10th Godhuli Kavykhand Ex-3 BSEB Free Notes Pdf । अति सूधो सनेह को मारग है
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अति सूधो सनेह को मारग है
इस पद में कवि घनानंद प्रेम के मार्ग को अत्यंत सीधा और सरल बताते हैं। वे कहते हैं कि प्रेम का मार्ग बहुत ही सीधा है, इस पर चलने के लिए किसी चतुराई या छल-कपट की आवश्यकता नहीं होती है। इस मार्ग पर वही चल सकता है जिसका हृदय निर्मल हो और जिसमें कोई अहंकार न हो। कवि अपने प्रिय (सुजान) से कहते हैं कि तुम कौन-सी पट्टी पढ़े हो जो मेरा मन तो ले लिया, पर बदले में कुछ भी नहीं देते। यहाँ ‘छटाँक नहीं’ का अर्थ है, थोड़ा भी नहीं।
मो अँसुवानिहि लै बरसौ
दूसरे पद में कवि विरह की वेदना को व्यक्त कर रहे हैं। वे बादलों से कहते हैं कि तुम परोपकार के लिए अपना शरीर धारण करते हो और दूसरों के लिए बरसते हो। कवि बादलों से अनुरोध करते हैं कि तुम मेरे आंसुओं को भी ले जाकर मेरे प्रिय (सुजान) के आँगन में बरसा दो, ताकि उसे मेरी विरह की पीड़ा का अहसास हो सके। यह पद विरह की मार्मिक अभिव्यक्ति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
नीचे आपको बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी गोधूली अध्याय 3 “अति सूधो सनेह को मारग है” के Free Notes PDF दिए गया है।
Bihar Board Class 10 Hindi गोधूली काव्यखंड Notes PDF Free | अति सूधो सनेह को मारग है
यह अध्याय रीतिकाल के महान कवि घनानंद द्वारा रचित है, जिसमें प्रेम की निश्छलता और विरह की मार्मिक पीड़ा का अद्भुत चित्रण है। आइए, इसे गहराई से समझते हैं!
संक्षिप्त सारांश
यह अध्याय रीतिकाल के रीतिमुक्त काव्यधारा के प्रमुख कवि घनानंद द्वारा रचित दो सवैयों का संकलन है। घनानंद प्रेम की पीर के कवि माने जाते हैं। ये सवैये उनकी प्रेमिका सुजान के प्रति उनके अनन्य प्रेम और विरह वेदना को दर्शाते हैं।
- पात्र परिचय:
- घनानंद: कवि स्वयं, जो अपनी प्रेमिका सुजान से असीम प्रेम करते हैं और उसके वियोग में अत्यंत दुखी हैं।
- सुजान: घनानंद की प्रेमिका, जिससे कवि को प्रेम में धोखा मिला है।
- बादल (परजन्य): दूसरे सवैये में कवि बादलों को संबोधित करते हुए अपने विरह संदेश को सुजान तक पहुँचाने का आग्रह करते हैं।
- घटनाओं का क्रम (काव्य प्रवाह):
- प्रथम सवैया: कवि प्रेम के मार्ग की सरलता और निश्छलता का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि प्रेम का मार्ग अत्यंत सीधा है, जहाँ चतुराई या कपट का कोई स्थान नहीं। इस मार्ग पर वही चल सकता है जो अपना अहंकार त्याग दे। वे अपनी प्रेमिका सुजान को उलाहना देते हुए कहते हैं कि तुमने कौन-सी ऐसी शिक्षा पाई है कि मेरा मन तो ले लिया, पर बदले में एक छटाँक (थोड़ा-सा) भी प्रेम नहीं दिया।
- द्वितीय सवैया: कवि बादलों को संबोधित करते हुए कहते हैं कि तुम परोपकारी हो, दूसरों के हित के लिए देह धारण करते हो और अमृत समान जल बरसाकर सबको जीवन देते हो। हे जीवनदायक बादल! तुम कभी उस निर्दयी सुजान के आँगन में मेरे आँसुओं को लेकर बरसो, ताकि उसे मेरे विरह की पीड़ा का अनुभव हो सके।
- मुख्य भाव:
इस अध्याय का मुख्य भाव शुद्ध प्रेम की निश्छलता, विरह की वेदना और प्रेम में त्याग की भावना है। कवि घनानंद ने प्रेम के सीधे और सरल मार्ग का वर्णन किया है, जहाँ छल-कपट का कोई स्थान नहीं। साथ ही, उन्होंने अपनी प्रेमिका द्वारा दिए गए धोखे से उत्पन्न अत्यंत गहरी पीड़ा और निराशा को भी व्यक्त किया है।
- लेखक का उद्देश्य:
घनानंद का उद्देश्य प्रेम की वास्तविक परिभाषा को प्रस्तुत करना है। वे बताना चाहते हैं कि सच्चा प्रेम स्वार्थरहित और सीधा होता है। साथ ही, वे अपनी विरह-व्यथा को अभिव्यक्त कर पाठकों को प्रेम की गहराई और उसकी पीड़ा से अवगत कराना चाहते हैं। वे यह भी दिखाना चाहते हैं कि प्रेम में धोखा मिलने पर भी प्रेमी का प्रेम कम नहीं होता, बल्कि वह और अधिक निश्छल हो जाता है।
- शिक्षा:
- प्रेम की निश्छलता: सच्चा प्रेम हमेशा सीधा, सरल और कपट रहित होता है। उसमें किसी प्रकार की चतुराई या स्वार्थ नहीं होता।
- त्याग और समर्पण: प्रेम के मार्ग पर चलने के लिए अहंकार का त्याग और पूर्ण समर्पण आवश्यक है।
- विरह की महत्ता: प्रेम में विरह भी एक महत्वपूर्ण अवस्था है, जो प्रेम की गहराई को और अधिक बढ़ा देती है।
- परोपकार: दूसरे सवैये में बादलों के माध्यम से परोपकार की भावना को भी दर्शाया गया है।
महत्वपूर्ण तत्व और विश्लेषण
- उल्लेखनीय संवाद/उदाहरण:
- “अति सूधो सनेह को मारग है, जहाँ नेकु सयानप बाँक नहीं।”
यह पंक्ति प्रेम के मार्ग की सबसे बड़ी विशेषता बताती है कि वह अत्यंत सीधा और सरल है, जहाँ थोड़ी-सी भी चतुराई या टेढ़ापन स्वीकार्य नहीं है। यह घनानंद के प्रेम की परिभाषा का मूल है।
- “तुम कौन धौं पाटी पढ़े हौ लला, मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं।”
यह पंक्ति कवि की गहरी पीड़ा और प्रेमिका के प्रति उलाहना को व्यक्त करती है। इसमें प्रेम में एकतरफापन और धोखे का भाव स्पष्ट झलकता है। कवि का हृदय पूरी तरह से समर्पित है, पर बदले में उसे कुछ भी नहीं मिला।
- “कबहुँ बा बिसासी सुजान के आँगन, मो अँसुवानिहिं लै बरसौ।”
यह पंक्ति कवि की विरह-वेदना की पराकाष्ठा को दर्शाती है। कवि बादलों से आग्रह करते हैं कि वे उनके आँसुओं को सुजान के आँगन में बरसाएँ, ताकि उसे कवि की पीड़ा का एहसास हो। ‘बिसासी’ (विश्वासघाती) शब्द सुजान के प्रति कवि के मन की कसक को उजागर करता है।
- “अति सूधो सनेह को मारग है, जहाँ नेकु सयानप बाँक नहीं।”
- काव्यगत विशेषताएँ:
- भाव (Mood/Emotion):
- प्रथम सवैया: प्रेम की निश्छलता का प्रतिपादन, समर्पण का भाव, प्रेमिका के प्रति उलाहना और विरह-वेदना।
- द्वितीय सवैया: तीव्र विरह-वेदना, निराशा, परोपकार की भावना (बादलों के संदर्भ में), और प्रेमिका तक संदेश पहुँचाने की आतुरता।
- शैली (Style):
घनानंद की शैली रीतिमुक्त है, जिसमें भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति प्रमुख है। उनकी भाषा ब्रजभाषा है, जो अत्यंत मधुर, प्रवाहमयी और लाक्षणिकता से परिपूर्ण है। शैली में संवादात्मकता और उलाहना का पुट है।
- छंद (Meter/Form):
यह कविता सवैया छंद में रचित है।
- प्रतीक (Symbolism):
- ‘सनेह को मारग’: शुद्ध और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक।
- ‘सयानप बाँक’: छल-कपट, चतुराई और स्वार्थ का प्रतीक।
- ‘बादल (परजन्य)’: परोपकार, जीवनदायिनी शक्ति और कवि के विरह संदेशवाहक का प्रतीक।
- ‘मो अँसुवानिहिं’: कवि की तीव्र विरह-वेदना और प्रेम की गहराई का प्रतीक।
- कवि परिचय (Author Background):
घनानंद (जन्म 1689 ई. के आस-पास, मृत्यु 1739 ई.) रीतिकाल के रीतिमुक्त काव्यधारा के प्रमुख कवि हैं। ये दिल्ली के बादशाह मुहम्मद शाह रंगीले के मीर मुंशी थे। इनकी प्रेमिका का नाम सुजान था। इनकी कविताओं में विरह-वेदना की मार्मिक अभिव्यक्ति मिलती है। इन्हें ‘प्रेम की पीर’ का कवि कहा जाता है। इनकी प्रमुख रचनाएँ: सुजान सागर, विरह लीला, रसकेलि वल्ली आदि।
- भाव (Mood/Emotion):
परीक्षा उपयोगी प्रश्न
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions – VVI)
- ‘अति सूधो सनेह को मारग है’ के कवि कौन हैं?
- (क) रसखान
- (ख) घनानंद
- (ग) प्रेमघन
- (घ) दिनकर
उत्तर: (ख) घनानंद
- घनानंद किस काव्यधारा के कवि हैं?
- (क) रीतिबद्ध
- (ख) रीतिसिद्ध
- (ग) रीतिमुक्त
- (घ) निर्गुण
उत्तर: (ग) रीतिमुक्त
- घनानंद की प्रेमिका का क्या नाम था?
- (क) रेशमा
- (ख) सुजान
- (ग) अंजना
- (घ) ललिता
उत्तर: (ख) सुजान
- ‘मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं’ – यह पंक्ति किस कविता से उद्धृत है?
- (क) स्वदेशी
- (ख) भारतमाता
- (ग) अति सूधो सनेह को मारग है
- (घ) जनतंत्र का जन्म
उत्तर: (ग) अति सूधो सनेह को मारग है
- घनानंद ने ‘परजन्य’ किसे कहा है?
- (क) सुजान को
- (ख) बादल को
- (ग) कृष्ण को
- (घ) अपनी आत्मा को
उत्तर: (ख) बादल को
विषयनिष्ठ प्रश्न (Subjective Questions – Short/Long)
- कवि प्रेम मार्ग को ‘अति सूधो’ क्यों कहता है? इस मार्ग की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर : कवि प्रेम मार्ग को ‘अति सूधो’ (अत्यंत सीधा) इसलिए कहता है क्योंकि सच्चा प्रेम छल-कपट, चतुराई और स्वार्थ से रहित होता है। इसमें किसी प्रकार का टेढ़ापन या दुराव नहीं होता। इस मार्ग की विशेषताएँ हैं:
- निश्छलता: यह मार्ग पूरी तरह से निश्छल और पवित्र होता है।
- अहंकार का त्याग: इस पर वही चल सकता है जो अपना अहंकार त्याग कर पूर्ण समर्पण भाव से आगे बढ़ता है।
- एकनिष्ठता: प्रेम मार्ग पर एक ही लक्ष्य होता है, यहाँ ‘एक’ और ‘दो’ का भेद नहीं होता, केवल एकाग्रता होती है।
- सरलता: यह मार्ग अत्यंत सरल होता है, इसमें किसी प्रकार की जटिलता या चालाकी नहीं होती।
- ‘मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं’ – इस पंक्ति के माध्यम से कवि क्या कहना चाहते हैं?
उत्तर : इस पंक्ति के माध्यम से कवि घनानंद अपनी प्रेमिका सुजान के प्रति अपनी गहरी पीड़ा और उलाहना व्यक्त करना चाहते हैं। वे कहते हैं कि हे सुजान! तुमने मेरा पूरा मन (हृदय और प्रेम) तो ले लिया है, लेकिन बदले में मुझे एक छटाँक (बहुत थोड़ा-सा) भी प्रेम या स्नेह नहीं दिया। यह पंक्ति प्रेम में एकतरफापन, विश्वासघात और कवि की निस्वार्थ प्रेम भावना के बावजूद मिली निराशा को दर्शाती है। कवि यह प्रश्न करते हैं कि सुजान ने ऐसी कौन-सी शिक्षा पाई है, जिसमें केवल लेना आता है, देना नहीं।
- घनानंद ने बादलों को किस रूप में देखा है और उनसे क्या प्रार्थना की है?
उत्तर : घनानंद ने बादलों को परोपकारी, जीवनदायक और अमृत बरसाने वाले के रूप में देखा है। वे बादलों को ‘परजन्य’ (दूसरों के लिए देह धारण करने वाला) कहते हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के धरती पर जल बरसाकर उसे हरा-भरा करते हैं और सभी प्राणियों को जीवन देते हैं।
क कवि बादलों से यह प्रार्थना करते हैं कि वे कभी उस विश्वासघाती प्रेमिका सुजान के आँगन में उनके (कवि के) आँसुओं को लेकर बरसें। कवि चाहते हैं कि बादलों के माध्यम से उनके विरह की पीड़ा और आँसुओं का संदेश सुजान तक पहुँचे, ताकि उसे भी कवि की विरह-वेदना का अनुभव हो सके और वह उनके प्रेम की गहराई को समझ पाए।
- घनानंद को ‘प्रेम की पीर’ का कवि क्यों कहा जाता है? इस पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।
उत्तर : घनानंद को ‘प्रेम की पीर’ (प्रेम की पीड़ा) का कवि इसलिए कहा जाता है क्योंकि उनकी कविताओं में प्रेम की गहरी और मार्मिक वेदना की अभिव्यक्ति प्रमुखता से मिलती है। वे प्रेम के वियोग पक्ष के श्रेष्ठ कवि माने जाते हैं।
इस पाठ में भी यह स्पष्ट होता है:
- एकतरफा प्रेम की पीड़ा: प्रथम सवैये में वे सुजान को उलाहना देते हैं कि उसने उनका मन तो ले लिया, पर बदले में कुछ नहीं दिया (“मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं”)। यह उनके एकतरफा प्रेम की पीड़ा को दर्शाता है।
- विरह की मार्मिकता: दूसरे सवैये में वे बादलों से अपने आँसुओं को सुजान के आँगन में बरसाने की प्रार्थना करते हैं (“मो अँसुवानिहिं लै बरसौ”)। यह उनकी विरह-वेदना की पराकाष्ठा है, जहाँ वे प्रकृति को अपना दूत बनाकर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हैं।
- निश्छल प्रेम: उनका प्रेम स्वार्थरहित और निश्छल है (“अति सूधो सनेह को मारग है”), और इसी निश्छलता के कारण उन्हें मिली पीड़ा और भी गहरी हो जाती है।
इन सभी कारणों से, घनानंद की कविताएँ प्रेम की गहरी अनुभूति, विशेषकर वियोगजन्य पीड़ा को अत्यंत संवेदनशीलता से व्यक्त करती हैं, इसीलिए उन्हें ‘प्रेम की पीर’ का कवि कहा जाता है।
बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी गोधूली के अन्य अध्यायों के समाधान
गोधूली (काव्यखंड)
| क्रमांक | अध्याय |
|---|---|
| 1 | राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा |
| 2 | प्रेम-अयनि श्री राधिका |
| 4 | स्वदेशी |
| 5 | भारतमाता |
| 6 | जनतंत्र का जन्म |
| 7 | हिरोशिमा |
| 8 | एक वृक्ष की हत्या |
| 9 | हमारी नींद |
| 10 | अक्षर – ज्ञान |
| 11 | लौटकर आऊँगा फिर |
| 12 | मेरे बिना तुम प्रभु |
गोधूली (गद्यखंड)
| क्रमांक | अध्याय |
|---|---|
| 1 | श्रम विभाजन एवं जातिप्रथा |
| 2 | विष के दाँत |
| 3 | भारत से हम क्या सीखें |
| 4 | नाखून क्यो बढ़ते हैं |
| 5 | नगरी लिपि |
| 6 | बहादुर |
| 7 | परंपरा का मूल्यांकन |
| 8 | जित-जित मैं निरखत हूँ |
| 9 | आविन्यों |
| 10 | मछली |
| 12 | शिक्षा और संस्कृति |
| क्रमांक | अध्याय |
|---|---|
| 1 | राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा |
| 2 | प्रेम-अयनि श्री राधिका |
| 3 | अति सुधो सनेह को मारग है |
| 4 | स्वदेशी |
| 5 | भारतमाता |
| 6 | जनतंत्र का जन्म |
| 7 | हिरोशिमा |
| 8 | एक वृक्ष की हत्या |
| 9 | हमारी नींद |
| 10 | अक्षर – ज्ञान |
| 11 | लौटकर आऊँगा फिर |
| 12 | मेरे बिना तुम प्रभु |
वर्णिका भाग - 2
| क्रमांक | अध्याय |
|---|---|
| 1 | दही वाले मगम्मा |
| 2 | ढहते विश्वास |
| 3 | माँ |
| 4 | नगर |
| 5 | धरती कब तक घूमेगी |
Notes क्या होते हैं और क्यों आवश्यक होते हैं?
कई छात्रों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर किसी विषय का Notes क्या होता है? चलिए इसे सरल शब्दों में समझते हैं।
Notes किसी भी विषय का संक्षिप्त और आसान सारांश होते हैं — यानी ऐसे पन्ने या कॉपी जिनमें किसी अध्याय की मुख्य बातें, महत्वपूर्ण परिभाषाएँ, सूत्र, उदाहरण और अवधारणाएँ छोटे-छोटे बिंदुओं में लिखी जाती हैं। Notes की आवश्यकता यह होती है कि छात्र कम समय में पूरे विषय को दोहरा सकें और कठिन टॉपिक को आसानी से समझ सकें।
अनेक शिक्षकों के अनुसार, Notes एक ऐसा संक्षिप्त लेखन होता है जो पढ़ाई और परीक्षा दोनों के लिए सहायक होता है। अच्छे Notes की मदद से छात्रों को बार-बार पूरी किताब पढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ती क्योंकि इनमें वही बातें शामिल होती हैं जो परीक्षा की दृष्टि से सबसे ज़्यादा जरूरी होती हैं।
जब छात्र स्वयं Notes तैयार करते हैं, तो वे केवल याद नहीं कर रहे होते बल्कि विषय को गहराई से समझ रहे होते हैं। इस प्रक्रिया से ज्ञान लंबे समय तक याद रहता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
Bihar Board Class 10 का हमारे Notes कैसे तैयार किए गए हैं?
- हमारे द्वारा तैयार किए गए सभी विषयों के नोट्स Bihar Board मैट्रिक के नवीनतम सिलेबस पर आधारित है।
- सभी विषयों के प्रत्येक अध्याय के Notes को सरल, स्पष्ट एवं आसान भाषा में तैयार किया गया है।
- सभी Concepts को Example के साथ समझाया गया है जिससे सभी छात्र आसानी से समझ पाए।
- प्रत्येक अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर (VVI Questions) और वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी शामिल किए गए हैं।
- विषयवस्तु को स्पष्ट चित्रों और उदाहरण के साथ भी समझाया गया गया है।
FAQ's About BSEB Class10 Ultimate Notes
1: क्या ये नोट्स BSEB के नए सिलेबस 2025-26 पर आधारित हैं?
2: क्या केवल इन नोट्स को पढ़कर अच्छे अंक लाए जा सकते हैं?
3: क्या ये सभी नोट्स फ्री (Free) में उपलब्ध हैं?
4: मैं इन नोट्स का PDF कैसे डाउनलोड कर सकता हूँ?
5: क्या इन नोट्स में Objective और Subjective दोनों प्रकार के प्रश्न शामिल हैं?
सारांश :
हम आशा करते हैं कि हमारे द्वारा तैयार किए गए Bihar Board 10th Hindi Godhuli Kavykhand Ultimate Notes pdf की यह श्रृंखला आपके अध्ययन में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।
इन Notes को अत्यंत सरल भाषा, सटीक व्याख्या, महत्वपूर्ण बिंदुओं, चित्रों, उदाहरणों और संभावित परीक्षा प्रश्नों के साथ व्यवस्थित किया गया है, ताकि हर विद्यार्थी अध्याय में दिए गए सभी टॉपिक को आसानी से समझ सके और पूर्ण आत्मविश्वास के साथ अपनी परीक्षा की तैयारी कर सके।
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