BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-5 Solution

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BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-5 Solution "नगरी लिपि" and pdf

इस पोस्ट में हम बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक “गोधूली” के पाँचवें अध्याय “नगरी लिपि” के कहानी का सारांश, कवि परिचय, सभी प्रश्नों के समाधान, महत्त्वपूर्ण एवं संभावित प्रश्न और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों ( Objective Questions) को विस्तार से देखने वाले हैं।
हमारा प्रयास आपको परीक्षा की तैयारी करवाना है ताकि आप अपने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें। इस अध्याय के सभी प्रश्नोत्तरों एवं व्याख्याओं का PDF भी आप निशुल्क डाउनलोड (Download) कर सकते हैं। PDF लिंक नीचे उपलब्ध है, जिससे आप इसे ऑफलाइन भी पढ़ सकते हैं।

"नागरी लिपि" की मुख्य बातें

लेखक गुणाकर मुले ने देवनागरी या नागरी लिपि की व्यापकता, प्राचीनता और विकास यात्रा को सरल, रोचक और प्रामाणिक ढंग से प्रस्तुत किया है। वे बताते हैं कि आज हिंदी, मराठी, नेपाली और कई अन्य भाषाएँ इसी लिपि में लिखी जाती हैं। इसका उपयोग केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दक्षिण भारत, नेपाल, श्रीलंका तथा इस्लामी शासनकाल तक फैला था। शिलालेखों, ताम्रपत्रों, सिक्कों और हस्तलिपियों के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि आठवीं-ग्यारहवीं सदी के बीच नागरी लिपि पूरे भारत में प्रचलित और सम्मानित हो चुकी थी। दक्षिण भारत के चोड़, राष्ट्रकूट, शिलाहार और विजयनगर के शासकों ने भी इसका उपयोग किया। इसी तरह उत्तर भारत के गुर्जर-प्रतीहार, परमार, गाहड़वाल, सोलंकी आदि राजवंशों ने इसे प्रशस्तियों और राजपत्रों में अपनाया।

लेखक का मुख्य उद्देश्य यह सिद्ध करना है कि नागरी लिपि किसी एक क्षेत्र, संस्कृति या समुदाय की नहीं रही, बल्कि यह एक “सार्वदेशिक लिपि” के रूप में विकसित हुई। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि इस लिपि की जड़ें ब्राह्मी और सिद्धम् जैसी प्राचीन लिपियों में हैं और इसका स्वरूप समय के साथ स्थिर व सुव्यवस्थित हुआ। लेखक यह संदेश देना चाहते हैं कि हमारी लिपि केवल लेखन-पद्धति नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और भाषाई एकता की सशक्त कड़ी है। नागरी लिपि के जरिए विभिन्न भाषाओं, धर्मों और क्षेत्रों में संवाद और ज्ञान का प्रसार हुआ। इस निबंध के माध्यम से लेखक पाठकों में अपनी लिपि के प्रति सम्मान, जिज्ञासा और गर्व की भावना जगाना चाहते हैं तथा यह समझाना चाहते हैं कि लिपि केवल अक्षरों का समूह नहीं, बल्कि पूरे सभ्यता-चक्र की जीवंत पहचान है।

इस विषय का हमारा समाधान ही क्यों?

  • हमारा समाधान बिहार बोर्ड कक्षा 10 के न्यूनतम पाठ्यक्रम (Syllabus) पर आधारित है।
  • यह समाधान सरल, आसान और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
  • हिंदी गोधूली के अभ्यास (Exercise) समाधान के साथ अनेक महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी दिए गए हैं।
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गुणाकर मुले का संक्षिप्त परिचय

अध्याय – 5 नगरी लिपि
पूरा नाम गुणाकर मुले
जन्म 1935 ई०
जन्म स्थान अमरावती जिला, महाराष्ट्र (ग्रामीण क्षेत्र)
मृत्यु सन् 2009 ई०
शिक्षा मराठी माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा, वर्धा में नौकरी के साथ अंग्रेजी एवं हिंदी अध्ययन, इलाहाबाद से गणित में मैट्रिक से एम०ए० तक
अध्ययन एवं कार्य क्षेत्र गणित, खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, विज्ञान का इतिहास, पुरालिपिशास्त्र, प्राचीन भारत का इतिहास एवं संस्कृति
प्रमुख रचनाएँ अक्षरों की कहानी, भारत : इतिहास और संस्कृति, प्राचीन भारत के महान वैज्ञानिक, आधुनिक भारत के महान वैज्ञानिक, मैंडलीफ, महान वैज्ञानिक, सौर मंडल, सूर्य, नक्षत्र-लोक, भारतीय लिपियों की कहानी, अंतरिक्ष-यात्रा, ब्रह्मांड परिचय, भारतीय विज्ञान की कहानी, अक्षर कथा आदि
विशेष उपलब्धि 2500 से अधिक लेख और लगभग 30 पुस्तकों का प्रकाशन
प्रस्तुत निबंध का स्रोत पुस्तक – ‘भारतीय लिपियों की कहानी’
रचनात्मक विशेषता सरल और प्रवाहपूर्ण शैली, ऐतिहासिक तथ्यों की सटीक प्रस्तुति, जिज्ञासा उत्पन्न करने की क्षमता, तकनीकी विवरणों से परहेज

बोध और अभ्यास प्रश्न

पाठ के साथ

Q1: देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता कैसे आयी है ?
उत्तर : देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता करीब दो सौ वर्ष पहले तब आई जब पहली बार इस लिपि के मुद्रण-टाइप तैयार किए गए। उससे पहले लोग हाथ से लिखते थे, इसलिए अक्षरों के आकार व्यक्ति-व्यक्ति और क्षेत्र के अनुसार बदल जाते थे। इस तरह मुद्रण तकनीक के विकास के कारण देवनागरी के अक्षरों में स्थिरता स्थापित हो पाई।
Q2: देवनागरी लिपि में कौन-कौन सी भाषाएँ लिखी जाती हैं ?
उत्तर : देवनागरी लिपि में हिन्दी, संस्कृत, मराठी, नेपाली (खसकुरा) और नेवारी भाषाएँ लिखी जाती हैं।
Q3: लेखक ने किन भारतीय लिपियों से देवनागरी का संबंध बताया है ?
उत्तर : लेखक ने देवनागरी लिपि का संबंध मुख्य रूप से ब्राह्मी लिपि से माना है। इसके आधार पर समय के साथ कई भारतीय लिपियाँ विकसित हुईं, जिनमें से बंगला और गुजराती लिपि को देवनागरी की सहोदर या संबद्ध शाखाएँ बताया गया है। इसलिए देवनागरी का ऐतिहासिक संबंध ब्राह्मी से है और इसका विकास जिन लिपियों से जुड़ा हुआ माना गया है, उनमें बंगला और गुजराती प्रमुख हैं।
Q4: नंदी नागरी किसे कहते हैं ? किस प्रसंग में लेखक ने उसका उल्लेख किया है ?
उत्तर : नंदीनागरी उस नागरी लिपि का रूप है, जिसका प्रयोग प्राचीनकाल में दक्षिण भारत में पोथियाँ और अभिलेख लिखने के लिए किया जाता था। विद्वानों के अनुसार इसका नाम महाराष्ट्र के प्राचीन नगर नंदिनगर (जो आज का नांदेड़ है) के आधार पर पड़ा, क्योंकि वाकाटक और राष्ट्रकूट शासनकाल में वहाँ यह लिपि प्रचलित थी। लेखक ने इसका उल्लेख इस प्रसंग में किया है कि नागरी लिपि केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं थी, बल्कि दक्षिण भारत में भी इसका एक विशेष रूप, जिसे नंदीनागरी कहा गया, व्यापक रूप से उपयोग में था। कोंकण के शिलाहार, मान्यखेट के राष्ट्रकूट, देवगिरि के यादव तथा विजयनगर के शासकों के अभिलेख इसी लिपि में लिखे जाते थे। शुरुआती समय में विजयनगर राजाओं के लेखों की लिपि को ही नंदीनागरी नाम दिया गया था।
Q5: नागरी लिपि के आरंभिक लेख कहाँ प्राप्त हुए हैं ? उनके विवरण दें ।
उत्तर : नागरी लिपि के प्राचीनतम लेख दक्षिण भारत में प्राप्त हुए हैं। आठवीं सदी से ही वहाँ इसके उपयोग के प्रमाण मिलते हैं। विशेष रूप से चोल वंश के प्रतापी शासक राजराजा और राजेन्द्र के सिक्कों पर नागरी अक्षर अंकित पाए गए हैं। दक्षिण भारत में जहाँ इसका प्रचलन पहले से था, वहीं उत्तर भारत में इसके अभिलेख नौवीं सदी के आसपास मिलने शुरू होते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि नागरी लिपि का प्रारंभिक प्रयोग दक्षिण भारत में हुआ और बाद में यह उत्तर भारत में फैलती गई।
Q6: ब्राह्मी और सिद्धम लिपि की तुलना में नागरी लिपि की मुख्य पहचान क्या है ?
उत्तर : ब्राह्मी और उसके बाद विकसित हुई सिद्धम् लिपि में अक्षरों के ऊपर केवल छोटी आड़ी रेखाएँ या ठोस त्रिकोणाकार चिह्न पाए जाते थे। इसके विपरीत नागरी लिपि की सबसे बड़ी पहचान इसकी पूर्ण शिरोरेखा (ऊपरी रेखा) है। नागरी में प्रत्येक अक्षर के ऊपर एक सीधी, बराबर चौड़ाई तक फैली लंबी रेखा होती है, जो अक्षर की चौड़ाई के अनुरूप पूरी तरह जुड़ी रहती है। यही शिरोरेखा इसे ब्राह्मी और सिद्धम् लिपियों से अलग और विशिष्ट बनाती है।
Q7: उत्तर भारत में किन शासकों के प्राचीन नागरी लेख प्राप्त होते हैं ?
उत्तर : उत्तर भारत में प्राचीन नागरी लेख विभिन्न शासकों के अभिलेखों और सिक्कों पर प्राप्त होते हैं। विशेष रूप से महमूद गजनवी के लाहौर के टकसाल में ढाले गए चाँदी के सिक्कों पर नागरी लिपि में शब्द अंकित हैं। इसके बाद मुहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह और बादशाह अकबर जैसे शासकों ने भी अपने सिक्कों और अभिलेखों में नागरी शब्दों का उपयोग किया। इससे स्पष्ट होता है कि उत्तर भारत में हिन्दू और इस्लामी दोनों शासकों ने नागरी लिपि का महत्व और प्रचलन बनाए रखा।
Q8: नागरी को देवनागरी क्यों कहते हैं ? लेखक इस संबंध में क्या बताता है ?
उत्तर : नागरी को देवनागरी इस कारण कहा जाता है क्योंकि इसका नाम उत्तर भारत के बड़े नगरों से जुड़ा माना जाता है। ‘पादताडितकम्’ नामक नाटक से पता चलता है कि प्राचीन पाटलिपुत्र (आज का पटना) को नगर कहा जाता था। उत्तर भारत की स्थापत्य शैली को भी ‘नागर शैली’ कहते हैं। संभव है कि चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के समय गुप्तों की राजधानी पटना को ‘देवनगर’ कहा जाता हो। चूंकि इस लिपि का व्यापक प्रयोग देवनगर में होता था और यह उत्तर भारत की प्रमुख लिपि बन गई, इसलिए इसे बाद में देवनागरी नाम दिया गया।
Q9: नागरी की उत्पत्ति के संबंध में लेखक का क्या कहना है ? पटना से नागरी का क्या संबंध लेखक ने बताया है ?
उत्तर : लेखक के अनुसार नागरी शब्द किसी नगर या बड़े शहर से संबंधित है। ‘पादताडितकम्’ नामक नाटक से पता चलता है कि प्राचीन पाटलिपुत्र (आज का पटना) को नगर कहा जाता था। उत्तर भारत की स्थापत्य शैली को भी ‘नागर शैली’ कहते हैं। विद्वानों के अनुसार, उत्तर भारत का यह बड़ा नगर संभवतः पटना ही था। चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य का व्यक्तिगत नाम ‘देव’ था, इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को ‘देवनगर’ कहा जाता था। चूंकि इस लिपि का प्रयोग देवनगर में व्यापक रूप से होता था और यह उत्तर भारत की प्रमुख लिपि बन गई, इसलिए इसे बाद में देवनागरी नाम दिया गया।
Q10: नागरी लिपि कब एक सार्वदेशिक लिपि थी ?
उत्तर : ईसा की 8वीं से 11वीं सदी के दौरान नागरी लिपि पूरे भारत में व्यापक रूप से प्रचलित थी। इस समय यह किसी विशेष क्षेत्र या समुदाय तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे देश में लिखने-पढ़ने और अभिलेखों के लिए प्रयुक्त होने के कारण इसे सार्वदेशिक लिपि माना जाता था।
Q11: नागरी लिपि के साथ-साथ किसका जन्म होता है ? इस संबंध में लेखक क्या जानकारी देता है ?
उत्तर : लेखक के अनुसार, नागरी लिपि के साथ-साथ विभिन्न प्रादेशिक भाषाओं का भी जन्म हुआ। आठवीं-नौवीं सदी से प्रारंभिक हिंदी साहित्य मिलने लगता है। इसी समय भारतीय आर्यभाषा परिवार की आधुनिक भाषाएँ, जैसे मराठी और बंगला, विकसित हो रही थीं। इसका मतलब है कि नागरी लिपि और स्थानीय भाषाओं का विकास एक साथ हुआ, जिससे भारतीय भाषाई और साहित्यिक परंपरा को एक नया आयाम मिला।
Q12: गुर्जर प्रतीहार कौन थे ?
उत्तर : गुर्जर-प्रतीहार एक राजवंश था, जिसके विद्वानों के अनुसार, मूलतः भारत के बाहर से आए थे। ईसा की आठवीं सदी के पूर्वार्द्ध में इन्होंने अवंती प्रदेश में अपना शासन स्थापित किया और बाद में कन्नौज पर भी अधिकार कर लिया। इस वंश के प्रख्यात शासकों में मिहिर भोज और महेन्द्रपाल शामिल हैं। मिहिर भोज (840-881 ई.) की ग्वालियर प्रशस्ति नागरी लिपि में संस्कृत भाषा में लिखी गई है, जो इस वंश के ऐतिहासिक महत्व का प्रमाण प्रस्तुत करती है।
Q13: निबंध के आधार पर काल-क्रम से नागरी लेखों से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करें ।
उत्तर : निबंध के आधार पर कालक्रम के अनुसार नागरी लिपि से संबंधित प्रमाण इस प्रकार हैं। आठवीं सदी में दोहाकोश की तिब्बत से मिली हस्तलिपि नागरी लिपि में है। आठवीं-नौवीं सदी में दक्षिण भारत से प्राप्त वरगुण का पलयम ताम्रपत्र नागरी लिपि में लिखा गया। 754 ई. में राष्ट्रकूट राजा दंतिदुर्ग का दानपत्र और 850 ई. में जैन गणितज्ञ महावीराचार्य का गणित सार-संग्रह भी नागरी लिपि में हैं। ग्यारहवीं सदी में चोल शासक राजराजा और राजेन्द्र के सिक्कों पर नागरी अक्षर अंकित हैं। बारहवीं सदी के केरल के शासकों के सिक्कों पर ‘वीरकेरलस्य’ जैसे शब्द नागरी में पाए जाते हैं। 1000 ई. के आसपास मालवा नगर में नागर लिपि का प्रयोग होता था। चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के समय पटना में देवनागरी का इस्तेमाल मिलता है। इन सभी प्रमाणों से स्पष्ट होता है कि आठवीं से ग्यारहवीं सदी के बीच नागरी लिपि पूरे भारत में व्यापक रूप से प्रचलित थी।

भाषा की बात

1. निम्नलिखित शब्दों से संज्ञा बनाएँ
स्थिर, अतिरिक्त, स्मरणीय, दक्षिणी, आसान, पराक्रमी, युगीन
उत्तर: स्थिर : स्थिरता
अतिरिक्त : अतिरिक्तता
स्मरणीय : स्मरणीयता / स्मृति
दक्षिणी : दक्षिणता / दक्षिणीपन
आसान : सुविधा / आसानपन
पराक्रमी : पराक्रम
युगीन : युग

2. निम्नलिखित पदों के समासविग्रह करें –
तमिल-मलयालम, रामसीय, विद्यानुराग, शिरोरेखा, हस्तलिपि, दोहाकोश, पहले-पहल
उत्तर: तमिल-मलयालम : तमिल और मलयालम (द्वन्द्व समास)
रामसीय : राम और सीता (तत्पुरुष समास)
विद्यानुराग : विद्या को अनुराग (तत्पुरुष समास)
शिरोरेखा : शिर पर रेखा (तत्पुरुष समास)
हस्तलिपि : हस्त की लिपि (तत्पुरुष समास)
दोहाकोश : दोहा का कोश (तत्पुरुष समास)
पहले-पहल : पहला पहला (द्वन्द्व समास)

3. निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखें
मत, सार्वदेशिक, अनुकरण, व्यवहार, शासक
उत्तर: मत : राय, विचार, अभिप्राय
सार्वदेशिक : सर्वव्यापी, सर्वत्र, सर्वदेशीय
अनुकरण : नकल, अनुयायिता, पालन
व्यवहार : आचरण, चाल-ढाल, कार्यपद्धति
शासक : राजा, शासककर्ता, प्रशासक

4. निम्नलिखित भिन्नार्थक शब्दों के अर्थ स्पष्ट करें –
(क) प्रत्न प्रयत्न
(ख) लिपि लिप्ति
(ग) नागरी नागरिक
(घ) पट पट्ट
उत्तर: प्रत्न : खोज, अनुसंधान
प्रयत्न : प्रयास, मेहनत
लिपि : अक्षर लिखने की प्रणाली, लेखन पद्घति
लिप्ति : चिपकना, लगना, शामिल होना
नागरी : नगर से संबंधित या नागर प्रकार की
नागरिक : किसी राज्य या देश का निवासी, नागरिक
पट : कपड़े का टुकड़ा, चादर
पट्ट : भूमि का अधिकार-पत्र या लिखित अनुबंध

10th हिंदी गोधूली के अन्य अध्यायों के Solution भी देखें।

क्रमांक अध्याय
1 श्रम विभाजन एवं जातिप्रथा
2 विष के दाँत
3 भारत से हम क्या सीखें
4 नाखून क्यो बढ़ते हैं
6 बहादुर
7 परंपरा का मूल्यांकन
8 जित-जित मैं निरखत हूँ
9 आविन्यों
10 मछली
11 नैबतख़ाने में इबादत
12 शिक्षा और संस्कृति

शब्द निधि

लिपि : ध्वनियों के लिखित चिह्न
नागरी : नगर की, शहर की
अनुकरण : नकल
ब्राह्मी : एक प्राचीन भारतीय लिपि जिससे नागरी आदि लिपियों का विकास हुआ
पोथियाँ : पुस्तकें, ग्रंथ
टकसाल : जहाँ सिक्के ढलते हैं
रामसीय : राम-सीता
अस्तित्व : पहचान, सत्ता
हस्तलिपि : हाथ की लिखावट
आद्यलेख : अत्यंत प्राचीन प्रारंभिक लेख
विद्यानुराग : विद्या से प्रेम

गुणाकर मुले का संक्षिप्त परिचय :

गुणाकर मुले का जन्म 1935 ई० में महाराष्ट्र के अमरावती जिले के एक गाँव में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा ग्रामीण परिवेश में हुई और मिडिल स्तर तक मराठी पढ़ाई की। वर्धा में दो वर्षों तक नौकरी करते हुए उन्होंने अंग्रेजी और हिंदी का अध्ययन किया। बाद में इलाहाबाद आकर गणित में मैट्रिक से एम.ए. तक की शिक्षा पूरी की। सन् 2009 में उनका निधन हुआ।
गुणाकर मुले का अध्ययन और लेखन क्षेत्र व्यापक था। उन्होंने गणित, खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, विज्ञान का इतिहास, पुरालिपिशास्त्र और प्राचीन भारत के इतिहास व संस्कृति पर लिखा। उनके 2500 से अधिक लेख और तीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। प्रमुख कृतियों में ‘अक्षरों की कहानी’, ‘भारत : इतिहास और संस्कृति’, ‘भारतीय लिपियों की कहानी’ आदि शामिल हैं।
उनकी पुस्तक ‘भारतीय लिपियों की कहानी’ में नागरी लिपि के ऐतिहासिक विकास और विस्तार को सरल एवं रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है, जिससे पाठकों में लिपि के प्रति रुचि और जिज्ञासा बढ़ती है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

नीचे इस अध्याय से संबंधित कुल 40 वस्तुनिष्ठ प्रश्न दिए गए हैं। ये प्रश्न अध्याय के गहन अध्ययन के आधार पर तैयार किए गए हैं तथा इनमें से कई प्रश्न पिछले वर्षों की बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा से भी लिए गए हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास करने से आपको परीक्षा की तैयारी में काफी मदद मिलेगी और यह समझने में आसानी होगी कि परीक्षा में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
1. ‘सूर्य’ नामक पुस्तक किनकी रचना है?
(A) मैक्स मूलर
(B) बिरजू महाराज
(C) गुणाकर मुले
(D) महात्मा गाँधी

2. नेवारी भाषाएँ किस लिपि में लिखी जाती हैं?
(A) देवनागरी
(B) खरोष्ठी
(C) शौरसेनी
(D) ब्राह्मी

3. ‘भारतीय लिपियों की कहानी’ पुस्तक के रचयिता कौन हैं?
(A) भीमराव अंबेदकर
(B) मैक्स मूलर
(C) यतीन्द्र मिश्र
(D) गुणाकर मुले

4. ‘हिंदी तथा इसकी विविध बोलियाँ’ किस लिपि में लिखी जाती हैं?
(A) देवनागरी
(B) खरोष्ठी
(C) तेलगु
(D) ब्राह्मी

5. नागरी लिपि निबंध के लेखक हैं:
(A) गुणाकर मुले
(B) अज्ञेय
(C) पंत
(D) प्रसाद

6. ‘नागरी लिपि’ शीर्षक पाठ साहित्य की कौन-सी विधा है?
(A) साक्षात्कार
(B) निबंध
(C) भाषण
(D) कहानी

7. गुणाकर मुले द्वारा रचित निबंध कौन-सा है?
(A) नाखुन क्यों बढ़ते हैं
(B) परंपरा का मूल्यांकन
(C) नागरी लिपि
(D) श्रम विभाजन और जाति प्रथा

8. गुणाकर मुले का जन्म कब हुआ?
(A) 1935
(B) 1925
(C) 1916
(D) 1908

9. नागरी लिपि का प्राचीनतम लेख किस प्रदेश से मिलते हैं?
(A) दक्खन प्रदेश
(B) कलिंग प्रदेश
(C) पांड्य प्रदेश
(D) कोंकण प्रदेश

10. नागरी लिपि में प्राचीन मराठी भाषा के लेख मिलने लगते हैं।
(A) आठवीं सदी
(B) नौवीं सदी
(C) दसवीं सदी
(D) ग्यारहवीं सदी

11. देवनागरी लिपि में कौन-सी भाषा लिखी जाती है?
(A) हिन्दी
(B) नेपाली (खसकुरा) व नेवारी
(C) मराठी
(D) उपर्युक्त सभी

12. उत्तर भारत से नागरी लिपि के लेख कब से मिलने लगते हैं?
(A) आठवीं सदी
(B) छठी सदी
(C) नौवीं सदी
(D) चौथी सदी

13. ‘सरहपाद’ की कृति है-
(A) दोहाकोश
(B) पृथ्वीराज रासो
(C) मृच्छकटिकम
(D) मेघदूतम्

14. ‘नागरी लिपि’ के लेखक हैं?
(A) महात्मा गाँधी
(B) विनोद कुमार शुक्ल
(C) गुणाकर मुले
(D) यतीन्द्र मिश्र

15. बारहवीं सदी के केरल के शासकों के सिक्कों पर ‘वीरकेरलस्य’ जैसे शब्द अंकित है। लिपि में
(A) ब्राह्मी
(B) खरोष्ठी
(C) गुजराती
(D) देवनागरी

16. ‘नक्षत्र लोक’ किस लेखक की कृति है?
(A) विनोद कुमार शुक्ल
(B) गुणाकर मुले
(C) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(D) मैक्स मूलर

17. मराठी भाषा की लिपि क्या है?
(A) खरोष्ठी लिपि
(B) प्राकृत लिपि
(C) नागरी लिपि
(D) देवनागरी लिपि

18. ‘धारा नगरी’ के कौन परमार शासक विद्यानुरागी थे?
(A) महेन्द्रपाल
(B) भोज
(C) मिहिर भोज
(D) अमोघवर्ष

19. चन्द्रगुप्त (द्वितीय) का व्यक्तिगत नाम क्या था?
(A) देव
(B) महादेव
(C) शैलदेव
(D) रामदेव

20. हिन्दी भाषा की लिपि क्या है?
(A) ब्राह्मी लिपि
(B) देवनागरी लिपि
(C) चित्रलिपि
(D) गुरुमुखी लिपि

21. ‘दोहा-कोश’ किसकी रचना है?
(A) सरहपाद की
(B) रसखान की
(C) जीवनानंद दास की
(D) गुरुनानक की

22. ‘रामायण’ की रचना किस भाषा में है?
(A) संस्कृत
(B) हिन्दी
(C) उर्दू
(D) अंग्रेजी

23. तमिल, मलयालम, तेलगू, कन्नड़ भाषाएँ हैं-
(A) उत्तर भारत की
(B) पश्चिम भारत की
(C) पूर्वी भारत की
(D) दक्षिण भारत की

24. पहली बार देवनागरी लिपि के टाइप कब बने?
(A) करीब दो सदी पहले
(B) करीब तीन सदी पहले
(C) करीब पाँच सदी पहले
(D) करीब चौथी सदी के पहले

25. ‘अक्षरों की कहानी’ जिसकी रचना है?
(A) मैक्समूलर
(B) गुणाकर मुले
(C) बिरजू महाराज
(D) रामविलास शर्मा

26. ‘नागरी लिपि’ निबंध गुणाकर मुले की किस पुस्तक से लिया जाता है?
(A) अक्षरों की कहानी
(B) नक्षत्र-लोक
(C) भारतीय लिपियों की कहानी
(D) अंतरिक्ष यात्रा

27. 9वीं सदी में सुदूर दक्षिण से प्राप्त वरगुण का पलियम ताम्रपत्र किस लिपि में है?
(A) नागरी लिपि
(B) रोमन लिपि
(C) ब्राह्मी लिपि
(D) खरोष्ठी लिपि

28. ईसा की चौदहवीं-पंद्रहवीं सदी के विजयनगर के शासकों ने अपने लेखों की लिपि को कहा है-
(A) नंदिनागरी
(B) देवनागरी
(C) गुजराती
(D) ब्राह्मी

29. बेतमा दानपत्र किस समय का है?
(A) 1020 ई०
(B) 1021 ई०
(C) 1022 ई०
(D) 1023 ई०

30. गुणाकर मुले ने अपनी किस पुस्तक में संसार की प्रायः सभी प्रमुख पुरालिपियों की विस्तृत जानकारी दी है?
(A) अक्षर कथा
(B) अक्षरा की कहानी
(C) भारतः इतिहास और संस्कृति
(D) नक्षत्र-लोक

31. महमूद गजनवी के बाद के किस शासक ने अपने सिक्कों पर नागरी शब्द खुदवाए हैं?
(A) मुहम्मद गौरी
(B) अलाउद्दीन खिलजी
(C) शेरशाह
(D) उपर्युक्त सभी

32. उत्तर भारत में पहले-पहल किस राजाओं के लेखों में नागरी लिपि देखने को मिलती है?
(A) राष्ट्रकूट राजा
(B) गुर्जर-प्रतीहार राजाओं
(C) चोल राजाओं
(D) इनमें से कोई नहीं

33. नागरी लिपि के आरंभिक लेख हमें कहाँ से मिले हैं?
(A) पूर्वी भारत
(B) पश्चिमी भारत
(C) दक्षिणी भारत
(D) उत्तरी भारत

34. नागरी लिपि की मुख्य पहचान क्या है?
(A) अक्षरों के सिरों पर छोटी आड़ी लकीरें होती हैं
(B) अक्षरों के सिरों पर पूरी लकीरें बनती हैं
(C) अक्षरों में ठोस तिकोन नहीं होते
(D) अक्षर गोलाकार होते हैं

35. नंदिनागरी शब्द का संबंध किससे है?
(A) महाराष्ट्र के नंदिनगर से
(B) दिल्ली के नगर से
(C) काशी के नगर से
(D) विजयपुर के नगर से

36. दक्षिण भारत में नागरी लिपि के आरंभिक लेख कहाँ से प्राप्त हुए हैं?
(A) विंध्य पर्वत
(B) कोंकण और राष्ट्रकूट क्षेत्र
(C) तमिलनाडु
(D) केरल

37. गुणाकर मुले ने कितनी पुस्तकें और लेख प्रकाशित किए हैं?
(A) 1000 लेख और 20 पुस्तकें
(B) 2500 लेख और 30 पुस्तकें
(C) 1500 लेख और 15 पुस्तकें
(D) 2000 लेख और 25 पुस्तकें

38. नागरी लिपि के आरंभिक लेखों का देशभर में प्रसार कब तक हुआ?
(A) 6वीं–8वीं सदी
(B) 8वीं–11वीं सदी
(C) 11वीं–14वीं सदी
(D) 14वीं–16वीं सदी

39. नागरी लिपि के आरंभिक लेखों में कौन-सी भाषाएँ लिखी जाती थीं?
(A) संस्कृत और हिंदी
(B) मराठी और बंगला
(C) संस्कृत, हिंदी और मराठी
(D) केवल संस्कृत

40. दक्षिण भारत में विजयनगर के शासकों के लेख किस लिपि में मिलते हैं?
(A) देवनागरी और कन्नड़-तेलुगु
(B) केवल देवनागरी
(C) केवल कन्नड़-तेलुगु
(D) गुजराती और देवनागरी

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निष्कर्ष :

ऊपर आपने बिहार बोर्ड कक्षा 10 की हिन्दी पुस्तक “गोधूली भाग 2” के गद्यखंड के पाँचवे अध्याय “नागरी लिपि” की व्याख्या, बोध-अभ्यास, महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को पढ़ा। हमें उम्मीद है कि यह सामग्री आपके अध्ययन को और सरल व प्रभावी बनाएगी। यदि किसी प्रश्न या समाधान को लेकर आपके मन में कोई शंका हो, तो आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं या सीधे हमसे संपर्क करें। हम आपकी मदद करने की पूरी कोशिश करेंगे। संपर्क करें
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