BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-6 Solution

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BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-6 Solution "बहादुर" and pdf

इस पोस्ट में हम बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक “गोधूली” के छठें अध्याय “बहादुर” के कहानी का सारांश, कवि परिचय, सभी प्रश्नों के समाधान, महत्त्वपूर्ण एवं संभावित प्रश्न और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों ( Objective Questions) को विस्तार से देखने वाले हैं।
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"बहादुर" की मुख्य बातें

अमरकांत की कहानी ‘बहादुर’ एक नेपाली बालक की मार्मिक कथा है, जिसे एक मध्यमवर्गीय परिवार नौकरी के लिए रखता है। शुरुआत में घर के सभी सदस्य उसे उत्सुकता और प्रेम से देखते हैं, जैसे कोई नया खिलौना या पालतू जानवर आया हो। बहादुर मेहनती, खुशमिजाज और सरल स्वभाव का होता है, इसलिए सब उससे जल्दी घुल-मिल जाते हैं। बच्चे उसके साथ खेलते हैं, वह पहाड़ी गीत गाता है और निर्मला उसे अपनापन देती है। लेकिन यह अपनापन बराबरी का नहीं, एक नौकर की दृष्टि से होता है। धीरे-धीरे परिवार का रवैया बदल जाता है और काम का बोझ, डाँट-फटकार और हुक्म चलाना बढ़ने लगता है। खासकर किशोर उसे मारता-डाँटता है और छोटी-सी गलतियों पर भी उसे कठोर सज़ा दी जाती है।

कहानी का सबसे पीड़ादायक पहलू यह है कि बहादुर की भावनाओं और सम्मान की परवाह कोई नहीं करता। जब किसी रिश्तेदार के पैसे गायब होते हैं तो बिना सबूत उस पर शक किया जाता है और पुलिस का डर दिखाया जाता है। रोटी अलग सेंकने की घटना से उसका आत्मसम्मान भी आहत होता है। अंततः सिलबट्टा टूटने की छोटी-सी घटना के डर से वह घर छोड़कर चला जाता है, बिना कुछ साथ लिए। उसके जाने के बाद परिवार को एहसास होता है कि उन्होंने उसे कितना अपमानित किया था। निर्मला रो पड़ती है, किशोर पछताता है और कथावाचक के मन में अपराधबोध जागता है। यह कहानी बताती है कि यदि किसी को प्यार, सम्मान और बराबरी न मिले तो वह साथ छोड़ देता है — चाहे वह एक बालक नौकर ही क्यों न हो।

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अमरकांत का संक्षिप्त परिचय

अध्याय – 6 बहादुर
पूरा नाम अमरकांत
जन्म जुलाई 1925 ई०
जन्म स्थान नागरा, बलिया (उत्तरप्रदेश)
मृत्यु
शिक्षा हाईस्कूल – गवर्नमेंट हाईस्कूल, बलिया
इंटरमीडिएट – सतीशचंद्र कॉलेज, बलिया (1946 ई०)
बी० ए० – इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1947 ई०)
कार्य क्षेत्र एवं संलग्नता दैनिक ‘सैनिक’ आगरा (1948 ई०),
‘अमृत पत्रिका’, ‘भारत’, ‘कहानी’, ‘मनोरमा’ (इलाहाबाद),
प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़ाव
प्रमुख रचनाएँ कहानी संग्रह – जिंदगी और जोंक, देश के लोग, मौत का नगर, मित्र-मिलन, कुहासा
उपन्यास – सूखा पत्ता, आकाशपक्षी, काले उजले दिन, सुखजीवी, बीच की दीवार, ग्राम सेविका
बाल उपन्यास – वानर सेना
सम्मान / उपलब्धियाँ अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता में ‘डिप्टी कलक्टरी’ पुरस्कृत
साहित्य अकादमी पुरस्कार
प्रस्तुत कहानी का सार एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार में काम करनेवाले नेपाली नौकर ‘बहादुर’ के स्वच्छंद स्वभाव, आत्मीयता और अंतर्द्वंद्व का यथार्थपूर्ण चित्रण। कहानी एक नए नायक को प्रतिष्ठित करती है।
भाषाई एवं शैलीगत विशेषता सहज, परिपक्व, फक्कड़ भाषा; लोकजीवन के मुहावरों और देशज शब्दों का प्रयोग; यथार्थवादी दृष्टिकोण

बोध और अभ्यास प्रश्न

पाठ के साथ

Q1: लेखक को क्यों लगता है कि जैसे उस पर एक भारी दायित्व आ गया हो ?
उत्तर : लेखक की पत्नी लगातार नौकर रखने की बात करती रहती थी और उसका भाई सचमुच एक लड़का (बहादुर) लाकर उनके सामने खड़ा कर देता है। अब लेखक को लगता है कि उस लड़के को घर के माहौल में ढालना, उसे ठीक से रखना और उसे टिकाए रखना उनकी जिम्मेदारी बन गई है। इसी कारण उन्हें एहसास होता है कि जैसे उनके कंधों पर एक भारी दायित्व आ गया हो।
Q2: अपने शब्दों में पहली बार दिखे बहादुर का वर्णन कीजिए ।
उत्तर : बहादुर का कद छोटा लेकिन शरीर मजबूत था। उसका रंग साफ़ और चेहरा कुछ चपटा था। उसने सफेद कमीज, उजला हाफ पैंट और भूरे रंग के जूते पहन रखे थे। गले में एक रूमाल भी बंधा हुआ था, जिससे उसका रूप और अलग लगता था।
Q3: लेखक को क्यों लगता है कि नौकर रखना बहुत जरूरी हो गया था ?
उत्तर : लेखक के अधिकतर रिश्तेदार और भाई ऊँचे पदों पर थे और उनके घरों में नौकर-चाकर थे। बहन के विवाह में जब सब एक साथ जुटे तो लेखक की पत्नी दूसरों के घरों में काम करने वाले नौकरों को देखकर प्रभावित और थोड़ा ईर्ष्यालु हो गई। इसके बाद वह बार-बार नौकर रखने की जिद करती रही। इस लगातार दबाव के कारण लेखक को लगा कि अब घर में नौकर रखना बहुत जरूरी हो गया है।
Q4: साले साहब से लेखक को कौन-सा किस्सा असाधारण विस्तार से सुनना पड़ा ?
उत्तर : लेखक को साले साहब से बहादुर का पूरा जीवन-किस्सा विस्तार से सुनना पड़ा। वह एक नेपाली लड़का था, जिसका गाँव नेपाल और बिहार की सीमा पर था। उसका पिता युद्ध में मर चुका था और उसकी माँ परिवार का भरण-पोषण करती थी। माँ बहुत गुस्सैल थी और बहादुर को अक्सर मारती थी। वह चाहती थी कि बहादुर घर के काम में मदद करे, लेकिन बहादुर पहाड़ों और जंगलों में घूमना पसंद करता, पेड़ों पर चढ़ता और चिड़ियों के घोंसलों में हाथ डालकर उनके बच्चे पकड़ता या फल तोड़ता। एक बार उसने भैंस को मारा, जिससे माँ ने उसे बहुत पीटा। अत्यधिक पिटाई और डर से बहादुर का मन माँ से टूट गया। वह रात भर जंगल में छिपा रहा और सुबह चोरी-छिपे कुछ पैसे लेकर घर से निकल गया।
Q5: बहादुर अपने घर से क्यों भाग गया था ?
उत्तर : बहादुर को अपनी माँ की प्यारी भैंस को मारने के कारण खूब पिटाई हुई थी। मार खाने के बाद उसका मन माँ से फट गया और वह पूरी रात जंगल में छिपा रहा। अगले दिन सुबह वह घर आया, चोरी-छिपे कुछ पैसे लेकर और अपने सामान के बिना, घर से भाग गया।
Q6: बहादुर के नाम से ‘दिल’ शब्द क्यों उड़ा दिया गया ? विचार करें ।
उत्तर : जब बहादुर से उसका नाम पूछा गया, तो उसने अपना नाम दिलबहादुर बताया। यहाँ ‘दिल’ शब्द का संबंध भावनाओं से है। निर्मला ने उसे समझाते हुए कहा कि घर में काम करते समय केवल भावनाओं से काम नहीं करना, बल्कि ध्यान और समझदारी से काम करना चाहिए। इसलिए उसने बहादुर के नाम से ‘दिल’ शब्द हटा दिया, ताकि वह केवल अपने काम और जिम्मेदारियों पर ध्यान दे।
Q7: व्याख्या करें –
(क) उसकी हँसी बड़ी कोमल और मीठी थी, जैसे फूल की पंखुड़ियाँ बिखर गई हों ।
(ख) पर अब बहादुर से भूल-गलतियाँ अधिक होने लगी थीं ।
(ग) अगर वह कुछ चुराकर ले गया होता तो संतोष हो जाता ।
(घ) यदि मैं न मारता, तो शायद वह न जाता ।
उत्तर : (क) बहादुर की हँसी बड़ी ही कोमल और मीठी थी। जब लेखक शाम को घर लौटते, तो बहादुर उनके पास आता, सिर झुका कर धीरे-धीरे मुस्कुराता और दिनभर की छोटी-छोटी घटनाएँ बताता। उसकी हँसी इतनी निर्मल और सहज होती थी कि लेखक ने इसे फूलों की पंखुड़ियों के बिखरने के समान कहा। यह हँसी बहादुर की निश्छलता, ईमानदारी और आत्मीय व्यवहार को दर्शाती थी।

(ख) बहादुर के साथ मार-पीट और गाली-गलौज होने लगी थी। लेखक का पुत्र किशोर उसे परेशान करता, और कभी-कभी उसकी पत्नी भी डाँटती। इससे बहादुर दुखी रहने लगा और छोटे-छोटे कामों में भूल करने लगा। लेखक भी उसे पूरी तरह मदद नहीं कर पाते थे क्योंकि उनके विचार में नौकर-चाकर को मार-पीट सहना पड़ता है। इस पंक्ति का मतलब यह है कि दुर्व्यवहार से व्यक्ति असहाय और असंतुलित हो जाता है।

(ग) जब बहादुर घर छोड़कर भाग गया, तो उसने कोई भी सामान नहीं लिया। लेखक और परिवार इसके लिए दुखी थे, लेकिन लेखक के मन में यह बात थी कि अगर बहादुर कुछ चुराकर भी ले गया होता तो भी उन्हें संतोष होता क्योंकि उसने सेवा और ईमानदारी दिखाई। यह पंक्ति हमें यह सिखाती है कि व्यक्ति के अच्छे व्यवहार का मूल्य उसकी सेवा और ईमानदारी में है, न कि वस्तुओं में।

(घ) बहादुर के भाग जाने पर लेखक को अफसोस हुआ और उन्होंने सोचा कि अगर उन्होंने उसे कभी नहीं मारा होता तो शायद वह भागता ही नहीं। लेखक को अपने अमानवीय व्यवहार का खेद हुआ। यह पंक्ति यह दर्शाती है कि सद्व्यवहार और सही दृष्टिकोण से ही व्यक्ति का विश्वास और आत्मीयता बनती है।
Q8: काम-धाम के बाद रात को अपने बिस्तर पर गये बहादुर का लेखक किन शब्दों में चित्रण करता है ? चित्र का आशय स्पष्ट करें ।
उत्तर : रात को काम-धाम खत्म करने के बाद बहादुर अपने बिस्तर पर जाता था। उसे निर्मला ने एक फटी-पुरानी दरी दी थी और घर से वह चादर भी ले आया था। वह भीतर के बरामदे में एक टूटी हुई बँसखट पर अपना बिस्तर बिछाता और उस पर बैठकर अपनी गोल-सी नेपाली टोपी पहनता। फिर छोटा-सा आईना निकालकर उसमें अपना मुँह देखता और बहुत प्रसन्न नजर आता। इसके बाद वह जेब से कुछ चीज़ें निकालकर उनके साथ खेलता और धीरे-धीरे गुनगुनाने लगता।
इस चित्रण से बहादुर के बाल मन की स्वाभाविकता और निर्दोष आनंद झलकता है। उसके गीत गाने और खेल-खिलवाड़ में खो जाने से उसकी सरलता, स्वच्छंदता और बचपन की मासूमियत स्पष्ट होती है। इसके माध्यम से लेखक ने बच्चे के अंतःकरण में छुपे भाव और उसके जीवन की सहजता को दिखाया है।
Q9: बहादुर के आने से लेखक के घर और परिवार के सदस्यों पर कैसा प्रभाव पड़ा ?
उत्तर : बहादुर के आने से लेखक के घर में बहुत बदलाव आया। घर का काम पहले की तरह बिखरा नहीं रहता था। बहादुर सबका काम संभालता था। इसके कारण घर के सभी सदस्य आराम करने लगे और कोई भी काम खुद नहीं करता था। अब परिवार के लोग बस बहादुर को आवाज देकर काम बताते और वह पूरे लगन से उसे करता था। इसके अलावा, घर के लोग रात में जल्दी सो जाते और सुबह आठ बजे से पहले नहीं उठते थे।
Q10: किन कारणों से बहादुर ने एक दिन लेखक का घर छोड़ दिया ?
उत्तर : शुरुआत में बहादुर को लेखक के घर में बहुत अच्छा रखा गया। लेकिन धीरे-धीरे लेखक का बेटा किशोर उस पर दबाव डालकर सारे काम करवाने लगा। कुछ समय बाद लेखक की पत्नी और बेटा छोटी-छोटी बातों पर उसे मारते और डाँटते। एक दिन लेखक के घर एक रिश्तेदार आए और रुपये खो जाने का झूठा आरोप बहादुर पर लगा दिया। उस दिन बहादुर को बहुत डाँट-मार झेलनी पड़ी। बार-बार मार-पीट और प्रताड़ना सहने के कारण वह एक दिन अचानक घर छोड़कर भाग गया।
Q11: बहादुर पर ही चोरी का आरोप क्यों लगाया जाता है और उस पर इस आरोप का क्या असर पड़ता है ?
उत्तर : बहादुर पर चोरी का आरोप इसलिए लगाया गया क्योंकि अक्सर लोग घर के नौकर को कम समझते हैं और छोटी-सी बात पर दोषी मान लेना आसान लगता है। रिश्तेदार ने भी बहादुर पर आरोप लगाकर ऐसा दिखाने की कोशिश की कि वह चोरी कर सकता है। इस आरोप से बहादुर बहुत दुखी हो गया। उसकी अंतरात्मा पर गहरी चोट लगी और वह उदास रहने लगा। इस घटना के बाद से उसे घर में अधिक डाँट-फटकार का सामना करना पड़ने लगा और काम में उसका मन नहीं लगता था।
Q12: घर आए रिश्तेदारों ने कैसा प्रपंच रचा और उसका क्या परिणाम निकला ?
उत्तर : लेखक के घर आए रिश्तेदारों ने अपनी झूठी प्रतिष्ठा बचाने के लिए रुपया चोरी का प्रपंच रचा। उन्होंने कहा कि मिठाई लाने के लिए पैसे निकालकर रखे थे, लेकिन बीच में पैसे गायब हो गए। उन्होंने बहादुर पर इस चोरी का दोष डाल दिया। इस आरोप के कारण बहादुर को पिटाई हुई और उसे घर में हर समय फटकार झेलनी पड़ी। वह उदास और मनमाना होकर काम करने लगा। अंततः इस प्रपंच की वजह से बहादुर घर छोड़कर चला गया और घर का काम-धाम अस्त-व्यस्त हो गया।
Q13: बहादुर के चले जाने पर सबको पछतावा क्यों होता है ?
उत्तर : बहादुर घर के सारे काम बड़े कुशलता से करता था और सभी परिवार के सदस्यों को आराम मिलता था। घर के सदस्य किसी भी काम के लिए बस उसे पुकारते थे और बहादुर पूरा काम कर देता था। वह घर के कामों में इतना निपुण था कि सबको मेहनत नहीं करनी पड़ती थी। साथ ही, वह सबके साथ मिलजुल कर रहता था और डाँट-फटकार के बावजूद अपने काम में हमेशा ईमानदार था। इन सब कारणों से बहादुर के चले जाने पर घर के सभी लोगों को बहुत पछतावा हुआ।
Q14: बहादुर, किशोर, निर्मला और कथावाचक का चरित्र चित्रण करें ।
उत्तर : बहादुर – बहादुर लेखक महोदय का नौकर था। वह नेपाली था और उसका पिता युद्ध में मर गया था। उसकी माँ घर संभालती थी और गुस्सैल थी। बहादुर बचपन से ही साहसी और मेहनती था। वह ईमानदार, हँसमुख और अपने काम में निपुण था। घर में रहते हुए भी वह बच्चों की तरह मासूम और स्वाभाविक था।

किशोर – किशोर लेखक महोदय का बड़ा बेटा था। वह अपने सारे काम बहादुर से करवा लेता और उसे अनुशासन में रखने के लिए कभी-कभी मार-पीट भी करता था। उसकी कठोरता और दबाव के कारण बहादुर घर छोड़कर भाग गया।

निर्मला – निर्मला लेखक महोदय की पत्नी थी। उसे नौकर रखने का शौक था और बहादुर के आने पर पहले उसे बहुत प्यार दिया। लेकिन बाद में उसका व्यवहार बदल गया और वह भी बहादुर पर गुस्सा होने लगी। बहादुर के जाने पर वह बहुत दुखी हुई।

कथावाचक – कथावाचक लेखक महोदय का साला है। वह बहादुर के बारे में विस्तृत रूप से बताता है और अपनी बहन की नौकर रखने की इच्छा को पूरा करता है। वह घर में होने वाली घटनाओं का गवाह और सहायक होता है।
Q15: निर्मला को बहादुर के चले जाने पर किस बात का अफसोस हुआ ?
उत्तर : निर्मला एक संवेदनशील और भावुक महिला थी। बहादुर के रहने से घर के काम-काज में उसे बहुत आराम मिलता था। लेकिन जब लेखक के रिश्तेदार ने रुपया चोरी का प्रपंच रचा और बहादुर को इसके लिए दोषी ठहराया, तो निर्मला गुस्से में बहादुर पर फटकार और मार-पीट करने लगी। बाद में जब उसे पता चला कि बहादुर निर्दोष था और उसने चोरी नहीं की थी, तो निर्मला को बहुत पछतावा हुआ। वह सोचती रही कि बहादुर बिना कुछ कहे क्यों चला गया और उसकी ईमानदारी, कर्मठता को याद करके उसने अपने व्यवहार पर अफसोस किया।
Q16: कहानी छोटा मुँह बड़ी बात कहती है । इस दृष्टि से ‘बहादुर’ कहानी पर विचार करें ।
उत्तर : कहानी “छोटा मुंह बड़ी बात” इस दृष्टि से बहादुर की कहानी पर बिल्कुल लागू होती है। बहादुर ने बिना कुछ कहे और बिना कोई सामान लिए अचानक घर छोड़ दिया। यह घटना तो छोटी लगती है, लेकिन इसके पीछे बड़ी बातें छिपी थीं। इसके कारण घर के सभी सदस्य अपने व्यवहार पर पछतावा करने लगे और खुद को दोषी महसूस करने लगे। किशोर, निर्मला और लेखक महोदय सभी को एहसास हुआ कि उन्होंने बहादुर के साथ कैसा व्यवहार किया। बहादुर की छोटी-सी हरकत ने सबको बड़ा संदेश दिया कि दूसरों के प्रति अच्छा व्यवहार और सम्मान देना कितना जरूरी है।
Q17: कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए । लेखक ने इसका शीर्षक ‘नौकर’ क्यों नहीं रखा ?
उत्तर : कहानी का शीर्षक बहादुर इसलिए सार्थक है क्योंकि यह सिर्फ एक नौकर की कहानी नहीं है, बल्कि बहादुर के बाल-सुलभ मनोभाव, ईमानदारी, सहनशीलता और कर्मठता का चित्रण भी प्रस्तुत करता है। कहानी में बहादुर नौकरी करने से पहले स्वच्छंद था, लेकिन माँ से पिटाई के बाद घर छोड़ देता है। लेखक के घर में नौकर के रूप में आते ही वह अपने अच्छे व्यवहार और कर्मठता से पूरे परिवार को प्रभावित करता है। अंत में बहादुर फिर से स्वच्छंद होकर अपने मार्ग पर चला जाता है। इसलिए कहानी के केंद्र में बहादुर ही मुख्य पात्र है और केवल ‘नौकर’ शब्द उसके व्यक्तित्व और गुणों को पूरी तरह नहीं दर्शा पाता। यही कारण है कि लेखक ने इसका शीर्षक ‘बहादुर’ रखा, न कि ‘नौकर’।
Q18: कहानी का सारांश प्रस्तुत करें ।
उत्तर : कहानी ‘बहादुर’ लेखक महोदय के घर आए एक छोटे नेपाली बालक बहादुर के जीवन और उसके प्रभाव पर आधारित है। बहादुर का परिवार कठिन परिस्थितियों में रहता था। उसकी माँ बहुत कठोर और गुस्सैल थी। बहादुर अक्सर घर के कामकाज में मदद करने के बजाय जंगल में खेल-कूद में व्यस्त रहता था। एक दिन उसने अपनी माँ की भैंस को मार दिया, जिससे उसकी माँ ने उसे बहुत पीटा। अत्यधिक मारपीट और प्रताड़ना सहते हुए बहादुर का मन टूट गया और वह चोरी करके घर छोड़ भाग गया।

बाद में बहादुर लेखक महोदय के घर नौकर के रूप में नौकरी करने आता है। शुरू में उसका व्यवहार शांत और सहनशील होता है। लेखक की पत्नी निर्मला और पुत्र किशोर उसे लाड़-प्यार से अपनाते हैं और बहादुर पूरे ईमानदारी और लगन से घर के काम करता है। वह न केवल घर के कार्यों में निपुण होता है, बल्कि अपने सरल और निर्दोष स्वभाव से पूरे परिवार का दिल जीत लेता है। बहादुर की हँसी, उसकी मासूमियत और बाल-सुलभ आदतें लेखक और परिवार के सदस्यों को बहुत प्रभावित करती हैं। वह रात को अपने फटे-पुराने बिस्तर पर बैठकर गीत गाता, स्मृतियों में खो जाता और बालमन की स्वाभाविकता प्रकट करता।

कहानी में मोड़ तब आता है जब लेखक के घर आए एक रिश्तेदार ने रुपया चोरी का प्रपंच रचा और बहादुर पर आरोप लगा दिया। इसके कारण लेखक की पत्नी और पुत्र ने बहादुर को फटकारना और पीटना शुरू कर दिया। बहादुर इस अनुचित व्यवहार और झूठे आरोप से दुखी हो जाता है। वह घर की परिस्थितियों और मारपीट से परेशान होकर एक दिन चुपके से बिना किसी को बताये घर छोड़ देता है। बहादुर के चले जाने के बाद लेखक, पत्नी और पुत्र को अपनी गलती का अहसास होता है। उन्हें उसके कर्मठ, ईमानदार और सहनशील स्वभाव का महत्व समझ में आता है और सभी को पछतावा होता है।
कहानी ‘बहादुर’ छोटे बालक की मासूमियत, ईमानदारी और सहनशीलता के माध्यम से इंसानों के व्यवहार और सामाजिक न्याय की सीख देती है। यह कहानी यह भी सिखाती है कि छोटे बच्चों के प्रति धैर्य और सम्मान जरूरी है, और अनुचित व्यवहार या संदेह से उन्हें गहरा दुख पहुँच सकता है। कहानी का शीर्षक ‘बहादुर’ इसलिए उपयुक्त है क्योंकि यह केवल नौकर के रूप में उसकी भूमिका नहीं बल्कि उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व, गुण और परिवार पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाता है।

भाषा की बात

1. निम्नलिखित मुहावरों का वाक्य में प्रयोग करते हुए अर्थ स्पष्ट करें
मारते-मारते मुँह रँग देना, हुलिया टाइट करना, हाथ खुलना, मजे में होना, बातों की जलेबी छनना, कहीं का न रहना, नौ-दो ग्यारह होना, खाली हाथ जाना, बुरे फँसना, पेट में लंबी दाढ़ी, चहल-पहल मचना
उत्तर: अर्थ : किसी को बहुत पीटने के दौरान उसका मुँह लाल होना या थकान होना।
वाक्य : शिक्षक ने अनुशासनहीन बच्चों को डांटा और मारते-मारते मुँह रँग गया।

अर्थ : अपनी पोशाक या हुलिया अच्छी तरह तैयार करना।
वाक्य : पार्टी में जाने से पहले उसने हुलिया टाइट कर लिया।

अर्थ : किसी कार्य के लिए अधिक पैसे या सुविधाएँ देना।
वाक्य : उसने मेहमानों के स्वागत के लिए हाथ खुला रखा।

अर्थ : पूरी तरह आराम या प्रसन्नता में होना।
वाक्य : छुट्टियों में बच्चा मजे में था और खेलों में खोया हुआ था।

अर्थ : किसी की बातें या बातें सुनकर आनंदित होना।
वाक्य : दादी की कहानियाँ सुनते समय बच्चों की बातों की जलेबी छन रही थी।

अर्थ : किसी स्थान या समाज में अपना अस्तित्व न रहना या अकेला महसूस करना।
वाक्य : नए शहर में वह बिल्कुल कहीं का न रहना महसूस कर रहा था।

अर्थ : अचानक या चुपके से कहीं से गायब हो जाना।
वाक्य : चोरी पकड़ते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गया।

अर्थ : कुछ भी लिए बिना वापस जाना।
वाक्य : बाजार से खाली हाथ लौटने की वजह से माँ नाराज़ हुई।

अर्थ : किसी मुसीबत में फंसना या कठिनाई में पड़ना।
वाक्य : परीक्षा में न तैयार होने के कारण वह बुरे फँस गया।

अर्थ : किसी कार्य में अनुभव या योग्यता होना।
वाक्य : अच्छे शिक्षक होने के कारण उसका पेट में लंबी दाढ़ी थी।

अर्थ : किसी जगह में जीवन या गतिविधियों का होना, हलचल होना।
वाक्य : बाजार में त्योहारों के समय चहल-पहल मच गई थी।

2. निम्नलिखित शब्दों का वाक्य में प्रयोग करते हुए लिंग-निर्देश करें
रूमाल, ओहदा, भरण-पोषण, इज्जत, झनझनाहट, फरमाइश, छेड़खानी, पुलई, फिक्र, चादर
उत्तर: रूमाल
वाक्य: उसने पसीने पोंछने के लिए सफ़ेद रूमाल लिया।
लिंग: पुल्लिंग

ओहदा
वाक्य: वह कंपनी में उच्च ओहदा प्राप्त कर चुका है।
लिंग: पुल्लिंग

भरण-पोषण
वाक्य: माता-पिता अपने बच्चों का भरण-पोषण पूरी लगन से करते हैं।
लिंग: पुल्लिंग

इज्जत
वाक्य: गाँव में उसकी इज्जत बहुत है।
लिंग: स्त्रीलिंग

झनझनाहट
वाक्य: घंटी की झनझनाहट दूर तक सुनाई देती थी।
लिंग: स्त्रीलिंग

फरमाइश
वाक्य: उसने खाने में मीठा पकवान बनाने की फरमाइश की।
लिंग: स्त्रीलिंग

छेड़खानी
वाक्य: सड़क पर छेड़खानी बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
लिंग: स्त्रीलिंग

पुलई
वाक्य: मवेशियों के लिए उन्होंने ताजगी भरी पुलई बिछा दी।
लिंग: स्त्रीलिंग

फिक्र
वाक्य: माता-पिता बच्चों की फिक्र करते हैं।
लिंग: स्त्रीलिंग

चादर
वाक्य: ठंडी रात में उसने ऊनी चादर ओढ़ ली।
लिंग: स्त्रीलिंग

3. निम्नलिखित वाक्यों की बनावट बदलें
(क) सहसा मैं काफी गंभीर हो गया था, जैसा कि उस व्यक्ति को हो जाना चाहिए, जिस पर एक भारी दायित्व आ गया हो ।
(ख) माँ उसकी बड़ी गुस्सैल थी और उसको बहुत मारती थी ।
(ग) मार खाकर भैंस भागी-भागी उसकी माँ के पास चली गई, जो कुछ दूरी पर एक खेत में काम कर रही थी ।
(घ) मैं उससे बातचीत करना चाहता था, पर ऐसी इच्छा रहते हुए भी मैं जानबूझकर गंभीर हो जाता था और दूसरी ओर देखने लगता था ।
(ङ) निर्मला कभी-कभी उससे पूछती थी बहादुर, तुमको अपनी माँ की याद आती है ?
उत्तर: (क) सहसा मैं गंभीर हो गया, जैसा कि उस व्यक्ति को होना चाहिए जिस पर भारी जिम्मेदारी आती है।
(ख) उसकी माँ बहुत गुस्सैल थी और उसे अक्सर मारती थी।
(ग) मार खाने के बाद भैंस भागती हुई अपनी माँ के पास चली गई, जो थोड़ी दूर खेत में काम कर रही थी।
(घ) मैं उससे बात करना चाहता था, पर फिर भी जानबूझकर गंभीर हो जाता और दूसरी ओर देखने लगता।
(ङ) निर्मला कभी-कभी बहादुर से पूछती, “तुम्हें अपनी माँ की याद आती है?”

4. अर्थ की दृष्टि से निम्नलिखित वाक्यों के प्रकार बताएँ
(क) वह मारता क्यों था ?
(ख) वह कुछ देर तक उनसे खेलता था ।
(ग) दिन मजे में बीतने लगे ।
(घ) इसी तरह की फरमाइशें ।
(ङ) देख – बे मेरा काम सबसे पहले होना चाहिए ।
(च) रास्ते में कोई ढंग की दुकान नहीं मिली थी, नहीं तो उधर से ही लाती ।
उत्तर: (क) प्रश्नवाचक वाक्य
(ख) वर्णनात्मक (विवरणात्मक/कथात्मक) वाक्य
(ग) वर्णनात्मक/साधारण वाक्य
(घ) विस्मयादिबोधक वाक्य
(ङ) आज्ञार्थक वाक्य
(च) मिश्रित वाक्य

10th हिंदी गोधूली के अन्य अध्यायों के Solution भी देखें।

क्रमांक अध्याय
1 श्रम विभाजन एवं जातिप्रथा
2 विष के दाँत
3 भारत से हम क्या सीखें
4 नाखून क्यो बढ़ते हैं
5 नगरी लिपि
7 परंपरा का मूल्यांकन
8 जित-जित मैं निरखत हूँ
9 आविन्यों
10 मछली
11 नैबतख़ाने में इबादत
12 शिक्षा और संस्कृति

शब्द निधि

पंच-बराबर : दो पक्षों के बीच निर्णायक की तरह होना, पंच की तरह
ओहदा : पद
जून : वक्त
बेजुबान : मूक, भाषाविहीन
हिदायत : चेतावनी, सावधानी
शरारत : चंचलता, बदमाशी
शऊर : ढंग, शिष्टाचार, सलीका
तुच्छ : नगण्य, क्षुद्र
फरमाइश : आग्रह, निवेदन
नेकर : पैंट
पुलई : पेड़ की सबसे ऊँची शाखा
सवांग : सगा, परिवार का सदस्य
फिरकी : नाचने वाली घिरनी
कायल : आकांक्षी, अभ्यस्त, आदी
दायित्व : जिम्मेदारी
दर्पण : आईना
खूँट : साड़ी के आँचल से बँधी हुई गाँठ
घाघ : घुँटा हुआ, चतुर
हौंड़ना : मँथना, मँथाना
अलगनी : कपड़े डालने के लिए बँधी लंबी रस्सी, खूँटी

अमरकांत का संक्षिप्त परिचय :

अमरकांत हिंदी साहित्य के एक प्रमुख आधुनिक कहानीकार और लेखक थे। उनका जन्म 23 जुलाई 1925 को उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में हुआ था। उन्होंने जीवन के कठिन अनुभवों और समाज के विभिन्न पहलुओं को अपनी कहानियों में बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत किया। अमरकांत की रचनाओं में गाँव-शहर का जीवन, आम आदमी की मानसिकता, संघर्ष और मानवीय संवेदनाएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। उनकी लेखनी सरल लेकिन प्रभावशाली थी, जिससे पाठक पात्रों की भावनाओं और परिस्थितियों के साथ आसानी से जुड़ पाते थे।
अमरकांत ने सामाजिक और मानवीय विषयों पर कई कहानियाँ लिखीं, जिनमें उन्होंने आम जीवन की जटिलताओं और छोटे-छोटे घटनाक्रमों के माध्यम से बड़े अर्थ व्यक्त किए। उनके साहित्य में इंसान की कमजोरियों, आशाओं और जीवन की सच्चाइयों को गहराई से चित्रित किया गया है। इन्हीं कारणों से उन्हें हिंदी कहानी साहित्य में विशेष स्थान प्राप्त है और उनकी रचनाएँ आज भी पाठकों के लिए प्रेरणास्रोत मानी जाती हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

नीचे इस अध्याय से संबंधित कुल 40 वस्तुनिष्ठ प्रश्न दिए गए हैं। ये प्रश्न अध्याय के गहन अध्ययन के आधार पर तैयार किए गए हैं तथा इनमें से कई प्रश्न पिछले वर्षों की बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा से भी लिए गए हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास करने से आपको परीक्षा की तैयारी में काफी मदद मिलेगी और यह समझने में आसानी होगी कि परीक्षा में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
1. ‘बहादुर’ शीर्षक कहानी की निर्मला कौन थी?
(A) लेखक की बहन
(B) लेखक की पत्नी
(C) लेखक के रिश्तेदार
(D) लेखक की माँ

2. ‘जिंदगी और जोंक’ किस लेखक की रचना है?
(A) भीमराव अंबेदकर
(B) गुणाकर मुले
(C) अशोक वाजपेयी
(D) अमरकांत

3. बहादुर को लेकर कौन आया था?
(A) लेखक का भाई
(B) लेखक का साला
(C) लेखक की बहन
(D) लेखक की चाची

4. लेखक अमरकांत ने हाई-स्कूल की शिक्षा कहाँ से प्राप्त की?
(A) बलिया
(B) छपरा से
(C) आरा से
(D) बक्सर से

5. बहादुर कहाँ से भागकर आया था?
(A) भोपाल से
(B) नेपाल से
(C) बंगाल से
(D) तिब्बत से

6. ‘बहादुर’ शीर्षक कहानी में ‘किशोर’ कौन था?
(A) लेखक का पुत्र
(B) लेखक के साले का पुत्र
(C) लेखक के भाई का पुत्र
(D) लेखक का चचेरा भाई

7. ‘बहादुर’ का पूरा नाम क्या है?
(A) शेखबहादुर
(B) दिलबहादुर
(C) दिलनबहादुर
(D) शिवबहादुर

8. बहादुर शीर्षक कहानी के लेखक कौन हैं?
(A) अमरकांत
(B) गुणाकर मुले
(C) विनोद कुमार शुक्ल
(D) यतीन्द्र मिश्र

9. हिन्दी के सशक्त कथाकार अमरकांत का जन्म कहाँ हुआ है?
(A) अमरावती महाराष्ट्र
(B) बदरघाट पटना
(C) नागरा बलिया उत्तरप्रदेश
(D) उन्नाव उत्तरप्रदेश

10. लेखक अमरकांत का जन्म कब हुआ था?
(A) जुलाई 1925 ई० में
(B) अगस्त 1928 ई० में
(C) मार्च 1924 ई० में
(D) जून 1927 ई० में

11. अमरकांत लिखित कहानी का नाम है?
(A) ईदगाह
(B) ठेस
(C) मछली
(D) बहादुर

12. ‘बहादुर’ कहानी का पात्र बहादुर क्या है?
(A) ड्राइवर
(B) घरेलू नौकर
(C) लेखक का मित्र है
(D) लेखक का साला है

13. बहादुर लेखक के घर से क्या लेकर भागा था?
(A) कपड़े
(B) विस्तरा
(C) जूते
(D) कोई भी सामान नहीं ले गया

14. बहादुर कहाँ का रहने वाला था?
(A) बिहार
(B) उत्तरप्रदेश
(C) नेपाल
(D) भूटान

15. बहादुर के नाम से ‘दिल’ शब्द किसने उड़ा दिया?
(A) लेखक ने
(B) लेखक के साले साहब ने
(C) निर्मला ने
(D) किशोर ने

16. बहादुर अपने घर से क्यों भागा था?
(A) नौकरी के लिए
(B) पिता के फटकार के कारण
(C) माँ की मार के कारण
(D) घूमने के लिए

17. बहादुर की शारीरिक बनावट कैसी थी?
(A) ठिगना चकइठ शरीर
(B) गोरा रंग
(C) चपटा मुँह
(D) उपर्युक्त सभी

18. लेखक के घर जब पहली बार आया था तो बहादुर क्या पहने हुए था?
(A) सफेद नेकर
(B) आधी बाँह की सफेद कमीज
(C) भूरे रंग का पुराना जूता
(D) उपर्युक्त सभी

19. ‘वानर-सेना’ नामक एक बाल उपन्यास किसने लिखा है?
(A) गुणाकर मुले
(B) यतीन्द्र मिश्र
(C) विनोद कुमार शुक्ल
(D) अमरकांत

20. मैं वहीं चारपाई पर सिर झुकाकर बैठ गया। मुझे एक अजीव-सी लघुता का अनुभव हो रहा था। यदि मैं नहीं मारता तो शायद वह न जाता। यह गद्यांश किस पाठ का है?
(A) मछली
(B) परंपरा का मूल्यांकन
(C) बहादुर
(D) विष के दाँत

21. उसकी हँसी बड़ी कोमल और मीठी थी जैसे फूल की पंखुड़ियाँ बिखर गई हों। उपर्युक्त कथन किसके संबंध में कही गई है?
(A) निर्मला
(B) किशोर
(C) बहादुर
(D) इनमें से कोई नहीं

22. बहादुर का बाप कहाँ मारा गया था?
(A) युद्ध में
(B) डकैती में
(C) चोरी में
(D) चरवाही में

23. बहादुर से मार खाकर भैंस भागी-भागी किसके पास चली आई?
(A) बहन के
(B) माँ के
(C) नानी के
(D) चाची के

24. किशोर से मार खाने के बाद बहादुर–
(A) प्रतिरोध करता
(B) हंगामा खड़ा करता
(C) चुपचाप कोने में खड़ा हो जाता
(D) रोने लगता

25. बहादुर के संबंध में क्या सही नहीं है?
(A) एक नेपाली लड़का
(B) बहुत ही हँसमुख और मेहनती था
(C) माँ से पिटाई के कारण घर छोड़कर भाग गया था
(D) वह लेखक के रिश्तेदार का पैसा चुरा लिया था

26. दिल बहादुर है–
(A) लेखक का मित्र
(B) लेखक का पड़ोसी
(C) लेखक का नौकर
(D) लेखक का ड्राइवर

27. बहादर को ‘सुअर का बच्चा’ किसने कहा?
(A) लेखक ने
(B) निर्मला ने
(C) किशोर ने
(D) लेखक के रिश्तेदार ने

28. किनकी कहानियों में मध्य वर्ग, विशेषकर निम्न मध्य वर्ग के जीवनानुभवों और जिजीविषा का वेहद प्रभावशाली और अंतरंग चित्रण मिलता है?
(A) गुणाकर मुले
(B) अमरकांत
(C) रामविलास शर्मा
(D) हजारी प्रसाद द्विवेदी

29. लेखक के बड़े लड़के का नाम क्या है?
(A) बहादुर
(B) मदन
(C) किशोर
(D) कुणाल

30. ‘जिंदगी और जोंक’ किनकी रचना है?
(A) अमरकांत
(B) विनोद कुमार शुक्ल
(C) गुणाकार मुले
(D) यतीन्द्र मिश्र

31. अमरकांत की कौन-सी कहानी अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता में पुरस्कृत हुई थी?
(A) बहादुर
(B) डिप्टी कलक्टरी
(C) जिंदगी और जोंक
(D) कुहासा

32. बहादुर के चले जाने के बाद किसे अजीव-सी लघुता का अनुभव हो रहा था?
(A) लेखक को
(B) निर्मला को
(C) किशोर को
(D) रिश्तदार को

33. बहादुर की माँ गुस्से से पागल क्यों हो गयी थी?
(A) बहादुर ने भैंस को मारा था
(B) बहादुर ने कुत्ते को मारा था
(C) बहादुर ने बिल्ली को मारा था
(D) बहादुर माँ का काम नहीं करता था

34. ‘बहादुर’ कैसी कहानी है?
(A) धार्मिक
(B) तार्किक
(C) सामाजिक
(D) ऐतिहासिक

35. बहादुर पर कितने रुपये की चोरी का इल्जाम लगा था?
(A) 10 रुपये
(B) 11 रुपये
(C) 12 रुपये
(D) 13 रुपये

36. लेखक के रिश्तेदार ने बहादुर पर क्या आरोप लगाए?
(A) पैसे चुराने का
(B) गहने चुराने का
(C) अंगूठी चुराने का
(D) मोती चुराने का

37. कहानी है–
(A) नाखून क्यों बढ़ते हैं
(B) बहादुर
(C) नौबतखाने में इबादत
(D) परंपरा का मूल्यांकन

38. बहादुर लेखक के घर से अचानक क्यों चला गया?
(A) दूसरी नौकरी मिल जाने के कारण
(B) माँ की याद आने के कारण
(C) स्वयं के प्रति लेखक तथा उसके घरवालों के व्यवहार में आए परिवर्तन के कारण
(D) उपर्युक्त सभी

39. बहादुर लेखक को क्या कहकर संबोधित करता था?
(A) मालिक
(B) साहब
(C) बाबुजी
(D) साबजी

40. बहादुर पर चोरी का आरोप कौन लगाता है?
(A) लेखक
(B) निर्मला
(C) किशोर
(D) निर्मला के रिश्तेदार

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निष्कर्ष :

ऊपर आपने बिहार बोर्ड कक्षा 10 की हिन्दी पुस्तक “गोधूली भाग 2” के गद्यखंड के छठें अध्याय “बहादुर” की व्याख्या, बोध-अभ्यास, महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को पढ़ा। हमें उम्मीद है कि यह सामग्री आपके अध्ययन को और सरल व प्रभावी बनाएगी। यदि किसी प्रश्न या समाधान को लेकर आपके मन में कोई शंका हो, तो आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं या सीधे हमसे संपर्क करें। हम आपकी मदद करने की पूरी कोशिश करेंगे। संपर्क करें
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