BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-1 Solution

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BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-1 Solution "श्रम विभाजन एवं जाति प्रथा"

इस पोस्ट में हम बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक “गोधूली” के प्रथम अध्याय “श्रम विभाजन एवं जाति प्रथा” के कहानी का सारांश, कवि परिचय, सभी प्रश्नों के समाधान, महत्त्वपूर्ण एवं संभावित प्रश्न और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों ( Objective Questions) को विस्तार से देखने वाले हैं।
हमारा प्रयास आपको परीक्षा की तैयारी करवाना है ताकि आप अपने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें। इस अध्याय के सभी प्रश्नोत्तरों एवं व्याख्याओं का PDF भी आप निशुल्क डाउनलोड (Download) कर सकते हैं। PDF लिंक नीचे उपलब्ध है, जिससे आप इसे ऑफलाइन भी पढ़ सकते हैं।

"श्रम विभाजन एवं जाति प्रथा" की मुख्य बातें

यहाँ प्रस्तुत पाठ बाबा साहेब के विख्यात भाषण ‘एनीहिलेशन ऑफ कास्ट’ के ललई सिंह यादव द्वारा किए गए हिंदी रूपांतर ‘जाति-भेद का उच्छेद’ से किंचित संपादन के साथ लिया गया है। यह भाषण ‘जाति-पाँति तोड़क मंडल’ (लाहौर) के वार्षिक सम्मेलन (सन् 1936) के अध्यक्षीय भाषण के रूप में तैयार किया गया था, परंतु इसकी क्रांतिकारी दृष्टि से आयोजकों की पूर्णतः सहमति न बन सकने के कारण सम्मेलन स्थगित हो गया और यह पढ़ा न जा सका। बाद में बाबा साहेब ने इसे स्वतंत्र पुस्तिका का रूप दिया। प्रस्तुत आलेख में वे भारतीय समाज में श्रम विभाजन के नाम पर मध्ययुगीन अवशिष्ट संस्कारों के रूप में बरकरार जाति प्रथा पर मानवीयता, नैसर्गिक न्याय एवं सामाजिक सद्भाव की दृष्टि से विचार करते हैं। जाति प्रथा के विषमतापूर्वक सामाजिक आधारों, रूढ़ पूर्वग्रहों और लोकतंत्र के लिए उसकी अस्वास्थ्यकर प्रकृति पर भी यहाँ एक संभ्रांत विधिवेत्ता का दृष्टिकोण उभर सका है। भारतीय लोकतंत्र के भावी नागरिकों के लिए यह आलेख अत्यंत शिक्षाप्रद है ।

इस विषय का हमारा समाधान ही क्यों?

  • हमारा समाधान बिहार बोर्ड कक्षा 10 के न्यूनतम पाठ्यक्रम (Syllabus) पर आधारित है।
  • यह समाधान सरल, आसान और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
  • हिंदी गोधूली के अभ्यास (Exercise) समाधान के साथ अनेक महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी दिए गए हैं।
  • हमारी वेबसाइट पर हिंदी के साथ-साथ अन्य विषयों के समाधान भी उपलब्ध हैं।
  • यहाँ आपको निःशुल्क उच्च गुणवत्ता वाले PDF मिलेंगे।

भीमराव अंबेडकर का संक्षिप्त परिचय

अध्याय – 1 श्रम विभाजन एवं जाती प्रथा
पूरा नाम भीमराव अंबेडकर
जन्म 14 अप्रैल 1891 ई०
जन्म स्थान महू, मध्यप्रदेश
मृत्यु 6 दिसंबर 1956 ई०, दिल्ली
शिक्षा न्यूयॉर्क (अमेरिका) एवं लंदन (इंग्लैंड) में उच्च शिक्षा
प्रेरणा स्रोत बुद्ध, कबीर, ज्योतिबा फुले
भूमिका भारतीय संविधान निर्माता, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, समाज सुधारक, शिक्षाविद्
प्रमुख रचनाएँ द कास्ट्स इन इंडिया, द अनटचेबल्स, हू आर शूद्राज, बुद्धा एण्ड हिज धम्मा, एनीहिलेशन ऑफ कास्ट आदि
रचनात्मक विशेषता सामाजिक समानता, जाति प्रथा का उच्छेद, लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना
सम्मान भारतीय संविधान का निर्माता, मानव अधिकारों के महान योद्धा

बोध और अभ्यास प्रश्न

पाठ के साथ

Q1: लेखक किस विडंबना की बात करते हैं ? विडंबना का स्वरूप क्या है ?
उत्तर : लेखक भीमराव अंबेडकर आधुनिक युग में भी “जातिवाद” के पोषकों की कमी नहीं है जिसे विडंबना कहते हैं।
विडंबना का स्वरूप यह है कि आधुनिक सभ्य समाज “कार्य-कुशलता” के लिए श्रम विभाजन को आवश्यक मानता है। चूंकि जाति प्रथा भी श्रम विभाजन का ही दूसरा रूप है इसलिए इसमें कोई बुराई नहीं है।
Q2: जातिवाद के पोषक उसके पक्ष में क्या तर्क देते हैं ?
उत्तर : जातिवाद के पोषक ‘जातिवाद’ के पक्ष में अपनी बात रखते हुए उसकी उपयोगिता सिद्ध करना चाहते हैं। वे निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत करते हैं –
1. जातिवादियों का कहना है कि आधुनिक सभ्य समाज “कार्यकुशलता” के लिए श्रम-विभाजन को आवश्यक मानता है। चूँकि जाति-प्रथा भी श्रम-विभाजन का ही दूसरा रूप है, इसलिए इसमें कोई बुराई नहीं है।
2. उनका मानना है कि माता-पिता के सामाजिक स्तर के अनुसार, अर्थात् गर्भधारण के समय से ही मनुष्य का पेशा निश्चित कर दिया जाता है।
3. हिन्दू धर्म पेशा-परिवर्तन की अनुमति नहीं देता। यदि कोई पेशा अनुपयुक्त या अपर्याप्त भी हो, या उससे भूखों मरने की स्थिति ही क्यों न उत्पन्न हो, फिर भी उसी को अपनाना आवश्यक है।
4. जातिवादियों का तर्क है कि परंपरागत पेशे में व्यक्ति दक्ष हो जाता है और वह अपना कार्य सफलतापूर्वक संपन्न करता है।
5. जातिवाद के समर्थक कहते हैं कि इससे व्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित अवश्य होती है, परंतु सामाजिक व्यवस्था बनी रहती है और अराजकता नहीं फैलती।
Q3: जातिवाद के पक्ष में दिए गए तर्कों पर लेखक की प्रमुख आपत्तियाँ क्या हैं ?
उत्तर : ‘जातिवाद’ के पक्ष में प्रस्तुत तर्कों पर लेखक ने कई गंभीर आपत्तियाँ की हैं, जो निम्नलिखित हैं –
1. लेखक के अनुसार जाति-प्रथा अनेक दोषों से युक्त है।
2. जाति-प्रथा का श्रम-विभाजन मनुष्य की स्वेच्छा पर आधारित न होकर जबरन थोपा गया है।
3. इसमें मनुष्य की व्यक्तिगत रुचि, योग्यता और इच्छा का कोई महत्व नहीं रहता।
4. आर्थिक दृष्टि से भी जाति-प्रथा अत्यंत हानिकारक सिद्ध होती है।
5. यह मनुष्य की स्वाभाविक प्रेरणा, रुचि और आत्मशक्ति को दबा देती है तथा अस्वाभाविक नियमों में बाँधकर उसे निष्क्रिय बना देती है।
Q4: जाति भारतीय समाज में श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप क्यों नहीं कही जा सकती ?
उत्तर : भारतीय समाज में जाति को श्रम-विभाजन का स्वाभाविक रूप नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह वास्तविक श्रम-विभाजन नहीं बल्कि श्रमिकों का बंधन है। इसमें किसी व्यक्ति की रुचि या योग्यता का सम्मान नहीं होता। श्रमिकों के बच्चों को भी अनिवार्य रूप से अपने परंपरागत कार्य को ही करना पड़ता है, चाहे उनकी इच्छा हो या न हो। इस प्रकार का जबरन श्रम-विभाजन आधुनिक समाज के लिए स्वाभाविक नहीं है।
Q5: जातिप्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण कैसे बनी हुई है ?
उत्तर : जाति प्रथा मनुष्य को जन्म से ही एक निश्चित पेशे में बाँध देती है। भले ही वह पेशा अनुपयुक्त या अपर्याप्त क्यों न हो, व्यक्ति को जीवनभर उसी को करना पड़ता है। यदि वह पेशा उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति न कर पाए, तो भी उसे बदलने की अनुमति नहीं मिलती।
आधुनिक युग में उद्योग-धंधों की तकनीक और प्रक्रिया में निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं, जिनके अनुसार लोगों को नए-नए पेशे अपनाने पड़ते हैं। लेकिन जाति प्रथा इस लचीलेपन की अनुमति नहीं देती। परिणामस्वरूप, अनेक व्यक्ति अपनी योग्यता और दक्षता होते हुए भी उपयुक्त रोजगार प्राप्त नहीं कर पाते। इस प्रकार, पेशा परिवर्तन की स्वतंत्रता न देकर जाति प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण बनी हुई है।
Q6: लेखक आज के उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या किसे मानते हैं और क्यों ?
उत्तर : लेखक आज के उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या जाति प्रथा को मानते हैं। जाति प्रथा के कारण व्यक्ति को अपने मनचाहे पेशे को चुनने की स्वतंत्रता नहीं मिलती। इसमें न तो मनुष्य की व्यक्तिगत भावना का स्थान है और न ही उसकी व्यक्तिगत रुचि का महत्व। मजबूरी में जहाँ काम करने वालों का न दिल लगता है और न ही दिमाग, वहाँ किसी प्रकार की कुशलता या उत्कृष्टता की आशा नहीं की जा सकती। इसलिए यह निर्विवाद रूप से सिद्ध होता है कि आर्थिक दृष्टि से भी जाति प्रथा अत्यंत हानिकारक है।
Q7: लेखक ने पाठ में किन प्रमुख पहलुओं से जाति प्रथा को एक हानिकारक प्रथा के रूप में दिखाया है ?
उत्तर : लेखक ने पाठ में अनेक पहलुओं से जाति प्रथा को एक हानिकारक प्रथा के रूप में प्रस्तुत किया है–
1. जाति प्रथा के कारण श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन हो गया है।
2. इसमें आपस में ऊँच-नीच की भावना विद्यमान रहती है।
3. व्यक्ति को अनिच्छा से पुश्तैनी पेशा अपनाना पड़ता है।
4. इसके कारण मनुष्य अपनी पूरी क्षमता और योग्यता का उपयोग नहीं कर पाता।
5. जाति प्रथा आर्थिक विकास और प्रगति में भी बाधा उत्पन्न करती है।
Q8: सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए लेखक ने किन विशेषताओं को आवश्यक माना है ?
उत्तर : डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुसार सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए निम्नलिखित विशेषताएँ आवश्यक हैं –
1. समाज में स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व की भावना का विकास होना चाहिए।
2. समाज में इतनी गतिशीलता बनी रहनी चाहिए कि कोई भी वांछित परिवर्तन एक छोर से दूसरे छोर तक संचालित हो सके।
3. समाज में बहुविध हितों में सबकी भागीदारी होनी चाहिए और सब उनकी रक्षा के प्रति सजग रहें।
4. सामाजिक जीवन में अबाध संपर्क के अनेक साधन और अवसर उपलब्ध होने चाहिए।
5. लोगों के बीच भाईचारा दूध-पानी के मिश्रण की तरह घुला-मिला होना चाहिए।
6. लोकतंत्र केवल शासन की पद्धति नहीं, बल्कि सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है।
7. इसमें अपने साथियों के प्रति श्रद्धा और सम्मान भाव होना आवश्यक है।

भाषा की बात

1. पाठ से संयुक्त, सरल एवं मिश्र वाक्य चुनें ।
उत्तर: संयुक्त वाक्य : ऐसे वाक्य जिनमें दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य हों और वे संयोजक (और, किन्तु, अथवा, क्योंकि, इसलिए आदि) से जुड़े हों।
1. जाति प्रथा पेशे का दोषपूर्ण पूर्वनिर्धारण ही नहीं करती बल्कि मनुष्य को जीवनभर के लिए एक पेशे में बाँध भी देती है।
2. भले ही पेशा अनुपयुक्त या अपर्याप्त होने के कारण वह भूखों मर जाए, किन्तु उसे पैतृक पेशा ही अपनाना पड़ता है।
3. लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति ही नहीं है, बल्कि सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति भी है।

सरल वाक्य : ऐसे वाक्य जिनमें केवल एक ही स्वतंत्र उपवाक्य हो।
1. जाति प्रथा श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन करती है।
2. आधुनिक युग में उद्योग-धंधों की प्रक्रिया व तकनीक में निरंतर विकास होता है।
3. सामाजिक जीवन में अबाध संपर्क के अनेक साधन व अवसर उपलब्ध रहने चाहिए।
4. आदर्श समाज स्वतंत्रता, समता और भ्रातृत्व पर आधारित होना चाहिए।

सरल वाक्य : ऐसे वाक्य जिनमें केवल एक ही स्वतंत्र उपवाक्य हो।
1. जाति प्रथा श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन करती है।
2. आधुनिक युग में उद्योग-धंधों की प्रक्रिया व तकनीक में निरंतर विकास होता है।
3. सामाजिक जीवन में अबाध संपर्क के अनेक साधन व अवसर उपलब्ध रहने चाहिए।
4. आदर्श समाज स्वतंत्रता, समता और भ्रातृत्व पर आधारित होना चाहिए।

2. निम्नलिखित के विलोम शब्द लिखें
सभ्य, विभाजन, निश्चय, ऊँच, स्वतंत्रता, दोष, सजग, रक्षा, पूर्वनिर्धारण
उत्तर: सभ्य : असभ्य
विभाजन : संयोजन / एकता
निश्चय : अनिश्चय
ऊँच : नीच
स्वतंत्रता : परतंत्रता / दासता
दोष : गुण
सजग : असावधान / लापरवाह
रक्षा : आक्रमण / भंग
पूर्वनिर्धारण : अनिर्धारण / आकस्मिकता

3. पाठ से विशेषण चुनें तथा उनका स्वतंत्र वाक्य प्रयोग करें ।
उत्तर: आधुनिक : यह एक आधुनिक विचारधारा है।
सभ्य : सभ्य समाज में सबको समान अधिकार मिलना चाहिए।
अस्वाभाविक : अस्वाभाविक स्थिति से समाज में अव्यवस्था फैलती है।
दूषित : दूषित वातावरण से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
अनुपयुक्त : अनुपयुक्त कार्य करने से सफलता नहीं मिलती।
अपर्याप्त : अपर्याप्त भोजन से शरीर कमजोर हो जाता है।
निर्विवाद : यह निर्विवाद सत्य है कि शिक्षा से जीवन बदलता है।
आदर्श : आदर्श समाज में सभी को समान अवसर मिलते हैं।
गतिशील : गतिशील समाज में प्रगति की संभावना अधिक होती है।
सामूहिक : सामूहिक प्रयास से कठिन कार्य भी सरल हो जाता है।

4. निम्नलिखित के पर्यायवाची शब्द लिखें
दूषित, श्रमिक, पेशा, अकस्मात, अनुमति, अवसर, परिवर्तन, सम्मान
उत्तर: दूषित : अशुद्ध, गंदा, अपवित्र
श्रमिक : मजदूर, कामगार, कर्मी
पेशा : व्यवसाय, धंधा, आजीविका
अकस्मात : अचानक, सहसा, अप्रत्याशित
अनुमति : आज्ञा, स्वीकृति, इजाज़त
अवसर : मौका, समय, संभावना
परिवर्तन : बदलाव, रूपांतरण, संशोधन
सम्मान : आदर, प्रतिष्ठा, मान

10th हिंदी गोधूली के अन्य अध्यायों के Solution भी देखें।

क्रमांक अध्याय
2 विष के दाँत
3 भारत से हम क्या सीखें
4 नाखून क्यो बढ़ते हैं
5 नगरी लिपि
6 बहादुर
7 परंपरा का मूल्यांकन
8 जित-जित मैं निरखत हूँ
9 आविन्यों
10 मछली
11 नैबतख़ाने में इबादत
12 शिक्षा और संस्कृति

शब्द निधि

विडंबना : उपहास
पोषक : समर्थक, पालक, पालनेवाला
पूर्वनिर्धारण : पहले ही तय कर देना
अकस्मात : अचानक
प्रक्रिया : किसी काम के होने का ढंग या रीति
प्रतिकूल : विपरीत, उल्टा
स्वेच्छा : अपनी इच्छा
उत्पीड़न : बहुत गहरी पीड़ा पहुँचाना, यंत्रणा देना
संचारित : प्रवाहित
बहुविध : अनेक प्रकार से
प्रत्यक्ष : सामने, समक्ष
भ्रातृत्व : भाईचारा, बंधुत्व
वांछित : इच्छित, चाहा हुआ

भीमराव अंबेडकर का संक्षिप्त परिचय :

डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर (1891–1956) एक महान समाज सुधारक, विधिवेत्ता, शिक्षाविद् और भारतीय संविधान के निर्माता थे। उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 ई० को महू (मध्यप्रदेश) में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने सामाजिक भेदभाव सहा, लेकिन कठिनाइयों को पार करते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अमेरिका और इंग्लैंड से कानून और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की।
अंबेडकर जी ने दलितों, महिलाओं और श्रमिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और उन्हें समाज में समानता दिलाने का प्रयास किया। उन्होंने जाति प्रथा का विरोध किया और बौद्ध धर्म को अपनाया। उनकी प्रमुख रचनाओं में जाति-भेद का उच्छेद, शूद्र कौन थे, बुद्ध और उनका धम्म आदि शामिल हैं।
6 दिसंबर 1956 को उनका निधन हो गया। डॉ. अंबेडकर को आज भी भारतीय लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के महानायक के रूप में याद किया जाता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

नीचे इस अध्याय से संबंधित कुल 40 वस्तुनिष्ठ प्रश्न दिए गए हैं। ये प्रश्न अध्याय के गहन अध्ययन के आधार पर तैयार किए गए हैं तथा इनमें से कई प्रश्न पिछले वर्षों की बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा से भी लिए गए हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास करने से आपको परीक्षा की तैयारी में काफी मदद मिलेगी और यह समझने में आसानी होगी कि परीक्षा में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
1. भारत में जाति-प्रथा का मुख्य कारण क्या है?
(A) बेरोजगारी
(B) गरीबी
(C) उद्योग धंधों की कमी
(D) अमीरी

2. ‘मानव मुक्ति के पुरोधा’ किसे कहा गया है?
(A) नलिन विलोचन शर्मा
(B) यतीन्द्र मिश्र
(C) भीमराव अंबेदकर
(D) अमरकांत

3. जाति-प्रथा स्वाभाविक विभाजन नहीं है, क्यों?
(A) भेदभाव के कारण
(B) शोषण के कारण
(C) गरीबी के कारण
(D) रुचि पर आधारित नहीं होने के कारण

4. बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर का जन्म किस राज्य में हुआ था?
(A) मध्य प्रदेश
(B) बिहार
(C) उत्तर प्रदेश
(D) बंगाल

5. “श्रम-विभाजन और जाति प्रथा” के लेखक कौन हैं?
(A) भीमराव अंबेदकर
(B) राम विलास शर्मा
(C) गुणाकर मुले
(D) हजारी प्रसाद द्विवेदी

6. बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर का जन्म कब हुआ था?
(A) 14 अप्रैल 1891 ई० में
(B) 20 अप्रैल 1892 ई० में
(C) 24 अप्रैल 1893 ई० में
(D) 28 अप्रैल 1894 ई० में

7. ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ गद्य की कौन-सी विधा है?
(A) कहानी
(B) नाटक
(C) निबंध
(D) आत्मकथा

8. भीमराव अंबेदकर के विख्यात भाषण ‘एनीहिलेशन ऑफ कास्ट’ का हिन्दी रूपांतरण किसने किया?
(A) ददई सिंह यादव
(B) ललई सिंह यादव
(C) रूप्पक सिंह यादव
(D) ललन सिंह यादव

9. ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ बाबा साहेब के किस भाषण का संपादित अंश है?
(A) द कास्ट्स इन इंडिया : देयर मैकेनिज्म
(B) जेनेसिस एंड डेवलपमेंट
(C) एनीहिलेशन ऑफ कास्ट
(D) हू आर शूद्राज

10. भीमराव अंबेदकर के मुख्यतः प्रेरक व्यक्ति रहे हैं
(A) बुद्ध
(B) कवीर
(C) ज्योतिवा फुले
(D) उपर्युक्त सभी

11. ‘आदर्श समाज स्वतंत्रता, समानता, भ्रातृत्व पर आधारित होगा’ किसने कहा?
(A) मैक्समूलर
(B) भीमराव अंबेदकर
(C) बिरजू महाराज
(D) अज्ञेय

12. आधुनिक सभ्य समाज श्रम विभाजन को आवश्यक क्यों मानता है?
(A) कार्य-कुशलता के लिए
(B) भाईचारे के लिए
(C) रूढ़िवादिता के लिए
(D) इनमें से कोई नहीं

13. भारत में बेरोजगारी का मुख्य कारण है-
(A) जाति प्रथा
(B) दहेज प्रथा
(C) अशिक्षा
(D) भ्रष्टाचार

14. ‘बुद्धा एण्ड हिज धम्मा’ के लेखक कौन हैं?
(A) नलिन विलोचन शर्मा
(B) गुणाकार मुले
(C) भीमराव अंबेदकर
(D) बिरजू महाराज

15. ‘हू आर शूद्राज’ किसकी रचना है?
(A) महात्मा गांधी
(B) यतीन्द्र मिश्र
(C) भीमराव अंबेदकर
(D) मैक्समूलर

16. भाई चारे का दूसरा नाम है-
(A) राजतंत्र
(B) लोकतंत्र
(C) श्रम
(D) सहयोग

17. अंबेदकर ने किनको मानवीय अधिकार व सम्मान दिलाने के लिए अधिक संघर्ष किया?
(A) अछूतों
(B) स्त्रियों
(C) मजदूरों
(D) उपर्युक्त सभी को

18. किनके प्रोत्साहन पर अंबेदकर उच्चतर शिक्षा के लिए न्यूयार्क गए?
(A) बड़ौदा नरेश
(B) ग्वालियर नरेश
(C) जयपुर नरेश
(D) महात्मा गांधी

19. ‘द कास्ट इन इण्डिया’ किसके द्वारा लिखा गया है?
(A) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(B) भीमराव अम्बेदकर
(C) अमरकांत
(D) मैक्समूलर

20. भारत सरकार के कल्याण मंत्रालय से ‘बाबा साहब अंबेदकर संपूर्ण वाङ्मय’ कितने खंडों में प्रकाशित हो चुका है?
(A) 15
(B) 20
(C) 21
(D) 25

21. ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ भाषण लाहौर के किस वार्षिक सम्मेलन के लिए तैयार किया गया था?
(A) 1936
(B) 1937
(C) 1938
(D) 1940

22. इस युग में भी ‘जातिवाद’ के पोषकों की कमी नहीं है। लेखक के अनुसार यह कैसी बात है?
(A) सम्मान की बात है
(B) विडंबना की बात है
(C) आदर्श बात है
(D) गौरव की बात है

23. बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर का निधन हुआ-
(A) 1950
(B) 1952
(C) 1956
(D) 1960

24. ‘देयर मैकेनिज्म’ किनकी कृति है?
(A) यतीन्द्र मिश्र
(B) रामविलास शर्मा
(C) महात्मा गांधी
(D) भीमराव अम्बेदकर

25. ‘विडंबना’ का अर्थ है-
(A) समर्थक
(B) पालक
(C) उपहास
(D) अचानक

26. समाज और राजनीति में बेहद सक्रिय भूमिका निभाते हुए अंबेदकर ने किनको मानवीय एवं अधिकार दिलाने के लिए अनेक प्रयास किये?
(A) अछूतों
(B) स्त्रियों
(C) मजदूरों
(D) उपर्युक्त सभी

27. संविधान निर्माता अंबेदकर के अनुसार आदर्श समाज किस पर आधारित होना चाहिए?
(A) स्वतंत्रता
(B) समता
(C) भ्रातृत्व
(D) उपर्युक्त सभी पर

28. भीमराव अंबेदकर किस विडंबना की बात करते हैं?
(A) इस युग में भी जातिवाद के पोषकों की कमी नहीं है
(B) जातिप्रथा श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप है
(C) जातिप्रथा बेरोजगारी का एक प्रमुख कारण है
(D) इनमें से कोई नहीं

29. अंबेदकर के अनुसार भाईचारे का वास्तविक रूप है-
(A) शहद की तरह
(B) दूध-पानी के मिश्रण की तरह
(C) शक्कर और पानी के मिश्रण की तरह
(D) इनमें से कोई नहीं

30. लेखक भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख व प्रत्यक्ष कारण किसे मानते हैं?
(A) कार्य-अकुशलता
(B) जातिप्रथा
(C) उद्योग धंधों की कमी
(D) प्रतिकूल परिस्थितियाँ

31. जाति प्रथा को श्रम विभाजन मान लिया जाए तो यह स्वाभाविक विभाजन नहीं है, क्योंकि यह मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं है। यह कथन किस पाठ का है?
(A) शिक्षा और संस्कृति
(B) श्रम विभाजन और जातिप्रथा
(C) मछली
(D) नौबतखाने में इवादत

32. जाति प्रथा पेशे का दोषपूर्ण पूर्व निर्धारण ही नहीं करती बल्कि मनुष्य को जीवनभर के लिए एक पेशे में बाँध भी देती है। प्रस्तुत गद्यांश के रचनाकार हैं-
(A) राजेन्द्र प्रसाद
(B) नलिन विलोचन शर्मा
(C) भीमराव अंबेदकर
(D) महात्मा गांधी

33. यह विडंबना की बात है कि इस युग में भी ‘जातिवाद’ के पोषकों की कमी नहीं है। यह कथन किस पाठ का है?
(A) विष के दाँत
(B) श्रम विभाजन और जाति प्रथा
(C) भारत से हमने क्या सीखा
(D) नाखून क्यों बढ़ते हैं

34. जाति प्रथा का श्रम विभाजन मनुष्य की स्वेच्छा पर निर्भर नहीं रहता। मनुष्य की व्यक्तिगत भावना तथा व्यक्तिगत रुचि का इसमें कोई स्थान अथवा महत्त्व नहीं रहता। प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से उद्धृत है?
(A) जित, जित मैं निरखत हूँ
(B) आविन्यों
(C) श्रम विभाजन और जातिप्रथा
(D) मछली

35. अंबेदकर का जन्म किस परिवार में हुआ था?
(A) ब्राह्मण
(B) क्षत्रिय
(C) दलित
(D) कायस्थ

36. अंबेदकर ने किसे “भारतीय समाज का अभिशाप” कहा है?
(A) अशिक्षा
(B) जाति प्रथा
(C) गरीबी
(D) भ्रष्टाचार

37. जाति प्रथा के कारण समाज में किसका अभाव हो जाता है?
(A) शिक्षा
(B) भ्रातृत्व और समानता
(C) उद्योग-धंधे
(D) भाषा और संस्कृति

38. अंबेदकर के अनुसार आदर्श समाज का आधार क्या होना चाहिए?
(A) संपत्ति और वैभव
(B) स्वतंत्रता, समता और भ्रातृत्व
(C) जाति और धर्म
(D) परंपरा और संस्कृति

39. ‘जाति प्रथा’ किस प्रकार की व्यवस्था है?
(A) व्यक्ति की रुचि पर आधारित व्यवस्था
(B) दोषपूर्ण और अन्यायपूर्ण व्यवस्था
(C) प्राकृतिक व्यवस्था
(D) स्वतंत्रता-आधारित व्यवस्था

40. अंबेदकर किसे समाज और राजनीति की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा मानते थे?
(A) विदेशी शासन
(B) अशिक्षा
(C) जातिवाद
(D) गरीबी

[Note] : यदि आप उपयुक्त वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का उत्तर जानना चाहते हैं, तो हमारे WhatsApp Channel या Telegram से अवश्य जुड़े।

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निष्कर्ष :

ऊपर आपने बिहार बोर्ड कक्षा 10 की हिन्दी पुस्तक “गोधूली भाग 2” के गद्यखंड के पहले अध्याय “श्रम विभाजन एवं जाति प्रथा” की व्याख्या, बोध-अभ्यास, महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को पढ़ा। हमें उम्मीद है कि यह सामग्री आपके अध्ययन को और सरल व प्रभावी बनाएगी। यदि किसी प्रश्न या समाधान को लेकर आपके मन में कोई शंका हो, तो आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं या सीधे हमसे संपर्क करें। हम आपकी मदद करने की पूरी कोशिश करेंगे। संपर्क करें
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