BSEB 10th Science Ex-8 Ultimate Notes Free pdf | जीवों में जनन - सम्पूर्ण नोट्स
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BSEB 10th Science Ex-8 Ultimate Notes : जीवों में जनन
परिचय (Introduction)
प्रत्येक जीव में अपने जैसी संतान उत्पन्न करने की क्षमता होती है। यह प्रक्रिया ‘जनन’ या ‘प्रजनन’ कहलाती है। जनन जीवों का एक महत्वपूर्ण लक्षण है जो पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता को बनाए रखने और प्रजातियों के अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। जनन के माध्यम से ही जीवों की संख्या में वृद्धि होती है और उनकी जातियाँ विलुप्त होने से बचती हैं। जनन की मूल घटना DNA की प्रतिकृति बनाना है, जिसके साथ-साथ अन्य कोशिकीय संगठन का सृजन भी होता है।
1. जनन का महत्व (Importance of Reproduction)
- जाति की निरंतरता: जनन यह सुनिश्चित करता है कि एक प्रजाति की पीढ़ी दर पीढ़ी निरंतरता बनी रहे।
- संख्या में वृद्धि: यह जीवों की संख्या बढ़ाने में मदद करता है।
- विभिन्नता (Variation): लैंगिक जनन के माध्यम से उत्पन्न विभिन्नताएँ जीवों को बदलते पर्यावरण के अनुकूल ढलने और प्रजातियों की उत्तरजीविता को लंबे समय तक बनाए रखने में सहायक होती हैं। DNA प्रतिकृति में कुछ विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं, जो संतति में समावेश हो पाती हैं।
- जैव विकास का आधार: विभिन्नताएँ जैव विकास का आधार होती हैं।
2. जनन के प्रकार (Types of Reproduction)
जीवों में जनन मुख्य रूप से दो प्रकार से होता है:
- 1. अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
- 2. लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
2.1. अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
अलैंगिक जनन वह प्रक्रिया है जिसमें केवल एक ही जनक (माता-पिता) भाग लेता है और बिना युग्मकों (यौन कोशिकाओं) के मेल के नए जीव का निर्माण होता है। इसमें उत्पन्न संतान आनुवंशिक रूप से अपने जनक के समान या समरूप (क्लोन) होती है। यह प्रजनन की एक तीव्र प्रक्रिया है। यह मुख्य रूप से निम्न श्रेणी के जीवों में अधिक पाया जाता है।
विखंडन (Fission): एकल जीव दो या अधिक भागों में विभाजित होकर नए जीवों को जन्म देता है।
– द्विखंडन (Binary Fission): उदाहरण: अमीबा, जीवाणु, पैरामीशियम, यूग्लीना।
– बहुखंडन (Multiple Fission): उदाहरण: प्लाज्मोडियम, शैवाल।
मुकुलन (Budding): उदाहरण: हाइड्रा, यीस्ट (खमीर)।
पुनर्जनन (Regeneration): उदाहरण: प्लेनेरिया, हाइड्रा।
बीजाणु जनन (Spore Formation): उदाहरण: राइजोपस (कवक)।
कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation): पादपों में।
प्राकृतिक: जड़ों द्वारा (डहेलिया, शकरकंदी), तने द्वारा (आलू, अदरक, हल्दी, पुदीना), पत्तियों द्वारा (ब्रायोफिलम)।
कृत्रिम: कर्तन (गुलाब), लेयरिंग (चमेली), रोपण/कलम बांधना (आम, अमरूद), ऊतक संवर्धन (ऑर्किड, केला)।
2.2. लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
लैंगिक जनन प्रजनन की वह क्रिया है जिसमें दो युग्मकों (नर और मादा युग्मक) के मिलने से बनी रचना ‘युग्मनज’ (Zygote) द्वारा नए जीव की उत्पत्ति होती है। इसमें दो अलग-अलग जनक (एक नर और एक मादा) भाग लेते हैं। इस प्रक्रिया में आनुवंशिक विविधता आती है। यह उच्च श्रेणी के जीवों में पाया जाता है।
विभिन्नता: यह संतानों में विविधता लाता है, जो प्रजाति को बदलते पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मदद करती है।
जैव विकास: विभिन्नताएँ जैव विकास का आधार होती हैं।
अलैंगिक और लैंगिक जनन में अंतर (Difference):
| विशेषता | अलैंगिक जनन | लैंगिक जनन |
|---|---|---|
| जनकों की संख्या | एक जनक भाग लेता है। | दो जनक (नर और मादा) भाग लेते हैं। |
| युग्मकों का निर्माण | युग्मक नहीं बनते हैं। | नर युग्मक और मादा युग्मक बनते हैं। |
| निषेचन | निषेचन नहीं होता है। | नर और मादा युग्मकों का संलयन (निषेचन) होता है। |
| संतान | जनक के आनुवंशिक रूप से समान (क्लोन) होते हैं। | आनुवंशिक रूप से जनक से भिन्न होते हैं (विविधता होती है)। |
| प्रक्रिया की गति | तीव्र होती है। | धीमी होती है। |
| जैव विकास | विभिन्नता न होने के कारण जैव विकास की संभावना कम। | विभिन्नता के कारण जैव विकास में सहायक। |
| उदाहरण | अमीबा, यीस्ट, हाइड्रा, प्लेनेरिया, पादपों में कायिक प्रवर्धन। | मनुष्य, पशु, पुष्पी पौधे। |
3. पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन (Sexual Reproduction in Flowering Plants)
पुष्पी पौधों में जननांग पुष्प में स्थित होते हैं। पुष्प के प्रमुख भाग:
- बाह्यदल (Sepals): हरे पत्ते जैसे, कली की रक्षा।
- दल/पंखुड़ियाँ (Petals): रंगीन, कीट आकर्षित।
- पुंकेसर (Stamen): नर अंग।
– परागकोष (Anther): परागकण (नर युग्मक)।
– तंतु (Filament): सहारा। - स्त्रीकेसर/अंडप (Pistil): मादा अंग।
– वर्तिकाग्र (Stigma): चिपचिपा, परागकण ग्रहण।
– वर्तिका (Style): नली।
– अंडाशय (Ovary): बीजांड (मादा युग्मक)।
1. परागण (Pollination): परागकोष से वर्तिकाग्र तक।
– स्वपरागण: उसी पुष्प/पौधे में।
– पर-परागण: अलग पौधे में।
2. निषेचन (Fertilization): पराग नलिका → बीजांड → युग्मनज।
3. बीज और फल का निर्माण: अंडाशय → फल, बीजांड → बीज।
4. मानव में जनन (Reproduction in Humans)
4.1. लैंगिक परिपक्वता (Sexual Maturation / Puberty)
नर में 12-14 वर्ष, मादा में 10-12 वर्ष में शुरू।
परिवर्तन:
लड़कों में: दाढ़ी-मूंछ, आवाज भारी, मांसपेशियाँ, शुक्राणु उत्पादन।
लड़कियों में: स्तन विकास, मासिक धर्म, कूल्हे चौड़े, अंड-कोशिका उत्पादन।
4.2. नर जनन तंत्र (Male Reproductive System)
- वृषण (Testes): शुक्राणु + टेस्टोस्टेरोन।
- शुक्रवाहिनी (Vas Deferens): शुक्राणु ले जाती है।
- मूत्रमार्ग (Urethra): शुक्राणु + मूत्र।
- शिश्न (Penis): शुक्राणु प्रवेश।
- सहायक ग्रंथियाँ: पोषण तरल।
4.3. मादा जनन तंत्र (Female Reproductive System)
- अंडाशय (Ovaries): अंड-कोशिका + एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन।
- अंडवाहिका (Oviduct): निषेचन स्थान।
- गर्भाशय (Uterus): भ्रूण विकास।
- योनि (Vagina): शुक्राणु प्राप्ति + जन्म मार्ग।
4.4. मानव में जनन की प्रक्रिया
2. मैथुन: शिश्न → योनि → शुक्राणु प्रवेश।
3. निषेचन: अंडवाहिका में → युग्मनज।
4. भ्रूण विकास: गर्भाशय में।
5. गर्भावस्था: ~9 महीने।
6. प्रसव: योनि मार्ग से।
4.5. जनसंख्या नियंत्रण एवं यौन संचारित रोग
गर्भनिरोधन: कंडोम, IUDs, गोलियाँ, नसबंदी, ट्यूबेक्टोमी।
STDs: गोनोरिया, सिफलिस, एचआईवी/एड्स।
बचाव: सुरक्षित यौन संबंध।
Science अध्याय 8 जीवों में जनन Notes का pdf
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Notes क्या होते हैं और क्यों आवश्यक होते हैं?
कई छात्रों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर किसी विषय का Notes क्या होता है? चलिए इसे सरल शब्दों में समझते हैं।
Notes किसी भी विषय का संक्षिप्त और आसान सारांश होते हैं — यानी ऐसे पन्ने या कॉपी जिनमें किसी अध्याय की मुख्य बातें, महत्वपूर्ण परिभाषाएँ, सूत्र, उदाहरण और अवधारणाएँ छोटे-छोटे बिंदुओं में लिखी जाती हैं। Notes की आवश्यकता यह होती है कि छात्र कम समय में पूरे विषय को दोहरा सकें और कठिन टॉपिक को आसानी से समझ सकें।
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सारांश :
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