BSEB 10th Science Ex-2 Ultimate Notes Free pdf | अम्ल, क्षारक एवं लवण
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BSEB 10th Science Ex-2 Ultimate Notes : अम्ल, क्षारक एवं लवण
परिचय (Introduction)
हमारे दैनिक जीवन में हम कई तरह के पदार्थों का उपयोग करते हैं, जिनमें से कुछ खट्टे होते हैं, कुछ कड़वे होते हैं, और कुछ का स्वाद नमकीन होता है। विज्ञान की भाषा में, इन पदार्थों को उनके रासायनिक गुणों के आधार पर अम्ल (Acids), क्षारक (Bases) और लवण (Salts) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इस अध्याय में, हम इन तीनों प्रकार के पदार्थों के गुणों, पहचान, रासायनिक अभिक्रियाओं और दैनिक जीवन में उनके महत्व को समझेंगे।
1. अम्ल (Acids)
अम्ल वे रासायनिक पदार्थ होते हैं जो स्वाद में खट्टे होते हैं और नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं। ये जल में घुलकर H⁺ आयन (हाइड्रोजन आयन) उत्पन्न करते हैं।
अम्लों के सामान्य गुणधर्म (General Properties of Acids):
- स्वाद: ये स्वाद में खट्टे होते हैं।
- लिटमस परीक्षण: ये नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं।
- प्रकृति: इनकी प्रकृति संक्षारक (corrosive) होती है, यानी ये त्वचा, कपड़े और धातुओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- विद्युत चालकता: जलीय विलयन में ये विद्युत के सुचालक होते हैं क्योंकि ये आयन उत्पन्न करते हैं।
- धातुओं से अभिक्रिया: अम्ल धातुओं से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस (H₂) उत्पन्न करते हैं।
उदाहरण: 2HCl (aq) + Zn (s) → ZnCl₂ (aq) + H₂ (g) - धातु कार्बोनेट और बाइकार्बोनेट से अभिक्रिया: अम्ल धातु कार्बोनेट और धातु बाइकार्बोनेट से अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड गैस (CO₂) उत्पन्न करते हैं।
उदाहरण: CaCO₃ (s) + 2HCl (aq) → CaCl₂ (aq) + H₂O (l) + CO₂ (g) - क्षारकों से अभिक्रिया: अम्ल क्षारकों से अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं (उदासीनीकरण अभिक्रिया)।
उदाहरण: HCl (aq) + NaOH (aq) → NaCl (aq) + H₂O (l)
अम्लों के प्रकार (Types of Acids):
- प्रबल अम्ल (Strong Acids): वे अम्ल जो जल में पूर्णतः आयनीकृत हो जाते हैं और अधिक संख्या में H⁺ आयन उत्पन्न करते हैं।
उदाहरण: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl), सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄), नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) - दुर्बल अम्ल (Weak Acids): वे अम्ल जो जल में आंशिक रूप से आयनीकृत होते हैं और कम संख्या में H⁺ आयन उत्पन्न करते हैं।
उदाहरण: एसिटिक अम्ल (CH₃COOH), फॉर्मिक अम्ल (HCOOH), कार्बोनिक अम्ल (H₂CO₃)
अम्लों के उपयोग (Uses of Acids):
- हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl): इस्पात की सफाई, औषधियों और सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में।
- सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄): रसायनों का राजा कहलाता है। बैटरी में, उर्वरक, प्लास्टिक, पेंट, डिटर्जेंट आदि के निर्माण में।
- नाइट्रिक अम्ल (HNO₃): उर्वरक (अमोनियम नाइट्रेट), विस्फोटक (TNT), एक्वारेजिया (अम्लराज) बनाने में।
- एसिटिक अम्ल (CH₃COOH): सिरका के रूप में खाद्य परिरक्षक (food preservative) के रूप में।
2. क्षारक (Bases)
क्षारक वे रासायनिक पदार्थ होते हैं जो स्वाद में कड़वे होते हैं और लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं। ये स्पर्श करने पर साबुन जैसे चिकने लगते हैं। जल में घुलनशील क्षारकों को क्षार (Alkalies) कहते हैं। ये जल में घुलकर OH⁻ आयन (हाइड्रॉक्सिल आयन) उत्पन्न करते हैं।
क्षारकों के सामान्य गुणधर्म (General Properties of Bases):
- स्वाद: ये स्वाद में कड़वे होते हैं।
- स्पर्श: ये छूने पर साबुन जैसे चिकने होते हैं।
- लिटमस परीक्षण: ये लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं।
- प्रकृति: प्रबल क्षारक संक्षारक होते हैं।
- विद्युत चालकता: जलीय विलयन में ये विद्युत के सुचालक होते हैं।
- अम्लों से अभिक्रिया: क्षारक अम्लों से अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं (उदासीनीकरण अभिक्रिया)।
उदाहरण: NaOH (aq) + HCl (aq) → NaCl (aq) + H₂O (l) - अधात्विक ऑक्साइडों से अभिक्रिया: क्षारक अधात्विक ऑक्साइडों (जो अम्लीय प्रकृति के होते हैं) से अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं।
उदाहरण: Ca(OH)₂ (aq) + CO₂ (g) → CaCO₃ (s) + H₂O (l)
क्षारकों के प्रकार (Types of Bases):
- प्रबल क्षारक (Strong Bases): वे क्षारक जो जल में पूर्णतः आयनीकृत हो जाते हैं और अधिक संख्या में OH⁻ आयन उत्पन्न करते हैं।
उदाहरण: सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH), पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH), कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (Ca(OH)₂) - दुर्बल क्षारक (Weak Bases): वे क्षारक जो जल में आंशिक रूप से आयनीकृत होते हैं और कम संख्या में OH⁻ आयन उत्पन्न करते हैं।
उदाहरण: अमोनियम हाइड्रॉक्साइड (NH₄OH), मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (Mg(OH)₂)
क्षारकों के उपयोग (Uses of Bases):
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH): साबुन, अपमार्जक (detergents), कागज और कृत्रिम रेशों के निर्माण में।
- कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (Ca(OH)₂): घरों में चूना पोतने में, मिट्टी की अम्लीयता कम करने में, ब्लीचिंग पाउडर बनाने में।
- मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (Mg(OH)₂): एंटासिड के रूप में पेट की अम्लीयता को दूर करने में (मिल्क ऑफ मैग्नीशिया)।
- अमोनियम हाइड्रॉक्साइड (NH₄OH): उर्वरक बनाने में।
3. सूचक (Indicators)
सूचक वे पदार्थ होते हैं जो किसी विलयन में अम्ल या क्षारक की उपस्थिति को रंग परिवर्तन या गंध परिवर्तन द्वारा दर्शाते हैं।
सूचकों के प्रकार (Types of Indicators):
1. प्राकृतिक सूचक (Natural Indicators):
- लिटमस: यह सबसे सामान्य प्राकृतिक सूचक है। यह एक लाइकेन (lichen) से प्राप्त होता है।
अम्लीय विलयन में लाल। क्षारकीय विलयन में नीला। - हल्दी (Turmeric): अम्लीय विलयन में कोई बदलाव नहीं (पीला रहता है)। क्षारकीय विलयन में लाल-भूरा हो जाता है।
- लाल पत्ता गोभी का रस: अम्लीय विलयन में लाल। क्षारकीय विलयन में हरा।
2. संश्लेषित सूचक (Synthetic Indicators):
- मेथिल ऑरेंज (Methyl Orange): अम्लीय विलयन में लाल। क्षारकीय विलयन में पीला।
- फिनोल्फथेलिन (Phenolphthalein): अम्लीय विलयन में रंगहीन। क्षारकीय विलयन में गुलाबी।
3. गंधीय सूचक (Olfactory Indicators):
- प्याज (Onion): अम्लीय विलयन में तीखी गंध बनी रहती है। क्षारकीय विलयन में गंध समाप्त हो जाती है।
- वैनिला (Vanilla): अम्लीय विलयन में गंध बनी रहती है। क्षारकीय विलयन में गंध समाप्त हो जाती है।
- लौंग का तेल (Clove Oil): अम्लीय विलयन में गंध बनी रहती है। क्षारकीय विलयन में गंध समाप्त हो जाती है।
4. अम्ल और क्षारकों की रासायनिक अभिक्रियाएँ (Chemical Reactions of Acids and Bases)
4.1 धातुओं के साथ अभिक्रिया (Reaction with Metals):
- अम्ल + धातु → लवण + हाइड्रोजन गैस
Zn (s) + H₂SO₄ (aq) → ZnSO₄ (aq) + H₂ (g) - क्षारक + धातु → लवण + हाइड्रोजन गैस (सभी धातुएँ क्षारकों से अभिक्रिया नहीं करतीं)
2NaOH (aq) + Zn (s) → Na₂ZnO₂ (aq) + H₂ (g) (सोडियम जिंकेट)
4.2 धातु कार्बोनेट और धातु बाइकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया:
अम्ल + धातु कार्बोनेट/बाइकार्बोनेट → लवण + कार्बन डाइऑक्साइड + जल
- Na₂CO₃ (s) + 2HCl (aq) → 2NaCl (aq) + H₂O (l) + CO₂ (g)
- NaHCO₃ (s) + HCl (aq) → NaCl (aq) + H₂O (l) + CO₂ (g)
Ca(OH)₂ (aq) + CO₂ (g) → CaCO₃ (s) ↓ + H₂O (l) (दूधिया)
यदि अधिक CO₂ प्रवाहित की जाए तो दूधियापन गायब हो जाता है क्योंकि कैल्शियम बाइकार्बोनेट बनता है जो जल में घुलनशील होता है।
CaCO₃ (s) + H₂O (l) + CO₂ (g) → Ca(HCO₃)₂ (aq) (घुलनशील)
4.3 धातु ऑक्साइडों के साथ अभिक्रिया:
धातु ऑक्साइडों की प्रकृति क्षारकीय होती है।
अम्ल + धातु ऑक्साइड → लवण + जल
CaO (s) + 2HCl (aq) → CaCl₂ (aq) + H₂O (l)
4.4 अधातु ऑक्साइडों के साथ अभिक्रिया:
अधातु ऑक्साइडों की प्रकृति अम्लीय होती है।
क्षारक + अधातु ऑक्साइड → लवण + जल
Ca(OH)₂ (aq) + CO₂ (g) → CaCO₃ (s) + H₂O (l)
4.5 उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction):
जब कोई अम्ल किसी क्षारक से अभिक्रिया करता है, तो लवण और जल बनते हैं। इस अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।
अम्ल + क्षारक → लवण + जल
HCl (aq) + NaOH (aq) → NaCl (aq) + H₂O (l)
5. pH स्केल (pH Scale)
किसी विलयन में H⁺ आयनों की सांद्रता ज्ञात करने के लिए एक स्केल विकसित किया गया है, जिसे pH स्केल कहते हैं। इसमें ‘p’ का अर्थ ‘पोटेंज’ (जर्मन में शक्ति) होता है। यह स्केल 0 से 14 तक होता है।
- pH < 7: विलयन अम्लीय होता है। H⁺ आयनों की सांद्रता अधिक होती है।
- pH = 7: विलयन उदासीन होता है। H⁺ और OH⁻ आयनों की सांद्रता बराबर होती है।
- pH > 7: विलयन क्षारकीय होता है। OH⁻ आयनों की सांद्रता अधिक होती है।
दैनिक जीवन में pH का महत्व (Importance of pH in Everyday Life):
- 1. पौधों एवं पशुओं के लिए pH: हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH परास के बीच कार्य करता है। वर्षा जल का pH मान जब 5.6 से कम हो जाता है, तो वह अम्लीय वर्षा कहलाती है, जो जलीय जीवन को नुकसान पहुँचाती है। स्वस्थ मिट्टी का pH लगभग 6.5 से 7.0 के बीच होना चाहिए।
- 2. हमारे पाचन तंत्र में pH: हमारा आमाशय (stomach) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) उत्पन्न करता है जो भोजन के पाचन में सहायता करता है। अपच की स्थिति में आमाशय अधिक अम्ल उत्पन्न करता है, जिससे पेट में दर्द और जलन होती है। इसे दूर करने के लिए एंटासिड (जैसे मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड) का उपयोग किया जाता है।
- 3. pH परिवर्तन के कारण दंत क्षय: मुँह का pH मान 5.5 से कम होने पर दाँतों का क्षय प्रारंभ हो जाता है। टूथपेस्ट (जो सामान्यतः क्षारकीय होते हैं) का उपयोग दाँतों के क्षय को रोकने में मदद करता है।
- 4. पशुओं और पौधों द्वारा उत्पन्न रसायनों से आत्मरक्षा: मधुमक्खी का डंक एक अम्लीय द्रव छोड़ता है जिससे दर्द और जलन होती है। इसके उपचार के लिए बेकिंग सोडा जैसे दुर्बल क्षारक का उपयोग किया जाता है। नेटल के डंक वाले बाल मेथनोइक अम्ल (मेथनोइक एसिड) छोड़ते हैं, जिससे जलन होती है। इसे डॉक पौधे की पत्ती रगड़कर कम किया जा सकता है।
6. लवण (Salts)
लवण वे आयनिक यौगिक होते हैं जो अम्ल और क्षारक की उदासीनीकरण अभिक्रिया के परिणामस्वरूप बनते हैं।
लवणों के गुणधर्म:
- अधिकतर लवण ठोस होते हैं।
- इनका गलनांक और क्वथनांक उच्च होता है।
- ये जलीय विलयन में विद्युत के सुचालक होते हैं।
कुछ महत्वपूर्ण लवण और उनके उपयोग (Some Important Salts and Their Uses):
निर्माण: समुद्र जल के वाष्पीकरण या सेंधा नमक के रूप में।
उपयोग: भोजन में, खाद्य परिरक्षक के रूप में, साबुन के निर्माण में, बर्फ पिघलाने में, और कई अन्य रसायनों (NaOH, Na₂CO₃, NaHCO₃) के निर्माण में प्रारंभिक पदार्थ के रूप में।
निर्माण: NaCl के जलीय विलयन (ब्राइन) के विद्युत अपघटन द्वारा (क्लोर-क्षार प्रक्रिया)।
2NaCl (aq) + 2H₂O (l) → 2NaOH (aq) + Cl₂ (g) + H₂ (g)
उपयोग: साबुन, अपमार्जक, कागज, कृत्रिम रेशे और ब्लीच के निर्माण में।
निर्माण: शुष्क बुझे हुए चूने (Ca(OH)₂) पर क्लोरीन गैस (Cl₂) की क्रिया द्वारा।
Ca(OH)₂ (s) + Cl₂ (g) → CaOCl₂ (s) + H₂O (l)
उपयोग: वस्त्र उद्योग में विरंजक के रूप में, पीने के पानी को जीवाणुमुक्त करने में, रासायनिक उद्योगों में एक ऑक्सीकारक के रूप में।
निर्माण: NaCl, अमोनिया (NH₃) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के उपयोग से।
NaCl + H₂O + CO₂ + NH₃ → NH₄Cl + NaHCO₃
उपयोग: बेकिंग पाउडर (NaHCO₃ + टार्टरिक अम्ल) बनाने में, एंटासिड के रूप में, सोडा-अम्ल अग्निशामक में।
गर्म करने पर: 2NaHCO₃ (s) → Na₂CO₃ (s) + H₂O (l) + CO₂ (g) (केक को फुलाने वाली CO₂ गैस)
निर्माण: बेकिंग सोडा को गर्म करके प्राप्त सोडियम कार्बोनेट के पुनः क्रिस्टलीकरण द्वारा।
Na₂CO₃ + 10H₂O → Na₂CO₃·10H₂O
उपयोग: काँच, साबुन और कागज उद्योगों में, बोरेक्स जैसे सोडियम यौगिकों के निर्माण में, घरों में साफ-सफाई के लिए, जल की स्थायी कठोरता को हटाने के लिए।
निर्माण: जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) को 373 K (100°C) पर गर्म करने पर।
CaSO₄·2H₂O (s) → CaSO₄·½H₂O (s) + 1½H₂O (l)
उपयोग: टूटी हुई हड्डियों को सही जगह स्थिर रखने में, खिलौने बनाने में, सजावट का सामान बनाने में, सतह को चिकना बनाने में, अग्निरोधी सामग्री के रूप में।
जल के साथ अभिक्रिया: यह जल के साथ मिलकर पुनः जिप्सम बनाता है जो एक कठोर ठोस है।
CaSO₄·½H₂O (s) + 1½H₂O (l) → CaSO₄·2H₂O (s)
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