BSEB 10th Science Ex-13 Ultimate Notes Free pdf | विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव
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BSEB 10th Science Ex-13 Ultimate Notes : विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव
परिचय
हम जानते हैं कि विद्युत धारा ऊष्मीय प्रभाव उत्पन्न करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि विद्युत धारा चुम्बकीय प्रभाव भी उत्पन्न करती है? जब किसी चालक से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसके चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इसी परिघटना को विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव कहते हैं। इस अध्याय में, हम विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव, विभिन्न चालकों में उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र, इस पर आधारित नियमों और इसके अनुप्रयोगों जैसे विद्युत मोटर और जनित्र का अध्ययन करेंगे।
1. चुम्बकीय क्षेत्र और क्षेत्र रेखाएँ (Magnetic Field and Field Lines)
एक चुंबक अपने चारों ओर के क्षेत्र में बल लगाता है। यह क्षेत्र जहाँ चुंबक का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है, चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है।
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ: ये वे काल्पनिक रेखाएँ हैं जिनका उपयोग चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा और प्रबलता को दर्शाने के लिए किया जाता है।
गुणधर्म:
- ये उत्तरी ध्रुव (N) से निकलकर दक्षिणी ध्रुव (S) में प्रवेश करती हैं और चुम्बक के अंदर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती हैं, जिससे एक बंद वक्र बनाती हैं।
- चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटती हैं। यदि वे काटतीं, तो कटान बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ होतीं, जो संभव नहीं है।
- जहाँ चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ अधिक सघन होती हैं, वहाँ चुम्बकीय क्षेत्र की प्रबलता अधिक होती है (जैसे ध्रुवों पर)।
- चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा उस बिंदु पर रखी गई दिक्सूचक की सुई के उत्तरी ध्रुव द्वारा दर्शाई जाती है।
2. सीधे धारावाही चालक के कारण चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field due to a Straight Current-Carrying Conductor)
जब किसी सीधे चालक तार में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके चारों ओर संकेंद्रित वृत्तों के रूप में चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। इन वृत्तों का केंद्र चालक पर होता है।
दाएँ हाथ का अंगूठा नियम (Right-Hand Thumb Rule): कल्पना कीजिए कि आप अपने दाहिने हाथ में एक धारावाही चालक को इस प्रकार पकड़े हुए हैं कि आपका अंगूठा विद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत कर रहा है, तो आपकी उंगलियाँ जिस दिशा में मुड़ती हैं, वह चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा को दर्शाती है।
3. वृत्ताकार पाश के कारण चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field due to a Circular Loop)
जब किसी वृत्ताकार पाश (लूप) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो प्रत्येक बिंदु पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ संकेंद्रित वृत्तों के रूप में होती हैं। जैसे-जैसे हम पाश के केंद्र की ओर बढ़ते हैं, वृत्त बड़े होते जाते हैं। पाश के केंद्र पर, चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ लगभग सीधी प्रतीत होती हैं।
वृत्ताकार पाश का प्रत्येक छोटा खंड एक सीधे चालक की तरह व्यवहार करता है।
पाश के केंद्र पर चुम्बकीय क्षेत्र की प्रबलता:
- प्रवाहित धारा के समानुपाती होती है।
- पाश की त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
- पाश के फेरों की संख्या के समानुपाती होती है।
4. परिनालिका में चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field in a Solenoid)
एक परिनालिका तार के अनेक फेरों वाली एक बेलनाकार कुंडली होती है, जिसे एक-दूसरे से पृथक्कृत करके बनाया जाता है।
जब परिनालिका से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह एक छड़ चुंबक की तरह व्यवहार करती है।
- परिनालिका के अंदर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ समानांतर सीधी रेखाओं के रूप में होती हैं, जो यह दर्शाती हैं कि अंदर चुम्बकीय क्षेत्र एक समान और प्रबल होता है।
- परिनालिका के सिरों पर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ छड़ चुंबक के समान होती हैं, जहाँ एक सिरा उत्तरी ध्रुव और दूसरा दक्षिणी ध्रुव की तरह कार्य करता है।
परिनालिका के अंदर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की प्रबलता:
- धारा के परिमाण के समानुपाती होती है।
- फेरों की संख्या प्रति इकाई लंबाई के समानुपाती होती है।
5. विद्युत चुंबक (Electromagnet)
एक विद्युत चुंबक एक चुंबक है जो तब बनता है जब एक नरम लोहे के कोर पर तार की कुंडली लपेटकर उसमें से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है। जब धारा बंद कर दी जाती है, तो चुंबकत्व समाप्त हो जाता है।
6. चुम्बकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल (Force on a Current-Carrying Conductor in a Magnetic Field)
जब एक धारावाही चालक को किसी चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो चालक पर एक बल कार्य करता है। इस बल की दिशा चालक में प्रवाहित धारा की दिशा और चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा दोनों पर निर्भर करती है।
फ्लेमिंग का वामहस्त नियम (Fleming’s Left-Hand Rule): अपने बाएँ हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा को इस प्रकार फैलाएँ कि वे तीनों एक-दूसरे के लंबवत हों। यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को, और मध्यमा विद्युत धारा की दिशा को दर्शाती है, तो अंगूठा चालक पर लगने वाले बल की दिशा को दर्शाएगा।
7. विद्युत मोटर (Electric Motor)
विद्युत मोटर एक ऐसा उपकरण है जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है। यह विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव के सिद्धांत पर कार्य करता है।
कार्यप्रणाली का सिद्धांत: जब एक धारावाही आयताकार कुंडली को चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बल युग्म कार्य करता है जो कुंडली को घुमाता है।
मुख्य भाग:
- क्षेत्र चुंबक: एक प्रबल चुंबक जो चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।
- आर्मेचर (कुंडली): नरम लोहे के कोर पर लिपटे हुए तांबे के तार की एक आयताकार कुंडली।
- विभक्त वलय (Split Ring) या दिकपरिवर्तक (Commutator): यह एक ऐसी व्यवस्था है जो कुंडली में प्रवाहित धारा की दिशा को हर आधे घूर्णन के बाद उत्क्रमित करती है, जिससे कुंडली लगातार एक ही दिशा में घूमती रहती है।
- ब्रश: कार्बन के बने होते हैं और विभक्त वलय से संपर्क बनाकर बाहरी परिपथ से धारा प्रदान करते हैं।
- धुरी: जिस पर आर्मेचर कुंडली घूमती है।
8. विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction)
जब किसी चालक और चुम्बकीय क्षेत्र के बीच सापेक्ष गति होती है, तो चालक में एक प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न होती है। इस परिघटना को विद्युत चुम्बकीय प्रेरण कहते हैं। इसकी खोज माइकल फैराडे ने की थी।
फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम (Fleming’s Right-Hand Rule): अपने दाहिने हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा को इस प्रकार फैलाएँ कि वे तीनों एक-दूसरे के लंबवत हों। यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को, और अंगूठा चालक की गति की दिशा को दर्शाता है, तो मध्यमा चालक में प्रेरित विद्युत धारा की दिशा को दर्शाएगी।
9. विद्युत जनित्र (Electric Generator)
विद्युत जनित्र एक ऐसा उपकरण है जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है। यह विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
कार्यप्रणाली का सिद्धांत: जब एक बंद कुंडली को चुम्बकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो कुंडली से संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, जिससे कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल और प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
मुख्य भाग:
- क्षेत्र चुंबक: एक प्रबल चुंबक जो चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।
- आर्मेचर (कुंडली): तारों की एक आयताकार कुंडली जिसे चुम्बकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है।
- सर्पी वलय (Slip Rings): ये वृत्ताकार वलय होते हैं जो कुंडली के सिरों से जुड़े होते हैं और बाहरी परिपथ से धारा एकत्र करने के लिए ब्रशों के साथ घूमते हैं। (प्रत्यावर्ती धारा जनित्र में)
- ब्रश: कार्बन के बने होते हैं और सर्पी वलयों से संपर्क बनाकर बाहरी परिपथ में प्रेरित धारा प्रदान करते हैं।
प्रकार:
- प्रत्यावर्ती धारा (AC) जनित्र: इसमें सर्पी वलयों का उपयोग होता है और यह प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न करता है, जिसकी दिशा समय के साथ बदलती रहती है।
- दिष्ट धारा (DC) जनित्र: इसमें दिकपरिवर्तक (विभक्त वलय) का उपयोग होता है और यह दिष्ट धारा उत्पन्न करता है, जो एक ही दिशा में प्रवाहित होती है।
10. घरेलू विद्युत परिपथ (Domestic Electric Circuits)
हमारे घरों में विद्युत शक्ति मुख्य रूप से दो या तीन तारों के माध्यम से आती है:
- विद्युन्मय तार (Live Wire): यह लाल रंग का अचालक आवरण वाला तार होता है, जिस पर उच्च विभव (220V) होता है।
- उदासीन तार (Neutral Wire): यह काले रंग का अचालक आवरण वाला तार होता है, जो शून्य विभव पर होता है।
- भू-संपर्क तार (Earth Wire): यह हरे रंग का अचालक आवरण वाला तार होता है, जिसे धातु के आवरण वाले उपकरणों (जैसे रेफ्रिजरेटर, प्रेस) में सुरक्षा के लिए जोड़ा जाता है। यह तार उपकरण के धात्विक आवरण को भूमि से जोड़ता है। यदि उपकरण के आवरण में कोई लीकेज (leakage) हो, तो भू-संपर्क तार धारा को भूमि में प्रवाहित कर देता है, जिससे हमें बिजली का झटका नहीं लगता।
घरेलू परिपथ की कुछ महत्वपूर्ण बातें:
घरेलू परिपथों में सभी उपकरण समांतर क्रम में जुड़े होते हैं। इससे प्रत्येक उपकरण को एक समान वोल्टेज (220V) मिलता है और एक उपकरण के खराब होने या बंद होने पर अन्य उपकरण काम करते रहते हैं।
11. लघुपथन और अतिभारण (Short-Circuiting and Overloading)
ये घरेलू विद्युत परिपथों में होने वाली सामान्य समस्याएँ हैं जो आग या उपकरणों को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
लघुपथन (Short-Circuiting): जब विद्युन्मय तार और उदासीन तार आपस में सीधे संपर्क में आ जाते हैं (इंसुलेशन खराब होने के कारण), तो परिपथ का प्रतिरोध बहुत कम हो जाता है और अत्यधिक धारा प्रवाहित होती है। इसे लघु पथन कहते हैं, जिससे आग लगने या उपकरणों को नुकसान पहुँचने का खतरा होता है।
अतिभारण (Overloading): जब लाइव तार और उदासीन तार के बीच वोल्टेज में अचानक वृद्धि या बहुत सारे उपकरणों को एक साथ जोड़ा जाता है, तो परिपथ में बहुत अधिक धारा प्रवाहित होने लगती है। इसे अधिभारण कहते हैं। इससे तार गर्म हो सकते हैं और आग लग सकती है।
विद्युत फ्यूज (Electric Fuse): यह परिपथों और उपकरणों को अधिभारण (overloading) और लघु पथन (short-circuiting) से बचाने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक सुरक्षा उपकरण है। यह कम गलनांक वाले पदार्थ (जैसे टिन और सीसे की मिश्र धातु) से बना तार होता है। जब परिपथ में अत्यधिक धारा प्रवाहित होती है, तो फ्यूज तार गर्म होकर पिघल जाता है और परिपथ टूट जाता है, जिससे उपकरण सुरक्षित रहते हैं। फ्यूज को हमेशा लाइव तार में श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है।
लघु परिपथ विच्छेदक (MCB – Miniature Circuit Breaker): यह फ्यूज का एक आधुनिक विकल्प है जो अतिभारण या लघुपथन होने पर स्वचालित रूप से परिपथ को बंद कर देता है और इसे आसानी से पुनः चालू किया जा सकता है।
Science अध्याय 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव Notes का pdf
बिहार बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान के अन्य अध्यायों के Free Notes PDF
Notes क्या होते हैं और क्यों आवश्यक होते हैं?
कई छात्रों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर किसी विषय का Notes क्या होता है? चलिए इसे सरल शब्दों में समझते हैं।
Notes किसी भी विषय का संक्षिप्त और आसान सारांश होते हैं — यानी ऐसे पन्ने या कॉपी जिनमें किसी अध्याय की मुख्य बातें, महत्वपूर्ण परिभाषाएँ, सूत्र, उदाहरण और अवधारणाएँ छोटे-छोटे बिंदुओं में लिखी जाती हैं। Notes की आवश्यकता यह होती है कि छात्र कम समय में पूरे विषय को दोहरा सकें और कठिन टॉपिक को आसानी से समझ सकें।
अनेक शिक्षकों के अनुसार, Notes एक ऐसा संक्षिप्त लेखन होता है जो पढ़ाई और परीक्षा दोनों के लिए सहायक होता है। अच्छे Notes की मदद से छात्रों को बार-बार पूरी किताब पढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ती क्योंकि इनमें वही बातें शामिल होती हैं जो परीक्षा की दृष्टि से सबसे ज़्यादा जरूरी होती हैं।
जब छात्र स्वयं Notes तैयार करते हैं, तो वे केवल याद नहीं कर रहे होते बल्कि विषय को गहराई से समझ रहे होते हैं। इस प्रक्रिया से ज्ञान लंबे समय तक याद रहता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
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सारांश :
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