BSEB 10th Science Ex-12 Ultimate Notes Free pdf | विद्युत धारा
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BSEB 10th Science Ex-12 Ultimate Notes : विद्युत धारा
परिचय
हमारे दैनिक जीवन में विद्युत धारा (Electric Current) का बहुत महत्व है। यह हमारे घरों में रोशनी, पंखे चलाने, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चलाने और उद्योगों में मशीनों को संचालित करने में उपयोग होती है। इस अध्याय में, हम विद्युत धारा की प्रकृति, इसके प्रभावों, इसे कैसे मापा जाता है, और विभिन्न घटकों के साथ इसके व्यवहार का अध्ययन करेंगे। हम ओम का नियम, प्रतिरोध, विद्युत शक्ति और विद्युत धारा के तापीय प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझेंगे।
1. विद्युत आवेश (Electric Charge)
विद्युत आवेश पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण वह विद्युत और चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करता है और अनुभव करता है।
प्रकार:
- धनावेश (Positive Charge): प्रोटॉन पर होता है।
- ऋणावेश (Negative Charge): इलेक्ट्रॉन पर होता है।
आवेश के गुण:
- समान आवेश एक दूसरे को प्रतिकर्षित (repel) करते हैं।
- विपरीत आवेश एक दूसरे को आकर्षित (attract) करते हैं।
- आवेश संरक्षित रहता है (न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट)।
- आवेश का परिमाणीकरण (Quantization) होता है, अर्थात आवेश हमेशा एक इलेक्ट्रॉन के आवेश (e) का पूर्ण गुणज होता है (Q = ne), जहाँ ‘n’ एक पूर्णांक है।
मात्रक: आवेश का SI मात्रक कूलम्ब (Coulomb) है।
- एक कूलम्ब आवेश में लगभग 6 × 10¹⁸ इलेक्ट्रॉन होते हैं।
- एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश: -1.6 × 10⁻¹⁹ कूलम्ब।
- एक प्रोटॉन पर आवेश: +1.6 × 10⁻¹⁹ कूलम्ब।
2. विद्युत धारा (Electric Current)
किसी चालक (Conductor) में आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं।
सूत्र: विद्युत धारा (I) = आवेश (Q) / समय (t)
I = Q/t
मात्रक: विद्युत धारा का SI मात्रक एम्पीयर (Ampere) है।
- जब किसी चालक के किसी अनुप्रस्थ-काट से 1 सेकंड में 1 कूलम्ब आवेश प्रवाहित होता है, तो विद्युत धारा 1 एम्पीयर कहलाती है।
- 1 एम्पीयर = 1 कूलम्ब / 1 सेकंड।
दिशा: परंपरागत रूप से, विद्युत धारा की दिशा धनावेश के प्रवाह की दिशा या इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की विपरीत दिशा में मानी जाती है।
एमीटर को हमेशा परिपथ में श्रेणीक्रम (series) में जोड़ा जाता है।
3. विद्युत परिपथ (Electric Circuit)
विद्युत धारा के सतत और बंद पथ को विद्युत परिपथ कहते हैं।
परिपथ के घटक:
- विद्युत स्रोत (जैसे बैटरी या सेल): ऊर्जा प्रदान करता है।
- चालक तार: विद्युत धारा को ले जाने के लिए।
- उपकरण (जैसे बल्ब, पंखा): ऊर्जा का उपयोग करने के लिए।
- स्विच (कुंजी): परिपथ को खोलने या बंद करने के लिए।
परिपथ आरेख (Circuit Diagram): विद्युत परिपथ को विभिन्न घटकों के मानकीकृत प्रतीकों का उपयोग करके दर्शाया गया आरेख।
| घटक | प्रतीक |
|---|---|
| सेल | + | – |
| बैटरी | + | | | – |
| खुली कुंजी (स्विच) | —O O— |
| बंद कुंजी (स्विच) | —O–●–O— |
| तार संधि | —┬— |
| तार क्रॉसिंग (बिना जुड़े) | —┴— |
| विद्युत बल्ब | —(x)— या —(~)— |
| प्रतिरोधक | —/\/\/\— |
| परिवर्ती प्रतिरोधक | —/\/\/\–|>— |
| एमीटर | —(A)— |
| वोल्टमीटर | —(V)— |
4. विद्युत विभव और विभवान्तर (Electric Potential and Potential Difference)
विद्युत विभव (Electric Potential): एकांक धनावेश को अनंत से किसी बिंदु तक लाने में किए गए कार्य को उस बिंदु का विद्युत विभव कहते हैं।
विभवान्तर (Potential Difference): एकांक धनावेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किए गए कार्य को उन दो बिंदुओं के बीच का विभवान्तर कहते हैं।
सूत्र: विभवान्तर (V) = कार्य (W) / आवेश (Q)
V = W/Q
मात्रक: विभवान्तर का SI मात्रक वोल्ट (Volt) है।
- जब 1 कूलम्ब आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में 1 जूल कार्य किया जाता है, तो विभवान्तर 1 वोल्ट कहलाता है।
- 1 वोल्ट = 1 जूल / 1 कूलम्ब।
वोल्टमीटर को हमेशा परिपथ में पार्श्वक्रम (parallel) में उन दो बिंदुओं के बीच जोड़ा जाता है जिनके बीच विभवान्तर मापना होता है।
5. ओम का नियम (Ohm’s Law)
एक स्थिर तापमान पर, किसी चालक के दो सिरों के बीच का विभवान्तर (V) उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा (I) के समानुपाती होता है।
गणितीय रूप: V ∝ I या V = IR
यहाँ, R एक स्थिरांक है जिसे चालक का प्रतिरोध (Resistance) कहते हैं।
प्रतिरोध (Resistance): यह किसी चालक का वह गुण है जो उसमें विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है।
मात्रक: प्रतिरोध का SI मात्रक ओम (Ohm) है, जिसे ग्रीक अक्षर Ω (ओमेगा) से दर्शाया जाता है।
- यदि किसी चालक के दो सिरों के बीच 1 वोल्ट का विभवान्तर लगाने पर उसमें 1 एम्पीयर की धारा प्रवाहित होती है, तो उसका प्रतिरोध 1 ओम कहलाता है।
- 1 ओम = 1 वोल्ट / 1 एम्पीयर।
6. प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Resistance)
किसी चालक का प्रतिरोध (R) निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:
- चालक की लंबाई (Length, L): प्रतिरोध चालक की लंबाई के समानुपाती होता है। (R ∝ L)
- अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल (Area of cross-section, A): प्रतिरोध अनुप्रस्थ-काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। (R ∝ 1/A)
- पदार्थ की प्रकृति (Nature of material): विभिन्न पदार्थों का प्रतिरोध अलग-अलग होता है।
- तापमान (Temperature): तापमान बढ़ने पर धात्विक चालकों का प्रतिरोध बढ़ता है।
प्रतिरोधकता (Resistivity, ρ): यह पदार्थ का एक आंतरिक गुण है जो विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है। यह चालक की लंबाई या अनुप्रस्थ-काट के क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता, बल्कि केवल पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करता है।
सूत्र: R = ρ(L/A)
मात्रक: प्रतिरोधकता का SI मात्रक ओम-मीटर (Ωm) है।
7. प्रतिरोधकों का संयोजन (Combination of Resistors)
प्रतिरोधकों को मुख्य रूप से दो तरीकों से जोड़ा जा सकता है:
a) श्रेणीक्रम संयोजन (Series Combination)
जब दो या दो से अधिक प्रतिरोधकों को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि एक के बाद एक जुड़े हों और उनमें समान विद्युत धारा प्रवाहित हो, तो इसे श्रेणीक्रम संयोजन कहते हैं।
समतुल्य प्रतिरोध (Equivalent Resistance, Req):
श्रेणीक्रम में जुड़े प्रतिरोधों का कुल प्रतिरोध उनके अलग-अलग प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है。
Req = R₁ + R₂ + R₃ + …
श्रेणीक्रम संयोजन के गुण:
- प्रत्येक प्रतिरोधक से समान विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
- कुल विभवान्तर अलग-अलग प्रतिरोधकों के विभवान्तरों के योग के बराबर होता है (V = V₁ + V₂ + V₃)।
- समतुल्य प्रतिरोध प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध से अधिक होता है।
b) पार्श्वक्रम संयोजन (Parallel Combination)
जब दो या दो से अधिक प्रतिरोधकों को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि सभी के सिरे एक ही बिंदु पर और दूसरे सिरे दूसरे बिंदु पर जुड़े हों, और उनके आर-पार विभवान्तर समान हो, तो इसे पार्श्वक्रम संयोजन कहते हैं。
समतुल्य प्रतिरोध (Equivalent Resistance, Req):
पार्श्वक्रम में जुड़े प्रतिरोधों के समतुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम उनके अलग-अलग प्रतिरोधों के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है。
1/Req = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃ + …
पार्श्वक्रम संयोजन के गुण:
- प्रत्येक प्रतिरोधक के आर-पार विभवान्तर समान होता है।
- कुल विद्युत धारा अलग-अलग प्रतिरोधकों में प्रवाहित धाराओं के योग के बराबर होती है (I = I₁ + I₂ + I₃)।
- समतुल्य प्रतिरोध प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध से कम होता है।
घरों में विद्युत उपकरणों को पार्श्वक्रम में जोड़ा जाता है ताकि सभी को समान वोल्टेज मिल सके और एक उपकरण खराब होने पर अन्य पर प्रभाव न पड़े।
8. विद्युत धारा का तापीय प्रभाव (Heating Effect of Electric Current)
जब किसी उच्च प्रतिरोध वाले चालक (जैसे नाइक्रोम तार) से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो चालक गर्म हो जाता है। विद्युत ऊर्जा का ऊष्मा ऊर्जा में रूपांतरण ही विद्युत धारा का तापीय प्रभाव कहलाता है।
जूल्स का तापन नियम (Joule’s Law of Heating):
- किसी प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा (H) उसमें प्रवाहित धारा (I) के वर्ग के समानुपाती होती है (H ∝ I²)।
- प्रतिरोध (R) के समानुपाती होती है (H ∝ R)।
- समय (t) के समानुपाती होती है जिसके लिए धारा प्रवाहित होती है (H ∝ t)।
इन तीनों को मिलाकर, ऊष्मा (H) का सूत्र है:
H = I²Rt
अनुप्रयोग:
- विद्युत हीटर, विद्युत इस्त्री, गीजर: ये सभी विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर कार्य करते हैं।
- विद्युत बल्ब: टंगस्टन फिलामेंट गर्म होकर प्रकाश उत्पन्न करता है।
- विद्युत फ्यूज: सुरक्षा उपकरण, जो परिपथ में अत्यधिक धारा प्रवाहित होने पर पिघलकर परिपथ को भंग कर देता है।
9. विद्युत शक्ति (Electric Power)
विद्युत परिपथ में जिस दर से विद्युत ऊर्जा व्यय या उपभोग होती है, उसे विद्युत शक्ति कहते हैं।
सूत्र:
- शक्ति (P) = कार्य (W) / समय (t)
- शक्ति (P) = विभवान्तर (V) × धारा (I) (क्योंकि W = VQ और Q = It, तो W = VIt)
P = VI - ओम के नियम (V = IR) का उपयोग करके:
P = I²R
P = V²/R
मात्रक: विद्युत शक्ति का SI मात्रक वाट (Watt) है।
- 1 वाट = 1 वोल्ट × 1 एम्पीयर।
- वाट एक छोटा मात्रक है, इसलिए किलोवाट (kW) का उपयोग भी किया जाता है (1 kW = 1000 W)।
10. विद्युत ऊर्जा (Electric Energy) और व्यावसायिक मात्रक
विद्युत ऊर्जा: विद्युत शक्ति द्वारा एक निश्चित समय में किया गया कार्य या उपभोग की गई ऊर्जा।
ऊर्जा (E) = शक्ति (P) × समय (t)
- E = VIt = I²Rt = (V²/R)t
SI मात्रक: जूल (Joule)।
विद्युत ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक (Commercial Unit): किलोवाट-घंटा (kWh) है, जिसे आमतौर पर ‘यूनिट’ कहा जाता है。
- 1 किलोवाट-घंटा वह ऊर्जा है जो 1 किलोवाट शक्ति वाले उपकरण द्वारा 1 घंटे में व्यय की जाती है।
- 1 kWh = 3.6 × 10⁶ जूल।
बिजली के बिल इसी किलोवाट-घंटा (यूनिट) के आधार पर आते हैं।
Science अध्याय 12 विद्युत धारा Notes का pdf
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Notes क्या होते हैं और क्यों आवश्यक होते हैं?
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Notes किसी भी विषय का संक्षिप्त और आसान सारांश होते हैं — यानी ऐसे पन्ने या कॉपी जिनमें किसी अध्याय की मुख्य बातें, महत्वपूर्ण परिभाषाएँ, सूत्र, उदाहरण और अवधारणाएँ छोटे-छोटे बिंदुओं में लिखी जाती हैं। Notes की आवश्यकता यह होती है कि छात्र कम समय में पूरे विषय को दोहरा सकें और कठिन टॉपिक को आसानी से समझ सकें।
अनेक शिक्षकों के अनुसार, Notes एक ऐसा संक्षिप्त लेखन होता है जो पढ़ाई और परीक्षा दोनों के लिए सहायक होता है। अच्छे Notes की मदद से छात्रों को बार-बार पूरी किताब पढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ती क्योंकि इनमें वही बातें शामिल होती हैं जो परीक्षा की दृष्टि से सबसे ज़्यादा जरूरी होती हैं।
जब छात्र स्वयं Notes तैयार करते हैं, तो वे केवल याद नहीं कर रहे होते बल्कि विषय को गहराई से समझ रहे होते हैं। इस प्रक्रिया से ज्ञान लंबे समय तक याद रहता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
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सारांश :
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