BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-4 Solution "नाखून क्यों बढ़ते हैं" with Notes
हमारा प्रयास आपको परीक्षा की तैयारी करवाना है ताकि आप अपने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें। इस अध्याय के सभी प्रश्नोत्तरों एवं व्याख्याओं का PDF भी आप निशुल्क डाउनलोड (Download) कर सकते हैं। PDF लिंक नीचे उपलब्ध है, जिससे आप इसे ऑफलाइन भी पढ़ सकते हैं।
"नाखून क्यों बढ़ते हैं" की मुख्य बातें
लेखक बताते हैं कि सभ्यता का विकास केवल बाह्य साधनों या हथियारों के विस्तार से नहीं, बल्कि आत्म-संयम और मानवीय मूल्यों से मापा जाना चाहिए। ‘स्वाधीनता’ शब्द का उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि भारत ने ‘इंडिपेंडेंस’ की जगह ‘स्व’ को केंद्र में रखकर स्वतंत्रता की अवधारणा गढ़ी, जो आत्म-नियंत्रण का भाव है। मनुष्य की असली पहचान संयम, करुणा, त्याग, सत्य और अहिंसा में है। हथियारों, बमों और आधुनिक हिंसा को लेखक बढ़ते नाखूनों से जोड़ते हैं और संकेत देते हैं कि यह पशुता का नया रूप है। वे मानते हैं कि नाखून काटना केवल शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि मनुष्यता की घोषणा है—यह बताता है कि हम पशुत्व को स्वीकार नहीं करते। लेखक का निष्कर्ष है कि सफलता अधिक हथियारों या साधनों से नहीं, बल्कि प्रेम, मैत्री, सह-अस्तित्व और आत्म-बंधन से मिलती है। नाखून बढ़ना हमारी अंध सहजात वृत्ति का प्रतीक है और उन्हें काटना मनुष्य के चरित्र, चेतना और सांस्कृतिक उत्कर्ष का संकेत।
इस विषय का हमारा समाधान ही क्यों?
- हमारा समाधान बिहार बोर्ड कक्षा 10 के न्यूनतम पाठ्यक्रम (Syllabus) पर आधारित है।
- यह समाधान सरल, आसान और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
- हिंदी गोधूली के अभ्यास (Exercise) समाधान के साथ अनेक महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी दिए गए हैं।
- हमारी वेबसाइट पर हिंदी के साथ-साथ अन्य विषयों के समाधान भी उपलब्ध हैं।
- यहाँ आपको निःशुल्क उच्च गुणवत्ता वाले PDF मिलेंगे।
हजारी प्रसाद द्विवेदी का संक्षिप्त परिचय
| अध्याय – 4 | नाखून क्यों बढ़ते हैं |
|---|---|
| पूरा नाम | आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी |
| जन्म | 19 अगस्त 1907 ई० |
| जन्म स्थान | आरत दुबे का छपरा, बलिया (उत्तर प्रदेश) |
| मृत्यु | 19 मई 1979 ई०, दिल्ली |
| शिक्षा | संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, बाँग्ला, संस्कृति, इतिहास व दर्शन का गहन अध्ययन |
| भूमिका / कार्यक्षेत्र | निबंधकार, उपन्यासकार, आलोचक, इतिहासकार, संस्कृतज्ञ, शिक्षाविद् |
| प्रमुख रचनाएँ | अशोक के फूल, कल्पलता, कुटज, विचार और वितर्क, पुनर्नवा, बाणभट्ट की आत्मकथा, अनामदास का पोथा, सूर साहित्य, कबीर, कालिदास की लालित्य योजना आदि |
| सम्मान | साहित्य अकादमी पुरस्कार (आलोक पर्व), पद्मभूषण, डी०लिट्० की उपाधि |
बोध और अभ्यास प्रश्न
पाठ के साथ
आज मनुष्य अत्याधुनिक हथियारों पर निर्भर हो चुका है, फिर भी उसके नाखून बढ़ते रहते हैं। यह प्रकृति की ओर से यह संकेत है कि मनुष्य अपनी आदिम प्रवृत्ति और मूल स्वभाव से पूरी तरह मुक्त नहीं हुआ है। नाखूनों का बढ़ना मनुष्य को यह याद दिलाता है कि उसके भीतर पुरानी पशुता अब भी कहीं न कहीं जीवित है। वह आज भी वही नख-दंत वाला प्राणी है, जिसके अवशेष उसके शरीर में बचे हुए हैं।
परंतु सभ्यता और विज्ञान के विकास के साथ समय बदल गया। मनुष्य ने पत्थर, लकड़ी, हड्डी, लोहा और आधुनिक तकनीक से हथियार बनाए, जिनमें बंदूक, बम, कारतूस और तोप जैसे अस्त्र शामिल हैं। परिणामस्वरूप आज नाखून आत्मरक्षा का साधन नहीं रहे। आधुनिक युग में नख को अस्त्र कहना व्यवहारतः उचित नहीं लगता, लेकिन ऐतिहासिक और जैविक दृष्टि से यह विचार पूर्णतः संगत है, क्योंकि यह मनुष्य की आदिम सहजात प्रवृत्तियों का प्रतीक है।
लेखक यह भी स्पष्ट करता है कि यद्यपि यह प्रवृत्ति कभी-कभी अधोगामी या विलासी प्रतीत होती है, लेकिन भारतीय संस्कृति ने ऐसी सब प्रवृत्तियों को मानवीय और सांस्कृतिक रूप देकर उन्हें एक मर्यादा प्रदान की है।
लेखक का अभिप्राय यह है कि सब पुराने विचार या परंपराएँ सार्थक नहीं होतीं और न ही सब नया बुरा होता है। समझदार व्यक्ति वही होता है जो पुराने और नए दोनों की परख करके जो हितकारी हो उसे अपनाए और जो अनुपयोगी हो उसे त्याग दे। अंधानुकरण या जड़ता को मनुष्यत्व के विकास में स्थान नहीं मिलना चाहिए।
(क) काट दीजिए, वे चुपचाप दंड स्वीकार कर लेंगे; पर निर्लज्ज अपराधी की भाँति फिर छूटते ही सेंध पर हाजिर ।
(ख) मैं मनुष्य के नाखून की ओर देखता हूँ तो कभी-कभी निराश हो जाता हूँ ।
(ग) कमबख्त नाखून बढ़ते हैं तो बढ़ें, मनुष्य उन्हें बढ़ने नहीं देगा ।
(ख) यह पंक्ति लेखक की चिंतनशील भावनाओं को व्यक्त करती है। नाखून मनुष्य की भयंकर और पाशवी वृत्ति का प्रतीक हैं। लेखक नाखून को देखकर इस बात पर निराश होता है कि मनुष्य कितनी विध्वंसक प्रवृत्ति रखता है। हिरोशिमा जैसी घटनाओं के उदाहरण से लेखक यह बताता है कि मनुष्य की बर्बरता आज भी उसके भीतर विद्यमान है।
(ग) इस पंक्ति में लेखक यह बताना चाहते हैं कि भले ही नाखून अपनी प्राकृतिक प्रवृत्ति से बढ़ते रहें, लेकिन मनुष्य अब विवेकशील और संवेदनशील हो गया है। वह अपने भीतर की विध्वंसक और पाशवी प्रवृत्ति को नियंत्रित करने लगा है। इसलिए नाखून बढ़ें या न बढ़ें, मनुष्य उन्हें काटकर नियंत्रण में रखेगा और सृजनात्मकता व मानवीय मूल्यों की ओर अग्रसर रहेगा।
लेखक ने यह भी दिखाया है कि मनुष्य ने नाखूनों को कलात्मक और सौंदर्य के लिए सजाना शुरू किया। यह उसके संवेदनशील और सभ्य बनने की प्रक्रिया का हिस्सा है। निबंध में लेखक मनुष्य की बर्बरता और प्रेम, त्याग तथा चरितार्थता के बीच तुलना करता है। नाखून बढ़ते रहना और काटना उसकी सहजात वृत्तियाँ हैं। लेखक यह प्रश्न उठाता है कि मनुष्य किस ओर बढ़ रहा है—पशुता की ओर या मनुष्यता की ओर। अंततः लेखक यह संदेश देता है कि मानव अपने भीतर की पशु प्रवृत्ति को नियंत्रित कर सृजनात्मक और मानवीय मूल्यों की ओर बढ़ सकता है।
भाषा की बात
1.
निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलें
अल्पज्ञ, प्रतिद्वंद्वियों, हड्डी, मुनि, अवशेष त्तियों, उत्तराधिकार, बँदरिया
उत्तर:
अल्पज्ञ – अल्पज्ञ (एकवचन)
प्रतिद्वंद्वियों – प्रतिद्वंदी (एकवचन)
हड्डी – हड्डियाँ (बहुवचन)
मुनि – मुनि (बहुवचन: मुनि / मुनिजन)
अवशेषत्तियों – अवशेष (एकवचन) या अवशेषत्तियाँ का शुद्ध रूप “अवशेषताएँ” होगा
उत्तराधिकार – उत्तराधिकार (एकवचन) – उत्तराधिकारी/उत्तराधिकारों (बहुवचन) (संदर्भानुसार)
बँदरिया – बँदरियाँ (बहुवचन)
2.
वाक्य-प्रयोग द्वारा निम्नलिखित शब्दों के लिंग-निर्णय करें
बंदूक, घाट, सतह, अनुसंधित्सा, भंडार, खोज, अंग, वस्तु
उत्तर:
बंदूक (स्त्रीलिंग)
– सैनिक ने बंदूक उठाई।
घाट (पुल्लिंग)
– वह गंगा के घाट पर स्नान करने गया।
सतह (स्त्रीलिंग)
– इस मेज़ की सतह बहुत चिकनी है।
अनुसंधित्सा (स्त्रीलिंग)
– विज्ञान की अनुसंधित्सा ने मानव जीवन में नई राहें खोली हैं।
भंडार (पुल्लिंग)
– इस पुस्तकालय में ज्ञान का विशाल भंडार है।
खोज (स्त्रीलिंग)
– उस वैज्ञानिक की नई खोज की चर्चा हर तरफ हो रही है।
अंग (पुल्लिंग)
– हाथ और पैर शरीर के मुख्य अंग हैं।
वस्तु (स्त्रीलिंग)
– यह वस्तु बहुत कीमती है, ध्यान से संभालो।
3.
निम्नलिखित वाक्यों में क्रिया की काल रचना स्पष्ट करें
(क) उन दिनों उसे जूझना पड़ता था ।
(ख) मनुष्य और आगे बढ़ा ।
(ग) यह सबको मालूम है ।
(घ) वह तो बढ़ती ही जा रही है ।
(ङ) मनुष्य उन्हें बढ़ने नहीं देगा ।
उत्तर:
(क) उन दिनों उसे जूझना पड़ता था । – भूतकाल
(ख) मनुष्य और आगे बढ़ा । – भूतकाल
(ग) यह सबको मालूम है । – वर्तमान काल
(घ) वह तो बढ़ती ही जा रही है । – वर्तमान काल
(ङ) मनुष्य उन्हें बढ़ने नहीं देगा । – भविष्य काल
4.
अस्त्र-शस्त्रों का बढ़ने देना मनुष्य की अपनी इच्छा की निशानी है और उनकी बाढ़ को रोकना मनुष्यत्व का तकाजा है ।’ इस वाक्य में आए विभक्ति चिह्नों के प्रकार बताएँ ।
उत्तर:
1. की – संबंधवाचक विभक्ति
2. को – संप्रेषण कारक
3. का – संबंधवाचक विभक्ति
5.
स्वतंत्रता, स्वराज्य जैसे शब्दों की तरह ‘स्व’ लगाकर पाँच शब्द बनाइए ।
उत्तर:
स्वधर्म
स्वसुख
स्वशक्ति
स्वभाव
स्वअध्ययन
6.
निम्नलिखित के विलोम शब्द लिखें
पशुता, घृणा, अभ्यास, मारणास्त्र, ग्रहण, मूढ़, अनुवर्तिता, सत्याचरण
उत्तर:
पशुता – मनुष्यता
घृणा – प्रेम / स्नेह
अभ्यास – अव्यवस्था / उपेक्षा
मारणास्त्र – रक्षकास्त्र / जीवनरक्षक
ग्रहण – त्याग / परित्याग
10th हिंदी गोधूली के अन्य अध्यायों के Solution भी देखें।
| क्रमांक | अध्याय |
|---|---|
| 1 | श्रम विभाजन एवं जातिप्रथा |
| 2 | विष के दाँत |
| 3 | भारत से हम क्या सीखें |
| 5 | नगरी लिपि |
| 6 | बहादुर |
| 7 | परंपरा का मूल्यांकन |
| 8 | जित-जित मैं निरखत हूँ |
| 9 | आविन्यों |
| 10 | मछली |
| 11 | नैबतख़ाने में इबादत |
| 12 | शिक्षा और संस्कृति |
शब्द निधि
दयनीय : दया करने योग्य
बेहया : बिना हया के, निर्लज्ज, बेशर्म
प्रतिद्वंद्वी : विरोधी
नखधर : नख को धारण करनेवाला, नाखून वाला
दंतावलंबी : दाँत का सहारा लेकर जीने वाला
विचरण : घूमना, भटकना
ततः किम् : फिर क्या, इसके बाद
असह्य : न सह सकने योग्य
पाशवी वृत्ति : पशु जैसा स्वभाव एवं आचरण
वर्तुलाकार : घुमावदार, गोलाकार
दंतुल : दाँत वाला, जिसके दाँत बाहर निकले हों
दाक्षिणात्य : दक्षिण का (दक्षिण भारतीय)
अधोगामिनी : नीचे की ओर जानेवाली
सहजात वृत्ति : जन्म के साथ पैदा होने वाली वृत्ति या स्वभाव
वाक् : वाणी, भाषा
निर्बोध नासमझ, नादान
अनुवर्तिता पीछे-पीछे चलना
अरक्षित : जो रक्षित न हो, खुला
अनुसंधित्सा : अनुसंधान की प्रबल इच्छा
सरबस : सर्वस्व, सबकुछ
पूर्वसंचित : पहले से इकट्ठा या जमा किया हुआ
समवेदना : दूसरे के दुख को महसूस करना
उद्भावित : प्रकट की गयी, उत्पन्न की गयी
असत्याचरण : असत्य आचरण, लोकविरुद्ध आचरण
: निर्वैर बिना वैर-विरोध के
: उत्स स्रोत, उद्गम, मूल
आत्मतोषण : अपने को संतुष्ट करना, अपने को समझाना
चरितार्थता : सार्थकता
निःशेष : जिसका शेष भी न बचे, सम्पूर्ण
तकाजा : माँग
हजारी प्रसाद द्विवेदी का संक्षिप्त परिचय :
हजारी प्रसाद द्विवेदी आधुनिक हिंदी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा-संपन्न और गहन चिंतक रचनाकार थे। उनका जन्म सन् 1907 में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के आरत दुबे का छपरा नामक गाँव में हुआ। उनका बचपन परंपरागत सांस्कृतिक वातावरण में बीता, जिसने आगे चलकर उनके साहित्यिक व्यक्तित्व को समृद्ध किया। संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, बाँग्ला, इतिहास, संस्कृति, धर्म और दर्शन पर उनकी पैनी दृष्टि थी। उन्होंने केवल पढ़ा नहीं, बल्कि इन विषयों को अपने साहित्य में जीवंत भी किया।द्विवेदीजी ने निबंध, उपन्यास, समालोचना, शोध, साहित्येतिहास और ग्रंथ-संपादन जैसे विविध क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान दिया। उनकी भाषा में विद्वत्ता के साथ सरलता और सौंदर्य का अद्भुत संतुलन मिलता है। ‘अशोक के फूल’, ‘कल्पलता’, ‘विचार और वितर्क’, ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’, ‘अनामदास का पोथा’, ‘पुनर्नवा’, ‘कबीर’ और ‘हिंदी साहित्य की भूमिका’ जैसी कृतियाँ हिंदी साहित्य को नई दिशा देने वाली मानी जाती हैं।
उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय, शांति निकेतन और चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में अध्यापन और प्रशासनिक पदों पर कार्य करते हुए नई पीढ़ी को भारतीय चिंतन और संस्कृति की ओर उन्मुख किया। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण और लखनऊ विश्वविद्यालय से डी॰लिट् की उपाधि प्राप्त हुई, जो उनके साहित्यिक अवदान की औपचारिक स्वीकृति है। सन् 1979 में दिल्ली में उनका निधन हो गया।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(A) नाखून क्यों बढ़ते हैं
(B) बहादुर
(C) मछली
(D) नागरी लिपि
2. किस देश के लोग बड़े-बड़े नख पसंद करते थे?
(A) अंगदेश के
(B) गांधार के
(C) कैकय देश के
(D) गौड़ देश के
3. ‘अनामदास का पोथा’ उपन्यास किस लेखक की कृति है?
(A) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(B) यतीन्द्र मिश्र
(C) अमरकांत
(D) महात्मा गाँधी
4. हजारी प्रसाद द्विवेदी ने ‘निर्लज्ज अपराधी’ किसे कहा है?
(A) डकैत को
(B) चोर को
(C) हत्यारे को
(D) नाखून को
5. हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित पाठ है-
(A) नाखून क्यों बढ़ते हैं
(B) बहादुर
(C) आविन्यों
(D) मछली
6. कौन-सा निबंध नई पीढ़ी में सौन्दर्य बोध, इतिहास चेतना और सांस्कृतिक आत्मगौरव का भाव जगाता है?
(A) श्रम विभाजन और जाति प्रथा
(B) नागरी लिपि
(C) बहादुर
(D) नाखून क्यों बढ़ते हैं
7. ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं’ हिन्दी की कौन विधा है?
(A) ललित निबंध
(B) कहानी
(C) कविता
(D) उपन्यास
8. ललित निबंध है-
(A) मछली
(B) नाखून क्यों बढ़ते हैं
(C) बहादुर
(D) नौबत खाने में इबादत
9. हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म कब और कहाँ हुआ?
(A) 1907-छपरा, बलिया
(B) 1916-बदरघाट, पटना
(C) 1935-अमरावती, महाराष्ट्र
(D) 1925-नागरा, बलिया
10. नाखून प्रतीक है-
(A) पाशवी वृत्ति का
(B) मानवता का
(C) प्रेम का
(D) पौरुष का
11. हम बार-बार नाखून क्यों काटते हैं?
(A) स्वच्छ रहने के लिए
(B) बर्बरता समापन हेतु
(C) सुंदरता के लिए
(D) मजबूरी से
12. द्विवेदी जी से किसने पूछा था- नाखून क्यों बढ़ते हैं?
(A) लड़के ने
(B) लड़की ने
(C) पत्नी ने
(D) नौकर ने
13. काट दीजिए वे चुपचाप दंड स्वीकार कर लेंगे पर निर्लज्ज अपराधी की भाँति फिर छूटते ही सेंध पर हाजिर। प्रस्तुत पंक्तियाँ किस पाठ से ली गई है?
(A) नागरी लिपि
(B) परंपरा का मूल्यांकन
(C) आविन्यों
(D) नाखून क्यों बढ़ते हैं
14. ‘विचार और वितर्क’ किस लेखक की रचना है?
(A) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(B) महात्मा गांधी
(C) गुणाकार मुले
(D) यतीन्द्र मिश्र
15. ‘नाखून बार-बार काटते रहना और अलंकृत करते रहना’ निरूपित करता है-
(A) सौन्दर्यबोध और सांस्कृतिक चेतना का
(B) सुन्दरता बढ़ाने का
(C) अच्छे व्यवहार का
(D) सुन्दरता और स्वास्थ्य पर ध्यान देने का
16. ‘मनुष्य की पशुता को जितनी बार भी काट दो, वह मरना नहीं जानती’ …….. पर पंक्ति किस शीर्षक पाठ की है?
(A) विष के दांत
(B) बहादुर
(C) नाखून क्यों बढ़ते हैं
(D) मछली
17. किसने कहा था कि- सब पुराने अच्छे नहीं होते, सब नए खराब ही नहीं होते हैं?
(A) मैक्समूलर
(B) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(C) स्वामी विवेकानंद
(D) कालिदास
18. दधीचि की हड्डी से क्या बना था?
(A) इंद्र का बज्र
(B) धनुष
(C) त्रिशुल
(D) तलवार
19. ‘कुटज’ के रचनाकार हैं-
(A) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(B) नलिन विलोचन शर्मा
(C) अमरकांत
(D) गुणाकर मुले
20. मनुष्य किस ओर बढ़ रहा है? पशुता की ओर या मनुष्यता की ओर? अस्त्र बढ़ाने की ओर या अस्त्र घटाने की ओर? प्रस्तुत पंक्ति किस रचना के हैं?
(A) मैक्समूलर
(B) गुणाकार मुले
(C) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(D) विनोद कुमार शुक्ल
21. ‘विचार प्रवाह’ किस लेखक की रचना है?
(A) भीमराव अंबेदकर
(B) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(C) यतीन्द्र मिश्र
(D) अमरकांत
22. काट दीजिए वे चुपचाप दंड स्वीकार कर लेंगे पर निर्लज्ज अपराधी की भाँति फिर छूटते ही सेंध पर हाजिर। उपर्युक्त कथन में निर्लज्ज अपराधी किसे कहा गया?
(A) चोरों को
(B) वनमानुष को
(C) जंगली जानवरों को
(D) नाखून को
23. हजारी प्रसाद द्विवेदी ने किसके बहाने अत्यंत सहज शैली में सभ्यता और संस्कृति की विकास गाथा उद्घाटित कर दिखायी है?
(A) आँखों
(B) सुंदरता
(C) नाखूनों
(D) कानों
24. हजारी प्रसाद द्विवेदी किस विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एवं प्रशासनिक पद पर रहे?
(A) काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
(B) शांति निकेतन विश्वविद्यालय
(C) चंडीगढ़ विश्वविद्यालय
(D) सभी
25. द्विवेदी जी को किस रचना के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?
(A) आलोकपर्व
(B) नाखून क्यों बढ़ते हैं
(C) कुटुज
(D) अशोक के फूल
26. लेखक के अनुसार मनुष्य के नाखून किसके जीवंत प्रतीक हैं?
(A) मनुष्यता के
(B) सभ्यता के
(C) पाशवी वृत्ति के
(D) सौन्दर्य के
27. हजारी प्रसाद द्विवेदी के कौन-सा निबंध नई पीढ़ी में सौंदर्यबोध, इतिहास चेतना और सांस्कृतिक आत्मगौरव का भाव जगाता है?
(A) अशोक के फूल
(B) कुटज
(C) नाखून क्यों बढ़ते हैं
(D) आलोक पर्व
28. लेखक के अनुसार नाखून की विविध आकृतियाँ कौन-सी हैं?
(A) त्रिकोण
(B) वर्तुलाकार
(C) चंद्राकार
(D) उपर्युक्त सभी
29. मनुष्य अपने नाखून बार-बार क्यों काटता है?
(A) स्वच्छ रहने के लिए
(B) पशुता समाप्त करने के लिए
(C) सौंदर्य के लिए
(D) मजबूरी से
30. लेखक के अनुसार नाखून किस प्रकार से मनुष्य की पशु प्रवृत्ति को दर्शाते हैं?
(A) नाखून बढ़ने से
(B) नाखून काटने से
(C) नाखून सजाने से
(D) नाखूनों की आकृति से