BSEB 10th Science Ex-3 Ultimate Notes Free pdf | धातु एवं अधातु । Toppers की पहली पसंद!
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BSEB 10th Science Ex-3 Ultimate Notes : धातु एवं अधातु
परिचय (Introduction)
हमारे आस-पास विभिन्न प्रकार के पदार्थ मौजूद हैं। इन पदार्थों को उनके गुणों के आधार पर मोटे तौर पर धातु (Metals) और अधातु (Non-metals) में वर्गीकृत किया जाता है। आवर्त सारणी में 118 तत्व ज्ञात हैं, जिनमें से 90 से अधिक धातुएँ, 22 अधातुएँ और कुछ उपधातुएँ हैं। इस अध्याय में, हम धातुओं और अधातुओं के भौतिक और रासायनिक गुणों, उनके बीच अंतर, आयनिक यौगिकों के निर्माण और गुणों, धातुओं की प्राप्ति (निष्कर्षण) और संक्षारण (Corrosion) जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं का अध्ययन करेंगे। यह हमें यह समझने में मदद करेगा कि इन तत्वों के गुण उनके विभिन्न उपयोगों को कैसे निर्धारित करते हैं।
1. धातु एवं अधातु: एक परिचय
धातुएँ (Metals):
वे तत्व जो कठोर, चमकीले, आघातवर्ध्य (Malleable), तन्य (Ductile), ध्वानिक (Sonorous), और ऊष्मा तथा विद्युत के सुचालक होते हैं, धातु कहलाते हैं। धातुएँ इलेक्ट्रॉन त्याग कर धनात्मक आयन बनाती हैं, इसलिए ये विद्युतधनात्मक होती हैं।
उदाहरण: सोडियम (Na), पोटैशियम (K), मैग्नीशियम (Mg), लोहा (Fe), एल्युमीनियम (Al), कैल्शियम (Ca), सोना (Au), चाँदी (Ag), कॉपर (Cu) आदि।
उपयोग: धातुओं का उपयोग इमारत, पुल, रेल पटरी बनाने में, हवाईजहाज, समुद्री जहाज, गाड़ियों के निर्माण में, घर में उपयोग होने वाले बर्तन, आभूषण, मशीन के पुर्जे आदि बनाने में किया जाता है।
अधातुएँ (Non-metals):
वे तत्व जो नरम, मलिन (चमकहीन), भंगुर (Brittle), ऊष्मा तथा विद्युत के कुचालक होते हैं, एवं जो ध्वानिक नहीं होते हैं, अधातु कहलाते हैं। अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणात्मक आयन बनाती हैं, इसलिए ये विद्युतऋणात्मक होती हैं।
उदाहरण: ऑक्सीजन (O), हाइड्रोजन (H), नाइट्रोजन (N), सल्फर (S), फॉस्फोरस (P), फ्लोरीन (F), क्लोरीन (Cl), ब्रोमीन (Br), आयोडीन (I), कार्बन (C) आदि।
उपयोग: ऑक्सीजन श्वसन के लिए आवश्यक है, नाइट्रोजन का उपयोग उर्वरकों में, क्लोरीन का उपयोग जल शुद्धिकरण में और आयोडीन का विलयन एंटीबायोटिक के रूप में घावों पर लगाया जाता है।
2. धातुओं के भौतिक गुणधर्म (Physical Properties of Metals)
धातुएँ सामान्यतः निम्नलिखित भौतिक गुण दर्शाती हैं:
- चमक (Lustre): अपने शुद्ध रूप में धातुओं की सतह चमकदार होती है, जिसे धात्विक चमक कहते हैं।
अपवाद: आयोडीन एक अधातु है, परन्तु यह चमकीला होता है। ग्रेफाइट भी चमकीला होता है। - कठोरता (Hardness): धातुएँ सामान्यतः कठोर होती हैं।
अपवाद: लिथियम, सोडियम और पोटैशियम इतनी मुलायम होती हैं कि इन्हें चाकू से आसानी से काटा जा सकता है। - भौतिक अवस्था (Physical State): मरकरी (पारा) को छोड़कर, सभी धातुएँ कमरे के ताप पर ठोस अवस्था में पाई जाती हैं।
अपवाद: पारा (Mercury, Hg) कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पाया जाता है। गैलियम (Ga) और सीज़ियम (Cs) का गलनांक बहुत कम होता है, इन्हें हथेली पर रखते ही पिघल जाती हैं. - आघातवर्ध्यता (Malleability): धातुओं को पीटकर पतली चादरों में ढाला जा सकता है।
सोना और चाँदी सबसे अधिक आघातवर्ध्य धातुएँ हैं। - तन्यता (Ductility): धातुओं को पतले तार के रूप में खींचा जा सकता है।
सोना सबसे अधिक तन्य धातु है, एक ग्राम सोने से 2 किलोमीटर लंबा तार बनाया जा सकता है। - ऊष्मा एवं विद्युत चालकता (Thermal and Electrical Conductivity): सभी धातुएँ ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं।
सिल्वर (चाँदी) और कॉपर (ताँबा) ऊष्मा तथा विद्युत के सबसे अच्छे चालक हैं।
अपवाद: लेड (सीसा) और मरकरी ऊष्मा के कुचालक हैं। - ध्वानिकता (Sonorous): धातुओं को कठोर सतह से टकराने पर एक विशेष प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती है।
- गलनांक एवं क्वथनांक (Melting and Boiling Points): धातुओं के गलनांक एवं क्वथनांक उच्च होते हैं।
अपवाद: सोडियम और पोटैशियम के गलनांक कम होते हैं। - घनत्व (Density): सामान्यतः धातुओं का घनत्व उच्च होता है।
अपवाद: सोडियम और पोटैशियम का घनत्व कम होता है।
3. अधातुओं के भौतिक गुणधर्म (Physical Properties of Non-metals)
अधातुएँ धातुओं के विपरीत गुण दर्शाती हैं:
- चमक (Lustre): अधातुओं में सामान्यतः चमक नहीं होती है।
अपवाद: आयोडीन अधातु होते हुए भी चमकीला होता है। - कठोरता (Hardness): अधातुएँ नरम होती हैं।
अपवाद: कार्बन का एक अपररूप, हीरा, सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है। - भौतिक अवस्था (Physical State): अधातुएँ सामान्यतः ठोस या गैस होती हैं।
अपवाद: ब्रोमीन (Bromine, Br) एकमात्र अधातु है जो कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पाई जाती है। - आघातवर्ध्यता (Malleability): अधातुएँ आघातवर्धनीय नहीं होती हैं। वे भंगुर होती हैं।
- तन्यता (Ductility): अधातुएँ तन्य नहीं होती हैं।
- ऊष्मा एवं विद्युत चालकता: अधातुएँ ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं।
अपवाद: कार्बन का एक अपररूप, ग्रेफाइट, विद्युत का सुचालक होता है। - ध्वानिकता (Sonorous): अधातुएँ ध्वानिक नहीं होती हैं।
- गलनांक एवं क्वथनांक: अधातुओं के गलनांक एवं क्वथनांक निम्न होते हैं।
- घनत्व (Density): अधातुओं का घनत्व अपेक्षाकृत कम होता है।
अपवाद: आयोडीन का घनत्व उच्च होता है।
4. धातुओं के रासायनिक गुणधर्म (Chemical Properties of Metals)
- वायु (ऑक्सीजन) के साथ अभिक्रिया: सभी धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड बनाती हैं。
2Mg + O2 → 2MgO (मैग्नीशियम ऑक्साइड)
4Na + O2 → 2Na2O (सोडियम ऑक्साइड)
कुछ धातुएँ जैसे सोडियम और पोटैशियम इतनी तेज़ी से अभिक्रिया करती हैं कि खुले में रखने पर आग पकड़ लेती हैं। इन्हें मिट्टी के तेल (केरोसिन) में डुबोकर रखा जाता है।
एल्युमीनियम, जिंक, लेड जैसी धातुओं की सतह पर सामान्य ताप पर ऑक्साइड की एक पतली परत चढ़ जाती है, जो आगे संक्षारण से बचाव करती है।
सिल्वर (चाँदी) और गोल्ड (सोना) उच्च ताप पर भी ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं।
कुछ धातु ऑक्साइड, जैसे ऐलुमिनियम ऑक्साइड (Al2O3) और जिंक ऑक्साइड (ZnO), अम्लीय और क्षारीय दोनों गुण प्रदर्शित करते हैं। ऐसे ऑक्साइडों को उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric oxides) कहते हैं। - जल के साथ अभिक्रिया: धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस और धातु ऑक्साइड/हाइड्रॉक्साइड उत्पन्न करती हैं।
ठंडे जल के साथ: पोटैशियम (K) और सोडियम (Na) ठंडे जल के साथ तेज़ी से अभिक्रिया करती हैं।
2Na(s) + 2H2O(l) → 2NaOH(aq) + H2(g) + ऊष्मा
कैल्शियम (Ca) की अभिक्रिया ठंडे जल के साथ थोड़ी धीमी होती है।
Ca(s) + 2H2O(l) → Ca(OH)2(aq) + H2(g)
मैग्नीशियम (Mg) ठंडे जल के साथ अभिक्रिया नहीं करता, परन्तु गर्म जल के साथ अभिक्रिया करती है।
एल्युमीनियम (Al), लोहा (Fe), और जिंक (Zn) भाप (steam) के साथ अभिक्रिया करती हैं।
3Fe(s) + 4H2O(g) → Fe3O4(s) + 4H2(g)
लेड (Pb), कॉपर (Cu), सिल्वर (Ag) और गोल्ड (Au) जल के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं। - अम्लों के साथ अभिक्रिया: धातुएँ तनु अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस (H2) और संगत लवण बनाती हैं।
2Na(s) + 2HCl(aq) → 2NaCl(aq) + H2(g)
Fe(s) + 2HCl(aq) → FeCl2(aq) + H2(g)
धातुओं की अम्लों के साथ अभिक्रियाशीलता सक्रियता श्रेणी पर निर्भर करती है। कॉपर, सिल्वर, गोल्ड जैसी कम अभिक्रियाशील धातुएँ तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं। - अन्य धातु लवणों के विलयनों के साथ अभिक्रिया: अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ कम अभिक्रियाशील धातुओं को उनके लवण के विलयन से विस्थापित कर देती हैं।
Fe(s) + CuSO4(aq) → FeSO4(aq) + Cu(s)
5. अधातुओं के रासायनिक गुणधर्म (Chemical Properties of Non-metals)
- ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया: अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके अम्लीय ऑक्साइड या उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं।
C(s) + O2(g) → CO2(g) (कार्बन डाइऑक्साइड – अम्लीय ऑक्साइड)
S(s) + O2(g) → SO2(g) (सल्फर डाइऑक्साइड – अम्लीय ऑक्साइड)
कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) एक उदासीन ऑक्साइड है। - जल एवं अम्लों के साथ अभिक्रिया: अधातुएँ सामान्यतः जल के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं। अधातुएँ तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं।
6. आयनिक यौगिक (Ionic Compounds)
आयनिक यौगिकों का निर्माण (Formation of Ionic Compounds):
धातुएँ इलेक्ट्रॉन का त्याग करती हैं और धनात्मक आयन (धनायन) बनाती हैं, जबकि अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती हैं और ऋणात्मक आयन (ऋणायन) बनाती हैं। धातु और अधातु के बीच इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से बनने वाले यौगिकों को आयनिक यौगिक या वैद्युत संयोजक यौगिक कहते हैं। इनके बीच प्रबल वैद्युत आकर्षण बल (आयनिक बंध) होता है।
सोडियम (Na) एक इलेक्ट्रॉन त्याग कर Na+ आयन बनाता है। क्लोरीन (Cl) एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर Cl– आयन बनाता है। ये विपरीत आवेशित आयन आपस में जुड़कर NaCl (आयनिक यौगिक) बनाते हैं।
आयनिक यौगिकों के गुणधर्म (Properties of Ionic Compounds):
- भौतिक प्रकृति: आयनिक यौगिक प्रायः ठोस और कठोर होते हैं। ये भंगुर प्रकृति के होते हैं।
- गलनांक और क्वथनांक: इनके गलनांक एवं क्वथनांक उच्च होते हैं।
- घुलनशीलता: आयनिक यौगिक जल में घुलनशील होते हैं। लेकिन ये कार्बनिक विलायकों जैसे केरोसिन, पेट्रोल आदि में अघुलनशील होते हैं।
- विद्युत चालकता: ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते हैं। गलित अवस्था या जलीय विलयन में विद्युत का चालन करते हैं।
7. धातुओं की प्राप्ति (Occurrence of Metals)
पृथ्वी की भूपर्पटी धातुओं का मुख्य स्रोत है। समुद्री जल में भी सोडियम क्लोराइड, मैग्नीशियम क्लोराइड आदि लवण पाए जाते हैं।
- खनिज (Minerals): पृथ्वी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले वे पदार्थ जिनमें धातुएँ उनके यौगिकों के रूप में होती हैं।
- अयस्क (Ores): वे खनिज जिनसे धातु को सरलता और आर्थिक रूप से लाभदायक तरीके से निकाला जा सकता है।
- गैंग (Gangue): अयस्कों में अवांछनीय पदार्थ जैसे मिट्टी, रेत आदि।
धातुओं का निष्कर्षण (Extraction of Metals):
अयस्क से शुद्ध धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को धातु कर्म (Metallurgy) कहते हैं।
- उच्च अभिक्रियाशील धातुएँ (K, Na, Ca, Mg, Al): विद्युत अपघटन द्वारा।
- मध्यम अभिक्रियाशील धातुएँ (Zn, Fe, Pb, Cu): भर्जन या निस्तापन → अपचयन।
भर्जन (Roasting): 2ZnS(s) + 3O2(g) → 2ZnO(s) + 2SO2(g)
निस्तापन (Calcination): ZnCO3(s) → ZnO(s) + CO2(g)
अपचयन: ZnO(s) + C(s) → Zn(s) + CO(g) - निम्न अभिक्रियाशील धातुएँ (Hg, Ag, Au): गर्म करके।
2HgS(s) + 3O2(g) → 2HgO(s) + 2SO2(g)
2HgO(s) → 2Hg(l) + O2(g)
धातुओं का परिष्करण (Refining of Metals):
अशुद्धियों को हटाने की प्रक्रिया। विद्युत अपघटनी परिष्करण सबसे सामान्य विधि है।
8. संक्षारण (Corrosion)
संक्षारण क्या है (What is Corrosion)?
जब कोई धातु अपने आस-पास अम्ल, आर्द्रता, वायु के ऑक्सीजन आदि के संपर्क में आती है, तो उसकी सतह धीरे-धीरे संक्षारित होने लगती है। इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं।
उदाहरण: लोहे पर जंग लगना, चाँदी का काला पड़ना, ताँबे पर हरी परत।
संक्षारण से बचाव (Prevention of Corrosion):
- पेंट करके (Painting)
- ग्रीस या तेल लगाकर (Greasing or Oiling)
- जस्तीकरण (Galvanization): लोहे पर जस्ते (Zinc) की परत।
- विद्युतलेपन (Electroplating)
- मिश्रधातु बनाकर (Alloying): स्टेनलेस स्टील (लोहा + निकेल + क्रोमियम) जंग नहीं लगता।
Science अध्याय 3 धातु एवं अधातु Notes का pdf
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