BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-8 Solution

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BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-8 Solution "जित जित मैं निखरत हूँ" and pdf

इस पोस्ट में हम बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक “गोधूली” के आठवें अध्याय “जित जित मैं निखरत हूँ” के कवि परिचय, कहानी का सारांश, कवि परिचय, सभी प्रश्नों के समाधान, महत्त्वपूर्ण एवं संभावित प्रश्न और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों ( Objective Questions) को विस्तार से देखने वाले हैं।
हमारा प्रयास आपको परीक्षा की तैयारी करवाना है ताकि आप अपने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें। इस अध्याय के सभी प्रश्नोत्तरों एवं व्याख्याओं का PDF भी आप निशुल्क डाउनलोड (Download) कर सकते हैं। PDF लिंक नीचे उपलब्ध है, जिससे आप इसे ऑफलाइन भी पढ़ सकते हैं।

"जित जित मैं निखरत हूँ" की मुख्य बातें

इस पाठ “पंडित बिरजू महाराज” में महान कथक नृत्यांगन बिरजू महाराज के व्यक्तित्व, साधना, कला-दृष्टि और जीवनानुभवों को आत्मीय ढंग से प्रस्तुत किया गया है। आज कथक और बिरजू महाराज एक-दूसरे के पर्याय माने जाते हैं। उनकी ख्याति केवल मंचीय प्रतिभा की देन नहीं, बल्कि सतत साधना, कल्पनाशीलता और परंपरा के प्रति सम्मान के साथ नवाचार की दृष्टि का परिणाम है। उन्होंने कथक को केवल शास्त्रीय ढाँचे तक सीमित न रखकर उसका विस्तार नई दिशाओं में किया और सिद्ध किया कि शास्त्रीय कला जड़ नहीं, बल्कि समय के साथ चलने वाली जीवंत विधा है।

उनका व्यक्तित्व सरल, सहज, हँसमुख और मिलनसार बताया गया है। बाहरी रूप से साधारण दिखने वाला यह कलाकार मंच पर आते ही ऊर्जा, लोच और अभिव्यक्ति से भर उठता है। उनमें लखनऊ घराने की सात पीढ़ियों की परंपरा का सौंदर्य सजीव रूप में दिखाई देता है। पाठ में उनकी शिष्या रश्मि वाजपेयी के साथ हुई बातचीत के माध्यम से उनके जीवन के अंतरंग पक्ष उभरते हैं। इसमें बचपन की सीख, कठिन परिस्थितियाँ, काव्य–रचनाएँ, कला के प्रति समर्पण और उनका संवेदनशील हृदय उजागर होता है। पाठ यह संदेश देता है कि सच्ची कला केवल अभ्यास से नहीं, बल्कि विनम्रता, संवेदना और निरंतर साधना से पूर्ण होती है।

इस विषय का हमारा समाधान ही क्यों?

  • हमारा समाधान बिहार बोर्ड कक्षा 10 के न्यूनतम पाठ्यक्रम (Syllabus) पर आधारित है।
  • यह समाधान सरल, आसान और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
  • हिंदी गोधूली के अभ्यास (Exercise) समाधान के साथ अनेक महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी दिए गए हैं।
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पंडित बिरजू महाराज का संक्षिप्त परिचय

अध्याय – 8 जित जित मैं निरखत हूँ
पूरा नाम पंडित बिरजू महाराज
घराना / परंपरा लखनऊ घराना, कथक की सातवीं पीढ़ी
विशेष पहचान कथक नृत्य के पर्याय, परंपरा और नव सृजन के मिश्रण के धरोहर
स्वभाव / व्यक्तित्व सौम्य, हँसमुख, मिलनसार, सहज और निष्कपट
सर्जनात्मक योगदान कथक को नए आयाम देना, शास्त्रीय कला को समकालीनता से जोड़ना
नृत्य शैली की विशेषता लोच, फुर्ती, हल्कापन और सौंदर्य की जीवंत अभिव्यक्ति
महत्वपूर्ण साक्षात्कार ‘नटरंग’ पत्रिका की संपादक रश्मि वाजपेयी से वार्ता
अन्य विशेष तथ्य उनकी दो काव्य रचनाएँ पाठ में समाहित हैं

बोध और अभ्यास प्रश्न

पाठ के साथ

Q1: लखनऊ और रामपुर से बिरजू महाराज का क्या संबंध है ?
उत्तर : बिरजू महाराज का जन्म लखनऊ में हुआ था। वे कथक की लखनऊ घराने की परंपरा से जुड़े हुए हैं। उनके पिता भी वहीं दरबार से संबंध रखते थे। बाद में उनका परिवार रामपुर चला गया, जहाँ उनकी बहनों का जन्म हुआ और महाराज ने अपने प्रारंभिक जीवन का महत्वपूर्ण समय वहीं बिताया।
Q2: रामपुर के नवाब की नौकरी छूटने पर हनुमान जी को प्रसाद क्यों चढ़ाया ?
उत्तर : बिरजू महाराज जब छोटे थे, तब उनके पिता रामपुर के नवाब के दरबार में नृत्य करते थे। उस समय वे केवल छह वर्ष के थे और इतनी कम उम्र में नृत्य कराना परिवार के लिए चिंता का विषय था। उनकी माँ (अम्मा) चाहती थीं कि बच्चे को इतनी छोटी उम्र में दरबारी नौकरी से मुक्ति मिले। उनके पिता ने भगवान हनुमान से प्रार्थना की थी कि यदि यह नौकरी छूट जाए तो वे प्रसाद चढ़ाएँगे। जब नवाब की नौकरी छूट गई तो उन्होंने इसे ईश्वर की कृपा मानकर हनुमान जी को प्रसाद चढ़ाया।
Q3: नृत्य की शिक्षा के लिए पहले-पहल बिरजू महाराज किस संस्था से जुड़े और वहाँ किनके सम्पर्क में आए ?
उत्तर : नृत्य की शिक्षा के प्रारंभिक चरण में बिरजू महाराज “हिंदुस्तानी डांस म्यूजिक स्कूल” से जुड़े। यह संस्था निर्मला जोशी जी की थी। वहाँ वे कई महत्वपूर्ण नृत्यांगनाओं और कलाकारों के संपर्क में आए, जिनमें कपिला वात्स्यायन, लीला कृपलानी और अन्य सांस्कृतिक कार्यकर्ता प्रमुख थीं। इन लोगों से मिलकर उनके व्यक्तित्व और कला-दृष्टि को नई दिशा मिली।
Q4: किनके साथ नाचते हुए बिरजू महाराज को पहली बार प्रथम पुरस्कार मिला ?
उत्तर : बिरजू महाराज को पहली बार प्रथम पुरस्कार कलकत्ता में मिला। उस प्रस्तुति में उन्होंने अपने पिता अच्चन महाराज और चाचा शंभू महाराज के साथ नृत्य किया था। यही उनका पहला सार्वजनिक सम्मान था, जिसने आगे चलकर उनकी कला-यात्रा को नई पहचान दी।
Q5: बिरजू महाराज के गुरु कौन थे ? उनका संक्षिप्त परिचय दें ।
उत्तर : बिरजू महाराज के प्रमुख गुरु उनके पिता अच्‍चन महाराज थे, जिन्हें वे स्नेहपूर्वक “बाबूजी” कहते थे। अच्‍चन महाराज लखनऊ घराने के प्रसिद्ध कथक नर्तक थे और दरबारी नृत्य परंपरा से जुड़े हुए थे। वे गंभीर, संवेदनशील और विनम्र स्वभाव के कलाकार थे। वे अपने दुख या कठिनाइयों को प्रकट नहीं करते थे और पूरी तरह कला-साधना के लिए समर्पित थे। बिरजू महाराज को कथक की प्रारंभिक और मूल शिक्षा उन्होंने ही दी। जब बिरजू महाराज साढ़े नौ वर्ष के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया, लेकिन तब तक वे उन्हें कथक की मजबूत बुनियाद दे चुके थे।
Q6: बिरजू महाराज ने नृत्य की शिक्षा किसे और कब देनी शुरू की ?
उत्तर : बिरजू महाराज ने अपने शागिर्दों को नृत्य की शिक्षा तब देना शुरू किया, जब उन्हें योग्य और उत्साही सीखने वाले की तलाश थी। इस दौरान उन्होंने रश्मि वाजपेयी को करीब 56 वर्ष की उम्र में प्रशिक्षित करना आरंभ किया। रश्मि जी उनकी प्रमुख शिष्या बनीं, और उन्हें महाराज की पूर्ण तालीम और कला का ज्ञान प्राप्त हुआ।
Q7: बिरजू महाराज के जीवन में सबसे दुखद समय कब आया ? उससे संबंधित प्रसंग का वर्णन कीजिए ।
उत्तर : बिरजू महाराज के जीवन में सबसे दुःखद समय उनके पिता (बाबूजी) की मृत्यु के समय आया। उस समय वे केवल नौ वर्ष के थे और परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। घर में इतने पैसे नहीं थे कि उनके पिता का दसवाँ किया जा सके। कठिन परिस्थितियों में महाराज ने दस दिनों के भीतर दो प्रोग्राम किए और उनसे 500 रुपए इकट्ठे किए। इसी राशि से पिता का दसवाँ और तेरह की व्यवस्था की गई। उस समय न केवल अपने पिता की मृत्यु का शोक झेलना था, बल्कि नाचते हुए आवश्यक धन जुटाना भी उनकी जिम्मेदारी थी। यह समय बिरजू महाराज के जीवन का सबसे कठिन और दुःखदायी अनुभव माना जाता है।
Q8: शंभु महाराज के साथ बिरजू महाराज के संबंध पर प्रकाश डालिए ।
उत्तर : बिरजू महाराज बचपन में ही शंभू महाराज के साथ नाचते थे। शंभू महाराज उनके चाचा थे और उन्होंने बिरजू महाराज के नृत्य कौशल के विकास में मार्गदर्शन दिया। बाद में जब बिरजू महाराज भारतीय कला केंद्र में आए, तब भी उन्हें शंभू महाराज का सान्निध्य मिला। शंभू महाराज के साथ सहयोग और सहायक के रूप में काम करते हुए महाराज ने अपनी कला को और निखारा। बचपन से ही शंभू महाराज का मार्गदर्शन और प्रेरणा उनके जीवन और नृत्य में महत्वपूर्ण रही।
Q9: कलकत्ते के दर्शकों की प्रशंसा का बिरजू महाराज के नर्तक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर : कलकत्ते में एक कांफ्रेंस में बिरजू महाराज ने जब नृत्य प्रस्तुत किया, तब वहां के दर्शकों ने उनकी प्रस्तुति की अत्यधिक प्रशंसा की। उनकी तारीफ अखबारों में भी प्रकाशित हुई। इस अनुभव ने बिरजू महाराज के नर्तक जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया। इसके बाद उन्हें अपनी कला में और मेहनत करने और नए आयाम स्थापित करने की प्रेरणा मिली। कलकत्ते की इस सराहना ने उन्हें आत्मविश्वास और पहचान दिलाई, जिससे वे आगे निरंतर उन्नति करते गए और अपने नृत्य को नई ऊँचाइयों तक ले गए।
Q10: संगीत भारती में बिरजू महाराज की दिनचर्या क्या थी ?
उत्तर : संगीत भारती में बिरजू महाराज की दिनचर्या बेहद अनुशासित थी। वे सुबह चार बजे उठकर रियाज़ करते थे। सुबह पाँच से आठ बजे तक लगातार अभ्यास करते और फिर एक घंटे में तैयार होकर सुबह की क्लास में जाते। वहाँ दो घंटे की कक्षा लेने के बाद वे वापस घर लौटते और फिर दोबारा अभ्यास करते। इस तरह तीन साल तक उन्होंने नियमित रूप से रियाज़ और शिक्षा जारी रखी। उस समय उन्हें संगीत भारती से मासिक 250 रुपए मिलते थे और वे दरियागंज में रहते थे। रोज़ाना पाँच या नौ नंबर की बस पकड़कर संगीत भारती पहुंचते थे। हालांकि, प्रदर्शन के अवसर उन्हें कम मिलते थे और उन्हें अपनी कला पूरी तरह दिखाने का पर्याप्त मौका नहीं मिलता था। इस कारण कुछ समय बाद वे दुखी होकर नौकरी छोड़ने के निर्णय पर पहुँचे।
Q11: बिरजू महाराज कौन-कौन से वाद्य बजाते थे ?
उत्तर : बिरजू महाराज ने अपने बचपन से ही विभिन्न वाद्यों का अभ्यास किया। वे तबला, सितार, गिटार, हारमोनियम, बाँसुरी और सरोद बजाते थे। बचपन में शौक के लिए उन्होंने इन वाद्यों का अभ्यास किया और कभी-कभी संगीत के माध्यम से खुद को रिलैक्स करने के लिए भी इन्हें बजाते थे। शुरुआती दिनों में सितार और गिटार बजाते रहे, फिर बाँसुरी और हारमोनियम का अभ्यास किया। तबला उनकी प्राथमिक शिक्षा का हिस्सा रहा और सरोद भी उनका शौक था।
Q12: अपने विवाह के बारे में बिरजू महाराज क्या बताते हैं ?
उत्तर : बिरजू महाराज की शादी 18 साल की उम्र में हुई। वह बताते हैं कि यह उनके लिए गलती रही, क्योंकि वे चाहते थे कि पहले अपने करियर और नृत्य में सफलता प्राप्त करें और उसके बाद विवाह करें। लेकिन उनके पिताजी की मृत्यु और माँ की चिंता के कारण, घबराहट में यह विवाह जल्दी कर दिया गया। महाराज इसे नुकसानदेह मानते हैं, क्योंकि विवाह और गृहस्थ जीवन ने उन्हें अपने नृत्य और रियाज में पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने से रोका।
Q13: बिरजू महाराज की अपने शागिर्दों के बारे में क्या राय है ?
उत्तर : बिरजू महाराज अपने शागिर्दों के बारे में बताते हैं कि वे केवल नृत्य को सीखने वाले नहीं, बल्कि कला के प्रति समर्पित और मेहनती हों। वे अपनी शिष्य रश्मि वाजपेयी को विशेष महत्व देते हैं और उन्हें शाश्वती कहते हैं। इसके अलावा वैरोनिक, फिलिप मेक्लीन, तीरथ प्रताप, प्रदीप और दुर्गा आदि शागिर्दों की प्रगति और तरक्की की भी चर्चा करते हैं। महाराज का मानना है कि सच्चा शिष्य वही है जो पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ सीखता है और कला को आगे बढ़ाता है।
Q14: व्याख्या करें –
(क) पाँच सौ रुपए देकर मैंने गण्डा बँधवाया ।
(ख) मैं कोई चीज चुराता नहीं हूँ कि अपने बेटे के लिए ये रखना है, उसको सिखाना है ।
(ग) मैं तो बेचारा उसका असिस्टेंट हूँ । उस नाचने वाले का ।
उत्तर : (क) इस पंक्ति का संबंध बिरजू महाराज के पिता से है। बिरजू महाराज ने अपने आरंभिक गुरु यानी पिता से नृत्य की शिक्षा प्राप्त की। पिता ने कहा कि जब तक गुरु-दक्षिणा नहीं दी जाएगी, गंडा नहीं बंधेगा। बिरजू महाराज को दो प्रोग्राम करके 500 रुपये मिले। उन्होंने यह राशि पिता को गुरु-दक्षिणा के रूप में दी, तभी पिता ने गंडा बाँधा। इससे यह स्पष्ट होता है कि गुरु-शिष्य परंपरा पवित्र होती है और उसकी मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है। पिता-पुत्र संबंध होते हुए भी गुरु-शिष्य का सम्मान उन्होंने सर्वोपरि रखा।

(ख) इस पंक्ति में बिरजू महाराज की उदारता और शिष्य-प्रियता झलकती है। वे शिष्यों के साथ समान व्यवहार करते थे और किसी को कुछ सिखाने में पक्षपात नहीं करते थे। उन्होंने अपने पुत्र या अन्य शिष्यों के बीच कोई भेदभाव नहीं रखा। कला को साझा करना और शिष्य की प्रगति के प्रति उनकी निष्ठा इस पंक्ति में स्पष्ट है।

(ग) इस पंक्ति में बिरजू महाराज अपने को नृत्य के सहायक के रूप में प्रस्तुत करते हैं। दर्शकों का प्यार और प्रशंसा न उनके लिए है, बल्कि उनके नृत्य के लिए है। वे मानते हैं कि कला सर्वोपरि है और सम्मान उस गुण या कला को मिलता है। महाराज स्वयं इसे साधारण मानते हैं और अपनी भूमिका केवल सहायक की बताते हैं।
Q15: बिरजू महाराज अपना सबसे बड़ा जज किसको मानते थे ?
उत्तर : बिरजू महाराज अपना सबसे बड़ा जज अपनी अम्मा को मानते थे। जब वे नाचते थे, तो अम्मा उनकी प्रस्तुति को ध्यानपूर्वक देखती थीं। महाराज अपनी कमी या अच्छाई के बारे में अम्मा से राय लेते थे। अम्मा अपने अनुभव और समझ के अनुसार उन्हें सुधारने की दिशा सुझाती थीं। उन्होंने बिरजू महाराज को बाबूजी के मानकों और कला के उच्चतम स्तर के अनुसार मार्गदर्शन दिया। इस प्रकार अम्मा ही उनके नृत्य और व्यक्तित्व की प्रगति में सबसे बड़ा निर्णायक एवं प्रेरक थीं।
Q16: पुराने और आज के नर्तकों के बीच बिरजू महाराज क्या फर्क पाते हैं ?
उत्तर : बिरजू महाराज के अनुसार पुराने नर्तक अपने नृत्य में केवल कला का प्रदर्शन करते थे। उनके लिए नृत्य प्रेम और उत्साह का माध्यम था। साधनों की कमी, छोटी जगह, गलीचे पर गड्ढा या खाँचा होने जैसी परेशानियों के बावजूद वे बेपरवाह होकर अपना प्रदर्शन करते थे। उनके नृत्य में प्राकृतिक सहजता और समर्पण दिखाई देता था। इसके विपरीत आज के नर्तक मंच की छोटी-छोटी गलतियों पर ध्यान देते हैं और उन्हें चर्चा का विषय बना देते हैं। आज सुविधाएँ तो पूरी हैं—जैसे एयर कंडीशन, अच्छा मंच, तकनीकी सहायता—लेकिन इसके बावजूद लोग मीन-मेख निकालने की प्रवृत्ति रखते हैं। बिरजू महाराज इसे पुराने नर्तकों और आज के कलाकारों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर मानते हैं।

भाषा की बात

1. काल रचना स्पष्ट करें
(क) ये शायद 43 की बात रही होगी ।
(ख) यह हाल अभी भी है ।
(ग) उस उम्र में न जाने क्या नाचा रहा होऊँगा ।
(घ) अब पचास रुपए में रिक्शे पर खर्च करता तो क्या बचता, और ट्यूशन में नागा हो तो पैसा अलग काट लेते थे ।
(ङ) पचास रुपए में काम करके किसी तरह पढ़ता रहा मैं ।
उत्तर: (क) भूतकाल (अनुमानसूचक भूतकाल)
व्याख्या: यहाँ अतीत की घटना का अनुमान लगाया गया है — “रही होगी” से अनुमान व्यक्त हो रहा है।
(ख) सामान्य वर्तमान काल
व्याख्या: “अभी भी है” वर्तमान में चल रही अथवा स्थायी स्थिति को दर्शाता है।
(ग) अनुमानसूचक भूतकाल
व्याख्या: यहाँ अतीत के बारे में अनुमान या कल्पना व्यक्त की गई है।
(घ) मिश्रित काल
“खर्च करता तो क्या बचता” — संभाव्य वर्तमान/अतीत
(ङ) अपूर्ण भूतकाल
व्याख्या: “पढ़ता रहा” से अतीत में चलने वाली प्रक्रिया का बोध होता है।

2. अर्थ की रक्षा करते हुए वाक्य की बनावट बदलें
(क) चौदह साल की उम्र में, जब मैं वापस लखनऊ आया फेल होकर, तब कपिला जी अचानक लखनऊ पहुँचीं मालूम करने कि लड़का जो है वह कुछ करता भी है या आवारा या गिरहकट हो गया, वह है कहाँ ।
(ख) वह तीन साल मैंने खूब रियाज किया, मतलब यही सोचकर कि यही टाइम है अगर कुछ बढ़ना है तो अंधेरा कमरा करके किया करता था जब बाद में थक जाऊँ मैं तो जो भी साज हाथ आए कभी सितार, कभी गिटार, कभी हारमोनियम लेकर बजाऊँ मतलब रिलैक्स होने के लिए ।
उत्तर: (क) जब मैं चौदह साल की उम्र में फेल होकर लखनऊ लौटा, तब कपिला जी अचानक वहाँ यह पता लगाने पहुँचीं कि मैं कहाँ हूँ और क्या कर रहा हूँ — कहीं मैं आवारा या जेबकतरा (गिरहकट) तो नहीं बन गया।
(ख) उन तीन वर्षों में मैंने खूब रियाज़ किया। मैं सोचता था कि अगर आगे बढ़ना है तो यही समय है। मैं अँधेरा कमरा करके अभ्यास करता था, और जब थक जाता तो आराम के लिए जो भी साज़ हाथ में आ जाए—कभी सितार, कभी गिटार, कभी हारमोनियम—उसे बजाने लगता।

3. पाठ से ऐसे दस वाक्यों का चयन कीजिए जिससे यह साबित होता हो कि ये वाक्य आमने-सामने बैठे व्यक्तियों के बीच की बातचीत के हैं, लिखित भाषा के नहीं ।
उत्तर: 1. “ये शायद 43 की बात रही होगी।”
2. “यह हाल अभी भी है।”
3. “उस उम्र में न जाने क्या नाचा रहा होऊँगा।”
4. “अब पचास रुपए में रिक्शे पर खर्च करता तो क्या बचता, और ट्यूशन में नागा हो तो पैसा अलग काट लेते थे।”
5. “पचास रुपए में काम करके किसी तरह पढ़ता रहा मैं।”
6. “मैं तो बेचारा उसका असिस्टेंट हूँ।”
7. “मैं कोई चीज चुराता नहीं हूँ कि अपने बेटे के लिए ये रखना है, उसको सिखाना है।”
8. “पांच सौ रुपए देकर मैंने गंडा बंधवाया।”
9. “मेरी अम्मा ही मेरा सबसे बड़ा जज थी।”
10. “कपिला जी अचानक लखनऊ पहुँचीं मालूम करने कि लड़का जो है वह कुछ करता भी है या आवारा या गिरहकट हो गया, वह है कहाँ।”

4. निम्नलिखित वाक्यों से अव्यय का चुनाव करें
(क) जब अंडा कहकर पूछें तो नहीं खाता था, पर जब मूंग की दाल कहें तो बड़े मजे से खा लेता था ।
(ख) एक सीताराम बागला करके लड़का था अमीर घर का ।
(ग) बिलकुल पैसा नहीं था घर में कि उनका दसवाँ किया जा सके ।
(घ) फिर जब एक साल हो गया तो कहने लगे कि अब तुम परमानेंट हो गए ।
उत्तर: (क) जब, तो, नहीं, पर, बड़े, से
(ख) करके
(ग) बिलकुल, कि, जा
(घ) फिर, जब, तो, कि, अब

10th हिंदी गोधूली के अन्य अध्यायों के Solution भी देखें।

क्रमांक अध्याय
1 श्रम विभाजन एवं जातिप्रथा
2 विष के दाँत
3 भारत से हम क्या सीखें
4 नाखून क्यो बढ़ते हैं
5 नगरी लिपि
6 बहादुर
7 परंपरा का मूल्यांकन
9 आविन्यों
10 मछली
11 नैबतख़ाने में इबादत
12 शिक्षा और संस्कृति

शब्द निधि

क्रोड़स्थ : गोद या अंक में स्थित
हलकारे : संदेशवाहक, कारिंदा
साफा : साफ लंबा वस्त्र जिसे नर्तक कंधे से लेकर कमर तक लपेट लेता है
अचकन : पोशाक विशेष
मेजरमेंट : नाप, माप
मस्का : मक्खन (मस्का लगाना या मक्खन लगाना मुहावरा भी है)
परन : तबले के वे बोल जिन पर नर्तक नाचता और ताल देता है
बंदिश : ठुमरी या अन्य प्रकार के गायन के बोल, स्थायी
दाल का चिल्ला : उबले हुए दाल को मसलकर बनाया गया व्यंजन
गण्डा बाँधना : दीक्षित करना, शिष्य स्वीकार करना
नजराना : भेंट, उपहार, गुरुदक्षिणा
नागा : अनुपस्थित, हाजिर नहीं होना, गायब रहना
गिरहकट : पैंतरेबाज, गाँठ काट लेनेवाला, पाकेटमार विशेष
परमानेंट : स्थायी
चरण : छंद की एक इकाई
टुकड़े : किसी पद की पंक्ति
तिहाइयाँ : तीसरे हिस्से
बैले : यूरोपीय नृत्य विशेष जिसमें कथानक, भावाभिनय और नृत्य तीनों शामिल होते हैं
अरसा : समय, अवधि
गलीचा : फर्श या बिस्तर जो नरम हो
मिजराब : सितार बजाने का एक तरह का छल्ला
लहरा : छंदमय आरोही गति जो भावप्रसंग के साथ हो
शागिर्द : शिष्य
लाजवाब : जिसका जवाब न हो, अद्वितीय, अनुपम

पंडित बिरजू महाराज का संक्षिप्त परिचय :

पंडित बिरजू महाराज का जन्म लखनऊ में हुआ था और बचपन का कुछ समय रामपुर में भी व्यतीत हुआ। उन्हें भारतीय शास्त्रीय नृत्य कथक की शिक्षा उनके पिता से मिली, जो उनके पहले गुरु थे। बचपन में ही उन्होंने विभिन्न मंचों पर प्रदर्शन किया और कलकत्ता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर अपनी कला का लोहा मनवाया। शंभू महाराज, उनके चाचा, ने भी उनके नृत्य जीवन में मार्गदर्शन किया। बिरजू महाराज संगीत भारती में भी नृत्य का अभ्यास और प्रदर्शन करते रहे, साथ ही विभिन्न वाद्य यंत्र जैसे सितार, गिटार, हारमोनियम, बाँसुरी, तबला और सरोद बजाना भी सीखें।

उन्होंने नृत्य की शिक्षा अपने शिष्यों को भी दी, जिसमें रश्मि वाजपेयी, वैरोनिक, फिलिप, तीरथ प्रताप आदि प्रमुख हैं। बिरजू महाराज हमेशा कला और गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सजीव और समर्पित रहे। अपने नृत्य और जीवन में वे सरल, उदार और अपने शिष्यों के प्रति निष्पक्ष रहे। वे स्वयं को नृत्य का सहायक मानते थे और कला को सर्वोपरि रखते थे। बिरजू महाराज का जीवन संघर्षों, समर्पण और कला के प्रति अथाह प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने कथक को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाई और इसे जीवंत रखा।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

नीचे इस अध्याय से संबंधित कुल 40 वस्तुनिष्ठ प्रश्न दिए गए हैं। ये प्रश्न अध्याय के गहन अध्ययन के आधार पर तैयार किए गए हैं तथा इनमें से कई प्रश्न पिछले वर्षों की बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा से भी लिए गए हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास करने से आपको परीक्षा की तैयारी में काफी मदद मिलेगी और यह समझने में आसानी होगी कि परीक्षा में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
1. पंडित बिरजू महाराज किस घराने के वंशज थे?
(A) बनारस घराना
(B) लखनऊ घराना
(C) डुमराँव घराना
(D) जयपुर घराना

2. बिरजू महाराज का संबंध किससे है?
(A) तबला वादन से
(B) संतूर वादन से
(C) बाँसुरी वादन से
(D) इनमें से कोई नहीं

3. ‘जित-जित मैं निरखत हूँ’ पाठ के लेखक कौन हैं?
(A) यतीन्द्र मिश्र
(B) महात्मा गाँधी
(C) अमरकांत
(D) पंडित बिरजू महाराज

4. बिरजू महाराज को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार कब प्राप्त हुआ?
(A) 27 साल की उम्र में
(B) 25 साल की उम्र में
(C) 20 साल की उम्र में
(D) 19 साल की उम्र में

5. बिरजू महाराज को तालीम किससे मिली?
(A) दादा से
(B) बाबूजी से
(C) नाना से
(D) चाचा से

6. पंडित बिरजू महाराज लखनऊ घराने की किस पीढ़ी के कलाकार हैं?
(A) छठी पीढ़ी
(B) सातवीं पीढ़ी
(C) नौवीं पीढ़ी
(D) आठवीं पीढ़ी

7. पंडित बिरजू महाराज का जन्म कहाँ हुआ था?
(A) बनारस
(B) लखनऊ
(C) इलाहाबाद
(D) बक्सर

8. पंडित बिरजू महाराज का जन्म कब हुआ?
(A) 4 फरवरी, 1938
(B) 4 फरवरी, 1937
(C) 4 फरवरी, 1936
(D) 4 फरवरी, 1935

9. ‘जित-जित मैं निरखत हूँ’ पाठ साहित्य की विधा है-
(A) कहानी
(B) रिपोर्ताज
(C) साक्षात्कार
(D) भाषण

10. बिरजू महाराज के गुरु कौन थे?
(A) उनके पिताजी
(B) चाचा
(C) बड़े भाई
(D) इनमें से कोई नहीं

11. बिरजू महाराज की ख्याति किस रूप में है?
(A) नर्तक के रूप में
(B) तबला वादक के रूप में
(C) शहनाई वादक के रूप में
(D) संतूर वादक के रूप में

12. बिरजू महाराज कौन-सा वाद्य यंत्र बजाते थे?
(A) सितार
(B) गिटार
(C) हरमोनियम
(D) उपर्युक्त सभी

13. बिरजू महाराज का संबंध है-
(A) बाँसुरी वादन से
(B) तबला वादन से
(C) कत्थक नृत्य से
(D) संतूर वादन से

14. बिरजू महाराज अपना सबसे बड़ा जज किसको मानते थे?
(A) बाबुजी को
(B) चाचाजी को
(C) अम्मा को
(D) इनमें से कोई नहीं

15. नृत्य की शिक्षा के लिए पहले-पहल बिरजू महाराज किस संस्था से जुड़े?
(A) न्यू थियेटर्स कंपनी कोलकाता
(B) हिन्दुस्तानी डान्स म्यूजिक दिल्ली
(C) संगीत भारती कंपनी दिल्ली
(D) इनमें से कोई नहीं

16. बिरजू महाराज कितना रुपया नजराना देकर अपने गुरु पिता से गण्डा बंधवाया?
(A) 200 रु०
(B) 400 रु०
(C) 500 रु०
(D) 600 रु०

17. बाबुजी के साथ बिरजू महाराज का आखिरी प्रोग्राम कहाँ हुआ था?
(A) जौनपुर
(B) कानपुर
(C) मैनपुरी
(D) देहरादून

18. ‘जित-जित मैं निरखत हूँ’ पाठ के केंद्र में है-
(A) विस्मिल्ला खाँ
(B) जाकिर हुसैन
(C) बिरजू महाराज
(D) उपर्युक्त सभी

19. बिरजू महाराज की शादी किस उम्र में हुई थी?
(A) सोलह साल की
(B) अठारह साल की
(C) बीस साल की
(D) बाइस साल की

20. किनके साथ नाचते हुए बिरजू महाराज को पहली बार प्रथम पुरस्कार मिला?
(A) अपने बाबूजी के साथ
(B) चाचा शम्भु महाराज
(C) उपर्युक्त दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं

21. बिरजू महाराज को लखनऊ से संगीत भारती कौन लाई?
(A) निर्मला जोशी
(B) कपिला जी
(C) लीला कृपलानी
(D) शम्भु महाराज

22. बिरजू महाराज की सुयोग्य शिष्या मशहूर नृत्यांगना और रंगकर्म की पत्रिका ‘नटरंग’ की सम्पादक कौन है?
(A) कपिला जी
(B) निर्मला जोशी
(C) लीला कृपलानी
(D) रश्मि वाजपेयी

23. शागिर्द का अर्थ क्या है?
(A) गुरु
(B) शिष्य
(C) मित्र
(D) पिता

24. पंडित बिरजू महाराज साढ़े नौ साल के थे तभी किसका देहावसान हो गया?
(A) पिता का
(B) माँ का
(C) मामा का
(D) भाई का

25. हिन्दुस्तानी डांस म्यूजिक कहाँ स्थित है?
(A) कलकत्ता में
(B) मुंबई में
(C) चेन्नई में
(D) दिल्ली में

26. बिरजू महाराज के चाचा का नाम क्या था?
(A) शंभु महाराज
(B) गोदई महाराज
(C) श्री महाराज
(D) विष्णु महाराज

27. ‘हलकारे’ का अर्थ होता है-
(A) कलाकार
(B) संदेशवाहक
(C) हल जोतने वाला
(D) गायक

28. पंडित बिरजू महाराज को पद्म विभूषण सम्मान कब दिया गया?
(A) 1976 में
(B) 1984 में
(C) 1989 में
(D) 1991 में

29. बिरजू महाराज ने किस फ़िल्म के लिए कोरियोग्राफी कर राष्ट्रीय पुरस्कार जीता?
(A) बाजीराव मस्तानी
(B) उमराव जान
(C) देवदास
(D) गदर

30. पंडित बिरजू महाराज को नृत्य की कौन-सी शैली के लिए सबसे अधिक जाना जाता है?
(A) ओडिसी
(B) भरतनाट्यम
(C) कथक
(D) कुचिपुड़ी

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निष्कर्ष :

ऊपर आपने बिहार बोर्ड कक्षा 10 की हिन्दी पुस्तक “गोधूली भाग 2” के गद्यखंड के आठवें अध्याय “जित जित मैं निखरत हूँ” की व्याख्या, बोध-अभ्यास, महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को पढ़ा। हमें उम्मीद है कि यह सामग्री आपके अध्ययन को और सरल व प्रभावी बनाएगी। यदि किसी प्रश्न या समाधान को लेकर आपके मन में कोई शंका हो, तो आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं या सीधे हमसे संपर्क करें। हम आपकी मदद करने की पूरी कोशिश करेंगे। संपर्क करें
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