BSEB Class10 Economics Chapter 1 Practice Set pdf : अब तैयारी नहीं, जीत की तैयारी
नमस्कार प्रिय छात्रों, इस पोस्ट में हम बिहार बोर्ड कक्षा 10 के सामाजिक विज्ञान की पुस्तक अर्थशास्त्र के पहले अध्याय ‘अर्थव्यवस्था और इसके विकास का इतिहास’ का Revision और इसके प्रश्नों की Practice Set को देखने वाले हैं। नीचे आपको इस अध्यय Practice Set दिया गया है।
बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा की तैयारी को मजबूत करने के लिए, BSEB Class10 Economics Chapter 1 Practice Set pdf एक शानदार संसाधन है। यह अभ्यास सेट आपको महत्वपूर्ण प्रश्नों से परिचित कराएगा और आपकी उत्तर लेखन क्षमता को सुधारेगा। आप इन प्रैक्टिस सेट को अक्सर ‘free pdf’ के रूप में ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं। बिहार बोर्ड के पैटर्न पर आधारित ये सेट आपको वास्तविक परीक्षा का अनुभव देंगे और सुनिश्चित करेंगे कि आप हर अवधारणा को गहराई से समझते हैं। नियमित रूप से इन सेटों का अभ्यास करके, आप परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
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पहले अध्याय में हमने क्या - क्या पढ़ा है?
इस अध्याय में हमने भारतीय अर्थव्यवस्था के ऐतिहासिक विकास, इसके विभिन्न चरणों और समय के साथ हुए महत्वपूर्ण परिवर्तनों का विस्तृत अध्ययन किया है। यह अध्याय हमें समझाता है कि कैसे भारत की अर्थव्यवस्था प्राचीन काल से लेकर आधुनिक समय तक कृषि आधारित से औद्योगिक और वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदल गई है।
इस अध्याय के पहले भाग में हमने भारत की प्राचीन और मध्यकालीन अर्थव्यवस्था का अध्ययन किया। इस समय भारत की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर निर्भर थी, जहाँ कृषि सबसे महत्वपूर्ण व्यवसाय था। कृषि के अलावा, व्यापार और वाणिज्य भी बहुत विकसित थे। भारतीय व्यापारी विश्व भर में अपने माल का निर्यात करते थे, विशेषकर मसाले, रेशम, सूती कपड़े और धातु के सामान। शिल्प और हथकरघा उद्योग बहुत फलते-फूलते थे, जिससे भारत को “सोने की चिड़िया” कहा जाता था। इस काल में भारतीय शिल्पकारों का कौशल विश्व प्रसिद्ध था और वे अपनी कारीगरी के लिए प्रसिद्ध थे।
अध्याय के दूसरे महत्वपूर्ण भाग में हमने औपनिवेशिक काल में भारतीय अर्थव्यवस्था पर ब्रिटिश शासन के नकारात्मक प्रभाव का अध्ययन किया। ब्रिटिश शासन के 200 सालों में भारत की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट आई। भारत के पारंपरिक और फलते-फूलते उद्योगों, विशेषकर हथकरघा और वस्त्र उद्योग का पूरी तरह विनाश हो गया। ब्रिटिश सरकार ने जानबूझकर भारतीय उद्योगों को नष्ट किया ताकि भारत को कच्चे माल का आपूर्तिकर्ता और ब्रिटिश माल के लिए एक बाजार बना सके। भारतीय किसानों को जबरदस्ती नकदी फसलें (जैसे नील, पोपी) उगाने के लिए मजबूर किया जाता था, जिससे उनकी स्थिति और भी दयनीय हो गई। कृषि पर भारी कर लगाए गए, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई और भारत गरीबी में डूबता चला गया।
अध्याय में भारत की आजादी के बाद किए गए आर्थिक सुधारों का भी विस्तृत विवरण दिया गया है। स्वतंत्रता के बाद, भारत ने नई आर्थिक नीतियाँ बनाईं जिनमें कृषि का आधुनिकीकरण, नई उद्योगों की स्थापना, और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया गया। 1991 के आर्थिक सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम दिया। इसमें उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation), और वैश्वीकरण (Globalisation) की नीतियाँ शामिल थीं। इन सुधारों के फलस्वरूप विदेशी निवेश बढ़ा, नई तकनीकें भारत में आईं, और आर्थिक वृद्धि तेज हुई। साथ ही, सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, और सेवा क्षेत्र (Service Sector) का तेजी से विकास हुआ।
इस अध्याय में हमने सीखा कि आर्थिक विकास को कैसे मापा जाता है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), प्रति व्यक्ति आय, रोजगार की दर, और मानव विकास सूचकांक (HDI) जैसे महत्वपूर्ण संकेतक हैं जो किसी देश के आर्थिक विकास को दर्शाते हैं। हमने यह भी समझा कि विकास और समानता के बीच एक संतुलन होना चाहिए, क्योंकि केवल संख्यात्मक विकास काफी नहीं है – यह महत्वपूर्ण है कि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों को समान रूप से मिले। असमान विकास से गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक असंतोष बढ़ता है।
अध्याय के अंत में हमने भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों पर भी चर्चा की। भारत अब विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियाँ भी हैं जैसे कि बेरोजगारी, असमान विकास, पर्यावरणीय समस्याएं, और आर्थिक असमानता। कृषि क्षेत्र अभी भी भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन यह पिछड़ी हुई तकनीक से जूझ रहा है। निर्माण और सेवा क्षेत्रों का विकास अच्छा हो रहा है, पर औद्योगिक विकास की गति कम है। आने वाले वर्षों में भारत को इन चुनौतियों का सामना करते हुए एक सतत और समावेशी विकास की राह अपनानी होगी।
इस अध्याय के पहले भाग में हमने भारत की प्राचीन और मध्यकालीन अर्थव्यवस्था का अध्ययन किया। इस समय भारत की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर निर्भर थी, जहाँ कृषि सबसे महत्वपूर्ण व्यवसाय था। कृषि के अलावा, व्यापार और वाणिज्य भी बहुत विकसित थे। भारतीय व्यापारी विश्व भर में अपने माल का निर्यात करते थे, विशेषकर मसाले, रेशम, सूती कपड़े और धातु के सामान। शिल्प और हथकरघा उद्योग बहुत फलते-फूलते थे, जिससे भारत को “सोने की चिड़िया” कहा जाता था। इस काल में भारतीय शिल्पकारों का कौशल विश्व प्रसिद्ध था और वे अपनी कारीगरी के लिए प्रसिद्ध थे।
अध्याय के दूसरे महत्वपूर्ण भाग में हमने औपनिवेशिक काल में भारतीय अर्थव्यवस्था पर ब्रिटिश शासन के नकारात्मक प्रभाव का अध्ययन किया। ब्रिटिश शासन के 200 सालों में भारत की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट आई। भारत के पारंपरिक और फलते-फूलते उद्योगों, विशेषकर हथकरघा और वस्त्र उद्योग का पूरी तरह विनाश हो गया। ब्रिटिश सरकार ने जानबूझकर भारतीय उद्योगों को नष्ट किया ताकि भारत को कच्चे माल का आपूर्तिकर्ता और ब्रिटिश माल के लिए एक बाजार बना सके। भारतीय किसानों को जबरदस्ती नकदी फसलें (जैसे नील, पोपी) उगाने के लिए मजबूर किया जाता था, जिससे उनकी स्थिति और भी दयनीय हो गई। कृषि पर भारी कर लगाए गए, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई और भारत गरीबी में डूबता चला गया।
अध्याय में भारत की आजादी के बाद किए गए आर्थिक सुधारों का भी विस्तृत विवरण दिया गया है। स्वतंत्रता के बाद, भारत ने नई आर्थिक नीतियाँ बनाईं जिनमें कृषि का आधुनिकीकरण, नई उद्योगों की स्थापना, और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया गया। 1991 के आर्थिक सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम दिया। इसमें उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation), और वैश्वीकरण (Globalisation) की नीतियाँ शामिल थीं। इन सुधारों के फलस्वरूप विदेशी निवेश बढ़ा, नई तकनीकें भारत में आईं, और आर्थिक वृद्धि तेज हुई। साथ ही, सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, और सेवा क्षेत्र (Service Sector) का तेजी से विकास हुआ।
इस अध्याय में हमने सीखा कि आर्थिक विकास को कैसे मापा जाता है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), प्रति व्यक्ति आय, रोजगार की दर, और मानव विकास सूचकांक (HDI) जैसे महत्वपूर्ण संकेतक हैं जो किसी देश के आर्थिक विकास को दर्शाते हैं। हमने यह भी समझा कि विकास और समानता के बीच एक संतुलन होना चाहिए, क्योंकि केवल संख्यात्मक विकास काफी नहीं है – यह महत्वपूर्ण है कि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों को समान रूप से मिले। असमान विकास से गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक असंतोष बढ़ता है।
अध्याय के अंत में हमने भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों पर भी चर्चा की। भारत अब विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियाँ भी हैं जैसे कि बेरोजगारी, असमान विकास, पर्यावरणीय समस्याएं, और आर्थिक असमानता। कृषि क्षेत्र अभी भी भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन यह पिछड़ी हुई तकनीक से जूझ रहा है। निर्माण और सेवा क्षेत्रों का विकास अच्छा हो रहा है, पर औद्योगिक विकास की गति कम है। आने वाले वर्षों में भारत को इन चुनौतियों का सामना करते हुए एक सतत और समावेशी विकास की राह अपनानी होगी।
अर्थव्यवस्था और इसके विकास का इतिहास Practice Set 1
खंड 1: वस्तुनिष्ठ प्रश्न
1. अर्थव्यवस्था के कितने प्रमुख क्षेत्र हैं?
[A] दो
[B] तीन
[C] चार
[D] पाँच
2. निम्नलिखित में कौन प्राथमिक क्षेत्र से संबंधित है?
[A] कृषि क्षेत्र
[B] औद्योगिक क्षेत्र
[C] सेवा क्षेत्र
[D] इनमें से कोई नहीं
3. भारत में योजना आयोग का गठन कब किया गया था?
[A] 15 मार्च 1950
[B] 15 सितंबर 1950
[C] 15 अक्टूबर 1951
[D] इनमें से कोई नहीं
4. किस देश को ‘विकसित’ देश कहा जा सकता है?
[A] भारत
[B] पाकिस्तान
[C] संयुक्त राज्य अमेरिका
[D] नेपाल
5. किस क्षेत्र को द्वितीयक क्षेत्र कहा जाता है?
[A] कृषि क्षेत्र
[B] औद्योगिक क्षेत्र
[C] सेवा क्षेत्र
[D] इनमें से कोई नहीं
6. भारत की आर्थिक व्यवस्था कैसी है?
[A] पूंजीवादी
[B] समाजवादी
[C] मिश्रित
[D] इनमें से कोई नहीं
7. राष्ट्रीय आय का अर्थ क्या है?
[A] सरकार की आय
[B] पारिवारिक आय
[C] सार्वजनिक उपक्रमों की आय
[D] किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य
8. मानव विकास सूचकांक (HDI) में कितने सूचक हैं?
[A] दो
[B] तीन
[C] चार
[D] पाँच
9. बिहार में जीवन यापन का मुख्य साधन क्या है?
[A] उद्योग
[B] कृषि
[C] व्यापार
[D] इनमें से कोई नहीं
10. अर्थव्यवस्था की कौन सी क्रियाएँ आर्थिक क्रियाएँ कहलाती हैं?
[A] मनोरंजन
[B] सेवाएँ
[C] उत्पादन एवं उपभोग
[D] पूजा-पाठ
11. ‘गरीबी कैंसर रोग की तरह है’ किसने कहा है?
[A] प्रो. लेविस
[B] माल्थस
[C] एडम स्मिथ
[D] प्रो. ब्रेशियन
12. आर्थिक विकास का गैर-आर्थिक कारक कौन है?
[A] प्राकृतिक संसाधन
[B] सामाजिक संस्थाएँ
[C] पूँजी निर्माण
[D] मानवीय संसाधन
13. आर्थिक विकास के माप के लिए सबसे उचित सूचकांक क्या है?
[A] राष्ट्रीय आय
[B] प्रति व्यक्ति आय
[C] उपभोग व्यय
[D] जीवन प्रत्याशा
14. किस अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों पर निजी व्यक्तियों का अधिकार होता है?
[A] समाजवादी अर्थव्यवस्था
[B] पूंजीवादी अर्थव्यवस्था
[C] मिश्रित अर्थव्यवस्था
[D] इनमें से कोई नहीं
15. भारत में वित्तीय वर्ष कब से कब तक होता है?
[A] 1 जनवरी से 31 दिसंबर
[B] 1 जुलाई से 30 जून
[C] 1 अप्रैल से 31 मार्च
[D] 1 सितंबर से 31 अगस्त
16. बिहार के किस जिले की प्रति व्यक्ति आय सर्वाधिक है?
[A] पटना
[B] शहरी
[C] मुजफ्फरपुर
[D] गया
17. सतत विकास का उद्देश्य क्या है?
[A] केवल अपना विकास
[B] केवल दूसरों का विकास
[C] वर्तमान पीढ़ी का विकास अपने साथ-साथ भावी पीढ़ी के लिए भी
[D] इनमें से कोई नहीं
18. भारत में नीति आयोग की स्थापना कब हुई?
[A] 2014
[B] 2015
[C] 2016
[D] 2017
19. वैश्वीकरण का अर्थ क्या है?
[A] व्यापार का राष्ट्रीयकरण
[B] अर्थव्यवस्था का एकीकरण
[C] अंतर्राष्ट्रीयकरण
[D] इनमें से कोई नहीं
20. किस क्षेत्र को ‘सेवा क्षेत्र’ कहा जाता है?
[A] प्राथमिक क्षेत्र
[B] द्वितीयक क्षेत्र
[C] तृतीयक क्षेत्र
[D] इनमें से कोई नहीं
[A] दो
[B] तीन
[C] चार
[D] पाँच
2. निम्नलिखित में कौन प्राथमिक क्षेत्र से संबंधित है?
[A] कृषि क्षेत्र
[B] औद्योगिक क्षेत्र
[C] सेवा क्षेत्र
[D] इनमें से कोई नहीं
3. भारत में योजना आयोग का गठन कब किया गया था?
[A] 15 मार्च 1950
[B] 15 सितंबर 1950
[C] 15 अक्टूबर 1951
[D] इनमें से कोई नहीं
4. किस देश को ‘विकसित’ देश कहा जा सकता है?
[A] भारत
[B] पाकिस्तान
[C] संयुक्त राज्य अमेरिका
[D] नेपाल
5. किस क्षेत्र को द्वितीयक क्षेत्र कहा जाता है?
[A] कृषि क्षेत्र
[B] औद्योगिक क्षेत्र
[C] सेवा क्षेत्र
[D] इनमें से कोई नहीं
6. भारत की आर्थिक व्यवस्था कैसी है?
[A] पूंजीवादी
[B] समाजवादी
[C] मिश्रित
[D] इनमें से कोई नहीं
7. राष्ट्रीय आय का अर्थ क्या है?
[A] सरकार की आय
[B] पारिवारिक आय
[C] सार्वजनिक उपक्रमों की आय
[D] किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य
8. मानव विकास सूचकांक (HDI) में कितने सूचक हैं?
[A] दो
[B] तीन
[C] चार
[D] पाँच
9. बिहार में जीवन यापन का मुख्य साधन क्या है?
[A] उद्योग
[B] कृषि
[C] व्यापार
[D] इनमें से कोई नहीं
10. अर्थव्यवस्था की कौन सी क्रियाएँ आर्थिक क्रियाएँ कहलाती हैं?
[A] मनोरंजन
[B] सेवाएँ
[C] उत्पादन एवं उपभोग
[D] पूजा-पाठ
11. ‘गरीबी कैंसर रोग की तरह है’ किसने कहा है?
[A] प्रो. लेविस
[B] माल्थस
[C] एडम स्मिथ
[D] प्रो. ब्रेशियन
12. आर्थिक विकास का गैर-आर्थिक कारक कौन है?
[A] प्राकृतिक संसाधन
[B] सामाजिक संस्थाएँ
[C] पूँजी निर्माण
[D] मानवीय संसाधन
13. आर्थिक विकास के माप के लिए सबसे उचित सूचकांक क्या है?
[A] राष्ट्रीय आय
[B] प्रति व्यक्ति आय
[C] उपभोग व्यय
[D] जीवन प्रत्याशा
14. किस अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों पर निजी व्यक्तियों का अधिकार होता है?
[A] समाजवादी अर्थव्यवस्था
[B] पूंजीवादी अर्थव्यवस्था
[C] मिश्रित अर्थव्यवस्था
[D] इनमें से कोई नहीं
15. भारत में वित्तीय वर्ष कब से कब तक होता है?
[A] 1 जनवरी से 31 दिसंबर
[B] 1 जुलाई से 30 जून
[C] 1 अप्रैल से 31 मार्च
[D] 1 सितंबर से 31 अगस्त
16. बिहार के किस जिले की प्रति व्यक्ति आय सर्वाधिक है?
[A] पटना
[B] शहरी
[C] मुजफ्फरपुर
[D] गया
17. सतत विकास का उद्देश्य क्या है?
[A] केवल अपना विकास
[B] केवल दूसरों का विकास
[C] वर्तमान पीढ़ी का विकास अपने साथ-साथ भावी पीढ़ी के लिए भी
[D] इनमें से कोई नहीं
18. भारत में नीति आयोग की स्थापना कब हुई?
[A] 2014
[B] 2015
[C] 2016
[D] 2017
19. वैश्वीकरण का अर्थ क्या है?
[A] व्यापार का राष्ट्रीयकरण
[B] अर्थव्यवस्था का एकीकरण
[C] अंतर्राष्ट्रीयकरण
[D] इनमें से कोई नहीं
20. किस क्षेत्र को ‘सेवा क्षेत्र’ कहा जाता है?
[A] प्राथमिक क्षेत्र
[B] द्वितीयक क्षेत्र
[C] तृतीयक क्षेत्र
[D] इनमें से कोई नहीं
खंड 2: लघु उत्तरीय प्रश्न
1. अर्थव्यवस्था क्या है? संक्षेप में समझाएँ।
2. मिश्रित अर्थव्यवस्था की दो विशेषताओं का उल्लेख करें।
3. सतत विकास से आप क्या समझते हैं?
4. आधारभूत संरचना (Infrastructure) का महत्व बताएँ।
5. प्रति व्यक्ति आय क्या है? इसके महत्व को स्पष्ट करें।
6. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के कोई दो कारण बताएँ।
7. राष्ट्रीय आय की परिभाषा दें।
8. प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र के दो-दो उदाहरण दें।
9. आर्थिक नियोजन से आप क्या समझते हैं?
10. गरीबी को ‘कैंसर रोग’ क्यों कहा जाता है?
2. मिश्रित अर्थव्यवस्था की दो विशेषताओं का उल्लेख करें।
3. सतत विकास से आप क्या समझते हैं?
4. आधारभूत संरचना (Infrastructure) का महत्व बताएँ।
5. प्रति व्यक्ति आय क्या है? इसके महत्व को स्पष्ट करें।
6. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के कोई दो कारण बताएँ।
7. राष्ट्रीय आय की परिभाषा दें।
8. प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र के दो-दो उदाहरण दें।
9. आर्थिक नियोजन से आप क्या समझते हैं?
10. गरीबी को ‘कैंसर रोग’ क्यों कहा जाता है?
खंड 3: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. अर्थव्यवस्था की संरचना को स्पष्ट करें। भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों का वर्णन करें।
2. आर्थिक विकास क्या है? आर्थिक विकास और आर्थिक वृद्धि में अंतर स्पष्ट करें।
3. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के क्या कारण हैं? इसे दूर करने के उपायों का वर्णन करें।
4. मानव विकास सूचकांक (HDI) क्या है? इसके मुख्य घटकों की व्याख्या करें।
5. पूंजीवादी, समाजवादी और मिश्रित अर्थव्यवस्था में अंतर स्पष्ट करें।
2. आर्थिक विकास क्या है? आर्थिक विकास और आर्थिक वृद्धि में अंतर स्पष्ट करें।
3. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के क्या कारण हैं? इसे दूर करने के उपायों का वर्णन करें।
4. मानव विकास सूचकांक (HDI) क्या है? इसके मुख्य घटकों की व्याख्या करें।
5. पूंजीवादी, समाजवादी और मिश्रित अर्थव्यवस्था में अंतर स्पष्ट करें।
किसी विषय के Practice Set लगाना क्यों जरूरी हैं?
- किसी भी विषय के Practice Set को हल करने से छात्रों को यह पता चलता है कि उस विषय की तैयारी कैसी है?
- Practice Set हल करने से यह पता चलता है कि कौन-सा टॉपिक कमजोर है, कहाँ गलती हो रही है और किस हिस्से पर दोबारा ध्यान देना चाहिए।
- Practice Set लगाने से लिखने की गति बढ़ती है और उत्तर सटीक लिखने की आदत बनती है।
- यह एक तरह से छोटा Revision होता है। इसे हल करते समय पूरा अध्याय दोहराया जाता है, जिससे याददाश्त मजबूत बनती है।
- परीक्षा के प्रति डर खत्म होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। इससे अच्छे नंबर आने की संभावना बढ़ जाती है।
Practice Sets को कैसे solve करें?
हमने ऊपर यह देखा कि Practice Sets को solve करना क्यों जरूरी है? यह केवल “उत्तर लिखने” की गतिविधि नहीं है, बल्कि “परीक्षा की स्थिति में खुद को ढालने” का अभ्यास है। अब हम देखते है इन्हें Solve कैसे करें?
- सबसे पहले एक शांत जगह पर टेबल और कुर्सी के साथ बैठें। अपने पास Practice Set वाली कॉपी, पेन और अन्य ज़रूरी सामग्री रखें ताकि बीच में उठना न पड़े।
- Practice Set हल करने से पहले सभी प्रश्नों को ध्यान से पढ़ें। इससे आपको कठिनाई का स्तर समझ आता है और यह तय करना आसान होता है कि किस प्रश्न से शुरुआत करें।
- हर प्रश्न के लिए समय तय करें और उसी समय सीमा में उसे हल करने की कोशिश करें। इससे आपकी स्पीड और Time Management मजबूत होगा।
- Practice Set पूरा करने के बाद अपने उत्तरों को स्वयं जाँचें और चाहें तो अपने शिक्षक से भी जाँच करवाएँ। इससे आपकी लिखने की शैली, Presentation और Accuracy का पता चलता है।
- Practice Set हल करने के बाद जिन जगहों पर कमी मिले, जैसे : साफ़ लिखावट, तेज गति से लिखना, सही और सटीक उत्तर देना और आत्मविश्वास एवं फ़ोकस बना रहे, उन्हें सुधारने की कोशिश करें।
- Tips
अगर आप हमारे द्वारा दिए गए Practice Set को परीक्षा जैसी स्थिति में हल करते हैं,
तो असली परीक्षा में आपको किसी भी तरह की घबराहट नहीं होगी और आपकी तैयारी 100% हो जाएगी।
अर्थशास्त्र के सभी अध्यायों का समाधान भी देखें।
सारांश
हमें आशा है कि यह पोस्ट आपको पसंद आया होगा। बिहार बोर्ड के सभी अध्यायों का अभ्यास सेट का नियमित अभ्यास आपकी सफलता की कुंजी है। ये सेट आपकी तैयारी को मजबूत करते हैं, आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और आपको परीक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार करते हैं। इसलिए, इन अभ्यास सेटों का उपयोग करके अपनी पढ़ाई को और भी प्रभावी बनाएं।