BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-9 Solution

Follow Us On

Hindi Exercise Solution Series

BSEB 10th Hindi Godhuli Exercise-9 Solution "आविन्यों" and pdf

इस पोस्ट में हम बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक “गोधूली” के नौवें अध्याय “आविन्यों” के कहानी का सारांश, कवि परिचय, सभी प्रश्नों के समाधान, महत्त्वपूर्ण एवं संभावित प्रश्न और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों ( Objective Questions) को विस्तार से देखने वाले हैं।
हमारा प्रयास आपको परीक्षा की तैयारी करवाना है ताकि आप अपने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें। इस अध्याय के सभी प्रश्नोत्तरों एवं व्याख्याओं का PDF भी आप निशुल्क डाउनलोड (Download) कर सकते हैं। PDF लिंक नीचे उपलब्ध है, जिससे आप इसे ऑफलाइन भी पढ़ सकते हैं।

"आविन्यों" की मुख्य बातें

इस कहानी में लेखक ने अपने आविन्यों प्रवास को एक गहरी आत्मिक और रचनात्मक अनुभूति के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया है कि यह स्थान केवल घूमने की जगह नहीं था, बल्कि वहाँ का शांत वातावरण, पुराना मठ, इतिहास से जुड़ा स्थापत्य और मौन ने उनके भीतर सृजन की भावना को जगाया। पत्थरों की प्रतीक्षा वाले वर्णन में यह भावना उभरकर आती है कि निर्जीव चीजें भी समय, प्रकृति और इतिहास की गवाह होती हैं। वे बिना कुछ कहे भी यादों और भावनाओं को संभाले रहती हैं। नदी वाले हिस्से में लेखक ने नदी और कविता के बीच सुंदर तुलना की है। उन्होंने कहा कि नदी केवल पानी का बहाव नहीं है, बल्कि उसके किनारे बैठने वाला व्यक्ति भी कुछ समय के लिए उसका हिस्सा बन जाता है। उसी प्रकार कविता भी हमें अपनी अनुभूति में शामिल कर लेती है। नदी भले ही शांत दिखे, लेकिन बहती रहती है; कविता भी समय के साथ नए भाव और कल्पनाएँ समेटती रहती है। इन दोनों में निरंतरता और जीवन का प्रवाह बना रहता है।

कुल मिलाकर यह अंश बताता है कि लेखक के लिए आविन्यों का अनुभव केवल यात्रा नहीं, बल्कि एकांत, प्रकृति, स्मृति और सृजन के बीच गहरा संबंध स्थापित करने वाला अवसर था। इससे यह समझ भी मिलती है कि भावनाएँ केवल मनुष्य में नहीं, बल्कि प्रकृति और वातावरण में भी छिपी होती हैं।

इस विषय का हमारा समाधान ही क्यों?

  • हमारा समाधान बिहार बोर्ड कक्षा 10 के न्यूनतम पाठ्यक्रम (Syllabus) पर आधारित है।
  • यह समाधान सरल, आसान और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
  • हिंदी गोधूली के अभ्यास (Exercise) समाधान के साथ अनेक महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी दिए गए हैं।
  • हमारी वेबसाइट पर हिंदी के साथ-साथ अन्य विषयों के समाधान भी उपलब्ध हैं।
  • यहाँ आपको निःशुल्क उच्च गुणवत्ता वाले PDF मिलेंगे।

अशोक वाजपेयी का संक्षिप्त परिचय

अध्याय – 9 आविन्यों
पूरा नाम अशोक वाजपेयी
जन्म 16 जनवरी 1941 ई०
जन्म स्थान दुर्ग, छत्तीसगढ़ (मूल निवास – सागर, मध्यप्रदेश)
माता-पिता माता – निर्मला देवी, पिता – परमानंद वाजपेयी
शिक्षा प्रारंभिक शिक्षा – गवर्नमेंट हायर सेकेंड्री स्कूल, सागर; बी॰ए॰ – सागर विश्वविद्यालय; एम॰ए॰ (अंग्रेजी) – सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली
वृत्ति / कार्यक्षेत्र भारतीय प्रशासनिक सेवा, कई उच्च पदों पर कार्य; महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति; संप्रति – कला अकादमी, भारत सरकार के निदेशक
प्रमुख रचनाएँ कविता संकलन – शहर अब भी संभावना है, एक पतंग अनंत में, तत्पुरुष, कहीं नहीं वहीं, बहुरि अकेला, थोड़ी सी जगह, दुख चिट्ठीरसा है आदि
आलोचना पुस्तकें – फिलहाल, कुछ पूर्वग्रह, समय से बाहर, कविता का गल्प, कवि कह गया है आदि
संपादन – तीसरा साक्ष्य, साहित्य विनोद, कला विनोद, कविता का जनपद, मुक्तिबोध/शमशेर/अज्ञेय की चुनी हुई कविताएँ, समवेत, पहचान, पूर्वग्रह, बहुवचन, कविता एशिया, समास आदि पत्रिकाओं का संपादन
सम्मान साहित्य अकादमी पुरस्कार, दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान, फ्रेंच सरकार का ऑफिसर अव द ऑर्डर अव क्रॉस (2004) आदि
प्रस्तुत पाठ का स्रोत ‘आविन्यों’ – गद्य एवं कविता का सर्जनात्मक संग्रह
रचनात्मक विशेषता संश्लिष्ट रचनाधर्मिता, वैश्विक चिंतन, स्थान व परिवेश से जुड़ी सृजन प्रक्रिया, संवेदनशील एवं सर्जनात्मक दृष्टि

बोध और अभ्यास प्रश्न

पाठ के साथ

Q1: आविन्यों क्या है और वह कहाँ अवस्थित है ?
उत्तर : आविन्यों फ्रांस का एक प्राचीन और सांस्कृतिक नगर है। यह दक्षिण फ्रांस में रोन नदी के किनारे बसा हुआ है। पहले यह कुछ समय के लिए पोप की राजधानी भी रहा था और आज यह अपने रंग-समारोह तथा ऐतिहासिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है।
Q2: हर बरस आविन्यों में कब और कैसा समारोह हुआ करता है ?
उत्तर : आविन्यों में हर वर्ष गर्मियों के मौसम में फ्रांस और यूरोप का एक बहुत प्रसिद्ध और लोकप्रिय रंगमंचीय समारोह आयोजित किया जाता है। इस समारोह के दौरान कई पुराने चर्च और ऐतिहासिक भवन रंगस्थलियों में बदल जाते हैं, जहाँ विविध नाट्य प्रस्तुतियाँ होती हैं।
Q3: लेखक आविन्यों किस सिलसिले में गए थे ? वहाँ उन्होंने क्या देखा-सुना ?
उत्तर : लेखक को पीटर ब्रुक द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले विवादास्पद नाट्य-प्रयोग ‘महाभारत’ को देखने के निमंत्रण पर आविन्यों जाना पड़ा। यह प्रस्तुति आविन्यों से कुछ किलोमीटर दूर एक पत्थर की खदान में होने वाली थी। वहाँ पहुँचकर लेखक ने देखा कि गर्मियों के इस रंग-समारोह के दौरान आविन्यों के कई पुराने चर्च और ऐतिहासिक इमारतें अस्थायी रंगमंचों में बदल जाती हैं। उन्होंने कुमार गंधर्व का गायन भी सुना, जो एक पुराने आर्कबिशप के आवास के बड़े आँगन में हुआ था।
Q4: ला शत्रूज़ क्या है और वह कहाँ अवस्थित है ? आजकल उसका क्या उपयोग होता है ?
उत्तर : ला शत्रूज़ एक प्राचीन ईसाई मठ है, जो वीलनव्व-ल-आविन्यों नामक स्थान में स्थित है। यह जगह रोन नदी के पार, मुख्य आविन्यों नगर के दूसरी ओर है। मूल रूप से इसे फ्रांसीसी शासकों ने पोप की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए एक किले के रूप में बनवाया था, बाद में इसे कार्थूसियन संप्रदाय के साधुओं का मठ बनाया गया।
आजकल इसका उपयोग एक कलाकेन्द्र के रूप में होता है। यहाँ रंगकर्मी, लेखक, नाटककार, अभिनेता और संगीतकार कुछ समय के लिए आकर रचनात्मक प्रवास करते हैं और अपने कार्य पर एकांत में ध्यान लगाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को पुराने चैम्बर्स में रहने और रचना करने की सुविधा दी जाती है। यह स्थान अब सांस्कृतिक और सृजनात्मक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केन्द्र बन चुका है।
Q5: ला शत्रूज़ का अंतरंग विवरण अपने शब्दों में प्रस्तुत करते हुए यह स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने उसके स्थापत्य को ‘मौन का स्थापत्य’ क्यों कहा है ?
उत्तर : ला शत्रूज़ एक पुराना ईसाई मठ है, जहाँ पहले कार्थूसियन संप्रदाय के साधु रहते थे। इसका निर्माण ऐसा है कि वहाँ की संरचना स्वयं ही शांति और एकांत का अनुभव कराती है। मठ के भीतर बने चैम्बर दो कमरों वाले छोटे-छोटे आवास हैं, जिनमें चौदहवीं सदी का फर्नीचर लगा हुआ है। इन कमरों के द्वार लंबे, बंद गलियारों की ओर खुलते हैं, और वे गलियारे कब्रगाह के चारों ओर बने हुए हैं। यहाँ की दीवारें मोटी हैं, खिड़कियाँ संकरी और ऊँची हैं, आँगन शांत हैं और पूरा परिवेश गहरे मौन से भरा रहता है। कार्थूसियन संप्रदाय के साधु बोलने से परहेज़ करते थे और अधिकतर समय एकांत में ध्यान और प्रार्थना में रहते थे। उनकी जीवन-पद्धति के अनुसार यह स्थान बनाया गया था। इसीलिए लेखक ने ला शत्रूज़ के स्थापत्य को ‘मौन का स्थापत्य’ कहा है—क्योंकि वहाँ का हर पत्थर, गलियारा, कमरा और आँगन बोलता नहीं, बल्कि शांत रहकर सन्नाटे और आत्मिक एकांत की छाप छोड़ता है।
Q6: लेखक आविन्यों क्या साथ लेकर गए थे और वहाँ कितने दिनों तक रहे ? लेखक की उपलब्धि क्या रही ?
उत्तर : लेखक आविन्यों अपने साथ हिंदी का टाइपराइटर, तीन-चार पुस्तकें और कुछ संगीत के टेप्स लेकर गए थे। वे वहाँ 24 अक्टूबर से 10 नवम्बर 1994 तक कुल उन्नीस दिन रहे। इस दौरान उन्होंने पूरी एकांत स्थिति में रचनात्मक समय बिताया और उन्नीस दिनों में कुल पैंतीस कविताएँ और सत्ताईस गद्य रचनाएँ लिखी। इस प्रकार, उनका आविन्यों प्रवास एक सृजनात्मक और प्रभावशाली उपलब्धि साबित हुआ।
Q7: प्रतीक्षा करते हैं पत्थर’ शीर्षक कविता में कवि क्यों और कैसे पत्थर का मानवीकरण करता है ?
उत्तर : कवि का आविन्यों में एकांत प्रवास मौन और स्थिरता से भरे वातावरण में था। वहाँ उन्होंने देखा कि पत्थर समय, इतिहास और प्रकृति की साक्षी होते हैं। कवि ने इन पत्थरों को मानवीय भावनाओं और क्रियाओं—जैसे प्रतीक्षा करना, प्रार्थना करना, धीरज रखना—से जोड़कर मानवीकरण किया। इस प्रकार, कविता में पत्थर जैसे जीवित प्राणी प्रतीत होते हैं, जो मौन में अपने अनुभव और संवेदनाएँ धारण किए रहते हैं।
Q8: आविन्यों के प्रति लेखक कैसे अपना सम्मान प्रदर्शित करते हैं ?
उत्तर : लेखक ने आविन्यों को गहरी कृतज्ञता और सम्मान के साथ याद किया है। वहाँ बिताए गए शांत, सघन और सुनसान दिन-रातें उनके लिए रचनात्मक अनुभव और पवित्रता से भरे हुए थे। उन्होंने अपनी कविताएँ और गद्य रचनाएँ वहीं रचा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि लेखक आविन्यों को सिर्फ स्थान नहीं बल्कि प्रेरणा और स्मृति का स्रोत मानते हैं।
Q9: मनुष्य जीवन से पत्थर की क्या समानता और विषमता है ?
उत्तर : मनुष्य और पत्थर दोनों परिवर्तनशील समय का अनुभव करते हैं। जैसे मनुष्य सुख-दुःख, उतार-चढ़ाव और अनुभवों से गुजरता है, वैसे ही पत्थर भी मौसम और समय की परिस्थितियों का सामना करता है। दोनों में समानता यह है कि दोनों अपने इतिहास और अनुभवों को संजोए रखते हैं।
विषमता यह है कि मनुष्य अपनी भावनाएँ व्यक्त करता है, प्रार्थना करता है, शब्दों और कविता के माध्यम से अपने अनुभव साझा करता है, जबकि पत्थर मूक और निराकार रहता है, बिना शब्द बोले अपने अस्तित्व में समय और इतिहास को धारण करता है। इस प्रकार, पत्थर मनुष्य के अनुभवों का प्रतीक होते हुए भी खुद अभिव्यक्त नहीं करता।
Q10: इस कविता से आप क्या सीखते हैं ?
उत्तर : इस कविता से हमें यह सीख मिलती है कि धैर्य और एकांत में रहकर अपने लक्ष्य पर ध्यान देना बहुत महत्वपूर्ण है। हमें जीवन में आने वाली कठिनाइयों और बाधाओं को सहन करते हुए अपने उद्देश्य को प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। जैसे पत्थर बिना शब्द बोले प्रतीक्षा करता है, वैसे ही हमें भी अपने कर्म और प्रयास में निरंतरता बनाए रखनी चाहिए।
Q11: नदी के तट पर बैठे हुए लेखक को क्या अनुभव होता है ?
उत्तर : नदी के तट पर बैठे लेखक को ऐसा अनुभव होता है कि जल स्थिर प्रतीत होते हुए भी बह रहा है और तट ही उसके साथ बह रहा है। लेखक महसूस करते हैं कि वे स्वयं नदी के प्रवाह का हिस्सा बन गए हैं। नदी के पास बैठने से उन्हें यह एहसास होता है कि जैसे वे भी नदी की तरह समय और प्रवाह में शामिल हो रहे हैं।
Q12: नदी तट पर लेखक को किसकी याद आती है और क्यों ?
उत्तर : नदी के तट पर बैठते समय लेखक को विनोद कुमार शुक्ल की एक कविता याद आती है। क्योंकि वह कविता बताती है कि जो लोग नदी के पास रहते हैं, वे “नदी-चेहरा” बन जाते हैं। लेखक महसूस करते हैं कि वे स्वयं नदी का हिस्सा बन गए हैं, इसलिए शुक्ल की कविता उनके अनुभव से मेल खाती है और यही कारण है कि उन्हें वह कविता याद आती है।
Q13: नदी और कविता में लेखक क्या समानता पाता है ?
उत्तर : लेखक के अनुसार, जैसे नदी सदियों से बहती रही है और विभिन्न स्थानों से जल मिलाकर सागर में समाहित होती है, पर उसका जल कभी कम नहीं होता, वैसे ही कविता भी समय के साथ नई छवियाँ, भाव और अनुभव अपने में समेटती रहती है और कभी खाली नहीं होती। इसलिए लेखक नदी और कविता में निरंतरता, जीवन का प्रवाह और समृद्धि जैसी समानताएँ पाता है।
Q14: किसके पास तटस्थ रह पाना संभव नहीं हो पाता और क्यों ?
उत्तर : लेखक कहते हैं कि नदी और कविता के पास तटस्थ रह पाना संभव नहीं है।
• नदी अपने प्रवाह और जल से किसी को भी अपने साथ जोड़ लेती है; वह किसी को अनदेखा नहीं करती।
• कविता भी समय के साथ विभिन्न बिम्ब, भाव और जीवन छवियाँ अपने में समेटती रहती है।

भाषा की बात

1. निम्नांकित के लिंग-निर्णय करते हुए वाक्य बनाएँ
खदान, आवास, बन्दिश, इमारत, रंगकर्मी, अवधि, नहानघर, आँगन, आसक्ति, प्रणति
उत्तर: खदान : स्त्रीलिंग
वाक्य : खदान में खनन का काम चल रहा है।

आवास : पुल्लिंग
वाक्य : छात्रों के लिए विश्वविद्यालय में नया आवास बनाया गया है।

बन्दिश : स्त्रीलिंग
वाक्य : संगीत में उन्होंने कठिन बन्दिश पर अभ्यास किया।

इमारत : स्त्रीलिंग
वाक्य : शहर में एक नई इमारत तैयार हो गई है।

रंगकर्मी : पुल्लिंग
वाक्य : रंगकर्मी मंच पर प्रस्तुति देने के लिए तैयार है।

अवधि : स्त्रीलिंग
वाक्य : परीक्षा की अवधि दो घंटे है।

नहानघर : पुल्लिंग
वाक्य : नहानघर में साफ-सफाई का काम किया गया।

आँगन : पुल्लिंग
वाक्य : बच्चे आँगन में खेल रहे हैं।

आसक्ति : स्त्रीलिंग
वाक्य : उसकी पुस्तकें उसके लिए सबसे बड़ी आसक्ति हैं।

प्रणति : स्त्रीलिंग
वाक्य : कवि ने अपनी प्रणति पाठकों के सामने रखी।

2. निम्नांकित के समास-विग्रह करते हुए भेद बताएँ
यथासंभव, पहले-पहल, लोकप्रिय, रंगकर्मी, पचासेक, कवित्रयी, कविप्रणति, प्रतीक्षारत, अपलक, तदाकार
उत्तर: यथासंभव : जैसा-सा-भव (तत्पुरुष समास)
पहले-पहल : पहले और पहल (द्वंद्व समास)
लोकप्रिय : लोक-प्रिय (तत्पुरुष समास)
रंगकर्मी : रंग + कर्मी (बहुव्रीहि समास)
पचासेक : पचास + एक (द्वंद्व समास)
कवित्रयी : कवि + त्रयी (बहुव्रीहि समास)
कविप्रणति : कवि + प्रणति (तत्पुरुष समास)
प्रतीक्षारत : प्रतीक्षा + रत (तत्पुरुष समास)
अपलक : अ + पलक (विकृति, विशेषणात्मक)
तदाकार : तत् + आकार (तत्पुरुष समास)

3. पाठ से अहिन्दी स्रोत के शब्द एकत्र कीजिए ।
उत्तर: अहिन्दी शब्द : आविन्यों, रोन, पोप, पीटर ब्रुक, महाभारत, रंग-समारोह, मधुरई, आर्कबिशप, कार्थूसियन, मठ, चैम्बर, डिपार्टमेंटल, संगीत, वीलनव्व, पिकासो, आन्द्रे ब्रेताँ, रेने शॉ, पाल एलुआर, निदेशक

4. निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलें
रंगकर्मी, कविताएँ, उसकी, सामग्री, अनेक, सुविधा, अवधि, पीड़ा, पत्तियाँ, यह
उत्तर: रंगकर्मी : रंगकर्मी (समान्यत: पुल्लिंग, बहुवचन में भी रंगकर्मी)
कविताएँ : कविता
उसकी : उनके / उसका
सामग्री : सामग्रीयाँ
अनेक : अनेक (समान रहता है)
सुविधा : सुविधाएँ
अवधि : अवधियाँ
पीड़ा : पीड़ाएँ
पत्तियाँ : पत्ती
यह : ये / यह (संदर्भ पर निर्भर)

10th हिंदी गोधूली के अन्य अध्यायों के Solution भी देखें।

क्रमांक अध्याय
1 श्रम विभाजन एवं जातिप्रथा
2 विष के दाँत
3 भारत से हम क्या सीखें
4 नाखून क्यो बढ़ते हैं
5 नगरी लिपि
6 बहादुर
7 परंपरा का मूल्यांकन
8 जित-जित मैं निरखत हूँ
10 मछली
11 नैबतख़ाने में इबादत
12 शिक्षा और संस्कृति

शब्द निधि

महाकाव्यात्मक : महाकाव्य की तरह व्यापक और गहरा
रंगस्थल : जहाँ नाटक मंचित हो
दुम : पेड़-पौधा
स्थापत्य : वास्तु-रचना, भवन-निर्माण की कला
जीर्णोद्धार : पुराने को नया करना
सुघर : सुंदर
चैम्बर्स : प्रकोष्ठ, कमरे
नीरव : शब्दहीन, ध्वनिहीन
निपट : नंगा, निरा, स्पष्ट
निविड़ : घना, सघन
आसक्ति : गहरा भावात्मक लगाव
दस्तावेज : ऐसे कागजात जिनमें किसी वस्तु का सारा विवरण हो
कविप्रणति : कवि का कृतज्ञतापूर्ण प्रणाम
बियाबान : निर्जन, सुनसान
बेहद्दी चौगान : सीमाहीन खुला मैदान
तदाकार : किसी वस्तु के आकार में ढल जाना
अभिभूति : पराजय, अत्यंत प्रभावित होना
नश्वरता : भंगुरता, नाशशीलता

अशोक वाजपेयी का संक्षिप्त परिचय :

अशोक वाजपेयी का जन्म 16 जनवरी 1941 को दुर्ग, छत्तीसगढ़ में हुआ, लेकिन उनका मूल निवास सागर, मध्यप्रदेश है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सागर से प्राप्त की और सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली से अंग्रेज़ी में एम.ए. किया। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़े और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति रहे। साहित्य में उनकी उल्लेखनीय भूमिका रही है और उनकी लगभग तीन दर्जन मौलिक और संपादित कृतियाँ प्रकाशित हैं। इनमें कविता संग्रह जैसे शहर अब भी संभावना है, एक पतंग अनंत में और आलोचना की पुस्तकें जैसे कुछ पूर्वग्रह, कविता का गल्प शामिल हैं। वे संपादक भी रहे और कई पत्रिकाओं का संपादन किया। अशोक वाजपेयी को साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक सम्मान मिल चुके हैं। उनके लेखन और संपादन कार्य ने हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

नीचे इस अध्याय से संबंधित कुल 30 वस्तुनिष्ठ प्रश्न दिए गए हैं। ये प्रश्न अध्याय के गहन अध्ययन के आधार पर तैयार किए गए हैं तथा इनमें से कई प्रश्न पिछले वर्षों की बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा से भी लिए गए हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास करने से आपको परीक्षा की तैयारी में काफी मदद मिलेगी और यह समझने में आसानी होगी कि परीक्षा में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
1. लेखक आविन्यों क्या साथ लेकर गए थे?
(A) कुर्सी
(B) पुस्तक, टाइपराइटर और टेप्स
(C) मेज
(D) डंडा

2. ला-शत्रूज क्या था?
(A) विद्यालय
(B) शहर
(C) गाँव
(D) ईसाई मठ

3. ‘पिकासो’ की विख्यात कृति का नाम है
(A) द आविन्यो
(B) द वीलनब्व
(C) मादामोजेल द आविन्यो
(D) द मादामोजेल

4. ललित रचना ‘आविन्यों’ के रचनाकार कौन हैं?
(A) अमरकांत
(B) अशोक वाजपेयी
(C) गुणाकर मुले
(D) विनोद कुमार शुक्ल

5. अशोक वाजपेयी का जन्म कब हुआ था?
(A) 16 जनवरी, 1941 ई० में
(B) 10 मार्च, 1942 ई० में
(C) 19 मई, 1943 ई० में
(D) 15 जून, 1944 ई० में

6. फ्रांस का प्रमुख कला केन्द्र कौन सा रहा है?
(A) एफिल टावर
(B) आविन्यो
(C) (A) एवं (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं

7. ‘आविन्यो’ किस देश में है?
(A) रूस
(B) फ्रांस
(C) जर्मनी
(D) स्विट्जरलैंड

8. लेखक अशोक वाजपेयी आविन्यों में कुल कितने दिन रहे?
(A) पन्द्रह दिन
(B) उन्नीस दिन
(C) बीस दिन
(D) बाइस दिन

9. ‘ला शत्रूज’ का धार्मिक उपयोग कब से कब तक होता रहा?
(A) ग्यारहवीं सदी से फ्रेंच क्रांति तक
(B) बारहवीं सदी से फ्रेंच क्रांति तक
(C) तेरहवीं सदी से फ्रेंच क्रांति तक
(D) चौदहवीं सदी से फ्रेंच क्रांति तक

10. आविन्यों में उन्नीस दिनों के प्रवास के दौरान लेखक ने कितने गद्य की रचना की?
(A) 27
(B) 28
(C) 29
(D) 30

11. आविन्यों में रहकर लगभग तीस संयुक्त कविताएँ लिखने वाले अतियथार्थवादी कवित्रयी हैं।
(A) आन्द्रे ब्रेता
(B) रेन शाँ
(C) पाल एलुआर
(D) उपर्युक्त सभी

12. अशोक वाजपेयी की ललित रचना है।
(A) नागरी लिपि
(B) नौबतखाने में इवादत
(C) मछली
(D) आविन्यों

13. कविता नहीं है।
(A) आविन्यों
(B) स्वदेशी
(C) हमारी नींद
(D) भारतमाता

14. ला शत्रूज में रहकर लेखक कितने कविताएँ की रचना की?
(A) 20
(B) 25
(C) 30
(D) 35

15. आविन्यों में 19 दिनों के प्रवास के दौरान लेखक ने कितने गद्य की रचना की?
(A) 20
(B) 25
(C) 27
(D) 35

16. आविन्यों है-
(A) कहानी
(B) कविता
(C) जीवनी
(D) ललित रचना

17. लेखक आविन्यों किस सिलसिले में गए थे?
(A) भ्रमण कार्यक्रम पर
(B) एकांत में रहने के लिए
(C) तीर्थ यात्रा पर
(D) रंग-समारोह में भाग लेके

18. पीटर ब्रुक का विवादास्पद ‘महाभारत’ पहले पहल कहाँ प्रस्तुत किया जाने वाला था?
(A) आविन्यों में
(B) जारशाही रूस में
(C) डेसाक जर्मनी
(D) दुर्ग, छत्तीसगढ़

19. ‘ला शत्रूज’ को किसने बनवाया था?
(A) जर्मन शासकों ने
(B) फ्रेंच शासकों ने
(C) चीनी शासकों ने
(D) जापानी शासकों ने

20. कार्यूसियन सम्प्रदाय का एक ईसाई मठ है-
(A) ला शत्रूज
(B) कॉथोलिक चर्च
(C) वीलनप्व
(D) इनमें से कोई नहीं

21. ‘जारशाही’ कहाँ थी?
(A) रूस में
(B) जापान में
(C) फ्रांस में
(D) चीन में

22. ‘आविन्यों’ किस नदी पर स्थित है?
(A) रोन नदी पर
(B) सोन नदी पर
(C) टेम्स नदी पर
(D) कोई नहीं

23. रोन नदी के दूसरी ओर आविन्यों का एक और हिस्सा है जो लगभग स्वतंत्र है। नाम है-वीलनत्व ल आवियों, अर्थात् आविन्यों का नया गाँव शायद कहना चाहिए नयी वस्ती। इस गद्यांश के लेखक कौन हैं?
(A) रामविलास शर्मा
(B) अशोक वाजपेयी
(C) विनोद कुमार शुक्ल
(D) यतीन्द्र मिश्र

24. ‘ल मादामोजेल द आविन्यों’ किसकी कृति है?
(A) लियानार्दो द विंची
(B) पिकासो
(C) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(D) विन्सेंट वैन गो

25. आविन्यों, दक्षिण फ्रांस में रोन नदी के किनारे बसा कैसा शहर है?
(A) नया
(B) आधुनिक
(C) पुराना
(D) विकसित

26. महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति कौन थे?
(A) नलिन विलोचन शर्मा
(B) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(C) अशोक वाजपेयी
(D) अमरकांत

27. ‘वीलनत्व’ क्या है?
(A) एक शहर
(B) एक छोटा सा गाँव
(C) एक नदी
(D) एक झील

28. ‘रोन’ नदी के किनारे बसे शहर का नाम है-
(A) लंदन
(B) लाहौर
(C) आविन्यों
(D) लखनऊ

29. प्रत्येक वर्ष आविन्यों में कैसा समारोह आयोजित होता है?
(A) रंग-समारोह
(B) धार्मिक
(C) विश्वकप
(D) राष्ट्रमंडल खेल

30. ‘एक पतंग अनंत में’ किनकी रचना है?
(A) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(B) विनोद कुमार शुक्ल
(C) यतीन्द्र मिश्र
(D) अशोक वाजपेयी

[Note] : यदि आप उपयुक्त वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का उत्तर जानना चाहते हैं, तो हमारे WhatsApp Channel या Telegram से अवश्य जुड़े।

"आविन्यों" की pdf Download करें

निष्कर्ष :

ऊपर आपने बिहार बोर्ड कक्षा 10 की हिन्दी पुस्तक “गोधूली भाग 2” के गद्यखंड के नौवें अध्याय “आविन्यों” की व्याख्या, बोध-अभ्यास, महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को पढ़ा। हमें उम्मीद है कि यह सामग्री आपके अध्ययन को और सरल व प्रभावी बनाएगी। यदि किसी प्रश्न या समाधान को लेकर आपके मन में कोई शंका हो, तो आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं या सीधे हमसे संपर्क करें। हम आपकी मदद करने की पूरी कोशिश करेंगे। संपर्क करें
Scroll to Top