BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-3 Solution

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BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-3 Solution "भारत से हम क्या सीखें"

इस पोस्ट में हम बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक “गोधूली” के तीसरे अध्याय “भारत से हम क्या सीखें” के कहानी का सारांश, कवि परिचय, सभी प्रश्नों के समाधान, महत्त्वपूर्ण एवं संभावित प्रश्न और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों (Objective Questions) को विस्तार से देखने वाले हैं।
हमारा प्रयास आपको परीक्षा की तैयारी करवाना है ताकि आप अपने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें। इस अध्याय के सभी प्रश्नोत्तरों एवं व्याख्याओं का PDF भी आप निशुल्क डाउनलोड (Download) कर सकते हैं। PDF लिंक नीचे उपलब्ध है, जिससे आप इसे ऑफलाइन भी पढ़ सकते हैं।

"भारत से हम क्या सीखें" की मुख्य बातें

यहाँ प्रस्तुत पाठ बाबा साहेब के विख्यात भाषण ‘एनीहिलेशन ऑफ कास्ट’ के ललई सिंह यादव द्वारा किए गए हिंदी रूपांतर ‘जाति-भेद का उच्छेद’ से किंचित संपादन के साथ लिया गया है। यह भाषण ‘जाति-पाँति तोड़क मंडल’ (लाहौर) के वार्षिक सम्मेलन (सन् 1936) के अध्यक्षीय भाषण के रूप में तैयार किया गया था, परंतु इसकी क्रांतिकारी दृष्टि से आयोजकों की पूर्णतः सहमति न बन सकने के कारण सम्मेलन स्थगित हो गया और यह पढ़ा न जा सका। बाद में बाबा साहेब ने इसे स्वतंत्र पुस्तिका का रूप दिया। प्रस्तुत आलेख में वे भारतीय समाज में श्रम विभाजन के नाम पर मध्ययुगीन अवशिष्ट संस्कारों के रूप में बरकरार जाति प्रथा पर मानवीयता, नैसर्गिक न्याय एवं सामाजिक सद्भाव की दृष्टि से विचार करते हैं। जाति प्रथा के विषमतापूर्वक सामाजिक आधारों, रूढ़ पूर्वग्रहों और लोकतंत्र के लिए उसकी अस्वास्थ्यकर प्रकृति पर भी यहाँ एक संभ्रांत विधिवेत्ता का दृष्टिकोण उभर सका है। भारतीय लोकतंत्र के भावी नागरिकों के लिए यह आलेख अत्यंत शिक्षाप्रद है ।

इस विषय का हमारा समाधान ही क्यों?

  • हमारा समाधान बिहार बोर्ड कक्षा 10 के न्यूनतम पाठ्यक्रम (Syllabus) पर आधारित है।
  • यह समाधान सरल, आसान और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
  • हिंदी गोधूली के अभ्यास (Exercise) समाधान के साथ अनेक महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी दिए गए हैं।
  • हमारी वेबसाइट पर हिंदी के साथ-साथ अन्य विषयों के समाधान भी उपलब्ध हैं।
  • यहाँ आपको निःशुल्क उच्च गुणवत्ता वाले PDF मिलेंगे।

फ्रेड्रिक मैक्समूलरका संक्षिप्त परिचय

अध्याय – 3 भारत से हम क्या सीखें
पूरा नाम फ्रेड्रिक मैक्समूलर
जन्म 6 दिसंबर 1823 ई०
जन्म स्थान डेसाउ, जर्मनी
मृत्यु 28 अक्टूबर 1900 ई०
शिक्षा लिपजिंग विश्वविद्यालय में संस्कृत अध्ययन, ग्रीक व लैटिन भाषाओं का गहन ज्ञान
प्रमुख कार्य हितोपदेश का जर्मन अनुवाद, कठ व केन उपनिषदों का अनुवाद, मेघदूत का पद्यानुवाद, वैदिक साहित्य का अध्ययन
भूमिका संस्कृतानुरागी विद्वान, भारतभक्त, वेदों के प्रचारक
प्रेरणा स्रोत भारतीय वेद, उपनिषद एवं वैदिक दर्शन
विशेषता वैदिक तत्त्वज्ञान को मानव सभ्यता का मूल स्रोत मानना
सम्मान साम्राज्ञी विक्टोरिया द्वारा ‘नाइट’ की उपाधि (जिसे अस्वीकार कर दिया)

बोध और अभ्यास प्रश्न

पाठ के साथ

Q1: समस्त भूमंडल में सर्वविद् सम्पदा और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण देश भारत है। लेखक ने ऐसा क्यों कहा है ?
उत्तर : भारत ऐसा देश है जहाँ मानव-मस्तिष्क की उत्कृष्टतम उपलब्धियों का सर्वप्रथम साक्षात्कार हुआ है। यहाँ जीवन की बड़ी-से-बड़ी समस्याओं के ऐसे समाधान खोजे गए हैं जो विश्व के दार्शनिकों के लिए चिंतन का विषय बने हैं। भारत में भूतल पर ही स्वर्गीय छटा बिखरी हुई है। यहाँ की धरती प्राकृतिक सौंदर्य, मानवीय गुण, मूल्यवान रत्न, प्राकृतिक सम्पदा तथा मनीषियों के आध्यात्मिक चिंतन से परिपूर्ण है। जीवन को सुखद और सार्थक बनाने के लिए यहाँ उपयुक्त ज्ञान, साधन और वातावरण उपलब्ध हैं, जो भूमंडल के अन्य देशों में नहीं मिलते।
Q2: लेखक की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन कहाँ हो सकते हैं और क्यों ?
उत्तर : लेखक की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन गाँवों में हो सकते हैं। भारत की संपूर्ण परंपरा का आधार ऋषि-संस्कृति और कृषि पद्धति है। गाँवों में ग्राम-पंचायत व्यवस्था, कृषि-व्यवस्था तथा मंदिर व्यवस्था जैसी विशेषताएँ मौलिक रूप से देखने को मिलती हैं। यही कारण है कि सच्चे भारत की झलक गाँवों में दिखाई देती है।
Q3: भारत को पहचान सकने वाली दृष्टि की आवश्यकता किनके लिए वांछनीय है और क्यों ?
उत्तर : भारत को पहचानने वाली दृष्टि भारतीय सिविल सेवा के लिए चयनित युवाओं के लिए वांछनीय है। भारत में पहुँचने के बाद उन्हें वहाँ की सामाजिक व्यवस्थाएँ, विज्ञान, संस्कृति और ज्ञान का अध्ययन एवं संग्रह करने की दृष्टि रखनी चाहिए। जैसे सर विलियम जोन्स ने किया, वैसे ही नए युवा अधिकारी भी गंगा और सिन्धु के मैदानों में उपलब्ध ज्ञान एवं संग्रहणीय वस्तुएँ इंग्लैंड ले जाने की क्षमता रखते हों।
Q4: लेखक ने किन विशेष क्षेत्रों में अभिरुचि रखने वालों के लिए भारत का प्रत्यक्ष ज्ञान आवश्यक बताया है?
उत्तर : लेखक के अनुसार यदि किसी की अभिरुचि किसी विशेष क्षेत्र में है, तो भारत में उसे पर्याप्त अवसर मिलेंगे। चाहे वह लोकप्रिय शिक्षा, उच्च शिक्षा, संसद में प्रतिनिधित्व, कानून बनाने, प्रवास संबंधी नियम या अन्य कानूनी मामलों से संबंधित हो, भारत एक ऐसी प्रयोगशाला है जहाँ सीखने और अनुभव प्राप्त करने के अपार अवसर हैं। लेखक का कहना है कि यह अनुभव विश्व में अन्यत्र कहीं नहीं मिल सकता।
Q5: लेखक ने वारेन हेस्टिंग्स से संबंधित किस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना का हवाला दिया है और क्यों ?
उत्तर : लेखक ने बताया कि वारेन हेस्टिंग्स को वाराणसी के पास 172 सोने के सिक्कों से भरा एक घड़ा मिला। उन्होंने इसे ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशक मंडल को भेजा, यह सोचकर कि यह एक ऐसा उपहार है जिसकी गणना उनके द्वारा भेजी गई सर्वोत्तम दुर्लभ वस्तुओं में की जाएगी। लेकिन कंपनी के निदेशक इस सिक्कों के ऐतिहासिक महत्त्व को नहीं समझ पाए और उन मुद्राओं को नष्ट कर दिया। वारेन हेस्टिंग्स के लिए यह सबसे बड़ा दुर्भाग्य था। इस घटना से उन्होंने सीखा कि ऐतिहासिक वस्तुओं को हमेशा सुरक्षित रखने और संभालकर रखने की आवश्यकता होती है।
Q6: लेखक ने नीतिकथाओं के क्षेत्र में किस तरह भारतीय अवदान को रेखांकित किया है ?
उत्तर : लेखक ने बताया कि नीति कथाओं के अध्ययन-क्षेत्र में भारत का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। समय-समय पर विभिन्न साधनों और मार्गों से अनेक नीति कथाएँ पूर्व से पश्चिम तक प्रवाहित हुई हैं। भारत में प्रचलित कहावतों और दंतकथाओं का प्रमुख स्रोत बौद्ध धर्म को माना जाता है, लेकिन इनमें छिपी समस्याओं और विचारों का समाधान अभी भी अध्ययन का विषय है। लेखक ने उदाहरण देकर बताया कि ‘शेर की खाल में गधा’ वाली कहावत यूनानी दार्शनिक प्लेटो की कृति क्रटिलस में पहले पाई जाती है, और इसी तरह संस्कृत की कुछ कथाएँ यूनानी नीति कथाओं से मिलती-जुलती हैं। यह दर्शाता है कि भारतीय नीति कथाएँ यूनान के ज्ञान से कैसे जुड़ी हैं और यह शोध का विषय हो सकता है।
Q7: भारत के साथ यूरोप के व्यापारिक संबंध के प्राचीन प्रमाण लेखक ने क्या दिखाए हैं ?
उत्तर : लेखक के अनुसार यह स्पष्ट प्रमाणित है कि सोलोमन के समय से ही भारत, सीरिया और फिलीस्तीन के बीच आवागमन और व्यापार के साधन उपलब्ध थे। इन देशों के व्यापारिक दस्तावेजों और अध्ययन में कुछ संस्कृत शब्दों का भी प्रयोग मिलता है, जिससे यह पता चलता है कि हाथी-दाँत, बंदर, मोर, चन्दन आदि जैसी वस्तुएँ, जिनका निर्यात बाइबिल में उल्लेख है, केवल भारत से ही संभव था। ऐतिहासिक शोध से यह भी ज्ञात हुआ कि दसवीं-ग्यारहवीं सदी में भी भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंध जारी रहे।
Q8: भारत की ग्राम पंचायतों को किस अर्थ में और किनके लिए लेखक ने महत्त्वपूर्ण बतलाया है? स्पष्ट करें।
उत्तर : लेखक ने ग्राम पंचायतों को विशेष रूप से उन युवा अंग्रेज अधिकारियों के लिए महत्त्वपूर्ण बताया है, जो भारतीय सिविल सेवा के लिए चयनित हुए थे। ग्राम पंचायतें अत्यंत सरल राजनीतिक इकाइयाँ हैं, जो प्राचीन युग के कानून और प्रशासन की पुरातन रूपरेखा को दर्शाती हैं। यदि कोई अधिकारी इन कानूनों और प्रथाओं के महत्त्व और विशेषताओं को समझना चाहता है, तो भारत में ग्राम पंचायतों के प्रत्यक्ष दर्शन से उसे इसके वास्तविक अनुभव और ज्ञान का अवसर प्राप्त होता है।
Q9: धर्मों की दृष्टि से भारत का क्या महत्त्व है ?
उत्तर : भारत प्राचीन काल से ही धार्मिक विकास का केंद्र रहा है। यहाँ धर्म के वास्तविक उद्भव, उसके प्राकृतिक विकास और उसके विविध रूपों का प्रत्यक्ष परिचय मिलता है। भारत वैदिक धर्म की भूमि, बौद्ध धर्म की जन्मभूमि और पारसियों के जरथुस्ट्र धर्म की शरणस्थली है। आज भी यहाँ नए-नए मत और मतान्तर प्रकट एवं विकसित होते रहते हैं। इस प्रकार, भारत धार्मिक क्षेत्र में विश्व को आलोकित करने वाला एक महत्त्वपूर्ण देश है।
Q10: भारत किस तरह अतीत और सुदूर भविष्य को जोड़ता है? स्पष्ट करें।
उत्तर : भारत में आप स्वयं को अतीत और सुदूर भविष्य के बीच खड़ा पाते हैं। यहाँ ऐसे अवसर भी मिलते हैं जो केवल प्राचीन काल में ही संभव प्रतीत होते हैं। आज की किसी भी ज्वलंत समस्या—चाहे वह लोकप्रिय शिक्षा, उच्च शिक्षा, संसद में प्रतिनिधित्व, कानून निर्माण या प्रवास संबंधी कानून से सम्बद्ध हो—सभी के लिए भारत एक प्रयोगशाला के समान है। यहाँ सीखने और सिखाने की संभावनाएँ इतनी व्यापक हैं कि विश्व के अन्य किसी देश में ऐसा अनुभव नहीं मिलता।
Q11: मैक्समूलर ने संस्कृत की कौन-सी विशेषताएँ और महत्त्व बतलाये हैं?
उत्तर : मैक्समूलर के अनुसार संस्कृत की सबसे प्रमुख विशेषता इसकी प्राचीनता है। यह ग्रीक भाषा से भी अधिक पुरानी मानी जाती है। संस्कृत की उपस्थिति से भाषाओं के पारस्परिक संबंध और उनके विकास का सही आभास लोगों को हुआ। इस दृष्टि से संस्कृत को अन्य भाषाओं की “अग्रजा” अर्थात मूल भाषा माना जाता है।
Q12: लेखक वास्तविक इतिहास किसे मानता है और क्यों ?
उत्तर : लेखक के अनुसार किसी देश या राज्य का वास्तविक इतिहास जानने के लिए सबसे पहले उसकी भाषा की प्राचीनता को समझना आवश्यक है। भाषा के अध्ययन से हम उस सभ्यता और सांस्कृतिक अवस्था को जान सकते हैं जो आर्यों के विभाजन से पहले थी। संस्कृत, ग्रीक और लैटिन जैसी भाषाओं के सामान्य मूल स्रोत तक पहुँचकर ही हम यह जान सकते हैं कि हिन्दू, यूनानी और अन्य जातियाँ कब और कैसे अलग हुईं। अतीत के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि आदि आर्य भाषा चिंतन-परंपरा के उतार-चढ़ाव से प्रभावित रही है। लेखक इसे वास्तविक इतिहास मानते हैं, क्योंकि यह केवल राज्यों, दरबारों और जातियों की क्रूरताओं का विवरण नहीं, बल्कि मानव सभ्यता और सांस्कृतिक विकास का सटीक और पठनीय ज्ञान प्रदान करता है।
Q13: संस्कृत और दूसरी भारतीय भाषाओं के अध्ययन से पाश्चात्य जगत् को प्रमुख लाभ क्या-क्या हुए ?
उत्तर : संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं के अध्ययन से पश्चात्य जगत् को अनेक लाभ हुए। इससे मानव जाति के बारे में दृष्टिकोण व्यापक और उदार हुआ। पहले अजनबी या ‘बरबर’ समझे जाने वाले लोगों को भी अब अपने परिवार के सदस्य की तरह समझने और अपनाने की क्षमता विकसित हुई। इसके अतिरिक्त, इस अध्ययन ने मानव जाति के संपूर्ण इतिहास को वास्तविक और समग्र रूप में प्रस्तुत किया, जो पहले सम्भव नहीं था।
Q14: लेखक ने भारत के लिए नवागंतुक अधिकारियों को किसकी तरह सपने देखने के लिए प्रेरित किया है और क्यों ?
उत्तर : लेखक ने नवागंतुक अधिकारियों को भारत के लिए सर विलियम जेम्स की तरह सपने देखने के लिए प्रेरित किया है। ऐसा इसलिए क्योंकि सर विलियम जेम्स ने इंग्लैंड से लंबी समुद्री यात्रा पूरी करने के बाद भारत के तट का दर्शन किया था और यह अनुभव उनके लिए अत्यंत सुखद और प्रेरणादायक रहा। उन्होंने देखा कि एशिया की यह भूमि विज्ञान, कला, साहित्य, मानव प्रतिभा और धार्मिक विकास की जननी है। यहाँ की परंपराएँ, रीति-रिवाज और भाषाएँ इसे विश्वभर में सम्मान की दृष्टि से पवित्र बनाती हैं।
Q15: लेखक ने नया सिकंदर किसे कहा है? ऐसा कहना क्या उचित है? लेखक का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : लेखक ने नया सिकंदर उन नवागंतुकों, अन्वेषकों, पर्यटकों और अधिकारियों को कहा है, जो भारत को समझने, जानने और उसका सम्पूर्ण लाभ प्राप्त करने हेतु यहाँ आते हैं। जैसा कि सिकंदर ने प्राचीन विश्व पर विजय पाने का स्वप्न देखा था, उसी प्रकार आज भी भारतीयता को निकट से जानने वाले नवीन शोधकर्ता और पर्यटक “नया सिकंदर” कहलाने के योग्य हैं।
यह कहना उचित है क्योंकि नए सिकंदर को निराश नहीं होना चाहिए कि गंगा और सिंध के मैदानों में विजय का अवसर नहीं बचा। भारत में आज भी अध्ययन, शोध, प्राच्य ज्ञान, साहित्य और विश्व की प्राचीनतम विज्ञान-संस्कृति के क्षेत्र में अनेक महान उपलब्धियाँ प्राप्त की जा सकती हैं। लेखक यह स्पष्ट करता है कि भारतीयता का सम्यक् ज्ञान आज भी विश्व के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है और भारत में असीम संभावनाएँ विद्यमान हैं।

भाषा की बात

1. निम्नांकित वाक्यों से विशेष्य और विशेषण पद चुनें
(क) उत्कृष्टतम उपलब्धियों का सर्वप्रथम साक्षात्कार
(ख) प्लेटो और काण्ट जैसे दार्शनिकों का अध्ययन करनेवाले हम यूरोपियन लोग
(ग) अगला जन्म तथा शाश्वत जीवन
(घ) दो-तीन हजार वर्ष पुराना ही क्यों, आज का भारत भी
(ङ) भूले-बिसरे बचपन की मधुर स्मृतियाँ
(छ) लाखों-करोड़ों अजनबियों तथा बर्बर समझे जानेवाले लोगों को भी
उत्तर:

2. ‘अग्रजा’ की तरह ‘जा’ प्रत्यय जोड़कर तीन-तीन शब्द बनाएँ –
उत्तर:

3. निम्नलिखित उपसर्गों से तीन-तीन शब्द बनाएँ-
प्र, निः, अनु, अभि, वि
उत्तर:

4. वास्तविक में ‘इक’ प्रत्यय से पाँच शब्द बनाएँ।
उत्तर:

10th हिंदी गोधूली के अन्य अध्यायों के Solution भी देखें।

क्रमांक अध्याय
1 श्रम विभाजन एवं जातिप्रथा
2 विष के दाँत
4 नाखून क्यो बढ़ते हैं
5 नगरी लिपि
6 बहादुर
7 परंपरा का मूल्यांकन
8 जित-जित मैं निरखत हूँ
9 आविन्यों
10 मछली
11 नैबतख़ाने में इबादत
12 शिक्षा और संस्कृति

शब्द निधि

अवलोकन : देखना, प्रतीति करना, महसूस करना अवगाहन : स्नान, गहरे डूबकर समझने की कोशिश करना वांछनीय : चाहने योग्य, कामना करने योग्य नृवंश विद्या : नृतत्त्व शास्त्र, मानव शास्त्र परिमाण : मात्रा दारिस : मुद्रा का एक प्राचीन प्रकार प्रेषित : भेजा हुआ दैवत विज्ञान : देव विज्ञान प्रत्नयुग : प्रागैतिहासिक युग, प्राचीन युग अनुरूपता : समानता, सादृश्य क्षय : छीजन, विनाश अपरिहार्य : जिसे छोड़ा न जा सके, अनिवार्य क्षीयमाण : नष्ट होता हुआ मसला : मुद्दा, विषय सदाशयता : उदारता, भलमनसाहत : जिसमें सारी चीजें समाहित हो सर्वातिशायी जायें विद्यमान : वर्तमान, उपस्थित अहेतुकवाद : ऐसा सिद्धांत जिसमें हेतु या कारण की पहचान न हो सके सर्वथा : पूरी तरह से ज्ञातव्य : जानने योग्य सारभूत : सार या निष्कर्ष कहा जाने योग्य, आधारभूत अजनबी : अपरिचित, अज्ञात बर्बर : जंगली, असभ्य सुविस्तीर्ण : अतिविस्तृत, खुशफैल, पूरी तरह से फैला हुआ अनिर्वचनीय : जिसकी व्याख्या न की जा सके, वाणी के परे धात्री : पालन-पोषण करनेवाली, धारण करनेवाली अपरांत : पश्चिमी परिणत : परिवर्तित, जिसका परिणाम सामने आ गया हो प्राच्य : पूर्वी (पाश्चात्य का विलोम), यहाँ भारतीय के अर्थ में

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

नीचे इस अध्याय से संबंधित कुल 40 वस्तुनिष्ठ प्रश्न दिए गए हैं। ये प्रश्न अध्याय के गहन अध्ययन के आधार पर तैयार किए गए हैं तथा इनमें से कई प्रश्न पिछले वर्षों की बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा से भी लिए गए हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास करने से आपको परीक्षा की तैयारी में काफी मदद मिलेगी और यह समझने में आसानी होगी कि परीक्षा में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
1. भारत में जाति-प्रथा का मुख्य कारण क्या है?
(A) बेरोजगारी
(B) गरीबी
(C) उद्योग धंधों की कमी
(D) अमीरी

[Note] : यदि आप उपयुक्त वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का उत्तर जानना चाहते हैं, तो हमारे WhatsApp Channel या Telegram से अवश्य जुड़े।

"भारत से हम क्या सीखें" की pdf Download करें

निष्कर्ष :

ऊपर आपने बिहार बोर्ड कक्षा 10 की हिन्दी पुस्तक “गोधूली भाग 2” के गद्यखंड के तीसरे अध्याय “भारत से हम क्या सीखें” की व्याख्या, बोध-अभ्यास, महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को पढ़ा। हमें उम्मीद है कि यह सामग्री आपके अध्ययन को और सरल व प्रभावी बनाएगी। यदि किसी प्रश्न या समाधान को लेकर आपके मन में कोई शंका हो, तो आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं या सीधे हमसे संपर्क करें। हम आपकी मदद करने की पूरी कोशिश करेंगे। संपर्क करें
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