शर्मा द्वारा लिखा गया है, जो हमें परंपरा को केवल आँख मूँदकर स्वीकार करने के बजाय, उसका आलोचनात्मक विश्लेषण करने की प्रेरणा देता है।

1. संक्षिप्त सारांश (Brief Summary)

यह पाठ प्रसिद्ध आलोचक, निबंधकार और विचारक डॉ. रामविलास शर्मा द्वारा रचित एक वैचारिक निबंध है। इस निबंध में लेखक ने साहित्य, समाज और परंपरा के अंतर्संबंधों का गहन विश्लेषण किया है।

  • लेखक का परिचय (Introduction of Author): डॉ. रामविलास शर्मा हिंदी साहित्य के एक प्रमुख आलोचक हैं। वे मार्क्सवादी विचारधारा से प्रभावित थे और उन्होंने साहित्य को समाज के विकास के संदर्भ में देखा। उनका मानना था कि परंपरा का ज्ञान समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है, लेकिन यह ज्ञान अंधानुकरण नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
  • घटनाओं का क्रम (Sequence of Arguments/Plot):
    • लेखक सबसे पहले यह स्पष्ट करते हैं कि परंपरा का ज्ञान उन लोगों के लिए सबसे अधिक आवश्यक है जो समाज में बदलाव लाना चाहते हैं, जो रूढ़ियों को तोड़कर एक नया समाज बनाना चाहते हैं।
    • वे बताते हैं कि साहित्य की परंपरा का ज्ञान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि वह समाज के इतिहास, उसकी संस्कृति और उसकी विचारधारा का दर्पण होता है।
    • लेखक इस बात पर जोर देते हैं कि परंपरा कोई स्थिर या जड़ वस्तु नहीं है। यह निरंतर बदलती रहती है और हर युग में इसका नए सिरे से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
    • वे वर्ग-संघर्ष के महत्व को रेखांकित करते हुए कहते हैं कि समाज में शोषण और असमानता को समाप्त किए बिना सच्ची परंपरा का निर्माण संभव नहीं है।
    • वे भारतीय समाज की बहुजातीय और बहुभाषी प्रकृति पर भी प्रकाश डालते हैं और बताते हैं कि राष्ट्रीय अस्मिता के निर्माण में विभिन्न जातियों और भाषाओं की परंपराओं का महत्वपूर्ण योगदान है।
    • अंत में, वे एक समाजवादी संस्कृति के निर्माण की बात करते हैं, जहाँ मनुष्य शोषण-मुक्त होकर अपनी रचनात्मकता का पूर्ण विकास कर सके।
  • मुख्य भाव (Main Theme or Essence): इस निबंध का मुख्य भाव यह है कि परंपरा का मूल्यांकन आवश्यक है। हमें परंपरा को आँख मूँदकर स्वीकार नहीं करना चाहिए, बल्कि उसकी अच्छाइयों को ग्रहण करना चाहिए और उसकी बुराइयों को त्याग देना चाहिए। साहित्य और समाज का गहरा संबंध है, और साहित्य के माध्यम से ही हम अपनी परंपरा को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं और उसका सही मूल्यांकन कर सकते हैं।
  • लेखक का उद्देश्य (Author’s Purpose/Objective): लेखक का उद्देश्य पाठकों को परंपरा के प्रति एक आलोचनात्मक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करना है। वे चाहते हैं कि लोग परंपरा को केवल अतीत की धरोहर न मानें, बल्कि उसे वर्तमान और भविष्य के संदर्भ में देखें और उसका सही उपयोग करें ताकि एक प्रगतिशील और समतावादी समाज का निर्माण हो सके।
  • शिक्षा (Lesson or Moral):
    • परंपरा का ज्ञान समाज के विकास के लिए अनिवार्य है।
    • परंपरा का मूल्यांकन निरंतर होना चाहिए, उसे जड़ता से नहीं देखना चाहिए।
    • साहित्य परंपरा को समझने और बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    • वर्ग-संघर्ष और सामाजिक असमानता को दूर करना एक स्वस्थ परंपरा के निर्माण के लिए आवश्यक है।
    • राष्ट्रीय अस्मिता का निर्माण विभिन्न जातियों और संस्कृतियों के समन्वय से होता है।

2. महत्वपूर्ण तत्व और विश्लेषण (Key Elements & Analysis)

  • लेखक की शैली और विचार (Author’s Style and Thought): डॉ. रामविलास शर्मा की शैली तार्किक, विश्लेषणात्मक और अकादमिक है। वे अपने विचारों को स्पष्टता और दृढ़ता से प्रस्तुत करते हैं। उनका मार्क्सवादी दृष्टिकोण इस निबंध में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है, जहाँ वे समाज, संस्कृति और साहित्य को वर्ग-संघर्ष और आर्थिक संरचना के संदर्भ में देखते हैं।
  • उल्लेखनीय संवाद/उदाहरण (Notable Statements/Examples):
    • “जो लोग साहित्य में युग परिवर्तन करना चाहते हैं, जो रूढ़ियाँ तोड़कर क्रांतिकारी साहित्य रचना चाहते हैं, उनके लिए साहित्य की परंपरा का ज्ञान सबसे अधिक आवश्यक है।” – यह कथन निबंध की केंद्रीय धारणा को स्थापित करता है कि परंपरा का ज्ञान परिवर्तन के लिए अनिवार्य है।
    • “साहित्य सापेक्ष रूप में स्वाधीन होता है।” – यह दर्शाता है कि साहित्य समाज से जुड़ा होने के बावजूद अपनी एक स्वतंत्र सत्ता रखता है और केवल सामाजिक परिस्थितियों का प्रतिबिंब मात्र नहीं होता।
    • “मनुष्य और परिस्थिति का संबंध द्वंद्वात्मक होता है।” – यह मार्क्सवादी दर्शन का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जो बताता है कि मनुष्य अपनी परिस्थितियों से प्रभावित होता है, लेकिन वह उन्हें बदलने की क्षमता भी रखता है।
    • “जाति अस्मिता और राष्ट्रीय अस्मिता का निर्माण विभिन्न जातियों के मेलजोल से होता है।” – यह भारतीय समाज की विविधता और एकता के महत्व को रेखांकित करता है।
  • लेखक की पृष्ठभूमि का प्रभाव (Influence of Author’s Background): डॉ. रामविलास शर्मा एक मार्क्सवादी आलोचक थे। उनकी आलोचना पद्धति में समाज के आर्थिक और सामाजिक यथार्थ को केंद्रीय महत्व दिया जाता है। इस निबंध में भी वे साहित्य और परंपरा को वर्ग-संघर्ष, सामाजिक विकास और राष्ट्रीय अस्मिता के संदर्भ में देखते हैं, जो उनकी विचारधारा का प्रत्यक्ष प्रमाण है। वे परंपरा को केवल सांस्कृतिक विरासत नहीं मानते, बल्कि उसे सामाजिक परिवर्तन के एक उपकरण के रूप में देखते हैं।

3. परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Exam Oriented Questions)

क. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions) – (VVI)

  1. “परंपरा का मूल्यांकन” किसकी रचना है?
    क) नलिन विलोचन शर्मा
    ख) रामविलास शर्मा
    ग) अशोक वाजपेयी
    घ) यतींद्र मिश्र
    उत्तर: ख) रामविलास शर्मा
  2. रामविलास शर्मा का जन्म कब हुआ था?
    क) 1911 ई.
    ख) 1912 ई.
    ग) 1913 ई.
    घ) 1914 ई.
    उत्तर: ख) 1912 ई.
  3. “परंपरा का मूल्यांकन” साहित्य की कौन-सी विधा है?
    क) कहानी
    ख) निबंध
    ग) उपन्यास
    घ) नाटक
    उत्तर: ख) निबंध
  4. साहित्य की परंपरा का ज्ञान किसके लिए आवश्यक है?
    क) जो लकीर के फकीर हैं
    ख) जो रूढ़ियों को तोड़कर क्रांतिकारी साहित्य रचना चाहते हैं
    ग) जो केवल मनोरंजन चाहते हैं
    घ) जो केवल अतीत में जीते हैं
    उत्तर: ख) जो रूढ़ियों को तोड़कर क्रांतिकारी साहित्य रचना चाहते हैं
  5. रामविलास शर्मा ने किस विश्वविद्यालय से एम.ए. किया?
    क) पटना विश्वविद्यालय
    ख) लखनऊ विश्वविद्यालय
    ग) दिल्ली विश्वविद्यालय
    घ) इलाहाबाद विश्वविद्यालय
    उत्तर: ख) लखनऊ विश्वविद्यालय

ख. विषयनिष्ठ प्रश्न (Subjective Questions)

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

1. लेखक के अनुसार परंपरा का ज्ञान किनके लिए सबसे ज्यादा आवश्यक है और क्यों?
उत्तर : लेखक के अनुसार, परंपरा का ज्ञान उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा आवश्यक है जो समाज में युग परिवर्तन करना चाहते हैं, जो रूढ़ियों को तोड़कर क्रांतिकारी साहित्य रचना चाहते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि परंपरा का सही ज्ञान ही उन्हें अतीत की गलतियों से सीखने और भविष्य के लिए सही दिशा निर्धारित करने में मदद करता है। बिना परंपरा को समझे, उसमें सकारात्मक बदलाव लाना संभव नहीं है।

2. साहित्य के सापेक्ष स्वाधीनता का क्या अर्थ है?
उत्तर : साहित्य की सापेक्ष स्वाधीनता का अर्थ है कि साहित्य समाज की परिस्थितियों से प्रभावित होता है, लेकिन वह केवल उनका निष्क्रिय प्रतिबिंब नहीं होता। साहित्यकार अपनी रचनात्मकता और विचारधारा से समाज को प्रभावित भी करता है। साहित्य का अपना एक आंतरिक विकास होता है, जो सामाजिक विकास से जुड़ा होने के बावजूद अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखता है। यह समाज के यथार्थ को प्रस्तुत करते हुए भी उसे बदलने की क्षमता रखता है।

3. जाति अस्मिता और राष्ट्रीय अस्मिता में लेखक क्या संबंध स्थापित करते हैं?
उत्तर : लेखक बताते हैं कि जाति अस्मिता और राष्ट्रीय अस्मिता का निर्माण विभिन्न जातियों के मेलजोल से होता है। भारत एक बहुजातीय और बहुभाषी देश है। यहाँ विभिन्न जातियों की अपनी-अपनी परंपराएँ और संस्कृतियाँ हैं। इन सभी जातियों की अस्मिताएँ मिलकर ही एक वृहत्तर राष्ट्रीय अस्मिता का निर्माण करती हैं। लेखक के अनुसार, राष्ट्रीय अस्मिता को मजबूत करने के लिए सभी जातियों की परंपराओं और संस्कृतियों का सम्मान करना आवश्यक है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

1. “परंपरा का मूल्यांकन” निबंध का प्रतिपाद्य स्पष्ट करें।
उत्तर : “परंपरा का मूल्यांकन” निबंध का प्रतिपाद्य यह है कि परंपरा को केवल अतीत की विरासत मानकर आँख मूँदकर स्वीकार नहीं करना चाहिए, बल्कि उसका आलोचनात्मक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मूल्यांकन करना चाहिए। लेखक डॉ. रामविलास शर्मा यह स्थापित करते हैं कि परंपरा कोई जड़ वस्तु नहीं है, बल्कि यह निरंतर विकासशील और परिवर्तनशील होती है। वे बताते हैं कि साहित्य की परंपरा का ज्ञान उन लोगों के लिए अत्यंत आवश्यक है जो समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन लाना चाहते हैं।
साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि वह समाज के इतिहास, उसकी संस्कृति और उसकी विचारधारा का दर्पण होता है। लेखक वर्ग-संघर्ष के महत्व को रेखांकित करते हुए कहते हैं कि शोषण-मुक्त समाज ही सच्ची परंपरा का निर्माण कर सकता है। वे भारतीय समाज की बहुजातीय प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रीय अस्मिता के निर्माण में विभिन्न जातियों की भूमिका को स्वीकार करते हैं। अंततः, निबंध का मूल संदेश यह है कि हमें परंपरा की अच्छाइयों को ग्रहण करना चाहिए और उसकी रूढ़ियों को त्यागकर एक प्रगतिशील, समतावादी और समाजवादी संस्कृति का निर्माण करना चाहिए।

मुझे उम्मीद है कि ये विस्तृत नोट्स आपको “परंपरा का मूल्यांकन” अध्याय को गहराई से समझने में मदद करेंगे और आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। खूब मन लगाकर पढ़ाई करें!

बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी गोधूली के अन्य अध्यायों के समाधान

गोधूली (गद्यखंड)

क्रमांक अध्याय
1 श्रम विभाजन एवं जातिप्रथा
2 विष के दाँत
3 भारत से हम क्या सीखें
4 नाखून क्यो बढ़ते हैं
5 नगरी लिपि
6 बहादुर
8 जित-जित मैं निरखत हूँ
9 आविन्यों
10 मछली
11 नैबतख़ाने में इबादत
12 शिक्षा और संस्कृति

गोधूली (काव्यखंड)

क्रमांक अध्याय
1 राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा
2 प्रेम-अयनि श्री राधिका
3 अति सुधो सनेह को मारग है
4 स्वदेशी
5 भारतमाता
6 जनतंत्र का जन्म
7 हिरोशिमा
8 एक वृक्ष की हत्या
9 हमारी नींद
10 अक्षर – ज्ञान
11 लौटकर आऊँगा फिर
12 मेरे बिना तुम प्रभु

वर्णिका भाग - 2

Notes क्या होते हैं और क्यों आवश्यक होते हैं?

कई छात्रों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर किसी विषय का Notes क्या होता है? चलिए इसे सरल शब्दों में समझते हैं। Notes किसी भी विषय का संक्षिप्त और आसान सारांश होते हैं — यानी ऐसे पन्ने या कॉपी जिनमें किसी अध्याय की मुख्य बातें, महत्वपूर्ण परिभाषाएँ, सूत्र, उदाहरण और अवधारणाएँ छोटे-छोटे बिंदुओं में लिखी जाती हैं। Notes की आवश्यकता यह होती है कि छात्र कम समय में पूरे विषय को दोहरा सकें और कठिन टॉपिक को आसानी से समझ सकें।

अनेक शिक्षकों के अनुसार, Notes एक ऐसा संक्षिप्त लेखन होता है जो पढ़ाई और परीक्षा दोनों के लिए सहायक होता है। अच्छे Notes की मदद से छात्रों को बार-बार पूरी किताब पढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ती क्योंकि इनमें वही बातें शामिल होती हैं जो परीक्षा की दृष्टि से सबसे ज़्यादा जरूरी होती हैं।
जब छात्र स्वयं Notes तैयार करते हैं, तो वे केवल याद नहीं कर रहे होते बल्कि विषय को गहराई से समझ रहे होते हैं। इस प्रक्रिया से ज्ञान लंबे समय तक याद रहता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

Bihar Board Class 10 का हमारे Notes कैसे तैयार किए गए हैं?

FAQ's About BSEB Class10 Ultimate Notes

उत्तर : जी हाँ, ये नोट्स पूरी तरह से बिहार बोर्ड के नवीनतम पाठ्यक्रम और परीक्षा पैटर्न को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। आप निश्चिंत रहें।
उत्तर : ये नोट्स आपकी तैयारी के लिए एक बेहतरीन सहायक सामग्री हैं। सर्वोत्तम परिणामों के लिए, आपको अपनी पाठ्यपुस्तक को पढ़ना चाहिए और इन नोट्स से रिवीजन करना चाहिए।
उत्तर : जी हाँ, हमारी वेबसाइट www.bsebsolution.in पर उपलब्ध सभी Bihar Board Class 10 Notes पूरी तरह मुफ़्त (Free PDF) हैं।
उत्तर : जी हाँ, आप इस पेज पर दिए गए डाउनलोड लिंक (जल्द ही उपलब्ध होगा) पर क्लिक करके आसानी से PDF को अपने फोन या कंप्यूटर में सेव कर सकते हैं।
उत्तर : जी हाँ, इन नोट्स में Objective Questions, Very Short, Short और Long Answer Questions सभी प्रकार के प्रश्न शामिल हैं। इससे छात्रों को परीक्षा के हर सेक्शन के लिए पूर्ण तैयारी करने में मदद मिलती है।

सारांश :

हम आशा करते हैं कि हमारे द्वारा तैयार किए गए Bihar Board 10th Hindi Godhuli Gadhykhand Ultimate Notes की यह श्रृंखला आपके अध्ययन में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।

इन Notes को अत्यंत सरल भाषा, सटीक व्याख्या, महत्वपूर्ण बिंदुओं, चित्रों, उदाहरणों और संभावित परीक्षा प्रश्नों के साथ व्यवस्थित किया गया है, ताकि हर विद्यार्थी अध्याय में दिए गए सभी टॉपिक को आसानी से समझ सके और पूर्ण आत्मविश्वास के साथ अपनी परीक्षा की तैयारी कर सके।

यदि पढ़ाई के दौरान आपके मन में किसी भी प्रकार का doubt या confusion उत्पन्न होता है, तो BSEBsolution.in पर उपलब्ध अध्यायवार समाधान, प्रश्न-उत्तर और व्याख्या आपके सभी संदेहों को दूर करने में मदद करेंगे।

इन Hindi Godhuli Notes का मुख्य उद्देश्य यही है कि Bihar Board Class 10 के हर छात्र को एक ही स्थान पर complete, free और high-quality study material उपलब्ध हो, ताकि उन्हें अलग-अलग किताबों या वेबसाइटों पर समय बर्बाद न करना पड़े। यह Notes आपकी परीक्षा की तैयारी को सरल, तेज़ और प्रभावी बनाते हैं।

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