BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-2 Solution

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BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-2 Solution "विष के दाँत" and Objectives

इस पोस्ट में हम बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक “गोधूली” के दूसरे अध्याय “विष के दाँत” के कहानी का सारांश, कवि परिचय, सभी प्रश्नों के समाधान, महत्त्वपूर्ण एवं संभावित प्रश्न और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों ( Objective Questions) को विस्तार से देखने वाले हैं।
हमारा प्रयास आपको परीक्षा की तैयारी करवाना है ताकि आप अपने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें। इस अध्याय के सभी प्रश्नोत्तरों एवं व्याख्याओं का PDF भी आप निशुल्क डाउनलोड (Download) कर सकते हैं। PDF लिंक नीचे उपलब्ध है, जिससे आप इसे ऑफलाइन भी पढ़ सकते हैं।

"विष के दाँत" की मुख्य बातें

यहाँ प्रस्तुत कहानी नलिन विलोचन शर्मा द्वारा लिखित है, जिसमें मध्यवर्गीय जीवन के अंतर्विरोध और सामाजिक भेदभाव को उजागर किया गया है। यह कहानी सेन साहब के बेटे खोखा, एक अमीर लड़के, और गिरधर लाल के बेटे मदन, एक साधारण मध्यवर्गीय लड़के, के बीच के टकराव पर केंद्रित है। कहानी में दिखाया गया है कि कैसे खोखा अपनी अमीरी और ताकत के घमंड में मदन पर रौब जमाता है, लेकिन मदन उसका डटकर सामना करता है। दोनों के बीच लड़ाई में मदन खोखा के दो दाँत तोड़ देता है। घटना के बाद मदन डर के मारे घर नहीं जाता, लेकिन रात में लौटने पर उसके पिता गिरधर लाल, जो अपनी नौकरी और सम्मान के कारण अक्सर अन्याय भी सहते रहते थे, पहली बार बेटे का साहस देखकर गर्व महसूस करते हैं। कहानी का संदेश यह है कि सामाजिक विषमता और अन्याय तब तक चलता रहता है जब तक हम उसका डटकर विरोध नहीं करते। ‘विष के दाँत’ शीर्षक अमीरों के अन्याय, अहंकार एवं सामाजिक ‘विष’ के प्रतीक रूप में प्रयुक्त हुआ है, जिसे तोड़कर ही एक नई सामाजिक चेतना का जन्म संभव है

इस विषय का हमारा समाधान ही क्यों?

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  • यह समाधान सरल, आसान और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
  • हिंदी गोधूली के अभ्यास (Exercise) समाधान के साथ अनेक महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी दिए गए हैं।
  • हमारी वेबसाइट पर हिंदी के साथ-साथ अन्य विषयों के समाधान भी उपलब्ध हैं।
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भीमराव अंबेडकर का संक्षिप्त परिचय

अध्याय – 2 विष के दाँत
पूरा नाम नलिन विलोचन शर्मा
जन्म 18 फरवरी 1916 ई०
जन्म स्थान बदरघाट, पटना
मृत्यु 12 सितंबर 1961 ई०
माता-पिता पं० रामावतार शर्मा (पिता), रत्नावती शर्मा (माता)
शिक्षा पटना विश्वविद्यालय से संस्कृत और हिंदी में एम० ए०
पेशा प्राध्यापक, साहित्यकार, आलोचक
प्रमुख पद 1959 से मृत्युपर्यंत पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष
प्रमुख रचनाएँ दृष्टिकोण, साहित्य का इतिहास दर्शन, मानदंड, हिंदी उपन्यास विशेषतः प्रेमचंद, साहित्य तत्त्व और आलोचना, विष के दाँत, नकेन के प्रपद्य, नकेन दो आदि
रचनात्मक विशेषता प्रपद्यवाद के प्रवर्तक, प्रयोगवाद के समर्थक, आधुनिक आलोचना शैली, मनोवैज्ञानिक कहानियाँ
सम्मान/योगदान हिंदी साहित्य में प्रयोगवाद और प्रपद्यवाद की नींव रखी, आलोचना भाषा में नवीनता

बोध और अभ्यास प्रश्न

पाठ के साथ

Q1: कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर : प्रस्तुत कहानी में लेखक ने अमीरों की तथाकथित मर्यादा पर तीखा व्यंग्य किया है। इसमें गरीबों पर अमीरों के शोषण एवं अत्याचार का चित्रण किया गया है। ‘विष के दाँत’ शीर्षक कहानी महल और झोपड़ी की लड़ाई का प्रतीक है। इस लड़ाई में महल की जीत भी वास्तव में हार सिद्ध होती है। मदन द्वारा पिटे जाने पर खोखा के जो दो दाँत टूट जाते हैं, वे अमीरों की प्रदर्शनप्रियता और गरीबों पर उनके अत्याचार का प्रतीक हैं। मदन का विद्रोह अमीरों की अन्यायपूर्ण प्रवृत्ति के विरुद्ध चेतावनी है, जो समाज में जागरण का संदेश देता है। इस प्रकार ‘विष के दाँत’ शीर्षक अत्यंत सार्थक है। अमीरों के विष के दाँत तोड़कर मदन ने जिस साहस और उत्साह का परिचय दिया है, वह समाज के अन्य अनेक गिरधर लालों के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बनता है।
Q2: सेन साहब के परिवार में बच्चों के पालन-पोषण में किए जा रहे लिंग आधारित भेद-भाव का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए ।
उत्तर : सेन साहब के परिवार में पाँच बेटियाँ थीं—सीमा, रजनी, आलो, शेफाली और आरती। सबसे छोटा बेटा काशू बाबू था, जिसे सब प्यार से खोखा कहते थे। परिवार में बेटियों पर अनुशासन के कठोर नियम लागू थे, जबकि बेटे पर अनुशासन का बंधन बहुत ढीला था। चूँकि खोखा का जन्म बहुत बाद में हुआ था, इसलिए परिवार के सभी सदस्य उस पर अत्यधिक स्नेह लुटाते थे। इस प्रकार बेटियों और बेटे के पालन-पोषण में लिंग आधारित भेदभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
Q3: खोखा किन मामलों में अपवाद था ?
उत्तर : खोखा सेन साहब का सबसे छोटा बेटा था और बुढ़ापे की आँखों का तारा माना जाता था। उसका जन्म तब हुआ जब उसकी उम्मीद ही नहीं रह गई थी, इसलिए उसे परिवार में विशेष छूट मिली हुई थी। घर के अनुशासन और नियम-कायदे जहाँ बेटियों पर लागू होते थे, वहीं खोखा के लिए वे बदल जाते थे। यहाँ तक कि मोटर-संबंधी सख्त नियमों का भी उल्लंघन वह कर सकता था। इस प्रकार खोखा परिवार में हर दृष्टि से एक अपवाद था।
Q4: सेन दंपती खोखा में कैसी संभावनाएँ देखते थे और उन संभावनाओं के लिए उन्होंने उसकी कैसी शिक्षा तय की थी ?
उत्तर : सेन दंपती खोखा में अपने पिता की तरह इंजीनियर बनने की संभावना देखते थे। इसी कारण उन्होंने उसकी शिक्षा की विशेष योजना बनाई थी। उन्होंने कारखाने से एक बढ़ई-मिस्त्री को बुलाकर यह व्यवस्था की थी कि वह रोज़ एक-दो घंटे घर आकर खोखा को औजारों से परिचित कराए और उसे काम सिखाए। उनका विश्वास था कि इस प्रकार की शिक्षा से खोखा की उँगलियाँ छोटी उम्र से ही औजारों की आदत डाल लेंगी और भविष्य में वह सफल इंजीनियर बन सकेगा।
Q5: सप्रसंग व्याख्या कीजिए –
(क) लड़कियाँ क्या हैं, कठपुतलियाँ हैं और उनके माता-पिता को इस बात का गर्व है।
(ख) खोखा के दुर्ललित स्वभाव के अनुसार ही सेनों ने सिद्धांतों को भी बदल लिया था ।
(ग) ऐसे ही लड़के आगे चलकर गुंडे, चोर और डाकू बनते हैं।
(घ) हंस कौओं की जमात में शामिल होने के लिए ललक गया ।
उत्तर : (क) प्रस्तुत पंक्तियाँ नलिन विलोचन शर्मा द्वारा लिखित ‘विष के दाँत’ कहानी से ली गई हैं। यह प्रसंग सेन परिवार की लड़कियों के जीवन से संबंधित है। सेन परिवार में लड़कियों को सदा अनुशासन और दिखावटी तहजीब-तमीज का पाठ पढ़ाया जाता था। उन्हें यह सिखाया जाता था कि उन्हें क्या नहीं करना है। उनके जीवन पर कृत्रिम मर्यादाओं की बेड़ियाँ डाल दी गई थीं। वे न तो स्वच्छंद विचरण कर सकती थीं और न ही अपनी इच्छाओं को व्यक्त कर सकती थीं। इसके विपरीत लड़का खोखा पर कोई रोक-टोक नहीं थी। इस प्रकार लड़कियों को कठपुतली की तरह जीने की आदत डाली गई थी और माता-पिता इसे अपनी उपलब्धि समझते थे। लेखक ने इन पंक्तियों के माध्यम से समाज में व्याप्त स्त्री-पुरुष भेदभाव को उजागर किया है।

(ख) यह पंक्ति ‘विष के दाँत’ कहानी से ली गई है। इसका संबंध सेन दंपत्ति के लाड़ले बेटे खोखा से है। खोखा बुढ़ापे की संतान था और इस कारण वह परिवार का सबसे प्रिय सदस्य बन गया था। उसके स्वभाव में दुर्ललितता (अत्यधिक लाड़-प्यार में बिगड़ापन) साफ झलकता था। उसे शरारत और अनुशासनहीनता की पूरी छूट मिली हुई थी। उसकी गलतियों को भी माता-पिता सही ठहराते थे। इतना ही नहीं, उसकी शिक्षा की व्यवस्था भी उसके स्वभाव को ध्यान में रखकर की गई थी—उसे इंजीनियर बनाने के लिए कारखाने से बढ़ई-मिस्त्री बुलाकर औजारों से खेलने की ट्रेनिंग दी जाती थी। इस प्रकार स्पष्ट है कि खोखा के स्वभाव के अनुसार ही सेनों ने अपने सिद्धांत और नियम बदल लिए थे।

(ग) यह पंक्ति ‘विष के दाँत’ कहानी से ली गई है और यह प्रसंग गिरधारी के बेटे मदन से जुड़ा है। एक बार मदन ने सेन साहब की मोटर को छू लिया था। ड्राइवर ने उसे रोका और धक्का दे दिया जिससे उसका घुटना फूट गया। जब इसकी चर्चा सेन साहब से हुई तो वे क्रोधित होकर गिरधारी को बुलाकर समझाने लगे कि उसका बेटा बहुत शरारती हो गया है और आगे चलकर यही शरारत उसे गुण्डा, चोर और डाकू बना देगी।
इन पंक्तियों में सेन साहब के दोहरे चरित्र की झलक मिलती है। वे अपने बेटे खोखा की अनुशासनहीनता को अनदेखा कर उसे इंजीनियर बनाने का सपना देखते हैं, जबकि निर्धन गिरधारी के बेटे की मामूली शरारत को भी कुलनाशक प्रवृत्ति मानते हैं। इस प्रकार लेखक ने समाज में व्याप्त वर्गभेद और अमीर-गरीब के प्रति दोहरे व्यवहार को रेखांकित किया है।

(घ) यह पंक्ति ‘विष के दाँत’ कहानी से ली गई है। इसका संबंध खोखा और मदन के प्रसंग से है। एक दिन खोखा बँगले के अहाते से निकलकर गली में पहुँचा, जहाँ मदन अपने साथियों के साथ लट्टू खेल रहा था। यह दृश्य देखकर खोखा भी उनके साथ खेलने को लालायित हो उठा। यहाँ खोखा ‘हंस’ का प्रतीक है क्योंकि वह अमीर परिवार का बेटा था, जबकि मदन और उसके साथी ‘कौए’ कहे गए हैं क्योंकि वे गरीब और निम्नवर्गीय थे। खोखा का उनके खेल में शामिल होने का उत्साह यह दर्शाता है कि अमीर वर्ग का बच्चा भी गरीब बच्चों के खेल और जीवन की ओर आकर्षित होता है। किंतु वर्गभेद और सामाजिक असमानता के कारण खोखा को वहाँ स्वीकार नहीं किया गया।
Q6: सेन साहब के और उनके मित्रों के बीच क्या बातचीत हुई और पत्रकार मित्र ने उन्हें किस तरह उत्तर दिया ?
उत्तर : एक दिन की बात है, ड्राइंग रूम में सेन साहब अपने कुछ मित्रों के साथ गपशप कर रहे थे। उनमें एक साधारण हैसियत के अखबारनवीस (पत्रकार) भी थे, जो सेन साहब के दूर के रिश्तेदार थे। उनके साथ उनका छोटा बेटा भी आया था। वह खोखा से भी छोटा था, लेकिन बहुत समझदार और होनहार प्रतीत होता था। किसी ने उसकी किसी हरकत की तारीफ करते हुए पूछा कि बच्चा स्कूल जाता होगा न?
इससे पहले कि पत्रकार महोदय उत्तर देते, सेन साहब बीच में बोल पड़े— “मैं तो खोखा को इंजीनियर बनाने जा रहा हूँ,” और वे अपनी ही बातें बार-बार दुहराते रहे। पत्रकार महोदय चुपचाप मुस्कुराते रहे। जब उनसे दोबारा पूछा गया कि वे अपने बेटे को क्या बनाना चाहते हैं, तो उन्होंने उत्तर दिया—
“मैं चाहता हूँ कि वह सज्जन (जेंटलमैन) बने और जो कुछ भी बने, उसकी इच्छा और काम के अनुसार पूरी आज़ादी रहे।”
पत्रकार मित्र का यह शिष्ट लेकिन प्रच्छन्न व्यंग्य सुनकर सेन साहब असहज होकर रह गए।
Q7: मदन और ड्राइवर के बीच के विवाद के द्वारा कहानीकार क्या बताना चाहता है ?
उत्तर : कहानीकार ने मदन और ड्राइवर के बीच हुए विवाद के माध्यम से सामंती मानसिकता को उजागर किया है। मदन एक गरीब परिवार का बच्चा था। उसने केवल मोटर को छू लिया, इसी कारण ड्राइवर ने उसे धक्का देकर चोट पहुँचा दी। यह घटना अमीरों और उनके नौकरों की गरीबों के प्रति कठोरता और तिरस्कार को दर्शाती है। कहानीकार यह संदेश देना चाहता है कि समाज में व्याप्त यह अन्याय और सामंती सोच ग़रीबों के साथ अमानवीय व्यवहार को बढ़ावा देती है।
Q8: काशू और मदन के बीच झगड़े का कारण क्या था ? इस प्रसंग के द्वारा लेखक क्या दिखाना चाहता है ?
उत्तर : उत्तर – सेन साहब की नयी चमकती काली गाड़ी को छूने भर के अपराध के लिए मदन न केवल शोफर द्वारा घसीटा जाता है, अपितु बाप गिरधर द्वारा भी बेरहमी से पीटा जाता है। दूसरे दिन खोखा जब मदन की मंडली में लटू खेलने चला जाता है तो मदन का स्वाभिमान जाग उठता है। दोनों की लड़ाई वृहत् रूप ले लेती है। खोखा और, मदन की लड़ाई महल और झोपड़ी की लड़ाई का प्रतीक है। खोखा को मुँह की खानी पड़ती है। इस स्वाभिमान की झगड़ा में झोपड़ी वाले की जीत होती है।
Q9: ‘महल और झोपड़ी वालों की लड़ाई में अक्सर महल वाले ही जीतते हैं, पर उसी हालत में जब दूसरे झोपड़ी वाले उनकी मदद अपने ही खिलाफ करते हैं।’ लेखक के इस कथन को कहानी से एक उदाहरण देकर पुष्ट कीजिए ।
उत्तर : लेखक के कथन के अनुसार, महल और झोपड़ी वालों की लड़ाई में महल वाले तभी जीतते हैं जब झोपड़ी वाले अपनी ही जाति या वर्ग के खिलाफ खड़े हो जाते हैं। इसका उदाहरण कहानी में तब मिलता है जब सेन साहब की चमचमाती मोटर को छूने मात्र पर शोफर ने मदन को बेरहमी से धक्का देकर घायल कर दिया। इस पर मदन के अपने पिता गिरधारी ने भी उसे पीटा, बजाय उसके साथ खड़े होने के। यहाँ झोपड़ी वाले (गिरधारी) ने अपने ही बेटे का पक्ष न लेकर महल वालों (सेन साहब और उनके शोफर) का साथ दिया। यही कारण है कि मदन जैसे निर्धन और शोषित वर्ग के बच्चे अपमानित होते हैं और महल वालों की जीत हो जाती है।
Q10: रोज-रोज अपने बेटे मदन की पिटाई करने वाला गिरधर मदन द्वारा काशू की पिटाई करने पर उसे दंडित करने की बजाय अपनी छाती से क्यों लगा लेता है ?
उत्तर : गिरधर लाल सेन साहब की फैक्ट्री में एक किरानी था और उनके बंगले के अहाते के एक कोने में रहता था। अक्सर सेन साहब मदन की कोई हरकत देखकर उसकी शिकायत गिरधर से कर देते थे, जिससे वह अपने बेटे को पीटता था। गिरधर सेन साहब की बात मानने के लिए विवश था।
लेकिन जब मदन ने काशू के अहंकार का जवाब देते हुए उसके दाँत तोड़ दिए, तो गिरधर ने उसे दंडित करने के बजाय अपनी छाती से लगा लिया। इसका कारण यह था कि जो काम गिरधर स्वयं नहीं कर पाया, वह उसका पुत्र मदन करके दिखा गया। मदन ने शोषण, अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध साहस और प्रतिशोध का प्रदर्शन किया। उसकी निर्भीकता और हिम्मत देखकर गिरधर गर्व और उल्लास से भर गया और उसे गले लगा लिया।
Q11: सेन साहब, मदन, काशू और गिरधर का चरित्र-चित्रण करें ।
उत्तर :
सेन साहब – कहानी के प्रमुख पात्र हैं। उन्होंने हाल ही में एक नई गाड़ी खरीदी है और इसलिए गाड़ी की सुरक्षा को लेकर बहुत सतर्क रहते हैं। सेन साहब दिखावटी और सामंती मानसिकता वाले व्यक्ति हैं। अपने बेटे काशू के संबंध में अतिशय लाड़-प्यार करते हैं और दूसरों के बच्चों की प्रशंसा पसंद नहीं करते।

मदन – गिरधर का बेटा है। साहसी, निर्भीक और शरारती है। बाल-सुलभ शरारतें करने में वह माहिर है। जब काशू उससे झगड़ता है, तो वह भी बिना डर अपने तरीके से जवाब देता है।

काशू (खोखा) – सेन साहब का एकमात्र पुत्र है। बहुत लाड़-प्यार में बड़ा हुआ और बिगड़ा हुआ है। शरारत करने में पारंगत है। कहानी का नायक भी वही है।

गिरधर – सेन साहब की फैक्ट्री में काम करने वाला एक ईमानदार और सरल कर्मचारी है। अपने बेटे मदन के प्रति स्नेही और धैर्यवान है। सेन साहब के गुस्से को वह सहन करता है और जरूरत पड़ने पर मदन को अनुशासन सिखाता है।
Q12: आपकी दृष्टि में कहानी का नायक कौन है ? तर्कपूर्ण उत्तर दें।
उत्तर : हमारी दृष्टि में ‘विष के दाँत’ शीर्षक कहानी का नायक मदन है। नायक के संबंध में पुरानी कसौटी अब बदल चुकी है। पहले यह धारणा थी कि नायक वही हो सकता है जो उच्च कुलोत्पन्न हो, सुसंस्कृत, सुशिक्षित, युवा तथा ललित कला प्रेमी हो। परन्तु नायक के संबंध में ये शर्तें अब मान्य नहीं। कोई भी पात्र नायक पद का अधिकारी है यदि वह घटनाओं का संचालक है, सारे पात्रों में सर्वाधिक प्रभावशाली है और कथावस्तु में उसका ही महत्व सर्वोपरि है। इस दृष्टि से विचार करने पर स्पष्ट ज्ञात होता है कि इस कहानी का नायक मदन ही है। इसमें मदन का ही चरित्र है जो सबसे अधिक प्रभावशाली है। पूरे कथावस्तु में इसी के चरित्र का महत्त्व है। खोखे के विष के दाँत उखाड़ने की महत्त्वपूर्ण घटना का भी वही संचालक है। अतः निर्विवाद रूप से मदन ही कहानी का नायक है।
Q13: आरंभ से ही कहानीकार का स्वर व्यंग्यपूर्ण है। ऐसे कुछ प्रमाण उपस्थित करें ।
उत्तर : पाँचों लड़कियाँ तो तहजीब और तमीज की जीती-जागती मूरत ही हैं। जैसे कोयल घोंसले से कब उड़ जाय। चमक ऐसी कि अपना मुँह देख लो।
Q14: ‘विष के दाँत’ कहानी का सारांश लिखें ।
उत्तर : ‘विष के दाँत’ शीर्षक कहानी के लेखक श्री नलिन विलोचन शर्मा हैं। कहानी में लेखक ने सामंती मानसिकता वाले धनवान परिवार और उसी पर आश्रित गरीब परिवार का चरित्र-चित्रण किया है। सेन साहब और उनकी पत्नी अपने घर में कड़े अनुशासन को पालन करने वाले हैं। उनके परिवार में पाँच लड़कियों के बाद सबसे छोटा पुत्र काशू (खोखा) जन्म लेता है। लड़कियों पर अनुशासन की छड़ी बहुत कड़ी है, मानो वे मिट्टी की मूर्तियाँ हों, जबकि खोखा लाड़-प्यार में शरारती और आज़ाद है। पाँच वर्ष की उम्र में ही वह नौकर और बहनों पर हाथ चला देता है।

कहानी में एक दिन सेन साहब अपने मित्रों और पत्रकार के साथ ड्राइंग रूम में बैठे हैं। चर्चा के क्रम में सेन साहब अपने पुत्र खोखा के बारे में बताते हैं कि वह उसे इंजीनियर बनाना चाहते हैं। उनके व्यवहार से यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने अपने पुत्र के लिए विशेष नियम बनाए हैं।
उसी अहाते में गिरधर लाल और उसका पुत्र मदन रहते हैं। मदन का स्वभाव साहसी और निर्भीक है। एक दिन गाड़ी गंदी होने पर सेन साहब ने गिरधर को बुलाकर डाँटा और परिणामस्वरूप मदन को भी डाँट और मार सहना पड़ा। अगले दिन खेलते समय खोखा ने मदन से लटू माँगी, जब वह नहीं मिला तो खोखा ने मदन पर चूंसा चलाया, और बदले में मदन ने भी घूसा लगाया। इस झगड़े में काशू के दो दाँत टूट गए, जिन्हें लेखक ने कहानी में “विष के दाँत” के रूप में चित्रित किया है।

कहानी अमीर-गरीब के बीच असमानता, लाड़-प्यार में बिगड़े बच्चों और सामाजिक भेदभाव को उजागर करती है, साथ ही बच्चों की साहस और विद्रोह की भावना को भी प्रदर्शित करती है।

भाषा की बात

1. कहानी से मुहावरे चुनकर उनके स्वतंत्र वाक्य प्रयोग करें ।
उत्तर:
आँखो का तारा : सबसे प्यारा होना – मोहन अपने माता-पिता के आँखो का तारा होना।
जीती-जागती मूरत : वास्तविक रूप – सेन साहब की पुत्री तहज़ीब और तमीज में जीती जागती मूरत है।
किलकारी मारना : आनंद प्रकट करना – राम के घर में खुशी का माहौल था, सब किलकारी मार रहे थे।

2. कहानी से विदेशज शब्द चुनें और उनका स्रोत निर्देश करें ।
उत्तर: कहानी में उपलब्ध विदेशज शब्द निम्न हैं:

  • लॉन – अंग्रेजी
  • ट्रेंड – अंग्रेजी
  • सोसायटी – अंग्रेजी
  • तहजीब – उर्दू, फारसी
  • वाकिफ – उर्दू, फारसी
  • हैसियत – उर्दू, फारसी
  • अदब – उर्दू, फारसी
  • रुखसत – उर्दू, फारसी

3. कहानी से पाँच मिश्र वाक्य चुनें ।
उत्तर: (i) उन्हें सिखाया गया है कि ये बातें उनकी सेहत के लिए जरूरी है।
(ii) सेनों का कहना था कि खोखा आखिर अपने बाप का बेटा ठहरा।
(iii) औरत के पास एक बच्चा खड़ा था, जिसे वह रोकने की कोशिश कर रही थी।
(iv) मैंने मना किया तो कहने लगा कहने जा-जा।

4. वाक्य-भेद स्पष्ट कीजिए
(क) इसके पहले कि पत्रकार महोदय कुछ जवाब देते, सेन साहब ने शुरू किया- मैं तो खोखा को इंजीनियर बनाने जा रहा हूँ।
(ख) पत्रकार महोदय चुप मुस्कुराते रहे ।
(ग) ठीक इसी वक्त मोटर के पीछे खट-खट की आवाज सुनकर सेन साहब लपके, शोफर भी दौड़ा ।
(घ) ड्राइवर, जरा दूसरे चक्कों को भी देख लो और पंप ले आकर हवा भर दो ।
उत्तर: (क) मिश्र वाक्य
(ख) सरल वाक्य
(ग) संयुक्त वाक्य
(घ) संयुक्त वाक्य

10th हिंदी गोधूली के अन्य अध्यायों के Solution भी देखें।

क्रमांक अध्याय
1 श्रम विभाजन एवं जातिप्रथा
3 भारत से हम क्या सीखें
4 नाखून क्यो बढ़ते हैं
5 नगरी लिपि
6 बहादुर
7 परंपरा का मूल्यांकन
8 जित-जित मैं निरखत हूँ
9 आविन्यों
10 मछली
11 नैबतख़ाने में इबादत
12 शिक्षा और संस्कृति

शब्द निधि

बरसाती : पोर्टिको; नाज : गर्व, गुमान
तहजीब : सभ्यता; शोफर : ड्राइवर
शामत : दुर्भाग्य; सख्त : कड़ा, कठोर
ताकीद : कोई बात जोर देकर कहना, चेतावनी; खोखा-खोखी : बच्चा-बच्ची (बाँग्ला)
फटकना : निकट आना; तमीज : विवेक, बुद्धि, शिष्टता
तालीम : शिक्षा; सोसाइटी : शिष्ट समाज, भद्रलोक
रश्क : ईर्ष्या; ताल्लुक : संबंध
हकीकत : सच्चाई, वास्तविकता; आविर्भाव : उत्पत्ति, प्रकट होना
दुर्ललित : लाड़-प्यार में बिगड़ा हुआ; ट्रेंड : प्रशिक्षित
दूरंदेशी : दूरदर्शिता, समझदारी; फरमाना : आग्रहपूर्वक कहना
फिजूल : फालतू, व्यर्थ; वाकिफ : परिचित
वाकया : घटना; हैसियत : स्तर, प्रतिष्ठा, सामर्थ्य, औकात
अखबारनवीस : पत्रकार; प्रच्छन्न : छिपा हुआ, गुप्त, अप्रकट
अदब : शिष्टता, सभ्यता; हिकमत : कौशल, योग्यता
रुखसत : विदाई; बेलौस : निःस्वार्थ
बेयरा : खाना खिलाने वाला सेवक; चीत्कार : क्रंदन, आर्त्त होकर चीखना
शयनागार : शयनकक्ष, सोने का कमरा; खलल : विघ्न, बाधा, व्यवधान
कातर : आर्त्त; खैरियत : कुशलक्षेम
बेढब : बेतरीका, अनगढ़; उज्र : आपत्ति
मजाल : ताकत, हिम्मत, साहस; अक्ल : बुद्धि
दुर्दमनीय : मुश्किल से जिसका दमन किया जा सके; निष्ठुरता : क्रूर निर्ममता

नलिन विलोचन शर्मा का संक्षिप्त परिचय :

नलिन विलोचन शर्मा का जन्म 18 फ़रवरी 1916 ई० में पटना के बदरघाट में हुआ। वे जन्मना भोजपुरी भाषी थे। इनके पिता महामहोपाध्याय पं० रामावतार शर्मा संस्कृत और दर्शन के प्रख्यात विद्वान थे। नलिन जी ने पटना विश्वविद्यालय से संस्कृत और हिंदी में एम०ए० किया। उन्होंने आरा के हरप्रसाद दास जैन कॉलेज, राँची विश्वविद्यालय तथा अंत में पटना विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। 1959 ई० में वे पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष बने और 12 सितंबर 1961 ई० को निधन तक इस पद पर रहे।
वे हिंदी कविता में प्रपद्यवाद के प्रवर्तक और आलोचना की नई शैली के समर्थक माने जाते हैं। उनकी रचनाओं में दृष्टिकोण, साहित्य का इतिहास दर्शन, मानदंड, हिंदी उपन्यास विशेषतः प्रेमचंद, विष के दाँत प्रमुख हैं।
उनकी आलोचना की भाषा सघन, संकेतात्मक और आधुनिक दृष्टि से युक्त है। वे कथ्य, शिल्प और भाषा – सभी स्तरों पर नवीनता के समर्थक थे। हिंदी साहित्य में उन्हें एक प्रयोगशील कवि, कथाकार और आधुनिक आलोचक के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

नीचे इस अध्याय से संबंधित कुल 40 वस्तुनिष्ठ प्रश्न दिए गए हैं। ये प्रश्न अध्याय के गहन अध्ययन के आधार पर तैयार किए गए हैं तथा इनमें से कई प्रश्न पिछले वर्षों की बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा से भी लिए गए हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास करने से आपको परीक्षा की तैयारी में काफी मदद मिलेगी और यह समझने में आसानी होगी कि परीक्षा में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
1. ‘विष के दाँत’ शीर्षक पाठ की विधा है
(A) निबंध
(B) कहानी
(C) रेखाचित्र
(D) डायरी

2. मदन के लिए क्या खाना मामूली बात थी?
(A) दुत्कार
(B) प्यार
(C) मार
(D) फटकार

3. नलिन विलोचन शर्मा द्वारा लिखित कहानी निम्न में कौन है?
(A) मछली
(B) अक्षरों की कहानी
(C) विष के दाँत
(D) भारतीय लिपियों की कहानी

4. नलिन विलोचन शर्मा का जन्म ई० में हुआ।
(A) 1914
(B) 1915
(C) 1916
(D) 1917

5. नलिन विलोचन शर्मा का जन्म कहाँ हुआ था?
(A) सिमरिया
(B) बलिया
(C) उन्नाव
(D) पटना

6. गिरधरलाल का बेटा है-
(A) खोखा
(B) काशू
(C) मदन
(D) आलो

7. खोखा किस कहानी का पात्र है?
(A) विष के दाँत
(B) बहादुर
(C) मछली
(D) नाखून क्यों बढ़ते हैं

8. ‘मदन’ किसका बेटा है?
(A) सेन साहब का
(B) गिरधर लाल का
(C) शोफर का
(D) अखबारनवीस का

9. सेन साहब की कितनी लड़कियाँ थीं?
(A) दो
(B) तीन
(C) चार
(D) पाँच

10. सीमा, रजनी, आलो, शेफाली, आरती पाँचों किनकी बेटियाँ हैं?
(A) गिरधरलाल की
(B) शोफर की
(C) सेन साहब की
(D) पत्रकार महोदय की

11. नाउम्मीद बुढ़ापे की आँखों का तारा है—
(A) मदन
(B) खोखा
(C) रजनी
(D) शेफाली

12. किसके अनुसार सेनों ने सिद्धांतों को भी बदल लिया था?
(A) बेटियों के अनुसार
(B) खोखा के अनुसार
(C) मदन के अनुसार
(D) गिरधर के अनुसार

13. खोखा के दाँत किसने तोड़े?
(A) मदन ने
(B) मदन के दोस्त ने
(C) सेन साहब ने
(D) गिरधर ने

14. सेन साहब की कार की कीमत है—
(A) साढ़े सात हजार
(B) साढ़े आठ हजार
(C) साढ़े नौ हजार
(D) साढ़े सात लाख

15. सेन साहब की आँखों का तारा है—
(A) कार
(B) खोखा
(C) खोखी
(D) उपर्युक्त सभी

16. ‘मोटर को कोई खतरा हो सकता है, तो से’।
(A) खोखा
(B) मदन
(C) सीमा
(D) शेफाली

17. “ऐसे ही लड़के आगे चलकर गुण्डे, चोर, डाकू बनते हैं!” यह पंक्ति कहानी के किस पात्र ने कही है?
(A) सेन साहब की धर्मपत्नी
(B) गिरधर
(C) सेन साहब
(D) शोफर

18. गिरधरलाल, सेन साहब की फैक्टरी में क्या था?
(A) किरानी
(B) ड्राइवर
(C) एकाउन्टेन्ट
(D) इनमें से कोई नहीं

19. हिन्दी कविता में प्रपद्यवाद के प्रवर्तक कौन हैं?
(A) मैक्समूलर
(B) नलिन विलोचन शर्मा
(C) अशोक वाजपेयी
(D) अमरकांत

20. किनकी लड़कियाँ तहजीब और तमीज की जीती-जागती मूरत हैं?
(A) गिरधरलाल की
(B) डॉक्टर साहब की
(C) सेन साहब की
(D) इंजीनियर साहब की

21. सीमा, रजनी, आलो, शेफाली, आरती-पाँचों किनकी बहने थीं?
(A) मदन की
(B) खोखा की
(C) लेखक की
(D) सेन साहब की

22. झोपड़ी और महल की लड़ाई में अक्सर कौन जीतते हैं?
(A) महल वाले
(B) झोपड़ी वाले
(C) दोनों
(D) कोई नहीं

23. कौन-सी कहानी मध्यवर्ग के अंतर्विरोधों को उजागर करती है?
(A) श्रम विभाजन और जाति प्रथा
(B) नाखून क्यों बढ़ते हैं
(C) विष के दांत
(D) नागरी लिपि

24. दर्शन और संस्कृत के प्रख्यात विद्वान महामहोपाध्याय पं० रामावतार शर्मा के ज्येष्ठ पुत्र थे—
(A) भीमराव अंबेदकर
(B) नलिन विलोचन शर्मा
(C) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(D) यतीन्द्र मिश्र

25. मध्यवर्ग के अनेक अंतर्विरोधों को उजागर करने वाली कहानी है—
(A) श्रम विभाजन और जाति प्रथा
(B) भारत से हम क्या सीखे
(C) नागरी लिपि
(D) विष के दांत

26. विष के दांत कहानी का प्रमुख पात्र है—
(A) गिरधर
(B) सेन साहब
(C) खोखा
(D) सेन साहब की पत्नी

27. काशू और मदन की लड़ाई के संबंध में लेखक क्या कहता है?
(A) हड्डी और मांस की लड़ाई
(B) बँगले के पिल्ले और गली के कुत्ते की लड़ाई
(C) उपर्युक्त दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं

28. खोखा के दाँत तोड़ने के बाद गिरधर लाल मदन को क्या करता है?
(A) गुस्सा करता है
(B) पिटाई करता है
(C) लपककर मदन को हाथों से उठा लेता है
(D) घर से भगा देता है

29. सेन साहब के दूर के रिश्तेदार थे—
(A) गिरधर लाल
(B) मुकर्जी साहब
(C) शोफर
(D) अखबारनवीस

30. नलिन विलोचन शर्मा की स्कूल की पढ़ाई कहाँ से हुई थी?
(A) पटना कॉलेजिएट स्कूल
(B) पटना हाइस्कूल
(C) बी० एन० कॉलेजिएट स्कूल
(D) टी० के० घोष हाइ स्कूल

31. नलिन विलोचन शर्मा प्राध्यापक रहे हैं–
(A) हर प्रसाद दास जैन कॉलेज आरा के
(B) राँची विश्वविद्यालय के
(C) पटना विश्वविद्यालय के
(D) उपर्युक्त सभी के

32. काली चमकती हुई स्ट्रीमल इंड नई मोटर कार थी-
(A) इंजीनियर साहब की
(B) अखबार नवीस की
(C) पत्रकार महोदय की
(D) सेन साहब की

33. मदन खोखा के कितने दाँत तोड़ डाले?
(A) एक
(B) दो
(C) तीन
(D) चार

34. ‘विष के दाँत’ कहानी में मोटरकार किसकी थी?
(A) गिरधर की
(B) सेन साहब की
(C) मदन की
(D) शोफर की

35. लड़कियाँ तो पाँचों बड़ी सुशील हैं, पाँच-पाँच ठहरी और सो भी लड़कियाँ, तहजीव और तमीज की तो जीती-जागती मूरत ही हैं। उपर्युक्त गद्यांश किस पाठ का है?
(A) नाखून क्यों बढ़ते हैं
(B) नौबतखाने में इवादत
(C) विष के दाँत
(D) परंपरा का मूल्यांकन

36. सेन साहब की नई मोटरकार किस रंग की थी?
(A) सफेद
(B) काली
(C) नीली
(D) लाल

37. महल और झोपड़ीवालों की लड़ाई में अक्सर महलवाले ही जीतते हैं। इस गद्यांश के लेखक कौन हैं?
(A) महात्मा गाँधी
(B) अमरकांत
(C) नलिन विलोचन शर्मा
(D) अशोक वाजपेयी

38. ‘विष के दाँत’ कहानी किस वर्ग के अनेक अंतरविरोधों को उजागर करती है?
(A) उच्च वर्ग
(B) मध्य वर्ग
(C) निम्न वर्ग
(D) शोषित वर्ग

39. सेन साहब की नई मोटरकार की पिछली बत्ती का लाल शीशा किसने चकनाचूर किया था?
(A) मदन
(B) काशू
(C) शोफर
(D) इनमें से कोई नहीं

40. खोखा जीवन के नियम का अपवाद था और यह अस्वाभाविक नहीं था कि वह घर के नियमों का भी अपवाद हो। यह गद्यांश किस पाठ का है?
(A) विष के दाँत
(B) शिक्षा और संस्कृति
(C) बहादुर
(D) मछली

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निष्कर्ष :

ऊपर आपने बिहार बोर्ड कक्षा 10 की हिन्दी पुस्तक “गोधूली भाग 2” के गद्यखंड के दूसरे अध्याय “विष के दाँत” की व्याख्या, बोध-अभ्यास, महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को पढ़ा। हमें उम्मीद है कि यह सामग्री आपके अध्ययन को और सरल व प्रभावी बनाएगी। यदि किसी प्रश्न या समाधान को लेकर आपके मन में कोई शंका हो, तो आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं या सीधे हमसे संपर्क करें। हम आपकी मदद करने की पूरी कोशिश करेंगे। संपर्क करें
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