BSEB 10th History Exercise 4 Solution in Hindi

BSEB 10th History Exercise 4 Solution in Hindi : भारत में राष्ट्रवाद के समाधान का Download करने वाला pdf | अभी करें!

हम बिहार बोर्ड कक्षा 10 इतिहास के अध्याय 4 “भारत में राष्ट्रवाद” के समाधान को वस्तुनिष्ठ प्रश्नों (Objective Questions) और विषयनिष्ठ प्रश्नों (Subjective Questions) के साथ आसान, स्पष्ट और बिहार बोर्ड के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित लेकर आए हैं। यदि आप सभी छात्रों को किसी भी प्रश्न या किसी भी concept को लेकर संदेह है तो उनका सबका उत्तर नीचे दिया गया है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Q1: गदर पार्टी की स्थापना किसने और कब की ?
[क] गुरदयाल सिंह, 1916
[ख] चन्द्रशेखर आजाद, 1920
[ग] लाला हरदयाल, 1913
[घ] सोहन सिंह भाखना, 1918
Q2: जालियाँवाला बाग हत्याकांड किस तिथि को हुआ ?
[क] 13 अप्रैल 1919 ई०
[ख] 14 अप्रैल 1919 ई०
[ग] 15 अप्रैल 1919 ई०
[घ] 16 अप्रैल 1919 ई०
Q3: लखनऊ समझौता किस वर्ष हुआ ?
[क] 1916
[ख] 1918
[ग] 1920
[घ] 1922
Q4: असहयोग आन्दोलन का प्रस्ताव कांग्रेस के किस अधिवेशन में पारित हुआ ?
[क] सितम्बर 1920, कलकत्ता
[ख] अक्टूबर 1920, अहमदाबाद
[ग] नवम्बर 1920, फैजपुर
[घ] दिसम्बर 1920, नागपुर
Q5: भारत में खिलाफत आंदोलन कब और किस देश के शासन के समर्थन में शुरू हुआ?
[क] 1920 तुर्की
[ख] 1920 अरब
[ग] 1920 फ्रांस
[घ] 1920 जर्मनी
Q6: सविनय अवज्ञा आंदोलन कब और किस यात्रा से शुरू हुआ ?
[क] 1920 भुज
[ख] 1930 अहमदाबाद
[ग] 1930 दांडी
[घ] 1930 एल्बा
Q7: पूर्ण स्वराज्य की माँग का प्रस्ताव कांग्रेस के किस अधिवेशन में पारित हुआ?
[क] 1929 लाहौर
[ख] 1931 कराँची
[ग] 1933 कलकत्ता
[घ] 1937 बेलगाँव
Q8: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना कब और किसने की ?
[क] 1923, गुरु गोलवलकर
[ख] 1925, के० बी० हेडगेवार
[ग] 1926, चितरंजन दास
[घ] 1928, लालचंद
Q9: बल्लभ भाई पटेल को सरदार की उपाधि किस किसान आंदोलन के दौरान दी गई ?
[क] बारदोली
[ख] अहमदाबाद
[ग] खेड़ा
[घ] चंपारण
Q10: रम्पा विद्रोह कब हुआ ?
[क] 1916
[ख] 1917
[ग] 1918
[घ] 1919

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें :

1. बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट ने होमरूल लीग आन्दोलन को शुरू किया ।
2. महात्मा गाँधी भारत में खिलाफत आन्दोलन के नेता थे ।
3. 25 फरवरी 1922 को असहयोग आन्दोलन स्थगित हो गया ।
4. साइमन कमीशन के अध्यक्ष सर जॉन थे ।
5. 1857 में भू-राजस्व कर के विरोध में आन्दोलन आरंभ हुआ ।
6. भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के पहले अध्यक्ष डबल्यू सी बनर्जी थे।
7. 11 अप्रैल 1936 को अखिल भारतीय किसान सभा का गठन लखनऊ हुआ ।
8. उड़िसा में 1914 में खोंड विद्रोह हुआ ।

BSEB 10th History Exercise 4 Solution in Hindi : भारत में राष्ट्रवाद : Very Short Question Answer

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (20 शब्दों में उत्तर दें)

Q1: खिलाफत आन्दोलन क्यों हुआ ?
उत्तर : प्रथम विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन द्वारा तुर्की के सुल्तान, जिन्हें दुनिया भर के मुसलमान अपना खलीफा (धर्मगुरु) मानते थे, के साथ किए गए अपमानजनक व्यवहार और उनके अधिकारों को छीनने के विरोध में खिलाफत आन्दोलन शुरू हुआ।
Q2: रॉलेट एक्ट से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर : रॉलेट एक्ट 1919 में ब्रिटिश सरकार द्वारा पारित एक दमनकारी कानून था, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में उभर रहे राष्ट्रवादी आंदोलनों को कुचलना था। इस कानून के तहत सरकार को यह अधिकार मिल गया था कि वह किसी भी भारतीय को बिना किसी मुकदमे के दो साल तक जेल में बंद रख सकती थी। इसे ‘काला कानून’ भी कहा गया ।
Q3: दांडी यात्रा का क्या उद्देश्य था ?
उत्तर : दांडी यात्रा का मुख्य उद्देश्य समुद्र के पानी से नमक बनाकर नमक कानून का उल्लंघन करना था ताकि ब्रिटिश सरकार के एकाधिकार को चुनौती दी जा सके। इस यात्रा के माध्यम से गांधीजी पूरे देश में सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत करना चाहते थे और भारतीयों को ब्रिटिश दमनकारी नीतियों के विरुद्ध एकजुट करना चाहते थे। इसका अंतिम लक्ष्य नमक पर लगे अनुचित कर को समाप्त कर जनता को जागरूक बनाना और पूर्ण स्वराज की दिशा में कदम बढ़ाना था।
Q4: गाँधी–इरविन पैक्ट अथवा दिल्ली समझौता क्या था ?
उत्तर : सविनय अवज्ञा आंदोलन के विस्तार को देखते हुए 5 मार्च 1931 को गांधीजी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच एक समझौता हुआ, जिसे गाँधी–इरविन पैक्ट या ‘दिल्ली समझौता’ कहा जाता है। इसके अंतर्गत गांधीजी ने आंदोलन स्थगित कर द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना स्वीकार किया और सरकार ने हिंसा के आरोपियों को छोड़कर शेष सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करने का वचन दिया।
Q5: चम्पारण सत्याग्रह का संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर : चम्पारण सत्याग्रह 1917 में महात्मा गांधी द्वारा बिहार के चम्पारण जिले में शुरू किया गया भारत का पहला सत्याग्रह आंदोलन था। यह आंदोलन नील की खेती करने वाले किसानों पर थोपी गई दमनकारी तिनकठिया प्रणाली के विरोध में चलाया गया था, जिसके अंतर्गत किसानों को अपनी भूमि के 3/20 भाग पर नील उगाना अनिवार्य था। गांधीजी के सफल हस्तक्षेप के कारण ब्रिटिश सरकार को इस व्यवस्था को समाप्त करना पड़ा और किसानों को शोषण से मुक्ति मिली।
Q6: मेरठ षड्यंत्र से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर : मेरठ षड्यंत्र मार्च 1929 में ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में बढ़ते साम्यवादी प्रभाव और श्रमिक आंदोलनों को दबाने के लिए चलाया गया एक दमनकारी मुकदमा था। इसके तहत 31 प्रमुख श्रमिक नेताओं को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें मुजफ्फर अहमद और एस.ए. डांगे जैसे नेता शामिल थे। इस घटना ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान वामपंथी विचारधारा और मजदूर वर्ग की एकता को और अधिक मजबूती प्रदान की।
Q7: जतरा भगत के बारे में आप क्या जानते हैं, संक्षेप में लिखें।
उत्तर : जतरा भगत बिहार (वर्तमान झारखंड) के छोटा नागपुर क्षेत्र के उरांव आदिवासियों के एक महान नेता थे, जिन्होंने 1914 में ताना भगत आंदोलन का सूत्रपात किया था। उन्होंने आदिवासियों के बीच मांस-मदिरा के त्याग और धार्मिक सुधारों पर बल दिया तथा ब्रिटिश सरकार के शोषण एवं जमींदारों के अन्याय के विरुद्ध अहिंसक संघर्ष का मार्ग अपनाया। कालांतर में उनके अनुयायी महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन और असहयोग आंदोलन का मुख्य हिस्सा बने।
Q8: ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना क्यों हुई ?
उत्तर : ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की स्थापना 1920 में मुख्य रूप से भारतीय श्रमिकों को संगठित करने और उनके हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से की गई थी। इसका मुख्य कारण मिल मालिकों द्वारा मजदूरों का शोषण रोकना, उन्हें उचित कार्यदशाएँ एवं मजदूरी दिलाना और श्रमिक आंदोलनों को राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम से जोड़कर एक मजबूत मंच प्रदान करना था ताकि मजदूरों की आवाज को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जा सके।
सुमेलित करें
मिलन करने वाले प्रश्नों में उसका सही उत्तर उस प्रश्न के सामने ही दिया गया है।
समूह ‘अ’ समूह ‘ब’
1. गाँधीवादी चरण (ख) 1919-1947
2. चौरी-चौरा हत्याकांड (क) 5 फ़रवरी 1922
3. कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष (च) व्योमेशचंद्र बनर्जी
4. बंगाल विभाजन वापस (ङ) 1911
5. हिन्द महासभा (ग) 1915
6. मोपला विद्रोह (घ) केरल

लघु उत्तरीय प्रश्न (60 शब्दों में उत्तर दें)

Q1: असहयोग आन्दोलन प्रथम जन आंदोलन था, कैसे ?
उत्तर : असहयोग आंदोलन को प्रथम जन आंदोलन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें पहली बार समाज के सभी वर्गों जैसे किसानों, मजदूरों, छात्रों और शहरी मध्य वर्ग ने राष्ट्रव्यापी स्तर पर भाग लिया था। इससे पहले के आंदोलन कुछ खास क्षेत्रों या वर्गों तक ही सीमित थे, लेकिन गांधीजी के नेतृत्व में इस आंदोलन ने आम जनता को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सीधे तौर पर एकजुट कर दिया, जिससे भारतीय राजनीति में पहली बार व्यापक जन-भागीदारी सुनिश्चित हुई।
Q2: सविनय अवज्ञा आंदोलन के क्या परिणाम हुए ?
उत्तर : सविनय अवज्ञा आंदोलन के परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार को यह अहसास हो गया कि वे भारतीयों के सहयोग के बिना लंबे समय तक शासन नहीं कर सकते, जिससे गांधी-इरविन समझौते का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस आंदोलन ने भारतीय जनता में राष्ट्रीयता की भावना को अत्यधिक सुदृढ़ किया और पहली बार महिलाओं ने बड़ी संख्या में सक्रिय रूप से भाग लिया। इसके साथ ही, विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार से भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिला और भारत के स्वतंत्रता संग्राम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली।
Q3: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना किन परिस्थितियों में हुई ?
उत्तर : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को सेवानिवृत्त ब्रिटिश अधिकारी ए.ओ. ह्यूम के प्रयासों से हुई थी। उस समय भारत में बढ़ते राष्ट्रवाद, आर्थिक शोषण और अंग्रेजों के प्रति बढ़ते जन-असंतोष को एक सुरक्षित और संवैधानिक मंच प्रदान करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसका प्राथमिक उद्देश्य भारतीय नेताओं को एकजुट कर ब्रिटिश शासन के समक्ष अपनी माँगें शांतिपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करना और राष्ट्र निर्माण की दिशा में काम करना था।
Q4: बिहार के किसान आंदोलन पर एक टिप्पणी लिखें ?
उत्तर : बिहार में किसान आंदोलन का उदय मुख्य रूप से जमींदारों के अत्याचारों और भारी लगान के विरुद्ध हुआ था, जिसमें स्वामी सहजानंद सरस्वती की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने 1929 में बिहार प्रादेशिक किसान सभा का गठन किया, जिसने किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया और संगठित होकर संघर्ष करने की शक्ति प्रदान की। इससे पूर्व महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुए चंपारण सत्याग्रह ने भी बिहार के किसानों में आत्मविश्वास भरकर उन्हें राष्ट्रीय आंदोलन की मुख्यधारा से जोड़ दिया था।
Q5: स्वराज पार्टी की स्थापना एवं उद्देश्य की विवेचना करें ।
उत्तर : स्वराज पार्टी की स्थापना 1 जनवरी 1923 को चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य असहयोग आंदोलन की समाप्ति के बाद विधायी परिषदों में प्रवेश करना, ब्रिटिश सरकार की नीतियों का विरोध कर सरकारी कामकाज में बाधा डालना और संवैधानिक तरीकों से भारत के लिए स्वराज्य की मांग को पुरजोर तरीके से उठाकर सरकार पर दबाव बनाना था।

दीर्घउत्तरीय प्रश्न (150 शब्दों में उत्तर दें)

Q1: प्रथम विश्व युद्ध का भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के साथ अंतर्संबंधों की विवेचना करें।
उत्तर : प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) ने भारत की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति में युगांतकारी परिवर्तन किए, जिसने राष्ट्रीय आंदोलन को एक नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की। इसके प्रमुख अंतर्संबंधों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

1. आर्थिक कठिनाइयाँ और जन-असंतोष : युद्ध के कारण ब्रिटिश सरकार के रक्षा व्यय में भारी वृद्धि हुई। इसकी भरपाई के लिए भारत में आयकर लगाया गया और सीमा शुल्क बढ़ा दिया गया। युद्ध के वर्षों के दौरान वस्तुओं की कीमतें दोगुनी हो गईं, जिससे आम जनता और किसानों में ब्रिटिश शासन के प्रति गहरा आक्रोश पैदा हुआ।

2. जबरन सैन्य भर्ती : युद्ध के लिए ब्रिटिश सेना में भर्ती हेतु गाँवों से युवकों को जबरन ले जाया गया। इसने ग्रामीण क्षेत्रों में अंग्रेजों के खिलाफ तीव्र घृणा पैदा की। जब ये सैनिक विदेशों से युद्ध लड़कर लौटे, तो उन्होंने वहाँ की लोकतांत्रिक व्यवस्था और स्वतंत्रता के विचारों को भारतीय जनमानस तक पहुँचाया।

3. होमरूल लीग आंदोलन का उदय : युद्ध के दौरान बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट द्वारा ‘होमरूल लीग’ आंदोलन चलाया गया। इस आंदोलन ने भारतीयों को संगठित किया और उन्हें स्वशासन के महत्व से परिचित कराया, जिससे राष्ट्रीय आंदोलन को एक ठोस आधार मिला।

4. हिंदू-मुस्लिम एकता (लखनऊ समझौता 1916) : युद्ध की परिस्थितियों ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग को एक-दूसरे के करीब ला दिया। 1916 के लखनऊ समझौते ने भारतीय राजनीति में अभूतपूर्व एकता पैदा की, जिसने ब्रिटिश सत्ता की चूड़ें हिला दीं।

5. खिलाफत आंदोलन और तुर्की का प्रभाव : युद्ध में तुर्की की हार और वहाँ के खलीफा के साथ किए गए दुर्व्यवहार ने भारतीय मुसलमानों को आक्रोशित कर दिया। इसके परिणामस्वरूप खिलाफत आंदोलन शुरू हुआ, जिसे महात्मा गांधी ने हिंदू-मुस्लिम एकता के एक स्वर्णिम अवसर के रूप में देखा।

6. रॉलेट एक्ट और जलियाँवाला बाग हत्याकांड : युद्ध समाप्ति के बाद भारतीयों को सुधारों की उम्मीद थी, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी रॉलेट एक्ट (1919) पारित किया। इसके विरोध में हुए प्रदर्शनों और जलियाँवाला बाग नरसंहार ने भारतीयों के मन से अंग्रेजों के प्रति बचा-कुचा सम्मान भी समाप्त कर दिया।
Q2: असहयोग आंदोलन के कारण एवं परिणाम का वर्णन करें।
उत्तर :महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1920 में प्रारंभ किया गया असहयोग आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का पहला व्यापक जन-आंदोलन था। इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश शासन के साथ सहयोग न करके शांतिपूर्ण ढंग से स्वराज प्राप्त करना था। इस आंदोलन के प्रमुख कारणों और परिणामों का विवरण निम्नलिखित है:

1. आंदोलन के प्रमुख कारण

रौलट एक्ट (1919) : ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों की स्वतंत्रता को कुचलने के लिए यह काला कानून बनाया, जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए जेल में डाला जा सकता था।
जलियांवाला बाग हत्याकांड : 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में निहत्थे लोगों पर जनरल डायर द्वारा की गई क्रूर गोलीबारी ने पूरे देश में आक्रोश भर दिया।
खिलाफत का मुद्दा : प्रथम विश्वयुद्ध के बाद तुर्की के खलीफा के साथ हुए अन्यायपूर्ण व्यवहार के कारण भारतीय मुसलमानों में असंतोष था। गांधीजी ने इसे हिंदू-मुस्लिम एकता के अवसर के रूप में देखा और असहयोग का समर्थन किया।
प्रथम विश्वयुद्ध का प्रभाव : युद्ध के कारण देश में महंगाई, करों का बोझ और बेरोजगारी बढ़ गई थी, जिससे किसान और मजदूर वर्ग काफी दुखी थे।

2. आंदोलन के प्रमुख परिणाम

राष्ट्रीय चेतना का उदय : इस आंदोलन ने पहली बार भारतीय राष्ट्रवाद को जन-जन तक पहुँचाया। यह आंदोलन केवल शिक्षित वर्ग तक सीमित न रहकर गाँवों, किसानों और मजदूरों तक फैल गया।
हिंदू-मुस्लिम एकता : खिलाफत के मुद्दे को असहयोग से जोड़ने के कारण दोनों समुदायों ने पहली बार बड़े पैमाने पर एकजुट होकर संघर्ष किया।
स्वदेशी को प्रोत्साहन : विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई और खादी एवं चरखे का प्रचार बढ़ा। इससे भारतीय कुटीर उद्योगों को मजबूती मिली और विदेशी व्यापार को भारी नुकसान हुआ।
निर्भयता की भावना : भारतीयों के मन से ब्रिटिश सत्ता, जेल और लाठी का डर निकल गया। जनता में ‘स्वराज’ के प्रति गहरा आत्मविश्वास पैदा हुआ।
Q3: सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कारणों की विवेचना करें।
उत्तर : सविनय अवज्ञा आन्दोलन (1930-34) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक महत्वपूर्ण घटना थी। इसके उदय के प्रमुख कारणों का विवरण निम्नलिखित है:

1. साइमन कमीशन का विरोध : 1928 में ब्रिटिश सरकार ने भारत के संवैधानिक सुधारों की समीक्षा के लिए साइमन कमीशन भेजा। इसमें एक भी भारतीय सदस्य नहीं था, जिससे भारतीयों में गहरा असंतोष व्याप्त हो गया और पूरे देश में ‘साइमन वापस जाओ’ के नारे गूँजने लगे।

2. नेहरू रिपोर्ट की अस्वीकृति : कांग्रेस ने 1928 में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में एक संविधान का प्रारूप तैयार किया जिसे नेह़रु रिपोर्ट कहा गया। ब्रिटिश सरकार ने इस रिपोर्ट की मांगों को मानने से इनकार कर दिया, जिससे आंदोलन का मार्ग प्रशस्त हुआ।

3. 1929-30 की विश्वव्यापी आर्थिक मंदी : 1929 की आर्थिक मंदी के कारण भारत के कृषि उत्पादों की कीमतें गिर गईं और किसानों की स्थिति दयनीय हो गई। भारी लगान और करों के कारण जनता में ब्रिटिश शासन के प्रति तीव्र आक्रोश था।

4. पूर्ण स्वराज्य की माँग : 1929 के लाहौर अधिवेशन में पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस ने ‘पूर्ण स्वराज्य’ का प्रस्ताव पारित किया। 26 जनवरी 1930 को पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया, जिससे जनता में नया उत्साह भर गया।

5. गांधीजी की 11 सूत्री मांगें और इरविन का रुख : महात्मा गांधी ने वायसराय लॉर्ड इरविन के सामने 11 सूत्री मांगें रखी थीं, जिनमें नमक कर को समाप्त करना प्रमुख था। जब इरविन ने इन मांगों को अनसुना कर दिया, तब गांधीजी ने आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया।

इन्हीं परिस्थितियों के परिणामस्वरूप 12 मार्च 1930 को गांधीजी ने अपनी ऐतिहासिक दांडी यात्रा शुरू की और 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़कर आधिकारिक रूप से सविनय अवज्ञा आन्दोलन का आगाज़ किया।
Q4: भारत में मजदूर आंदोलन के विकास का वर्णन करें।
उत्तर : भारत में मजदूर आंदोलन का उदय औद्योगिकीकरण और ब्रिटिश शोषणकारी नीतियों के विरोध के रूप में हुआ। इसका विकास निम्नलिखित चरणों में समझा जा सकता है:

प्रारंभिक चरण और कारखाना अधिनियम : भारत में आधुनिक उद्योगों की स्थापना के साथ ही मजदूरों का शोषण शुरू हो गया था। शुरुआत में सोराबजी शापुरजी और एन. एम. लोखंडे जैसे समाज सुधारकों ने आवाज उठाई। इसके परिणामस्वरूप 1881 का प्रथम कारखाना अधिनियम पारित हुआ, जिसने बच्चों के काम के घंटों को सीमित किया।

प्रथम विश्वयुद्ध का प्रभाव : प्रथम विश्वयुद्ध (1914-18) के दौरान वस्तुओं की कीमतें बढ़ गईं लेकिन मजदूरों की मजदूरी नहीं बढ़ी। इससे मजदूरों में गहरा असंतोष पैदा हुआ और देश के विभिन्न हिस्सों में हड़तालें शुरू हो गईं। इसी दौरान 1917 की रूसी क्रांति ने भी भारतीय मजदूरों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने की प्रेरणा दी।

AITUC की स्थापना (1920) : भारतीय मजदूर आंदोलन के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 31 अक्टूबर 1920 को आया, जब ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की स्थापना हुई। लाला लाजपत राय इसके प्रथम अध्यक्ष बने। इसने मजदूरों को एक संगठित मंच प्रदान किया और उन्हें राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ा।

कानूनी मान्यता और ट्रेड यूनियन अधिनियम (1926) : बढ़ते आंदोलनों को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने 1926 का ट्रेड यूनियन अधिनियम पारित किया। इस कानून ने मजदूर संघों को कानूनी मान्यता दी और उन्हें पंजीकरण कराने की सुविधा प्रदान की, जिससे वे संगठित होकर अपनी मांगें रख सकें।

वामपंथी विचारधारा का प्रभाव : 1920 के दशक के अंत तक भारतीय मजदूर आंदोलन पर साम्यवादी (Communist) विचारधारा का प्रभाव बढ़ गया। मेरठ षड्यंत्र केस और पब्लिक सेफ्टी बिल जैसे दमनकारी कानूनों के बावजूद मजदूरों ने ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ और बाद में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में सक्रिय भागीदारी की।

भारत का मजदूर आंदोलन केवल आर्थिक सुधारों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया। इसने न केवल श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार किया, बल्कि ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ एक मजबूत जनाधार भी तैयार किया।
Q5: भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में गाँधीजी के योगदान की विवेचना करें।
उत्तर : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में महात्मा गाँधी का आगमन एक युगांतरकारी घटना थी। उन्होंने भारतीय राजनीति को एक नई दिशा दी और ‘सत्य’ तथा ‘अहिंसा’ के शस्त्रों से ब्रिटिश साम्राज्य का मुकाबला किया। उनके योगदान को निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत समझा जा सकता है:

प्रारंभिक सत्याग्रह का सफल नेतृत्व : गाँधीजी ने भारत लौटने के बाद सबसे पहले 1917 में बिहार के चंपारण में नील की खेती करने वाले किसानों के पक्ष में सफल सत्याग्रह किया। इसके बाद खेड़ा और अहमदाबाद के मजदूर आंदोलनों ने उन्हें एक जननेता के रूप में स्थापित कर दिया।

असहयोग आन्दोलन (1920-22) : जलियाँवाला बाग हत्याकांड के विरोध में गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन शुरू किया। इसमें उन्होंने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, सरकारी उपाधियों का त्याग और स्वदेशी अपनाने पर जोर दिया। इस आंदोलन ने पहली बार भारतीय जनता को निडर होकर सड़कों पर उतरना सिखाया।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन (1930) : ब्रिटिश सरकार के नमक कानून को चुनौती देने के लिए गाँधीजी ने प्रसिद्ध दांडी यात्रा की। उन्होंने समुद्र तट पर नमक बनाकर कानून तोड़ा और पूरे देश को सविनय अवज्ञा (कानूनों को विनम्रतापूर्वक न मानना) के लिए प्रेरित किया।

भारत छोड़ो आन्दोलन (1942) : क्रिप्स मिशन की विफलता के बाद गाँधीजी ने अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर करने के लिए अपना अंतिम बड़ा आन्दोलन शुरू किया। उन्होंने देशवासियों को ‘करो या मरो’ का प्रसिद्ध नारा दिया, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी।

सामाजिक और रचनात्मक कार्य : गाँधीजी का योगदान केवल राजनीति तक सीमित नहीं था। उन्होंने छुआछूत (अस्पृश्यता) उन्मूलन, साम्प्रदायिक सद्भाव, महिलाओं का उत्थान और खादी व चरखा के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता का संदेश दिया।
Q6: भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में वामपंथियों की भूमिका को रेखांकित करें।
उत्तर : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में वामपंथियों (Leftists) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। 1917 की रूसी क्रांति के प्रभाव और 1920 के दशक में भारत में बढ़ते औद्योगिक शोषण के विरुद्ध वामपंथी विचारधारा का उदय हुआ। इनके योगदान को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना : 1925 में कानपुर में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की स्थापना हुई। एम.एन. रॉय, मुजफ्फर अहमद और एस.ए. डांगे जैसे नेताओं ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ एक वैज्ञानिक और क्रांतिकारी विचारधारा प्रदान की, जिसने राष्ट्रीय आंदोलन को एक नई दिशा दी।

मजदूर और किसान आंदोलनों का नेतृत्व : वामपंथियों ने समाज के निचले तबके, विशेषकर मजदूरों और किसानों को संगठित किया। उन्होंने ‘अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ (AITUC) और ‘अखिल भारतीय किसान सभा’ के माध्यम से उनके अधिकारों की आवाज उठाई। इससे स्वतंत्रता आंदोलन का आधार व्यापक हुआ और यह केवल मध्यम वर्ग तक सीमित न रहकर जन-आंदोलन बन गया।

कांग्रेस के भीतर वामपंथी प्रभाव : कांग्रेस के अंदर भी वामपंथी विचारधारा का प्रभाव बढ़ा। जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे युवा नेता वामपंथ से प्रभावित थे। उनके दबाव के कारण ही 1929 के लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने ‘पूर्ण स्वराज’ का लक्ष्य निर्धारित किया और आर्थिक व सामाजिक सुधारों को अपने एजेंडे में शामिल किया।

साम्राज्यवाद और शोषण का विरोध : वामपंथियों का मानना था कि राजनीतिक आजादी तब तक अधूरी है जब तक आर्थिक आजादी न मिले। उन्होंने अंग्रेजों के साथ-साथ देशी जमींदारों और पूंजीपतियों द्वारा किए जा रहे शोषण का भी पुरजोर विरोध किया। मेरठ षड्यंत्र केस और कानपुर षड्यंत्र केस जैसे मुकदमों के माध्यम से ब्रिटिश सरकार ने उन्हें दबाने की कोशिश की, लेकिन इससे उनकी लोकप्रियता और बढ़ी।

क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रियता : वामपंथी विचारधारा ने कई क्रांतिकारियों को प्रभावित किया। उदाहरण के लिए, भगत सिंह और उनके साथियों ने ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (HSRA) के माध्यम से समाजवाद को अपना लक्ष्य बनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल गोरे साहबों को हटाना नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन है।
वामपंथियों ने न केवल देश की आजादी की मांग की, बल्कि एक ऐसे समाज की कल्पना की जहाँ किसानों और मजदूरों का शोषण न हो। उनकी सक्रियता ने राष्ट्रीय आंदोलन को अधिक उग्र, व्यापक और समावेशी बना दिया।

BSEB 10th History Exercise 4 Solution in Hindi : PDF कैसे Download करें।

नीचे आप सभी को बिहार बोर्ड कक्षा 10 के इतिहास के अध्याय 4 भारत में राष्ट्रवाद के सभी प्रश्नों का PDF link दिया जा रहा है। जिसे आप सभी छात्र बिल्कुल मुफ्त में Download कर सकते हैं।
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क्रमांक अध्याय
1 यूरोप में राष्ट्रवाद
2 समाजवाद एवं साम्यवाद
3 हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आन्दोलन
5 अर्थव्यवस्था और आजीविका
6 शहरीकरण एवं शहरी जीवन
7 व्यापार और भूमंडलीकरण
8 प्रेस-संस्कृति एवं राष्ट्रवाद
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