BSEB 10th Science Ex-7 Ultimate Notes Free pdf | नियंत्रण एवं समन्वय
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BSEB 10th Science Ex-7 Ultimate Notes : नियंत्रण एवं समन्वय
परिचय (Introduction)
हमारे आस-पास के वातावरण में लगातार परिवर्तन होते रहते हैं, और इन परिवर्तनों के अनुसार जीवों को प्रतिक्रिया देनी होती है। यह प्रतिक्रियाएँ और शरीर के विभिन्न अंगों के बीच तालमेल ही “नियंत्रण एवं समन्वय” कहलाता है। यह जीवों को जीवित रहने और अपने वातावरण के अनुकूल ढलने में मदद करता है। जंतुओं में यह कार्य तंत्रिका तंत्र और हार्मोन द्वारा होता है, जबकि पौधों में केवल हार्मोन द्वारा समन्वय होता है।
1. जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination in Animals)
जंतुओं में नियंत्रण और समन्वय दो मुख्य प्रणालियों द्वारा होता है:
- तंत्रिका तंत्र (Nervous System)
- अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System)
1.1 तंत्रिका तंत्र (Nervous System)
तंत्रिका तंत्र संवेदी अंगों से जानकारी प्राप्त करता है, उसका विश्लेषण करता है और उसके अनुसार प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।
a) तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) (Nerve Cell / Neuron):
तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई को न्यूरॉन कहते हैं। यह शरीर की सबसे लंबी कोशिका होती है।
एक न्यूरॉन के मुख्य तीन भाग होते हैं:
कोशिकाकाय (Cell Body / Cyton): इसमें केंद्रक और कोशिका द्रव्य होता है।
डेंड्राइट (Dendrites): ये कोशिकाकाय से निकलने वाली छोटी, शाखादार संरचनाएं होती हैं जो सूचना प्राप्त करती हैं।
एक्सॉन (Axon): यह कोशिकाकाय से निकलने वाली लंबी प्रवर्ध है जो सूचना को कोशिकाकाय से दूर ले जाता है। एक्सॉन के अंतिम सिरे पर तंत्रिकाक्ष का अंतिम सिरा (Nerve Ending) होता है。
न्यूरॉन विद्युत रासायनिक आवेगों (जिसे तंत्रिका आवेग कहते हैं) के रूप में सूचना का संवहन करते हैं। डेंड्राइट सूचना प्राप्त करते हैं, कोशिकाकाय से होते हुए एक्सॉन तक जाती है, और फिर एक्सॉन के अंतिम सिरे से दूसरे न्यूरॉन के डेंड्राइट तक पहुंचती है।
b) तंत्रिका आवेग (Nerve Impulse):
यह एक विद्युत रासायनिक संकेत है जो न्यूरॉन में एक सिरे से दूसरे सिरे तक यात्रा करता है।
c) सिनेप्स (Synapse):
यह दो न्यूरॉन के बीच का सूक्ष्म अंतराल होता है, जहाँ से एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन में सूचना का संचरण होता है। यहां रासायनिक संदेशवाहक (न्यूरोट्रांसमीटर) द्वारा सूचना आगे बढ़ती है।
d) प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action):
यह वातावरण में किसी उद्दीपन के प्रति मस्तिष्क के हस्तक्षेप के बिना, मेरुरज्जु द्वारा अचानक, अनैच्छिक और तीव्र अनुक्रिया होती है। उदाहरण के लिए, गर्म वस्तु को छूने पर हाथ का तुरंत हट जाना।
जिस मार्ग से प्रतिवर्ती क्रिया संपन्न होती है, उसे प्रतिवर्ती चाप कहते हैं। इसमें संवेदी न्यूरॉन (जो उद्दीपन को प्राप्त करता है), मेरुरज्जु (जहाँ संवेदी और प्रेरक न्यूरॉन मिलते हैं), और प्रेरक न्यूरॉन (जो अनुक्रिया के लिए मांसपेशियों को निर्देश देता है) शामिल होते हैं।
e) मानव तंत्रिका तंत्र (Human Nervous System):
मानव तंत्रिका तंत्र को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:
- केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System – CNS): इसमें मस्तिष्क और मेरुरज्जु शामिल हैं।
- परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System – PNS): इसमें कपाल तंत्रिकाएं (मस्तिष्क से निकलने वाली) और मेरु तंत्रिकाएं (मेरुरज्जु से निकलने वाली) शामिल हैं। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को शरीर के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।
मस्तिष्क (Brain):
यह खोपड़ी द्वारा सुरक्षित होता है और शरीर की सभी क्रियाओं को नियंत्रित करता है। यह सोचने, समझने, याद रखने, निर्णय लेने आदि का केंद्र है। मस्तिष्क के तीन मुख्य भाग होते हैं:
- अग्रमस्तिष्क (Forebrain): यह मस्तिष्क का सबसे जटिल और विशिष्ट भाग है। यह सोचने, सुनने, सूंघने, देखने और बोलने जैसी ऐच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है। सेरिब्रम इसी का भाग है।
- मध्यमस्तिष्क (Midbrain): यह अग्र और पश्चमस्तिष्क को जोड़ता है और कुछ अनैच्छिक क्रियाओं जैसे पुतली के आकार में परिवर्तन को नियंत्रित करता है।
- पश्चमस्तिष्क (Hindbrain): इसके तीन मुख्य भाग हैं:
– अनुमस्तिष्क (Cerebellum): यह शरीर का संतुलन बनाने और ऐच्छिक गतियों (जैसे चलना, साइकिल चलाना) को नियंत्रित करने में मदद करता है।
– पॉन्स (Pons): यह मस्तिष्क के विभिन्न भागों को जोड़ता है और श्वसन के नियमन में मदद करता है।
– मेड्युला ऑब्लांगेटा (Medulla Oblongata): यह अनैच्छिक क्रियाओं जैसे रक्तचाप, हृदय गति, उल्टी और श्वसन को नियंत्रित करता है।
मेरुरज्जु (Spinal Cord):
यह रीढ़ की हड्डी के अंदर स्थित होता है और मस्तिष्क से आने वाले तथा मस्तिष्क को जाने वाले संदेशों का संवहन करता है। यह प्रतिवर्ती क्रियाओं का केंद्र भी है।
1.2 अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System)
अंतःस्रावी तंत्र ग्रंथियों का एक समूह है जो हार्मोन नामक रासायनिक संदेशवाहकों का उत्पादन और स्राव करता है। ये हार्मोन रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न भागों तक पहुंचते हैं और विशिष्ट कार्यों को नियंत्रित करते हैं।
ये रासायनिक पदार्थ होते हैं जो शरीर में धीमी गति से, लेकिन दीर्घकालिक प्रभाव डालते हैं। ये वृद्धि, विकास, उपापचय और प्रजनन जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
कुछ महत्वपूर्ण अंतःस्रावी ग्रंथियाँ और उनके हार्मोन:
- पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland): इसे ‘मास्टर ग्रंथि’ भी कहते हैं क्योंकि यह अन्य ग्रंथियों के कार्यों को नियंत्रित करती है। यह वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone) स्रावित करती है जो शरीर की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करता है।
- थायरॉयड ग्रंथि (Thyroid Gland): यह गर्दन में स्थित होती है और थायरोक्सिन हार्मोन स्रावित करती है। थायरोक्सिन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के उपापचय को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से गॉयटर रोग हो सकता है।
- पैराथायरॉयड ग्रंथि (Parathyroid Gland): थायरॉयड ग्रंथि के पीछे स्थित होती है और रक्त में कैल्शियम तथा फॉस्फेट के स्तर को नियंत्रित करती है।
- एड्रीनल ग्रंथि (Adrenal Gland): ये गुर्दे के ऊपर स्थित होती हैं और एड्रेनालिन हार्मोन स्रावित करती हैं। एड्रेनालिन हार्मोन ‘लड़ो या भागो’ (fight or flight) हार्मोन कहलाता है, जो तनाव या खतरे की स्थिति में शरीर को तैयार करता है।
- अग्नाशय (Pancreas): यह इंसुलिन और ग्लूकागॉन हार्मोन स्रावित करता है। इंसुलिन रक्त शर्करा (ग्लूकोज) के स्तर को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से मधुमेह (Diabetes) रोग होता है।
- वृषण (Testes) (केवल पुरुषों में): यह टेस्टोस्टेरोन हार्मोन स्रावित करता है, जो पुरुषों में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों और शुक्राणु उत्पादन को नियंत्रित करता है।
- अंडाशय (Ovaries) (केवल महिलाओं में): यह एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन स्रावित करता है, जो महिलाओं में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों, मासिक धर्म चक्र और गर्भावस्था को नियंत्रित करते हैं।
हार्मोन का फीडबैक मेकैनिज्म (Feedback Mechanism of Hormones):
हार्मोन का स्राव अक्सर एक फीडबैक तंत्र द्वारा नियंत्रित होता है। उदाहरण के लिए, जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ता है, तो अग्नाशय अधिक इंसुलिन स्रावित करता है। जब ग्लूकोज का स्तर सामान्य हो जाता है, तो इंसुलिन का स्राव कम हो जाता है।
2. पादपों में समन्वय (Coordination in Plants)
पौधों में जंतुओं की तरह तंत्रिका तंत्र नहीं होता है। वे रासायनिक पदार्थों, जिन्हें पादप हार्मोन या फाइटो हार्मोन कहते हैं, के माध्यम से समन्वय स्थापित करते हैं।
2.1 पादप हार्मोन (Plant Hormones / Phytohormones):
ये ऐसे रासायनिक पदार्थ हैं जो पौधों की वृद्धि, विकास और पर्यावरणीय उद्दीपनों के प्रति प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
- ऑक्सिन (Auxins): यह तने के शीर्ष पर संश्लेषित होता है और कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि को बढ़ावा देता है। यह प्रकाशानुवर्तन (प्रकाश की ओर मुड़ना) और गुरुत्वानुवर्तन (गुरुत्वाकर्षण की ओर बढ़ना) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- जिबरेलिन (Gibberellins): यह तने की वृद्धि, बीजों के अंकुरण और फलों के विकास में मदद करता है।
- साइटोकाइनिन (Cytokinins): ये कोशिका विभाजन को उत्तेजित करते हैं और फलों व बीजों में अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।
- एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid – ABA): यह एक वृद्धि अवरोधक हार्मोन है। यह पत्तियों के मुरझाने और गिरने, बीजों की प्रसुप्ति (dormancy) और रंध्रों को बंद करने में मदद करता है।
- एथिलीन (Ethylene): यह एक गैसीय हार्मोन है जो फलों को पकाने और पत्तियों तथा फूलों के झड़ने में भूमिका निभाता है।
2.2 पादपों में गतियाँ (Movements in Plants):
पौधे विभिन्न उद्दीपनों के प्रति गति करके प्रतिक्रिया करते हैं। ये गतियाँ दो प्रकार की होती हैं:
- अनुवर्तन गतियाँ (Tropic Movements): ये उद्दीपन की दिशा की ओर या उससे दूर होने वाली वृद्धि-निर्भर गतियाँ होती हैं।
– प्रकाशानुवर्तन (Phototropism): प्रकाश की ओर पौधे के भाग की गति (जैसे तने का प्रकाश की ओर बढ़ना)।
– गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism): गुरुत्वाकर्षण बल की ओर पौधे के भाग की गति (जैसे जड़ का नीचे की ओर बढ़ना)।
– रसायनवर्तन (Chemotropism): रासायनिक उद्दीपन की ओर पौधे के भाग की गति (जैसे पराग नलिका का अंडाशय की ओर बढ़ना)।
– जलानुवर्तन (Hydrotropism): जल की ओर पौधे के भाग की गति (जैसे जड़ का जल स्रोत की ओर बढ़ना)।
– स्पर्शनुवर्तन (Thigmotropism): स्पर्श के प्रति पौधे के भाग की गति (जैसे मटर के प्रतान का सहारे के चारों ओर लिपट जाना)। - कम्पानुकुंची गतियाँ (Nastic Movements): ये उद्दीपन की दिशा पर निर्भर नहीं करती हैं और वृद्धि से संबंधित नहीं होती हैं।
उदाहरण: छुई-मुई (Mimosa pudica) के पौधे की पत्तियों का छूने पर सिकुड़ जाना। यह कोशिकाओं में जल की मात्रा में परिवर्तन के कारण होता है।
Science अध्याय 7 नियंत्रण एवं समन्वय Notes का pdf
बिहार बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान के अन्य अध्यायों के Free Notes PDF
Notes क्या होते हैं और क्यों आवश्यक होते हैं?
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Notes किसी भी विषय का संक्षिप्त और आसान सारांश होते हैं — यानी ऐसे पन्ने या कॉपी जिनमें किसी अध्याय की मुख्य बातें, महत्वपूर्ण परिभाषाएँ, सूत्र, उदाहरण और अवधारणाएँ छोटे-छोटे बिंदुओं में लिखी जाती हैं। Notes की आवश्यकता यह होती है कि छात्र कम समय में पूरे विषय को दोहरा सकें और कठिन टॉपिक को आसानी से समझ सकें।
अनेक शिक्षकों के अनुसार, Notes एक ऐसा संक्षिप्त लेखन होता है जो पढ़ाई और परीक्षा दोनों के लिए सहायक होता है। अच्छे Notes की मदद से छात्रों को बार-बार पूरी किताब पढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ती क्योंकि इनमें वही बातें शामिल होती हैं जो परीक्षा की दृष्टि से सबसे ज़्यादा जरूरी होती हैं।
जब छात्र स्वयं Notes तैयार करते हैं, तो वे केवल याद नहीं कर रहे होते बल्कि विषय को गहराई से समझ रहे होते हैं। इस प्रक्रिया से ज्ञान लंबे समय तक याद रहता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
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सारांश :
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