BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-11 Solution

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BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-11 Solution "नौबतखाने में इबादत" and pdf

इस पोस्ट में हम बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक “गोधूली” के ग्यारवें अध्याय “नौबतखाने में इबादत” के कहानी का सारांश, कवि परिचय, सभी प्रश्नों के समाधान, महत्त्वपूर्ण एवं संभावित प्रश्न और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों ( Objective Questions) को विस्तार से देखने वाले हैं।
हमारा प्रयास आपको परीक्षा की तैयारी करवाना है ताकि आप अपने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें। इस अध्याय के सभी प्रश्नोत्तरों एवं व्याख्याओं का PDF भी आप निशुल्क डाउनलोड (Download) कर सकते हैं। PDF लिंक नीचे उपलब्ध है, जिससे आप इसे ऑफलाइन भी पढ़ सकते हैं।

"नौबतखाने में इबादत" की मुख्य बातें

“नौबतखाने में इबादत” पाठ में भारत रत्न से सम्मानित महान शहनाईवादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन, व्यक्तित्व और संगीत-साधना का अत्यंत मार्मिक चित्र प्रस्तुत किया गया है। उनका जन्म 1916 में बिहार के डुमराँव में हुआ था। बचपन में ही काशी के बालाजी मंदिर के नौबतखाने में गूँजती शहनाई की मधुर ध्वनि ने उनके मन में संगीत के प्रति गहरा आकर्षण उत्पन्न किया। उन्होंने शहनाई को केवल वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि ईश्वर की उपासना माना। उनके लिए रियाज़ ही नमाज़ था और शहनाई बजाना ही इबादत। वे हिंदू मंदिर में बैठकर शहनाई बजाते थे, जिससे भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब का सुंदर संदेश मिलता है। जीवन में अनेक कठिनाइयों, गरीबी और साधारण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपनी सादगी नहीं छोड़ी। रसूलनबाई और बतूलनबाई जैसी लोक गायिकाओं से लेकर शास्त्रीय उस्तादों तक से उन्होंने प्रेरणा ली। बिस्मिल्ला खाँ ने शहनाई को शादियों और दरबारों की सीमित परंपरा से निकालकर शास्त्रीय संगीत की ऊँचाइयों तक पहुँचाया। भारत रत्न प्राप्त करने के बाद भी वे फटी लुंगी और साधारण जीवन में ही संतुष्ट रहे। यह पाठ सिखाता है कि सच्ची कला धर्म, जाति और सीमा से परे होती है — संगीत ही सबसे बड़ी इबादत है और सादगी व समर्पण ही किसी कलाकार को महान बनाते हैं।

इस विषय का हमारा समाधान ही क्यों?

  • हमारा समाधान बिहार बोर्ड कक्षा 10 के न्यूनतम पाठ्यक्रम (Syllabus) पर आधारित है।
  • यह समाधान सरल, आसान और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
  • हिंदी गोधूली के अभ्यास (Exercise) समाधान के साथ अनेक महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी दिए गए हैं।
  • हमारी वेबसाइट पर हिंदी के साथ-साथ अन्य विषयों के समाधान भी उपलब्ध हैं।
  • यहाँ आपको निःशुल्क उच्च गुणवत्ता वाले PDF मिलेंगे।

यतींद्र मिश्र का संक्षिप्त परिचय

अध्याय – 11 नौबतखाने में इबादत
पूरा नाम यतींद्र मिश्र
जन्म सन् 1977 ई०
जन्म स्थान अयोध्या, उत्तर प्रदेश
शिक्षा लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी भाषा एवं साहित्य में एम० ए०
रुचि एवं कार्यक्षेत्र साहित्य, संगीत, सिनेमा, नृत्य, चित्रकला
प्रमुख रचनाएँ / पुस्तकें काव्य-संग्रह – ‘यदा-कदा’, ‘अयोध्या तथा अन्य कविताएँ’, ‘ड्योढ़ी पर आलाप’
‘गिरिजा’ (गायिका गिरिजा देवी पर),
‘देवप्रिया’ (सोनल मान सिंह से संवाद),
‘यार जुलाहे’ (गुलजार की कविताओं का संपादन)
संपादन कार्य पत्रिका ‘थाती’ (स्पिक मैके – विरासत 2001),
अर्द्धवार्षिक पत्रिका ‘सहित’ के संपादक
संस्थागत कार्य ‘विमला देवी फाउंडेशन’ (1999 से संचालन)
प्राप्त पुरस्कार भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद् युवा पुरस्कार,
राजीव गाँधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार, रजा पुरस्कार,
हेमंत स्मृति कविता पुरस्कार, ऋतुराज सम्मान आदि
फेलोशिप केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी एवं सराय, नई दिल्ली
प्रस्तुत पाठ का स्रोत ‘नौबतखाने में इबादत’ (उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ पर लिखा गया व्यक्तिचित्र)
रचनात्मक विशेषता सरल एवं रोचक शैली, कला-जगत से गहरा सरोकार, व्यक्तिचित्रण में संवेदनशीलता

बोध और अभ्यास प्रश्न

पाठ के साथ

Q1: डुमराँव की महत्ता किस कारण से है ?
उत्तर : डुमराँव की महत्ता इस कारण विशेष है कि यह महान शहनाईवादक भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जन्मस्थान है। इसके अतिरिक्त, शहनाई में प्रयुक्त होने वाली ‘रीड’ (फूँकने वाली नली) बनाने के लिए जिस विशेष प्रकार की घास ‘नरकट’ की आवश्यकता होती है, वह भी डुमराँव के पास बहने वाली सोन नदी के किनारे प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। इस प्रकार डुमराँव न केवल बिस्मिल्ला खाँ की जन्मभूमि होने के कारण प्रसिद्ध है, बल्कि शहनाई निर्माण की मूल सामग्री उपलब्ध कराने के कारण भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
Q2: सुषिर वाद्य किन्हें कहते हैं । ‘शहनाई’ शब्द की व्युत्पत्ति किस प्रकार हुई है ?
उत्तर : ऐसे वाद्य जिनमें फूँक मारकर ध्वनि उत्पन्न की जाती है, उन्हें सुषिर वाद्य कहते हैं। इन वाद्यों में प्रायः नाड़ीयाँ (रीड या नरकट) लगी होती हैं, जिनसे वायु के प्रवाह से स्वर निकलता है।
शहनाई शब्द की व्युत्पत्ति के संबंध में माना जाता है कि यह वाद्य पहले राजदरबारों और शाही समारोहों में बजाया जाता था, इसलिए इसे “शाह + नाई” अर्थात “राजा का वाद्य” कहा गया। एक मत यह भी है कि इसे प्रारंभ में नाई समुदाय के लोग बजाते थे, इसलिए इसका नाम “शहनाई” पड़ा। इसकी ध्वनि अन्य सुषिर वाद्यों जैसे मुरली, नगाड़ा या शृंगी की तुलना में अधिक मधुर, कोमल और हृदयस्पर्शी होती है।
Q3: बिस्मिल्ला खाँ सजदे में किस चीज के लिए गिड़गिड़ाते थे ? इससे उनके व्यक्तित्व का कौन-सा पक्ष उद्घाटित होता है ?
उत्तर : बिस्मिल्ला खाँ जब इबादत के समय खुदा के सामने सजदा करते थे, तो वे गिड़गिड़ाकर सच्चे और सुर में डूबे हुए स्वर का वरदान माँगते थे। वे खुदा से यही प्रार्थना करते थे कि उनकी शहनाई से कभी बेसुरा स्वर न निकले।
इससे उनके व्यक्तित्व का धार्मिक, साधक वृत्ति वाला, विनम्र तथा निरअहंकारी स्वभाव प्रकट होता है। यह दर्शाता है कि वे अपनी सफलता का श्रेय ईश्वर को देते थे और संगीत को इबादत मानकर पूर्ण समर्पण के साथ साधना करते थे।
Q4: मुहर्रम पर्व से बिस्मिल्ला खाँ के जुड़ाव का परिचय पाठ के आधार पर दें ।
उत्तर : मुहर्रम पर्व से बिस्मिल्ला खाँ का गहरा भावनात्मक जुड़ाव था। वे अपने खानदान की परंपरा के अनुसार मुहर्रम के दस दिनों में न तो शहनाई बजाते थे और न ही किसी संगीत कार्यक्रम में हिस्सा लेते थे। इस महीने को वे केवल अजादारी (शोक) के रूप में मनाते थे।
मुहर्रम की आठवीं तारीख उनके लिए विशेष महत्त्व रखती थी। इस दिन वे खड़े होकर शहनाई बजाते हुए दालमंडी से फातमान तक लगभग आठ किलोमीटर पैदल चलते और रोते हुए नौहा (शोकगीत) बजाते जाते थे। इस अवसर पर वे कोई राग या रागिनी नहीं बजाते, क्योंकि इस दिन राग-संगीत की प्रस्तुति वर्जित मानी जाती है।
इस प्रकार मुहर्रम पर्व में उनकी भागीदारी यह प्रमाणित करती है कि वे केवल महान कलाकार ही नहीं, बल्कि गहरी आस्था और परंपरा का पालन करने वाले संवेदनशील इंसान थे।
Q5: ‘संगीतमय कचौड़ी’ का आप क्या अर्थ समझते हैं ?
उत्तर : ‘संगीतमय कचौड़ी’ से तात्पर्य है कि बिस्मिल्ला खाँ साहब की दृष्टि में संगीत केवल राग-वाद्य तक सीमित नहीं था, बल्कि वे उसे जीवन के हर अनुभव में महसूस करते थे। जब कुलसुम घी में कचौड़ी तलती थी और उसमें से ‘छन्न’ की आवाज उठती थी, तो खाँ साहब को उसमें भी शहनाई के सुरों जैसा आरोह-अवरोह महसूस होता था। अर्थात, उनके लिए कचौड़ी तलने की आवाज भी संगीत जैसी मधुर प्रतीत होती थी। इसीलिए उन्होंने उसे ‘संगीतमय कचौड़ी’ कहा।
Q6: बिस्मिल्ला खाँ जब काशी से बाहर प्रदर्शन करते थे तो क्या करते थे ? इससे हमें क्या सीख मिलती है ?
उत्तर : जब बिस्मिल्ला खाँ काशी से बाहर किसी भी स्थान पर शहनाई का प्रदर्शन करने जाते थे, तो वे वहाँ पहुँचकर पहले काशी विश्वनाथ मंदिर की दिशा में मुँह करके बैठते और कुछ देर तक शहनाई बजाकर भगवान विश्वनाथ को प्रणाम करते थे। वे मानते थे कि उनकी शहनाई की असली शक्ति काशी और विश्वनाथ जी की कृपा से ही है।

एक मुसलमान होते हुए भी उनका हृदय विश्वनाथ जी के प्रति गहरी आस्था से भरा हुआ था। इससे हमें यह सीख मिलती है कि सच्चे कलाकार या सच्चे इंसान के लिए धर्म की सीमाएँ नहीं होतीं। हमें सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए और आपसी सौहार्द तथा समन्वय की भावना रखनी चाहिए।
Q7: ‘बिस्मिल्ला खाँ का मतलब बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई ।’ एक कलाकार के रूप में बिस्मिल्ला खाँ का परिचय पाठ के आधार पर दें ।
उत्तर : बिस्मिल्ला खाँ एक महान और अद्वितीय शहनाईवादक थे। उनके लिए शहनाई केवल वाद्य नहीं, बल्कि जीवन और इबादत का माध्यम थी। वे अपनी शहनाई के माध्यम से संगीत-साधना को पूरी तरह अपनाए हुए थे। इस कारण कहा जाता है कि “बिस्मिल्ला खाँ का मतलब बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई”। इसका अर्थ यह है कि उनके हाथ की फूँक और शहनाई की मधुर, जादुई ध्वनि सुनने वाले के मन पर ऐसा असर डालती थी कि जैसे संगीत हमारे सिर चढ़कर बोलने लगता हो। उनकी शहनाई में सात सुरों का ताल, परवरदिगार की कृपा, गंगा मइया की भक्ति और उस्ताद की नसीहत सब झलकते थे। बिस्मिल्ला खाँ और उनकी शहनाई इतने गहरे रूप से एक-दूसरे के पर्याय बन गए कि उनके व्यक्तित्व और कला को अलग-अलग देखना असंभव था। उनका संसार सुरीला, मधुर और भावपूर्ण था, जो संगीत प्रेमियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
Q8: आशय स्पष्ट करें
(क) फटा सुर न बख्शें । लुगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सिल जाएगी ।
(ख) काशी संस्कृति की पाठशाला है ।
उत्तर : (क) जब एक शिष्या ने बिस्मिल्ला खाँ से पूछा कि आप फटी तहमद क्यों पहनते हैं, जबकि आपको भारतरत्न मिल चुका है, तो खाँ साहब ने सहज और विनम्र भाव में उत्तर दिया कि भारतरत्न तो मुझे शहनाईवादन के लिए मिला है, लुंगी या तहमद के लिए नहीं। यदि मैं सज-श्रृंगार में उलझ जाता, तो मेरी सारी उम्र वहीं बीत जाती और मैं शहनाई की साधना नहीं कर पाता। उन्होंने कहा कि ईश्वर यही कृपा करें कि मुझे फटा सूर न मिले, सूर की कोमलता और लय बनी रहे। अर्थात् खाँ साहब के लिए संगीत की पूर्णता और सच्चा सूर ही सर्वोपरि था, भौतिक वस्तुएँ या दिखावा उनकी प्राथमिकता नहीं थी।

(ख) काशी केवल एक नगर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और कलात्मक शिक्षा का केंद्र है। इसे आनंदकानन कहा जाता है। यहाँ कलाधर हनुमान और नृत्य विश्वनाथ जैसी सांस्कृतिक परंपराएँ विद्यमान हैं। बिस्मिल्ला खाँ जैसे महान कलाकार इसी संस्कृति का हिस्सा थे। काशी में अलग-अलग उत्सव, ग़म और संगीत की अपनी अनूठी परंपराएँ हैं। यहाँ संगीत, भक्ति और धर्म इतने गहरे रूप से जुड़े हैं कि किसी भी कलाकार, राग, कजरी या पर्व को अलग-अलग देखकर नहीं समझा जा सकता। इस प्रकार काशी सांस्कृतिक महानगरी और परंपराओं की पाठशाला है।
Q9: बिस्मिल्ला खाँ के बचपन का वर्णन पाठ के आधार पर दें ।
उत्तर : बिस्मिल्ला खाँ का जन्म 1916 में डुमराँव, बिहार के एक संगीत-प्रेमी परिवार में हुआ। पाँच-छः वर्ष की उम्र में ही वे अपने ननिहाल काशी चले गए। डुमराँव की विशेषता यह थी कि शहनाई की रीड बनाने वाली नरकट घास सोन नदी के किनारे पाई जाती थी। बिस्मिल्ला खाँ के परदादा उस्ताद सलार हुसैन खाँ डुमराँव निवासी थे और वे पैगंबर बख्श खाँ और मिट्टन के छोटे साहबजादे थे। चार साल की उम्र में ही बिस्मिल्ला खाँ नाना की शहनाई बजाते हुए सुनते और रियाज की शुरुआत करते। उन्होंने अपने मामाओं के सान्निध्य में शहनाईवादन का कौशल प्राप्त किया। 14 साल की उम्र तक वे बालाजी मंदिर में नियमित रियाज करते और संगीत साधना में पूरी तरह डूब गए। इसी समय से उनकी प्रतिभा विकसित हुई और आगे चलकर वे महान शहनाईवादक बने।

भाषा की बात

1. रचना के आधार पर निम्नलिखित वाक्यों की प्रकृति बताएँ
(क) काशी संस्कृति की पाठशाला है ।
(ख) शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं ।
(ग) एक बड़े कलाकार का सहज मानवीय रूप ऐसे अवसरों पर आसानी से दिख जाता है ।
(घ) उनको यकीन है, कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान होगा ।
(ङ) धत् ! पगली ई भारतरत्न हमको शहनईया पे मिला है, लुगिया पे नाहीं ।
उत्तर: (क) सरल वाक्य
(ख) संयुक्त वाक्य
(ग) मिश्र वाक्य
(घ) मिश्र वाक्य
(ङ) मिश्र वाक्य

2. निम्नलिखित वाक्यों से विशेषण छाँटिए
(क) इसी बालसुलभ हँसी में कई यादें बंद हैं ।
(ख) अब तो आपको भारतरत्न भी मिल चुका है, यह फटी तहमद न पहना करें ।
(ग) शहनाई और काशी से बढ़कर कोई जन्नत नहीं इस धरती पर हमारे लिए ।
(घ) कैसे सुलोचना उनकी पसंदीदा हीरोइन रही थीं, बड़ी रहस्यमय मुस्कराहट के साथ गालों पर चमक आ जाती है।
उत्तर: (क) बालसुलभ, कई
(ख) फटी
(ग) इस, हमारे
(घ) पसंदीदा, बड़ी, रहस्यमय

10th हिंदी गोधूली के अन्य अध्यायों के Solution भी देखें।

क्रमांक अध्याय
1 श्रम विभाजन एवं जातिप्रथा
2 विष के दाँत
3 भारत से हम क्या सीखें
4 नाखून क्यो बढ़ते हैं
5 नगरी लिपि
6 बहादुर
7 परंपरा का मूल्यांकन
8 जित-जित मैं निरखत हूँ
9 आविन्यों
10 मछली
12 शिक्षा और संस्कृति

शब्द निधि

ड्योढ़ी : दहलीज; नौबतखाना : प्रवेश द्वार के ऊपर मंगल ध्वनि बजाने का स्थान; रियाज : अभ्यास; मार्फत : द्वारा; श्रृंगी : सींग का बना वाद्ययंत्र; मुरछंग : एक प्रकार का लोक वाद्ययंत्र; नेमत : ईश्वर की देन, वरदान, कृपा; सज़दा : माथा टेकना; इबादत : उपासना; तासीर : गुण, प्रभाव, असर; श्रुति : शब्द-ध्वनि; ऊहापोह : उलझन, अनिश्चितता; तिलिस्म : जादू; गमक : खुशबू, सुगंध; अजादारी : मातम करना, दुख मनाना; बदस्तूर : कायदे से, तरीके से; नैसर्गिक : स्वाभाविक, प्राकृतिक; दाद : शाबाशी, प्रशंसा, वाहवाही; तालीम : शिक्षा; अदब : कायदा, साहित्य; अलहमदुलिल्लाह : तमाम तारीफ ईश्वर के लिए; जिजीविषा : जीने की इच्छा; शिरकत : शामिल होना; वाजिब : सही, उपयुक्त; मतलब : अर्थ; लिहाज : शिष्टाचार, छोटे-बड़े के प्रति उचित भाव; गोया : जैसे कि, मानो कि; रोजनामचा : दैनंदिन, दिनचर्या; विग्रह : मूर्ति; कछार : नदी का किनारा; उकेरी : चित्रित करना, उभारना; संपूरक : पूरा करने वाला, पूर्ण करने वाला; मुराद : आकांक्षा, अभिलाषा; दुश्चिंता : बुरी चिंता; बरतना : बर्ताव करना, व्यवहार करना; सलीका : शिष्ट तरीका; गमजदा : गम में डूबा; सुकून : शांति, आराम; जुनून : उन्माद, सनक; खारिज : अस्वीकार करना; आरोह : चढ़ाव; अवरोह : उतार; आनंदकानन : ऐसा बागीचा जिसमें आठों पहर आनन्द रहे; उपकृत : उपकार करना, कृतार्थ करना; तहजीब : संस्कृति, सभ्यता; सेहरा-बन्ना : सेहरा बाँधना, श्रेय देना; नौहा : शहनाई; सरगम : संगीत के सात स्वर (सारेगमपधनी); नसीहत : शिक्षा, उपदेश, सीख; तहमद : लुंगी, अधोवस्त्र; शिद्दत : असरदार तरीके से, जोर के साथ; सामाजिक : सुसंस्कृत; नायाब : अद्भुत, अनुपम; जिजीविषा : जीने की लालसा

यतींद्र मिश्र का संक्षिप्त परिचय :

यतींद्र मिश्र समकालीन हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित कवि, संपादक और संगीत-वेद के गहरे जानकार लेखकों में से एक हैं। उनका जन्म 1977 में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ। उन्होंने संगीत, कला और संस्कृति पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ और लता मंगेशकर जैसी महान विभूतियों पर आधारित कृतियाँ विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। उनके लेखन में भारतीय संगीत परंपरा और लोक संस्कृति के प्रति गहरी संवेदनशीलता झलकती है। उन्हें अपने साहित्यिक योगदान के लिए भारतीय भाषा परिषद पुरस्कार, प्रेमचंद सम्मान, भारतीय युवा शक्ति सम्मान सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। यतींद्र मिश्र आज के दौर में उन विरल साहित्यकारों में गिने जाते हैं जो साहित्य और संगीत दोनों क्षेत्रों के बीच एक पुल का काम करते हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

नीचे इस अध्याय से संबंधित कुल 40 वस्तुनिष्ठ प्रश्न दिए गए हैं। ये प्रश्न अध्याय के गहन अध्ययन के आधार पर तैयार किए गए हैं तथा इनमें से कई प्रश्न पिछले वर्षों की बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा से भी लिए गए हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास करने से आपको परीक्षा की तैयारी में काफी मदद मिलेगी और यह समझने में आसानी होगी कि परीक्षा में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
1. ‘अमीरुद्दीन’ नाम किसका था?
(A) मिट्ठन मियाँ का
(B) बिस्मिल्ला खाँ का
(C) अलीबख्श का
(D) जमाल शेख का

2. ‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ के केंद्र में कौन हैं?
(A) बिरजू महाराज
(B) बिस्मिल्ला खाँ
(C) जाकिर हुसैन
(D) इनमें से कोई नहीं

3. निम्न में से कविता नहीं है-
(A) एक वृक्ष की हत्या
(B) लौटकर आऊँगा फिर
(C) नौबतखाने में इबादत
(D) हमारी नींद

4. ‘इबादत’ का अर्थ है-
(A) उपासना
(B) इठलाना
(C) ईंट
(D) ईख

5. ‘सुषिर वाद्यों में शाह’ की उपाधि प्राप्त है-
(A) तबले को
(B) बाँसुरी को
(C) ढोलक को
(D) शहनाई को

6. ‘बिस्मिल्ला खाँ’ का संबंध किस वाद्य से है?
(A) बाँसुरी से
(B) हारमोनियम से
(C) तबले से
(D) शहनाई से

7. बिस्मिल्ला खाँ की मृत्यु कब हुई?
(A) 21 अगस्त, 2006
(B) 30 मई, 2000
(C) 12 सितम्बर, 1961
(D) इनमें से कोई नहीं

8. “फटा सुर न बख्शे, लुगिया का क्या है, आज फटी तो कल सिल जाएगी” — यह कथन किसका है?
(A) शम्सुद्दीन
(B) अलीबख्श
(C) बिस्मिल्ला खाँ
(D) पैगंबर बख्श

9. संगीत आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा कहाँ रही है?
(A) काशी
(B) डुमराँव
(C) लखनऊ
(D) इलाहाबाद

10. शास्त्रों में ‘आनंदकानन’ के नाम से कौन-सा स्थान प्रतिष्ठित है?
(A) डुमराँव
(B) काशी
(C) लखनऊ
(D) इलाहाबाद

11. उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जन्म कहाँ हुआ था?
(A) बदरघाट, पटना
(B) डुमराँव, बिहार
(C) काशी, उत्तरप्रदेश
(D) बलिया, उत्तरप्रदेश

12. ‘नौबतखाना’ का अर्थ है-
(A) प्रवेश द्वार के ऊपर मंगल ध्वनि बजाने का स्थान
(B) पूजाघर
(C) इबादत
(D) शिक्षा

13. ‘नौबतखाने में इबादत’ साहित्य की कौन-सी विधा है?
(A) निबंध
(B) कहानी
(C) व्यक्तिचित्र
(D) साक्षात्कार

14. ‘नौबतखाने में इबादत’ में किनके जीवन की रुचियाँ, अंतर्मन की बुनावट और संगीत साधना प्रकट हुई है?
(A) बिस्मिल्ला खाँ
(B) महात्मा गाँधी
(C) पं. बिरजू महाराज
(D) मैक्समूलर

15. व्यक्तिचित्र है-
(A) जित-जित मैं निरखत हूँ
(B) भारत से हम क्या सीखें
(C) नौबतखाने में इबादत
(D) बहादुर

16. प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जन्म कब हुआ?
(A) 1912
(B) 1916
(C) 1925
(D) 1938

17. कमरूद्दीन/उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के बड़े भाई कौन थे?
(A) अलीबख्श
(B) सादिक हुसैन
(C) सलार हुसैन
(D) शम्सुद्दीन

18. उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ को रियाज के लिए कहाँ जाना पड़ता था?
(A) संकटमोचन मंदिर
(B) पुराना बालाजी का मंदिर
(C) शिव मंदिर
(D) इनमें से कोई नहीं

19. 5-6 वर्ष डुमराँव में बिताकर कमरूद्दीन कहाँ आ गए थे?
(A) लखनऊ
(B) बनारस
(C) काशी
(D) इलाहाबाद

20. शहनाई बजाने के लिए किसका प्रयोग होता है?
(A) वीणा
(B) संतूर
(C) रीड (नरकट)
(D) सितार

21. रसूलनाबाई थी-
(A) कवयित्री
(B) कथा वाचिका
(C) गायिका
(D) नर्तकी

22. बिस्मिल्ला खाँ के बचपन का नाम था-
(A) नसरुद्दीन
(B) अमीरुद्दीन
(C) कमरूद्दीन
(D) सालार हुसैन

23. काशी किसकी पाठशाला है?
(A) संस्कृति की
(B) नृत्य की
(C) नर्तन की
(D) वादन की

24. बिस्मिल्ला खाँ के परदादा उस्ताद सलार हुसैन किस स्थान के निवासी थे?
(A) डुमराँव
(B) सीतामढ़ी
(C) दरभंगा
(D) पटना

25. उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ को कौन-सा सम्मान प्राप्त हुआ?
(A) भारतरत्न
(B) संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
(C) पद्मविभूषण
(D) उपर्युक्त सभी

26. “धत् पगली, ई भारतरत्न हमको शहनइया पे मिला है, लुगिया पे नाहीं” — यह किसने कहा?
(A) बिस्मिल्ला खाँ
(B) पैगंबर बख्श
(C) अलीबख्श
(D) शम्सुद्दीन

27. ‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ में लेखक ने किनका व्यक्तिगत चित्र प्रस्तुत किया है?
(A) पं. बिरजू महाराज
(B) महात्मा गाँधी
(C) बिस्मिल्ला खाँ
(D) यतींद्र मिश्र

28. किस पुस्तक में भरतनाट्यम और ओडिसी की प्रख्यात नृत्यांगना सोनल मान सिंह से यतींद्र मिश्र का संवाद संकलित है?
(A) गिरिजा
(B) देवप्रिया
(C) यदा-कदा
(D) नौबतखाने में इबादत

29. बिस्मिल्ला खाँ किस नदी के किनारे बैठकर शहनाई बजाते थे?
(A) गंगा नदी
(B) यमुना नदी
(C) गोदावरी नदी
(D) सोन नदी

30. बिस्मिल्ला खाँ किस मंदिर की दिशा में मुँह करके काशी से बाहर भी शहनाई बजाते थे?
(A) संकटमोचन मंदिर
(B) दुर्गाकुंड मंदिर
(C) काशी विश्वनाथ मंदिर
(D) बालाजी मंदिर

[Note] : यदि आप उपयुक्त वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का उत्तर जानना चाहते हैं, तो हमारे WhatsApp Channel या Telegram से अवश्य जुड़े।

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निष्कर्ष :

ऊपर आपने बिहार बोर्ड कक्षा 10 की हिन्दी पुस्तक “गोधूली भाग 2” के गद्यखंड के ग्यारवें अध्याय “नौबतखाने में इबादत” की व्याख्या, बोध-अभ्यास, महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को पढ़ा। हमें उम्मीद है कि यह सामग्री आपके अध्ययन को और सरल व प्रभावी बनाएगी। यदि किसी प्रश्न या समाधान को लेकर आपके मन में कोई शंका हो, तो आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं या सीधे हमसे संपर्क करें। हम आपकी मदद करने की पूरी कोशिश करेंगे। संपर्क करें
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